Wednesday, October 16, 2019

वृक्ष और आस्था। पोयम 16/10/2019💐

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वृक्ष और आस्था। पोयम 16/10/2019💐

पोयम।
Pics form google.

एक गाँव मैं एक पेड़ था।
वो हरा भरा विशाल था।
उसकी जड़ें बहुत मजबूत थी।
भयंकर तूफान भी उसे गिरा नहीं पाए।


एक दिन एक फकीर आया।
उस पेड़ के नीचे उसने डेरा जमाया।
पेड़ पहले ही गाँव में बहुत लोकप्रिय था।
अब फकीर वहाँ निरन्तर रहने लगा।।

कुछ वक्त पहले वो पेड़ सिर्फ गाँव का था।
अब फकीर के कारण लोग पेड़ से कतराने लगे।
इधर फकीर वहीं से अपना गुजर चलाने लगा।
लोग पेड़ की जगह फकीर से मीलने जाने लगे।।

वक्त कभी ठहरता नहीं वो तो गतिमान है।
पेड़ अब निराश रहने लगा।
लोगों की रूची बदलने लगी।
फकीर की दुकान चलने लगी।।

पेड़ समझ गया उसके प्रति प्रेम अब गाँव मैं नहीं।।
उसे बड़ा अफसोस हुआ जन जन की मूर्खता पर।
क्योंकि पहले लोग उस पर जल चढा़या करते थे।
उसकी आरती और पूजा किया करते थे।

पेड़ भी अपने इष्टदेव से गाँव के मंगल की।
कामना किया करता था।
एक समय में वो गाँव के लिए भगवान हुआ करता था।।
पर एक ढोंगी फकीर ने सबका विश्वास जीत लिया।
पेड़ के साथ ही उसके इष्टदेव से भी पंगा लिया।


वर्षौ पुराना रिस्ता अब पेड़ का टुट चुका था ।
लोगों के विश्वास और आस्था का सुरज डुब चुका था।
उस रात एक भयंकर तुफान गाँव पर मडराया।।
पेड़ झुककर जमीं पर गीर आया।
फकीर तुफान में पेड़ से दबकर मर चुका था।
पुरा गाँव अपना वजूद खो चुका था।

मित्रों आस्था और विश्वास मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
जो उसे अनेको पून्य  कार्य करने  पर प्राप्त होती हैं।
इसलिए कभी भी किसी धर्म विश्वास और आस्था के साथ खिलवाड़ न करे अन्यथा परिणाम सुखद नहीं होता।
व्यक्ति को हमेशा उस समय को याद रखना चाहिए जिस समय से वो धिरे धिरे निकल कर बड़ा हुआ है और बाहर आया है।।

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Writing by ranjit choubeay. Poetry motivational.
16/010/2019/

वृक्ष और आस्था। पोयम 16/10/2019💐



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