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Wednesday, September 18, 2019

सपनों का शहर मुम्बई उसमें पल पल बड़े होते छिपकी के ख़्वाब💐भाग 03) 18/09/2019

#EDMranjit    Motivational Story.

सपनों का शहर मुम्बई उसमें पल पल बड़े होते छिपकी के ख़्वाब💐भाग 03) 18/9/2019

Motivational Story. Chipki.
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छिपकी आज सुबह ही उठ गई पार्क में टहलते हुए एक पास के पड़ोसी अंकल ने उस से सवाल कर लिया ।छिपकी जी अंकल मेंने कल हमारे प्रिय प्रधानमंत्री जी का भाषण सुना उन्होने कहाँ जीवन में स्वस्थ रहना उतना ही जरूरी है जितना के पेट के लिए भोजन जेब के लिए पैसे और पढाई के लिए किताबे अंकल वाह छिपकी बिटिया बहुत सुंदर और शाबाश बेटा ऐसे ही पढ़ते लिखते रहना हमेशा देखना एक दिन बहुत नाम होगा तुम्हारा। छिपकी जी अंकल अब घर जाती हु मेरा वाँकिंग टाईम खत्म हुआ। अंकल हाहाहाहा जी बेटा अपना ख्याल रखना। 

छिपकी माँ आप अभी तक नहीं उठी देखो ना माँ मै तो पार्क भी हो आई। पता है आज वहाँ बहुत भीड़ है अब तो ज्यादा से ज्यादा लोग जोंगिंग के लिये आने लगे हैं वहीं माँ कल तक तो पार्क भी सुना सुना सा लगता था। छिपकी की माँ भी अब उठ गई थी आखिर उसकी बिटियाँ उसको जगा जो रही थी। उसके बाद वो अपने पापा के पास गई और उन्हें भी जगाने लगी उठो उठो पापा सुबह हो गई हैं आप तो बहुत आलसी हो गये हो देखो बाहर जाकर सारी दुनियां योगा व्याम मे लगी हुई हैं वो लोग अब हमेशा स्वास्थ्य लाभ लेंगे और पापा आप हो की चलते ही नहीं हो कितने सारे गली के अंकल वहाँ जाते है सब लोग दोड़ते हैं। छिपकी के पिता अपनी बिटिया को गोद में उठाकर बोले अच्छा ठिक है कल से कोशिश करूंगा मैं भी अपनी बिटियाँ के साथ पार्क जाऊ और दौड़ लगाऊ अब खुश ना बिटियाँ छिपकी जी पापा। 

छिपकी अपने मम्मी पापा को नींद से जगाकर खुद एक चैयर पर बैठ गई उसके मम्मी पापा दोनो ही सुबह के काम में लग गये और छिपकी जो अभी पार्क से दौड़ कर आई थी कुर्सी पर बैठे बैठे नींद भरने लगी उसे पता भी नहीं चला और वो ज्याद थक जाने कारण वहीं पर शौ गई कुछ टाईम बाद जब उसकी माँ बाथरूम से आई तो उसे देख हंसने लगी और फिर  उसके पिता को दिखाया देखो अभी हमें जगाया भाषण किया और खुद इतनी सुबह उठकर भाग गई थी पार्क की थक गई हैं और अब बैठे बैठे शौ गई। उसके पिता ने उसे आराम से उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया। 

कुछ टाईम बाद जब छिपकी की माँ का सब काम निपट गया तो उसने छिपकी को उठाना शुरू कर दिया पर छिपकी आज बहुत थकी हुई थी शायद इसलिए वो उठने का नाम ही नहीं ले रही थी पर उसकी माँ ने उसे अपनी गोद मैं उठाकर बिठा लिया फिर वो धिरे धिरे उठ गई। उठते ही बोलने लगी ये क्या माँ आपने मुझे गोद में कब लिया मे तो अभी वहाँ बैठी थी। उसकी माँ ने कहाँ नहीं गुड़िया अब दिन के नौ बज गये हैं और तुम सात बजे से सोई सोई अब उठ रही हो। छिपकी अरे बाप रे माँ में वापस सो गई थी हे भगवान मुझे तो पढ़ना था अभी तक तो मैने अपना काम भी पुरा नही किया। माँ आप का टाइम भी हो गया होगा ना काम पर जाने का हाँ गुड़िया टाइम तो हो गया है मैने तुम्हारे लिए नास्ता और लंच दौनो बना दिया है अब तुम जल्दी से नहा कर अपना सब् काम करो तब तक में काम पर जाकर आती हु। छिपकी जी माँ आप जाओं में सब कर लुंगी। छिपकी माँ पापा गये हाँ बेटा पापा चले गये जी माँ। 

छिपकी की माँ का नाम गुलबियाँ है और उसके पिता का नाम महतों  हैं दोनो मजदुरी करते हैं इसलिए इस नन्हीं सी आठ साल की गुड़िया को घर पर अकेले ही छोड़कर जाना पड़ता हैं। छिपकी के माता पिता दोनों दिन रात मेहनत कर के पैसा जुटा रहे हैं। सिर्फ़ इसलिए की उनकी बेटी को किसी अच्छे स्कुल में दाखिला दिलवा सके। इश्वर ने इन दोनों माता पिता को बहुत प्यारी गुड़िया दी है जो सच में हर तरह से सुंदर हे पढ़ाई खेल सोच दिमाग चंचलता सब चिज इस छोटी सी बच्ची में अथाह है।  जब भी इस बच्ची से कोई मीलता हैं कुछ पल के लिए अपने सारे गम भुल जाता है और सिर्फ़ इसकी बाते सुनता है। छिपकी की माँ काम पर जा चुकी हैं  और अब छिपकी अपने काम मै लग चुकी हैं। घर में सब समान जो इधर उधर पड़ा होता है उस पर गुस्सा करती है और फिर उसको उसकी जगह पर लगा देती है। 

सपनों का शहर मुम्बई उसमें पल पल बड़े होते छिपकी के ख़्वाब💐भाग 03) 18/9/2019

टाइम देख रही है सब काम कर चुकी है। उसको पता है माँ अब आ जाऐगी इसलिए चुप बठकर अपनी किताबों को देख रही है कभी कुछ पढ़ लेती है कभी कुछ लिख लेती है और कभी कुछ रट्टा भी मारती हैं फिर कभी कभी खुद से बोलती है ओह हो ये पढ़ना लिखना भी कितना मुश्किल काम है। पर पढ़ना तो पड़ेगा वरना मम्मी पापा को आराम कैसे दिला पाऊंगी डैली डैली काम पर जाते हैं। मेरे लिए कितनी मेहनत करते हैं। इसलिए मुझे पढ़लिखकर पैसा कमाना है और सबकी मद्त भी तो करनी है इसलिए इस मुश्किल पढाई को करना ही होगा मुझे।। 

छिपकी के छोटे से दिमाग में बडी़ बडी़ बाते आती हैं। हैरत की बात है सारी बातों को खुब समझती भी है खुद से भी बाते कर लेती है अकेले घर में कभी भी बौर नही होती है। दिवारो से भी हंस के बोलती है। कभी कुछ लिखकर दीवारों से पुछती हैं बताओ मैंने तुम्हारे ऊपर क्या लिख दिया है। फिर खुद से ही उसे बोलती है अच्छा नहीं पता ना तुम्हें चलों इस बार तो बता देती हूँ पर अगली बार से तुम्हें याद कर के मुझे सुनाना होगा। फिर खुद ही दिवाल पर लिखा दिवाल को सुनाती है। और बहुत खुश होती है। जब उसे लगता है उसने इस तरह से अपना लैसन याद कर लिया। 

छिपकी अपनी इन्हीं छोटी छोटी शरारतो से सबका दिल जीत लेती है धारावी के छोटे बड़े सभी अच्छे और बदमाश बच्चों को भी छिपकी से डर लगता है। यहाँ बहुत से छोटे छोटे बच्चे ऐसे भी है जो सिगरेट तम्बाकू की लत के शिकर हो चुके हैं। मगर छिपकी के सामने ऐसा कुछ भी करने से डरते है। ने देख लिया की वो आ रही है तो कहते हैं अरे छुपाओ जल्दी से सगगरेट नहीं तो बहुत मारेगी और दौड़ाऐगी भी। छिपकी से बड़े उम्र के बच्चे भी उसको देख कुछ गलत नहीं करते कहते हैं ये हम सबकी प्यारी गुड़िया हैं इसके सामने कोई गलत काम नहीं करना क्योंकि इसकी आँखो मैं आँसू अच्छे नहीं लगते। शायद इसलिए भी कोई इस नन्हीं गुड़िया के सामने मजबुर हो जाते है। 

बहुत जगह देखा भी जाता है अच्चाई के सामने बुराई हार जाती है। तो ये छिपकी इसका सबसे अच्छा उदहारण है। गली का गुंडा भी जिसे देख शराफत दिखाने लगे उस अच्छाई का नाम है छिपकी। अब उसकी माँ आ चुकी है और छिपकी का काम भी हो गया है। उसे अब अपने टयुशन के लिए निकलना है जिसका इंतजार वो कर रही थी। माँ चलो अब मुझे छोड़ आओ। गुलबियाँ अब छिपकी को लेकर सोनू के घर निकली है रास्ते भर छिपकी सबको छेड़ती खैलथी हंसती जाऐगी और सबको हँसाती जाऐगी। अद्भुत है ये बच्ची कुदरत ने इसमे दुनियां कि सारी खुशियों को एक साथ भर दिया है।
माँ सोनू भैया का घर आ गया आप बैठोगी या चली जाओगी छिपकी बेटा आ गई तु देखते ही सोनू की माँ ने आवाज लगाई। छिपकी जी आँटी आ गई में। जा अंदर सोनू भैया और बाकी सब बच्चे भी अंदर ही है।। 

छिपकी सोनू के पास चली जाती है और गुलबियाँ सोनु की माँ कुछ इधर उधर की बातों में लग जाती है।  सोनू छिपकी का होमवर्क चैक करता है अरे वाह छिपकी सब कर लिया है आज भी शाबाश छिपकी थैंक्यू भैया। सोनू छिपकी को फिर से कुछ याद करने के लिए देता है। और साथ में सभी बच्चों का भी सब होमवर्क चैक कर के सबको काम देता है। छिपकी  और इन सभी धारावी के बच्चों का भविष्य सिर्फ़ एक विश्वास पर चलता हैं।  और इनका विश्वास है उनका ये टिचर सोनू भैया जो अपने साथ साथ इन सभी बच्चों का भविष्य लेकर चल रहा है। ईश्वर  से प्रार्थना है इन सभी को कुछ ना कुछ जरूर बनाए।। 

अब आगे। पड़ते रहिए छिपकी की रोचक जिंदगी की अनोखी कहानीं। 
अगले अंक में।। 
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Writing by ranjit choubeay. 
18/09/2019.

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