बंसत पंचमी कविता 👏30/01/2020

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बंसत पंचमी कविता👏30/01/2020

बंसत पंचमी कविता 

इस माँ के बीना तो संसार अधुरा लगता था।
नहीं आती तु तो सब सूना सूना लगता था।
विद्या की देवी माँ तुझ बीन ज्ञान सरोवर सूना था।
तु ज्योति बनकर आई तो बंसत भी पुरा लगता हैं।

 " मधुर स्वर वीणा ज्योति कुंज उज्ज्वल संसार किया।
माँ तुने तो धरा को विद्या कंठ कर दिया।
गुगे का भी स्वर बनी माँ हर मुख मैं तु समाई।
धरती से अंबर तले तु वेदो मैं हैं छाई।

"बीन तेऱे माता जीवन के हर मोड़ पर अंधेरा।
तू हैं तो प्राणी का भी जीवन लगे है पुरा।
माँ वंदना माँ सारदा माँ ज्योतिमय विद्यावाहिनी।
करो कृपा जगत ज्योति रुपा जीव सजल तारिणि।

 बंसत पंचमी कविता👏30/01/2020

"ब्रम्हा का सृजन हो माँ  कंमलडली कहलाई हो।
सरस्वती नदी का रुप माँ धरा पर तुम आई हो।
जगत के कण कण पर माँ तेरा उपकार हैं।

"तु बुद्धि हैं संगीत माँ तु वेद् हो विज्ञान भी।
जीवन की सुरुआत से मानव के उत्थान तक।
जीव जगत से देवो तक माँ तेरा ही तो ज्ञान है।
माँ हंसवाहिनी तुम से ही तीनों लोक प्रकाशमान हैं।

"माँ ऐसे ही जीवन में सभी के प्रकाश फैलाए रखना।
ज्ञान का दिपक जग में जलाए रखना।
हर जीवन की बुद्धि बनाए रखना।
धरा पर वेदो की लहर चलाए रखना।

"माँ हंसवाहिनी माँ वीणादाहिनी माँ सारदा माँ विद्यावाहिनी
तिनो लोक मैं आपकी जय जय कार आपको मेरा सदैव प्रणाम 👏👏👏👏👏👏👏☘️writing by Ranjit choubeay .Edmranjit.com
Date 30/01/2020
हैप्प बंसत  पंचमी ।

बंसत पंचमी कविता 👏30/01/2020



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