ठोकर की सीख💐motivational Story 💐

Edmranjit. 

ठोकर की सीख💐motivational Story💐

मध्य प्रदेश के जंगल में एक भील परिवार रहता था। भील परिवार बेहद ही खतरनाक स्वभाव का था वो अपने आसपास किसी और जाती समुदाय को देखना भी पंसद नहीं करता था। मुल रूप से वो परिवार किसी और जंगल के भील परिवार से था। पर उनके समुदाय के आपसी झगड़ो की वजह से उनके समुदाय ने उन्हें अपने जंगल से निष्कासित कर दिया था। 
इस भील परिवार ने इस जंगल में अपने रहने के लिए उचित स्थान बना लिया था। परिवार इतना खतरनाक था जंगल के जंगली जानवर भी इनके ठिकाने के आस पास नहीं आते थे क्योंकि जब से ये परिवार इस जंगल में आया था तब से इन्होने कई जंगली जानवरों का शिकार कर लिया था। यु समझ लिजिए उनका मुख्य भोजन ही जंगली जानवर था। 

परिवार में कुल चार सदस्य थे एक मुदुआ और उसकी पत्नी व उसकी एक बेटी सनाई और बेटा भिलूआ था। 
भिलूआ अपनी बहन सनाई से पाँच साल बड़ा था। भिलूआ कोई सौलह साल का हो गया था और सनाई इगारह बरस की हुई थी ।दिखने में तो ये परिवार सुंदर था पर जंगली वेशभूषा के कारण इनके समीप जाने में भी डर लगता था।। मुदुआ जब से अपनी जंगली बिरादरी से दुर हौकर इधर आया था तब से वो कुछ बाहरी संसार को भी जानने लगा था। क्योंकि जंगल से कोई पच्चीस किलोमीटर दुरी पर कुछ गाँव बसे हुए थे।। कभी कभी मुदुआ शिकार की खोज में भटकते भटकते अपने जंगल से काफी दुर निकल आता था। ऐसे ही एक दिन मुदुआ अपने शिकार के पिछे भागते भागते एक गाँव के करीब पहुँच गया उसने शिकार तो कर लिया था पर गाँव के कुछ लोगों ने उसे देख लिया मुदुआ के हाथ में एक हिरन का शव था गाँव वाले देखते ही उसके पिछे दोड़ने लगे चूंकि गाँव के लोग ज्यादा थे इसलिये सबसे मिलकर उसको घेर लिया। 

अब कोई कहता था इसने हिरन मारा है इसे पकड़ कर थानेदार साहब को दे आते हैं। तो कोई बोलता था अरे नहीं ये जंगली जानवर जैसा खुंखार है इसे मार डालो वरना ये हमारे गाँव के लिए खतरा बन सकता है भविष्य में मुदुआ बस गाँव वालों का मुँह देख समझने की कोशिश कर रहा था ये लोग क्या क्या बात कर रहे हैं। जैसे ही कोई उसे पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाता वो हथियार घुमाने लगता जो बहुत खतरनाक था अगर किसी को भी लगता तो सीधा जमीन पर लाश गीरती ये सब देख कोई हिम्मत नहीं जुटा पाता उसके करीब जाने की। फिर एक पढ़ा लिखा लड़का आगे आया उसने मुदुआ से इशारो में पुछा तुमने हिरन क्यों मारा। तो मुदुआ भी उसकी बात समझ गया उसने भी कहाँ इशारो में खाने का इशारा किया और कहाँ मुझे जाने दो आकाश की तरफ इशारा किया मुदुआ ने अंधेरा होने वाला है।

मेरे बच्चे मेरा इंतजार कर रहे हैं  वो नौजवान समझ गया वो अकेला नहीं है उसके साथ उसका परिवार भी है और उनके जीवन यापन का साधन ये जानवर ही है क्योंकि इन्हें और कुछ समझ नहीं आता। या फिर इनके पास शिकार के अलावा कोई और साधन नहीं भुख मिटानें का। गाँव वालें इस मुदुआ को देख बड़े अचंभित थे क्योंकि उन्होने इससे पहले ऐसा व्यक्ति नहीं देखा। पर वो शिक्षित लड़का प्रकाश समझ चुका था अभी भी पुराने आदिवासी भिल प्रजाति के लोग जंगलो मैं रहते हैं। इसलिये उसने गाँव वालों से कहाँ इसको जाने दो ये भी इंसान है। हम सब इसकी हेल्प कर सकते हैं और ये भी हमारी तरह हो जाऐगा पर अभी इसे जाने दो। मुदुआ समझ रहा था ये एक आदमी उसकी तरफ से बोलकर उसकी मद्त कर रहा था। इसलिये जब उसका रास्ता गाँव वालों ने छोड़ दिया तो प्रकाश मुदुआ के करीब गया और कहाँ दोस्त तुम जाओ  और इशारे में कहाँ तुम फिर कल दिन के प्रहर मैं मुझसे मिलने आना चाहो तो आ जाना मुदुआ उसकी बात समझ रहा था इसलिए उसने प्रकाश को सर झुकाकर दो बार अभिवादन किया और वहाँ से वापस जंगल की तरफ लौट गया। 

गाँव वाले प्रकाश के फैसले से खुश थे पर पुछने लगे बेटा इसकी मद्त करना कही हमे महंगा ना पड़ जाए। प्रकास न कहाँ नहीं ऐसा नहीं  होगा ये भी इंसान है और इनकी मद्त भी इश्वर ही करता है। शायद ईश्वर ने ही इसकी मद्त के लिए हम सबको ज़रिया बनाया हो।। चुंकी प्रकाश  डाँक्टर था इसलिए सब गाँव वाले उसकी बातों से सहमत थे।। इधर मुदुआ दौड़ते दौड़ते अपने घर में पहुँचा तो उसका परिवार परेशान था क्योंकि मुदुआ को शिकार पर आऐ काफी देर हो चुकी थी और वो घर लैट पहुंचा था। इसलिए उसकी पत्नी उससे सब पुछने लगी मुदुआ ने सब कुछ उसको बताया। फिर खाँ बना कर सब सौ गये।। 


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अगले दिन भिलुआ सुबह सुबह अपनी माँ को बोलकर निकल गया जंगल में और तलाब के किनारे बैठकर उसने दो बगुलों का शिकार कर डाला। जब भिलुआ बगुला लेकर अपने घर पहुँचा तो सनाई बहुत खुश हुई क्योंकि आज दोनों भाई बहन मिलकर पहली बार किसी पंछी का भोजन करने वाले थे। इसके पहले उन्होने हिरन खरगोश और अलग अलग जानवरों को अपना भोजन बनाया था। इसलिए दोनों ने उसे मिलकर पकाया और फिर बड़े मजे से सबने मिलकर खाया सनाई को सबसे ज्यादा पंसद आया बगूला खाने में। अगली सुबह फिर सनाई  भिलुआ से  कहने लगी भाई भाई आज फिर वहीं चिंडिया लाओं ना जो कल हमने खाया था। भिलुआ कहने लगा अरे उनको मारना बहुत मुश्किल है बड़े तेज पंछी है  ई। देखते ही उड़ जाता है इसलिए तो सुबह से शाम तक सिर्फ दो ही मार पाया था। 

पर सनाई सुनने को तैयार नहीं थी। इधर मुदुआ सुबह तड़के ही उसी गाँव की तरफ चल दिया जहाँ कल उसे प्रकाश मिला था। मुदुआ भटकते भटकते गाँव के करीब जंगल में पहुँच गया और एक पेड़ पर चढ़कर देखने लगा गाँव वाले कर क्या रहे हैं। मुदुआ बड़े ध्यान से देखता था। गाँव के लोग अपने अपने खेतों मैं काम कर रहे थे पर उसे कुछ समझ नहीं आता था आखिर ये सब आदमी कर क्या रहे हैं। उसने पेड़ से आवाज लगानी शुरू कर दि अपनी भाषा वालें पहलें तो 
समझे ही नहीं पर बार बार आवाज करने पर वो आवाज की तरफ बढ़ने लगे। तभी एक आदमी की नजर मुदुआ पर पड़ी जो इशारें से कुछ बता रहा था मुदुआ इशारे से पुछ रहा था वो प्रकाश कहाँ हैं  मुझे उनसे मिलना हैं पर कोई समझ नहीं पा रहा था। 
फिर किसी ने कहाँ प्रकाश को बुला लाओ उसे ही पता होगा आज ये क्या करने आया है और क्या बोल रहा है। गाँव का एक वंदा प्रकाश को बुला लाया। प्रकाश को देखते ही मुदुआ पेड़ से नीचे आ गया। प्रकाश पेशे से एक डाँक्टर था वो समझ गया था ये मुझसे ही मिलने आया है। मुदुआ जब पेड़ से नीचे आया तो प्रकाश ने उस से पुछा इशारे से कैसे हो दोस्त तो मुदुआ ने आदर से सर झुकाया और कहाँ अच्छा हु। मुदुआ ने अपनी भाषा में प्रकाश से कहाँ आप सब बहुत अच्छे लोग हो इसलिए मिलने आ गया। ये बात प्रकाश ने गाँव वालों से भी बताई सभी गाँव वाले मुदुआ को इस तरह देख कर दया की भावना से देखने लगे और सबकी आँखें भी भर आई ये सोचकर के आज भी जंगल के आदिवासी इंसान कितने असहाय परेशान और बुरी जिंदगी जिते है। 

प्रकाश के मन में  मुदुआ के प्रति जो सहानुभूति थी वही सहानुभूति अब गाँव वालों के मन में भी जागृत हो गई थी मुदुआ भी सभी के साथ बोल रहा था चाहें कोई कुछ समझे या नहीं पर सब उसकी बात बड़े ध्यान से सुनते और फिर प्रकाश से पुछते की मूदूआ क्या बोल रहा हु।। इधर भिलुआ बगुला की तलास में तलाब किनारें बेठा इंतजार कर रहा था की कोई बगूला आए तो वो शिकार करे। मुदुआ प्रकाश से इशारे इशारे में कुछ कुछ बात कर रहा था गाँव के सब लोग अपने अपने काम पर लौट गये। कुछ देर बाद मुदुआ भी लौटने लगा तो प्रकाश ने कहाँ अगली बार आना तो सामने मेरा हाँस्पिटल हैं वो देखो सीधा वहीं आ जाना पेड़ पर से आवाज नहीं लगाना इस बार  मुदुआ प्रकाश की बात समझ गया और फिर मिलकर अपने घर की तरफ चल दिया इधर प्रकाश मुदुआ के विषय मैं सोचने लगा क्योंकि वो डाँक्टर था तो वो समझ गया अगर इसकी मद्त की जाऐ तो ये भी आम आदमी की तरह बन जाऐगा और दुनियां से जुड़कर अच्छी जिंदगी जी पाएगा।। कहीं ना कहीं प्रकाश की सोच भी सही थी शायद इसलिए प्रकृति ने प्रकाश से मुदुआ को मिलवाया था और बीना ईश्वर की मर्जी के कहाँ कुछ होता हैं प्रकाश ये बात भलिभाँति समझ चुकाँ था।। 


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कोई दोपहर का वक्त था मुदुआ अपने घर आ चुकाँ था। पर खाली हाथ आया था क्योंकि आज उसने कोई शिकार नहीं किया था इधर भिलुआ को जैसे ही एक बगुला मिला उसने बीना मौका गवाए तुरंत उसका शिकार कर डाला और उसे उठाकर तेजी से अपने घर की तरफ दौड़ा भिलुआ बहुत खुश था क्योंकि उसकी बहन बहुत खुश होगी इसलिए वो जल्दी से जल्दी घर आना चाहता था। पर होनी को तो कुछ और ही मंजुर था। अचानक से दौड़ते दौड़ते भिलुआ का पैर एक पेड़ की जड़ से टकरा गया और भिलुआ एक नुकीले पत्थर पर गिरा उसका सर फट गया भिलुआ बेहोश हो गया जंगल में उसके आस पास कोई नहीं था। उसके सर से खुन बहा जा रहा था। पेड़ो पर चिड़िया ये देख तेजी से चिड़चिड़ाने लगी।। 

इधर भिलुआ की बहन और माँ को अब चिंता होने लगी क्योंकि वक्त ज्यादा हो गया था और भिलुआ लौटा नहीं था शाम होने वाली थी तो मुदुआ उसकी पत्नी और किऊली तिनों भिलुआ की तलाश में चल दिए सनाई मन ही मन डर से भरी हुई थी वो सोच रही थी मेंने जिद् करके भाई को शायद मुसीबत में डाल दिया है। वो भिलुआ को आवाज लगा रहे थे तभी चिड़ियों की आवाज की तरफ गये। उन्हें अचानक भिलुआ एक जगह खुन से लथपथ पड़ा हुआ बेहोशी की हालत में मिला। मुदुआ उसकी बेटी और पत्नी तिनों की जान मानों निकल गई थी भिलुआ की हालत बहुत सिरियस थी  सनाई की तो जान जैसे निकल ही गई थी अपने भाई की ऐसी हालत देखकर मुदुआ ने अपने बेटे के सर को कुछ पतो से दबाया और सबको  साथ लेकर गाँव की तरफ दौड़ा किऊली और उसकी माँ समझ नहीं पा रहे थे मुदुआ कहाँ दोडे़ जा रहा है वो बस पिछे पिछे दोड़ते रहे।। 

लगभग दो घंटे लगातार दौड़ने के बाद मुदुआ भिलुआ को लेकर प्रकाश के क्लिनिक पर पहुँचा और चारो तरफ देखने लगा वो प्रकाश को तलास रहा था सनाई और उसकी माँ सिर्फ रो रहे थे और चिल्ला रहे थे तभी प्रकाश को किसी नर्स ने जाकर बताया कोई जंगली आदमी अपनी फैमली और बच्चो के साथ हाँस्पिटल मैं आया है उसके हाथ में एक बड़ा सा लड़का हैं जो बेहोश है  प्रकाश बीना देरी किऐ उनकी तरफ दौड़ा और मुदुआ से बिना कुछ पुछे भिलुआ को एडमिट करके जल्दी से उसका इलाज शुरू किया भिलुआ का बहुत खून बह चुका था उसको बेहोश हुये लगभग पाँच घंटे बीत चुके थे इधर प्रकाश को पता था अब जो कुछ भी करना था उसे ही करना था क्योंकि मुदुआ और उसकी फैमली को तो कुछ भी पता नहीं था इलाज के लिए ब्लड लाना पड़ेगा और आँपरेशन भी करना पड़ेगा । सनाई और उसकी माँ प्रकाश के सामने हाथ जोड़कर खडे़ थे उनकी आँखों से आँसुओ का सागर लगातार बह रहा था।। 

इधर मुदुआ प्रकाश के सामने चुपचाप खडे़ होकर एकटक प्रकास को देखे जा रहा था शायद वो समझ गया था भिलुआ की तबियत  ज्यादा बिगड़ चुकी थी इसलिए मुदुआ की आँखों ने भी अब जवाब दे दिया वो भी अब फुट फुटकर रोने लगा तभी प्रकाश ने उसे अपने पास बुलाया और किऊली उसकी माँ को भी पास बुलाकर कहाँ आप सब घबराइऐं नहीं भगवान सब ठिक कर देगा जब उसने आप सबको यहाँ तक भेज ही दिया है तो इस बच्चे को भी हम सब मिलकर बच्चा लेंगे। प्रकाश ने नर्स से ब्लड अरेंज करने को कहाँ और खुद मुदुआ और उसकी फैमिली को एक रूम में लै जाकर बैठाया प्रकाश ने उन तीनों को बड़े विश्वास के साथ बताया की हम भिलुआ को ठिक कर लेंगे आप सब भगवान से प्रार्थना किजिए। 

प्रकाश ने फिर भिलुआ के आँपरेशन की तैयारी शुरू कर दि भिलुआ को कुछ मिनट के लिए होश भी आया डाँक्टर को तब थोड़ी राहत मिली। प्रकाश ने मुदुआ और उसकि फेमली के लिए कुछ खाना मँगवाया और खुद उनके पास जाकर उन्हें दिया और समझया आप सब ये भोजन खाँ लो भिलुआ ठिक हो जाऐगा। भिलुआ की माँ उसकी बहन का रो रो कर बुराहाल हो गया था। प्रकाश ने एक नर्स से कहाँ ये बहूत भले लोग हैं इन सबका थोड़ा ख्याल रखो ये भालुआ की फैमली है इन्हें बाहरी दुनियां की कोई समझ नहीं है। आप इन्हें थोड़ा कुछ समझाइऐ क्योंकि आप भी महिला है आपकी बातों का असर इन पर जरूर होगा।। उस नर्स ने भिलुअ की फैमली को किसी तरह समझा बुझाकर कुछ खाना खिलाया और उन्हें  अपनी बातों मैं उलझाऐं रखा। 

इधर डाँक्टर प्रकाश ने सकुशल भिलुआ का आँपरेशन कर लिया अब भिलुआ खतरे से बाहर था। कुछ गाँव वाले भी मुदुआ से मिलने हाँस्पिटल आ गये थे सबने मुदुआ की बहुत मद्त की और डाँक्टर प्रकाश से मिलकर कहाँ बेटा प्रकाश इनको अब जंगल वापस मत जाने देना इन रहने का इंतजाम हम सब मिलकर कर लेंगे। गाँव वालों का प्यार मुदुआ के प्रति देखकर प्रकाश बहुत खुश था। 


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अगले दिन जब भिलुआ को होश आया तो उसने खुद को जंगल की जगह एक बंद कमरे में पाया वो समझ नहीं पाया वो कहाँ आ गया है तभी उसके सामने सनाई पड़ी तो उसके पास बैठी रो रही थी पर जैसे ही भिलुआ को होश आया चिल्लाकर सबको अंदर बुला दिया अब मुदुआ उसकी पत्नी और सनाई सब खुश नजर आ रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें उनका जीवन वापस मिल गया था। पुरा हाँसपिटल खुशी के मारे झुम रहा था क्योंकि कहीं ना कहीं ये इंसानियत और अच्छाई की जीत थी डाँक्टर प्रकाश मुदुआ के पास खडे़ थे और मुदुआ उन्हें बार बार हाथ जोड़कर दुआए दे रहा था सनाई अपनी माँ के गले लिपटकर खुश थी। प्रकाश ने इशारे से मुदुआ से कहाँ अभी भिलुआ को यहीं कुछ टाईम रहने दो उनको दवा खानी है और आराम करना हैं।

और आप तिंनो मेरे साथ मेरे घर चलो भिलुआ की माँ  ने कहाँ  अपने पति से कहाँ आप अपने जंगल वाले घर जाओ और मैने वहाँ कुछ रखा है संभाल कर वो लेते आना। प्रकाश उनकी बातों को समझने की कोशिश कर रहा था पर सारी बात नहीं समझ पाया। फिर मुदुआ ने प्रकाश से कहाँ मै जंगल जाकर आता हूँ फिर आपके साथ हम सब आऐगे। 

डाँक्टर प्रकाश के पास भगवान का दिया सब कुछ था अभी कुछ वक्त पहले ही उनकी शादी भी हुई थी जीस घर में वो रहते थे वहीं उसमे उनका आऊट हाऊस भी था उन्होने अपनी पत्नी को फोन करके भिलुआ और उसकी फैमली के रहने के लिए उचित इंतजाम करवाने के लिए कह दिया। प्रकाश की पत्नी भी एक सुलझी हुई बेहद ही अच्छी इंसान थी उन्होने भी कोई एतराज नहीं जताया।। 

मुदुला जब जंगल से वापस आया तो उसके हाथ में एक पौटली थी उसने वो पौटली अपनी पत्नी को सौंप दि और भिलुआ की माँ ने डाँक्टर प्रकाश को अपने हाथो से वो पोटली दे दी। और हाथ जोड़कर विनती की इसे आप हमारी तरफ से स्विकार कर लीजिए हम गरीब गँवार लोगों के पास पैसा कहाँ से आएगा पर ये कस्तूरी आपके जीवन को हमेशा अपनी खुशबु से महकाती रहेगी।। डाँक्टर प्रकाश ने वो कस्तूरी की पौटली रख ली और इन सभी को अपने घर ले गये। 

भिलुआ भी सबके साथ आराम से गाड़ी में आया प्रकाश की पत्नी ने बड़े आदर के साथ उन सभी को अपने घर के मेम्बर की तरह अपना लिया। मित्रों आज एक भिल परिवार जो आम जिंदगी से कौशो दुर था सिर्फ एक अच्छे इंसान की सही सोच के कारण बदल गया उन चारो का जीवन सुखमय और सुंदर हो गया। अब सनाई और भिलुआ दोनो पढ़ाई करते हैं और मुदुआ डाँक्कर के साथ हाँसपिटल में छोटे मोटे काम देख लैता और उसकी पत्नी जिसका नाम जिवती है वो प्रकाश की पत्नी के साथ ही घर में दो बहनो की तरह रहते हैं।। 

तो  मित्रों इस तरह एक बार फिर इनसानियत जीत जाती है।। इस कहानी से हमें यहीं शिक्षा मिलती है। 
हमें हर उस इंसान की मद्त करनी चाहिए जिसको इश्वर ने इस धरा पर भेजा है फिर चाहें वो किसी भी दुनियां का क्यों ना हो।। 

Www.edmranjit.com
Writing by ranjit choubeay. 
05/09/2019

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