इतनी हैं जिंदगी। पोयम 18/10/2019💐

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इतनी हैं जिंदगी। पोयम 18/10/2019💐

कवित पोयम।
Pics from Google. 

इतनी है जिंदगी जैसे शाम का ढल जाना।
इतनी है खुशियाँ जैसे कुछ पल मुश्कुराना।
इतनी है आदतें जैसे सासों का आना जाना।
इतनी है ख्वाहिशें जैसे सपने में सब कुछ मिल जाना।


इतनी है लड़ाईया जैसे सुई का चुभना।
इतनी है बेबसी जैसे सब भुलकर लौट आना।
इतनी है कमियां जैसे गलतियों की किताब।
इतनी है बातें जैसे कुछ पल लाजवाब।

इतनी है बेवकूफी जैसे पहली एक गलती।
इतनी हैं चाहत जैसे उस पर मिट जाना।।
इतनी है मिन्नते जैसे फिर कुछ और नहीं।।
इतनी है पागलपंती जैसे आगे अब और नहीं।।

इतनी हैं दुरियां जैसे पास आना मुमकिन नहीं।।
इतनी हैं मजबुरियाँ जैसे भुल जाना चाहत हैं।।
इतनी हैं खामोंशियाँ जैसे सच गलत हो जाएं।।
इतनी हैं आवारगी जैसे गलत भी सही हो जाएं।।

इतनी हैं मुश्किलें जैसे एक पल का दर्द।।
इतनी हैं मंजिलें जैसे सफर का एक दौर।।
इतनी हैं शुरूआत जैसे अंतहीन एक कहानी।।
इतनी हैं नफरतें जैसे मिट जानी हैं जिंदगानी।।

इतनी हैं नैतिकता जैसे सब कुछ अच्छा है।।
इतनी हैं सादगी जैसे कुछ और सुंदर नहीं।।
इतनी हैं माया जैसे सब एक और हैं।।
इतनी हैं मासुमियत जैसे फिर कोई और नहीं।।


 जिंदगी को हमेशा अपने आसपास ही नहीं दुर तक देखों बहुत कुछ नजर आता जाएगा अगर सिर्फ़ मैं में ही देखना है।
तो फिर आप सिर्फ उस कुए के मेढ़क की तरह ही हो जिसको एक बुंद भी बरसात लगती हैं।।
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Writing by ranjit choubeay.

18/10/2019.motivational poetry. 

इतनी हैं जिंदगी। पोयम 18/10/2019💐

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