माँ आ रही 💐 नवरात्रि कविता।। Mother is coming 💐 Navratri poem.27/09/2019

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माँ आ रही 💐 नवरात्रि कविता।। Mother is coming 💐 Navratri poem.27/09/2019


माँ आ रही हैं जग को फिर से संवारने। 
तु तन से तु मन से माँ को पुकार ले।। 
जो थम गया था तेरा जीवन का कारवाँ। 
बीन बोले पुरी होगी वो हर मुराद तेरी। 

वो भक्ति में है खोई भक्तों के संग रहती। 
ना भुलती कभी वो नवरात्रि का सबेरा। 
निश्चल हैं मन अगर गुहार फिर लगा ले। 
माँ के चरण मैं झुक कर अब शीश तु नवा ले।। 

वो चर में भी अचर में भी धरा के हर पहर में भी। 
वो नभ भी है और शीत भी स्वर्ग भी स्तह भी है ।।
जगत की हर विरह भी है सुख भी संचय भी है। 
माँ ज्ञान भी संज्ञान भी है शक्ति का वरदान भी है।। 

अब आ गया है फिर से स्नेह का सवेरा। 
जोत भी जल रही है माँ ले कर नाम तेरा।। 
छुटे ना तेरे दर से कोई गरीब शाही।
 आशीष सबको देना ओ कटरा वाली माँई।। 

अभय हैं तेरे दर का हर एक रहगुजारी।। 
तुने तो सबकी दुनियां स्नेह से सजाई।। 
अब आ भी ओ माते हम भी बुला रहे हैं।। 
तेरे धाम की तरफ हम अर्जी लगा रहे हैं।। 

माँ तुझ से ऐसा नाता जो प्राण से भी प्यारा।। 
पुकारते हैं तुझको धरती के सारे लाला।। 
माँ शीतले माँ कोमल हृदय की शीत छाया।। 
तुने बड़े विनय से संसार ये बसाया।। 

नमन हैं माता तुमको धरती के कण कण से।। 
झुमता हैं मन सबका आपके आगमन से।। 
माँ आप सबकी प्यारी हम लाल सब तुम्हारे।। 
आशीष सबको देना सब चरण हैं पखारे।। 
माँ तुझे प्रणाम।। जय माता दी।। 💐🙏🏻🔱
Writing by ranjit choubeay. 
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माँ आ रही 💐 नवरात्रि कविता।। Mother is coming 💐 Navratri poem.27/09/2019🌹🌺🌼☘️





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