वो एहसास जो प्यार बन गया💐The feeling that fell in love14/10/2019 part 2) ,

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वो एहसास जो प्यार बन गया💐The feeling that fell in love14/10/2019 part 2)
प्रेम कहानी। लव स्टोरी
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आज शीतल को गाँव गये पुरे आठ दिन हो गए थे। और मन बस याद किए जा रहा है समझ नहीं आ रहा था मन को हुआ क्या था। ऐनि टाईम दिमाग की घंटी सिर्फ उसके ही इर्दगिर्द घुमती रहती थी परेशान था इस तरह की बेबसी से मन विद्यालय में भी मन नहीं लग रहा था दोस्तों से बात करना भी कुछ खास नहीं अच्छा लगता था। जब तक स्कुल का टाइम होता था किसी तरह निकल जाता था लेकिन घर का टाइम तो जैसे बदल ही गया था लगता ही नहीं था हर वक्त खुश रहने वाला साहिल इतना भी उदास हो सकता था। मैने लाइफ को हमेशा से एक बच्चे की तरह समझा था जब भी मुझे कुछ चाहिए होता तो मैं माँ या पापा से बोलकर ले लेता था। पर यहाँ जो कुछ भी मेरे साथ हो रहा था वो सब कुछ अलग सा था वो कोई चिज या सामान नहीं था जो मम्मी पापा दिला देते ।कभी कभी मन होता था माँ से बात करू और अपनी सारी परेशानी बता दू। पर फिर मन में संकोच होता था ये सब बहुत अलग था। मेरा टाइम शीतल को याद कर के बस युही निकल रहा था।

आज मैंने आँटी से पुछा शीतल कैसी है ऐडमिशन हो गया उसका वहाँ आँटी पहले तो कुछ पल मुझे देखती रही फिर बोली नहीं साहिल अभी तो कुछ एक घंटे पहले उसका फोन आया था बोल रही थी वो टेस्ट में फैल हो गई जिसके कारण उसका ऐडमिशन रूक गया है। आँटी इतना बता कर उलटा मुझसे ही पुछने लगी अच्छा साहिल तू ये बता वो तेरी अच्छी दोस्त हैं तु तो जानता है ना वो पढाई मै काफी अच्छी है फिर ये टेस्ट में फेल होना मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा बेटा आँटी की बातो से एक तरफ तो मैं समझ चुका था ।  उसने जान बुझकर टेस्ट पास नहीं किया होगा। सिर्फ़ यहाँ वापस आने के लिए फिर भी मैने उन्हें उलझा लिया आँटी से मैने कहाँ नहीं जी कभी कभी हमारे सबजेक्ट से हटकर भी सवाल पुछ लिए जाते हैं और हमारी तैयारी इतनी नहीं होती तो ऐडमिशन मीलना मुश्किल हो जाता है।। 

फिर इतना कहकर में अपने घर पर आया और बेड पर लेट गया काफी खुश था मन कुछ हलका सा मेहसुस कर रहा था में लगभग दस दिनों बाद मुझे कुछ राहत मिली थी। उस वक्त मुझे पता ही नहीं था में शीतल के प्यार में पड़ गया हु वो अब मेरी दोस्त ही नहीं मेरी जिंदगी बन गई थी बस आज और उस वक्त मे फर्क सिर्फ इतना सा था की आज हमे सब कुछ अच्छे से समझ आता हैं। और उस वक्त सिर्फ तकलिफ का एहसास होता था। नासमझ जिंदगी की बचकानी कहानी तो हजारों में होती है पर कुछ कहानियाँ जिंदगी के हर दौर में याद कर के खुशियाँ और गम दोनों समेटे उस पल उस वक्त को जीवंत बना देती है। साहिल और शीतल भी इस पहलु के वही सितारें थे जिन्हें याद कर के आज में आप सभी को उस दौर में ले जाने की कोशिश कर रहा हु जब राजा हिन्दुस्तानी और दिवाना जैसी फिल्मों का सुनहरा दौर था।। 

बस सोचते सोचते शीतल की छवि को याद करते मेरी आँखों ने मुझे कुछ पल के लिए अपनी पलको मैं कैद कर लिया और में न जाने कौन सी दुनियां का 🌟 बन गया मजे की बात तो यही थी आँख लगते ही शीतल के हजारों सवाल सामने खड़े होते थे। क्यों बच्चु अब याद आ रही हैं ना मेरी। रोते भी हो ना। दिल नही लगता होगा ना ।माँ से रोजाना मेरी खबर लेने लगे हो ना। अब समझ आ गया बेटा में तुझसे दुर क्यों नहीं होना चाहती थी। ऐसा लगता था मानो सच मैं वो सामने से बैठी सब मुझसे पुछ रही हो लेकिन वो सच नहीं था पर आज बिलकुल समझ आता हैं वो सब सच के एकदम करीब ही था। कुछ टाईम के बाद मेरी नींद खुली तो मैं एकदम से सन्न रह गया था सामने देखा तो माँ थाली में चावल साफ कर रही थी।  शाम हो चुकी थी मैं उठा और माँ के हाथों से थाली हटाकर उनके आँचल में सिर रखकर लैट गया। 

माँ मुझे इस तरह देखकर पुछने लगी क्या हुआ बता क्या बात है तबीयत तो ठिक है ना बेटा मैने कहाँ हाँ माँ आप परेशान मत हो जाओ सब ठिक है।लेकिन माँ एक बात पुछनी थी बताओगी। माँ ने कहाँ पुछ क्या पुछना है पुछ। मैने माँ से कहाँ माँ ये सपने क्यों आते हैं। और क्या ये सच भी होते हैं या बस हमे तंग करने के लिए होते हैं।। क्योंकि मुझे पता था माँ ही इसका सही उतर दे सकती है। माँ समझ गई मैने कोई सपना देखा हैं। वो पुछने लगी बता बेटा तुने क्या सपना देखा है। मैने कहाँ माँ बस युही पुछ रहा हु बताओ ना। फिर माँ कहने लगी जब भी हम किसी एक ही बिषय पर सोचते हैं उसमे खोये रहते हैं तो बस वो बात हमे सपने में नजर आती है। फिर चाहें हम दुनियां के किसी भी बिषय में क्यों ना सोचे। माँ की बातों से मुझे राहत तो मिली थी ।क्योंकि ये सच भी था उन दिनों मन में सिर्फ़ शीतल का ही ख्याल था तो सपना उसका ही आना लाजिमी भी था।। फिर बातों बातों मैं मैने माँ से कहाँ पता है माँ अभी मैंने सपने में देखा की शीतल वापस यही आ रही हैं। मेरी बात सुनकर माँ हंसने लगी और बोली अब तुने देखा है तो फिर सपना सच ही होगा तेरा आखिर तेरी दोस्त जो ठहरी वो सपने में तो आऐगी ही। माँ बोलते हुये हंसने लगी मुझे छेड़ने लगी।। 

वो एहसास जो प्यार बन गया💐The feeling that fell in love14/10/2019 part 2) 


आज सुबह उठते ही अपनी छत पर गया और वहाँ से शीतल की छत की तरफ मुंह करके बैठ गया मुझे लग रहा था आज तो पक्का आ गई होगी क्योंकि रात में चली होगी तो सुबह सुबह आ गई होगी । पर ऐसा नही हुआ था क्योंकि ये महज मेरी सोच थी जो हर पल उसकी तलाश कर रही थी हल्की हल्की ठंडी थी तो धुप के लिए में छत पर बैठे शीतल की छत तरफ देख रहा था तभी आँटी ऊपर आई और मुझे देखते ही हंसते हुए कहने लगी साहिल अरे बेटा तुम इतनी सुबह उठ गए इधर आओ। क्योंकि मेरा छत उनकी छत से अटैच था तो मैं चला गया। जब में उनके पास गया तो वो कहने लगी अच्छा बताओ में तुमसे कुछ बताने वाली हु तो बताओं क्या बात होगी। 

मेरे मन में तो डर भी था और खुशी भी इसलिए मैने डरते हुए पहले कहाँ शायद शीतल का ऐडमिशन हो गया ये सुनकल आँटी बोली नहीं हुआ। साहिल यही तो दुख की बात है। पर मेरा मन अंदर से खुश हो गया था दिल ने कहाँ नहीं आँटी जी मेरे लिये तो यही खुशी की बात है।। फिर आँटी ने कहाँ पर कोई नहीं उसके बिना यहाँ भी तो सब सुना सुना सा लगता है अब यही होगा ऐडमिशन रात को उसने अपने पापा से बात की अब कल आ जाएगी वापस फिर से तुम दोनों एक ही जगह हो जाओगे। मैने कहाँ जी आँटी मेरे अंदर तो खुशी के लड्डू फुट रहे थे मन तो कर रहा था जैसे आज आँटी के साथ डांस कर लु पर इतना रिएक्ट अच्छा नहीं था क्योंकि वो नाईन्टीन का दौर था जहाँ शरम और सभ्यता दोनों की एक खास जगह थी।। 


वो एहसास जो प्यार बन गया💐The feeling that fell in love14/10/2019 part 2) 




फिर आँटी पुछने लगी क्या हुआ साहिल तुम खुश नहीं हो क्या। मेने कहाँ नहीं आँटी जी खुश तो हु पर वो टेस्ट में फेल हो गई ये सोचकर थोड़ा परेशान सा था अब सब ठिक है।, हमारी फेमली बहुत क्लोज थी इसलिए हम दोनों की दोस्ती भी खास थी सबको हम दोनों बहुत प्यारे थे पर। अब जो हम दोनों की हालत थी ये किसी को पता नहीं था। कोई नहीं समझता था के साहिल  और शीतल अब बड़े हो रहे हैं दोनों दोस्ती में कुछ और ना हो जाए। सच तो एक ये भी था की साहिल और शीतल अपने साथ होने वाले बदलाव से अंजान थे। शीतल साहिल से सिर्फ एक क्लास सीनियर थी पर अकल नाम की कोई बात उसमे भी नहीं थी। उसको सिर्फ़ साहिल नजरो के सामने चाहिए था।। 


आज का दिन और रात साहिल के लिए बहुत ही खतरनाक हो रही थी उसको लग रहा था कब दिन गुजर जाता और रात बीत जाती पर दिन के चौबीस घंटे तो होने ही थे। उसमे तो बदलाव मुमकिन नहीं था। स्कुल से साहिल छुट्टी के बाद सीधे अपने एक दोस्त के घर चला गया और वहीं शाम तक पढाई बात चीत करते शाम ढलने पर घर आया और माँ से जल्दी से खाना माँगा कुछ टाईम बाद साहिल खाना खाके सो गया। उसका पुरा दिन सिर्फ एक ही ख्याल मैं गुजरा कल शीतल आ जाऐगी बहुत सी बातें करनी है और अपनी प्राब्लमस बतानी है । बोलना हैं उसे तुम्हारे गाँव जाने के बाद मेरी क्या हालत हुई हैं। क्या हुआ है मुझे पुछना हैं साहिल को सब शीतल से। बस इन्ही सब सवालों को सोचते हूए साहिल सो गया।। 

अब आगे क्या साहिल शीतल समझ पाऐगे अपने बीच पनपते प्यार को। 
जानने के लिए पढ़ते रहिए।। 
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Writing by ranjit choubeay. 
14/10/2019

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