एक आईना। पोयम 23/10/2019💐

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कविता
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एक आईना। पोयम 23/10/2019💐

एक आईना की तरह जिंदगी ।
को साफ रखा जाए। 
कुछ खुशियों की तरह गम। 
को भी पास रखा जाए।। 

" शिकायत नहीं करों कभी भगवान से।। 
बेईमानी न करो कभी इंसान से।। 
खुद की तरह औरो  को भी
दिल के पास रखा जाए।। 

" कुछ भटक कर लौट आओ। 
कुछ सीख कर वापसी करो।। 
कुछ चाहत नसीब के बस में नहीं।। 
ये बात समझ कर मान लिया जाए।

" इंसान हर तरफ अब बढ़ रहा हैं।। 
हर राह में तरक्की कुछ कर रहा हैं।। 
यही सोच कर हम सबको अब।। 
बदलाव का युग समझ लिया जाए।

"चिंगारी को भी कम नहीं समझना कभी।। 
वो भी शौला बन जाती हैं हवा की मद्त से। 
आना जाना तो लगा ही रहता है सबका ।।
अब ठहर जाना ही उचित राह बन जाए।। 

"मदत कुदरत प्रकृति की  माया हैं।। 
इम्तिहान जिंदगी की पाठशाला हैं।। 
अपने पराए रिस्तो का गठबंधन हैं।। 
क्यों न इन्हीं को जीवन दर्पण समझा जाए।। 

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Writing by ranjit choubeay.
23/10/2019

Poem. एक आईना। पोयम 23/10/2019💐



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