क्या है फेसबुक । what is facebook 11/09/2019

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क्या है फेसबुक। what is facebook 11/09/2019

आईये जानते हैं। फेसबुक क्या है  करीब एक दसक पहले इसके फाउनडर मार्क जुकरबर्ग ने फेसबुक नाम का एक एप बनाया 
अपने रिसर्च से एक नाम सोचा और इस एप का नाम फेसबुक रख दिया। जब भी कोई व्यक्ति अपने बिजनेस अपनी कंपनी अपने आँफिस या अपनी दुकान की शुरुआत करता है तो एक अच्छा सा नाम जरूर तलाश करता है। इस मामले में फिर एक विदेशी क्यों पीछे रहता।  ये दुनियां का सबसे ज्यादा युज किये जाने वाला सोशल नेटवर्क शाइड हैं। फेसबुक शूरूआती दौर में अपने देश में ही पोपुलर हुआ। 

इसके कुछ ही सालो में इसने बहुत सफलता हाशिल की और फिर ये विश्व के लगभग सभी देशों में लाँच कर दिया गया आज इसके मलिक के पास इस एक एप का दिया सब कुछ है।।  फेसबुक एक व्यक्ति का दुसरे व्यक्ति से सम्पर्क का माध्यम बना। फेसबुक युथ को इश्क फरमाने का भी माध्यम बना और बनता जा रहा है । विश्व के लगभग हर परिवार के एक व्यक्ति का फेसबुक आइडी जरूर होगा। हमारे देश भारत में आज फेसबुक बहुत ज्यादा पोपुलर हो चुका है। 

आज इसका बुखार इतना ज्यादा है लोग अपना ज्यादातर टाईम या फिर फ्री टाइम यही युज करते हैं। मित्रों अब बात करते है। फेसबुक पर और क्या क्या होता हैं आजकल। 

1) कुछ लोग तो अब इस एप के माध्यम से अपना बिजनेस भी चला रहे हैं। 
अब उनका बिजनेस कैसा हैं आप सब भी समझ ही चुके होंगे। 
कुछ बिजनेस ऐसा भी है जो आज हमारे समाज को युथ को बर्बादी की राह पर ले जा रहा है।। 
 इसके माध्यम से अवैध धंधे भी चल रहे हैं जैसे दैह व्यापर और नशे का बिजनेस भी इसमें शामिल हैं। क्योंकि आज भी समाज के सभ्य और नौकरशाही लोग  नेता लोगों का इसका सही अनुमान नहीं है। की उनके बच्चे सारी सारी रात फेसबुक पर क्या कर रहे हैं कहाँ जा रहे।। 

2) आज समाज जहाँ डिजिटल होता जा रहा है इसका एक और फायदा इस फेसबुक को सबसे ज्यादा होता जा रहा है। 
अब यहाँ कुछ सालो से ढोंगी बाबाओं का परचार भी जोरो से होता जा रहा है।। 
 लगभग हर तबका आज यहाँ इस फेसबुक को प्रचार का माध्यम बना रहा है प्रशासन को सब प्रिय ही नजर आ रहा है। 

3) अब बात करते हैं झुठ और धोकाधडी़ की इसमें भी गँवार से लेकर शिक्षित युथ पोढ़ बड़े बुढ़े महिलाऐं सभी यहाँ  एक दुसरे के साथ बढ़े आराम से संपर्क में आकर अपना काम चला रहे हैं। चाहें फिर परिणाम बाद में बूरा क्यों ना हो। 
इंसान को जब सहुलियत मिलती है वो अक्सर उसका गलत फायदा उठाता है इसका जीता जागता प्रणाम ये सोशलिज्म हो चुका है।। 

4) आज के युथ का कुछ ऐसा रिझान है इस फेसबुक पर जिसके कारण उनका व्यक्तित्व ही बर्बाद होता जा रहा है। एक अंजान के संपर्क में आते ही अपनी जिंदगी के सब पन्नों पर लीपापोती करवा लेना कहाँ की बुद्धिमत्ता हैं। अगर आपके पडो़सी को मुसीबत आए तो वो आप घर से नहीं निकलते वहीं एक अजनबी को हर तरह का स्पोप करने के लिए राजी होते हो। सरासर बेवकूफी हैं। ये फेसबुक चेहरा पढ़ने की किताब नहीं आपकी जिंदगी की किताब को भुला देने वाली काली छाया हैं आपके जीवन में।। आप यहाँ अपना सारा टाईम बर्बाद कर के हजारों दोस्त बना लो पर मुसीबत में यहाँ कोई भी सोशल दोस्त आपके साथ नहीं होगा । this is 100% truth. 

क्या है फेसबुक । what is facebook 11/09/2019


5)इस फेसबुक ने अब एक और युग बना दिया है। आज सभ्य लोग सभ्यता सोसायटी की बात करने वाले सभी महापुरुष घर मंदिर माता पिता बढ़े बुढ़े बाकी सब को भुल जाते हैं पर फेसबुक पर अपनी धार्मिक छवि बनाऐ रखते हैं। मतलब सुबह उठते ही बीना नहाए बीना फ्रेस फ्री हुए ही  लम्बी लम्बी फोटो के साथ अपने सुंदर विचार जरूर व्यक्त करते हैं।। 
मतलब भगवान भी अब आनलाईन ही याद किए जाने लगे हैं पुजे जाने लगे हैं। 

कुछ लोग तो ईश्वर का एक बड़ा सा समूह बनाकर वहाँ भी सोसायटी में रहने वाली अकेली अबला नारियों को अपना शिकार बना रहे हैं। ऐसे बाबाओ के आज हजारों लाखों समुह इस फेसबुक पर फल फुल रहे हैं उनकी पुजा आरती भी हो रही है।। 

6) फेसबुक पर ऐसे कई कृत्य हो चुके हैं जिसके कारण बहुत से मासुम बहनों की इज्जत बर्बाद हो चुकी है हजारों युथ पागल हो चुके हैं लाखों मासुमों का दिल टुट चुका है हजारों परिवार इसके कारण उजण चुके हैं। कितने ही युथ आज ऐसे है जिन्होंने अपना किमती टाईम यहाँ बर्बाद कर लिया और आज डिप्रेरेशन जैसी हाई बिमारी की चपेट में आकर जिंदगी के सही और गलत फैसले का फर्क भुल चुके हैं।।  मित्रों मार्क जुकरबर्ग तो एक विदेशी है उनके कल्चर, में इज्जत का शायद कोई मतलब ही ना हो पर आप भारतीय हो अपनी सभ्याताओं का ऐसा विनाश कैसे सह सकते हैं।। 

अगर मैं लिखना चाहू तो इस फेसबुक की महिमा का अंत ही ना हो। हो सकता है इस फेसबुक से कुछ एक गीने चुने लोगों का भला भी हुआ हो। पर लाखों में  किसी एक का भला होकर भी समाज को क्या मिलता है।  इसलिये में भारत के हर एक युथ से यही प्रार्थना करना चाहता हु।  जिंदगी को सामने से जिओं ना की अंधेरे मैं लडा़ई लड़ो  जीतना हो सके ऐसी फालतु बकवास सोशलिज्म से बचों।  वैसे जैसे जैसे इसके परिणाम एक एक के सामने आऐंगे खुद ही इसका भुत भी उतरता जाऐगा।  

लेकिन प्रशन उठता है जब हमें पता है ये गढ्ढा है तो हमे इसने भरने का कार्य करना चाहिए। 
मित्रों इस फेसबुक रुपी गड्ढे को अपनी जिंदगी से निकालकर ढक दो जहाँ से इसमें गिरने का कोई चांस ही ना हो।। 

Www.edmranjit.com

Writing by ranjit choubeay. 

11/09/2019




क्या हैं फेसबुक। what is facebook 11/09/2019

क्या होता होता है फेसबुक।
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क्या हैं फेेेसबुक ।





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