वो एहसास जो प्यार बन गया💐The feeling that fell in love19/09/2019

लव स्टोरी
Www.edmranjit.com
#EDMranjit

वो एहसास जो प्यार बन गया💐The feeling that fell in love19/09/2019

Story 2002 to 2008

वो शाम कैसे भुल सकता हूँ जब अचानक से एक एहसास ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया था। उससे पहले मुझे कभी वैसा एहसास हुआ   था। हरपल साथ रहना हंसना खेलना पढ़ना लिखना सब अलग बात थी उस वक्त मैं इलेवन का छात्र था ना ही कोई होशियारी थी न कोई खास नादानी थी। सिर्फ़ दोस्ती और पढाई के सिवा मन में कोई ख्याल नहीं था। 

उस दिन दिन के कोई दस बज रहे थे और में अपनी शेविंग कर रहा था। तभी अंटी ने अचानक अपने वाले गेट का दरवाजा खोला था। उनका दरवाजा मेरे खिड़की के सामने ही था दरवाजा खुलते ही उनकी बेटी जिनका नाम शीतल था वो अंदर आई और झूक कर अपने माँ के चरण छुये। इसके बाद वो लड़की की नजर सीधे मेरी खिड़की की तरफ आई शायद उसने भी मुझे देख लिया था। तो देखते ही बोली माँ वो इतना बड़ा हो गया है देखो तो पुरे चेहरे पर क्रीम लगाकर शेविंग कर रहा हैं। 

में सिर्फ उसकी आवाज सुन रहा था उसने अंदर आते ही दरवाजा खटखटाया पर मैने खोलने से मना कर दिया तो आँटी हंसने लगी और बोली चल पहले हाथ मुँह धोकर कुछ खाँ ले आराम कर ले उससे बाद में मील लेना। उसे भी यही सही लगा उसने सोचा ज्यादा भाव खा रहा है और वो चली गई। सच तो ये था की मुझे उस वक्त पता भी नहीं था भाव खाना क्या होता हैं। मुझे सिर्फ़ इतना पता था मेरी दोस्त गाँव से आई है। एग्जाम के बाद छुट्टियाँ माँ पापा के साथ बिताने। मेंने अपनी शैविंग की उसके बाद फ्रैस हुआ नास्ता किया और माँ से बोलकर दोस्तों से मिलने चला गया। 

में कोई रात को नौ बजे घर वापस आया। तो देखा शीतल घर में माँ के पास बैठी उनसे कुछ बाते कर रही थी। मेरे आते ही उसका मुँह बंद सा हो गया में भी कुछ बोल नहीं पाया क्योंकि मेरे पास बोलने के लिए शायद कुछ था ही नहीं।मेरे कमरे मैं जाते ही वो माँ से बोली देखा आँटी कब से इसका इंतजार किया आया तो हैल्लो तक नही बोला। माँ ने मुझे आवाज लगाई और कहाँ सुन बेटा साहिल इसको हैल्लो तो बोल दे कम से कम माँ की बात सुनते ही मेरी हंसी छुट गई माँ भी हँसने लगी फिर शीतल दोड़ते हुए मेरे कमरे मैं आई और मुझसे एक कदम दुरी पर रूक गई। कहने लगी क्या हिरो बचपन भुल गए हो या फिर मुझे देखकर डर लग रहा है तुम्हें। 

वो एहसास जो प्यार बन गया💐The feeling that fell in love19/09/2019

में सच मैं उसकी तरफ देख ही नहीं पा रहा था उस वक्त क्योंकि मुझे उस टाइम अपने किसी काम की ज्यादा टेंशन थी। 
तो मैने उस से कह दिया ना बचपन भुला हु और ना तुझसे डर लगता है मुझे बस मेरे पास फालतु का वक्त नही है ये सुनते ही वो बोलने लगी मेरे पास फालतु टाइम था जो अपनी दोस्ती के लिए गाँव की छुट्टियाँ छोड़ तुझसे मीलने इतनी दुर आ गई हु। मुझे कुछ समझ नहीं आया तो कह दिया तुरन्त मेने भी वं हैल्लो मैने नही बुलाया टिकट करवाकर तुम्हारी मम्मी को तुम्हारी याद आ रही थी इसलिए तुम्हें बुला लिया। शीतल इतना सुनते ही कुछ उदास सा मुँह बनाकर मेरे कमरे से सीधा अपने घर भाग गई ।फिर माँ ने उसे ऐसे जाते देख मुझे बहुत डाँट लगा दी। 

कुछ वक्त बाद मैने खाना खाया और वापस सो गया। कहते हैं स्कुल के दिन बहुत खास होते हैं  मुझे भी अब इसका एहसास होता है। बचपन मैं साथ पढ़ने वाले दोस्त सच मैं बहुत खास होते हैं उनका मन बहुत निर्मल होता है और हम सब अपने हिसाब से अपने मन से अपने दोस्त भी चुन लेते हैं। फिर चाहे लड़की हो या लड़का कौई भेदभाव भी नहीं होता दोस्ती में। ऐसे ही शीतल मेरी बचपन की क्लासमीट थी जो दसवीं तक साथ पढ़ने के बाद अपनी सिटी मे आगे की पढ़ाई के लिए चली गई थी। 

एग्जाम खत्म होते ही उसे सबसे पहले मेरी ही याद आई और वो सीधा अपने मम्मी पापा के पास वहीं आ गई जहाँ हम भी साथ रहा करते थे। पर हम लड़के जब भी लड़कियों से दोस्ती करते हैं उस तरह से नहीं निभा पाते जीस तरह से वो निभाना जानती है। शायद ये इसलिए भी होता हैं क्योंकि हम लड़के ज्यादातर अनाड़ी ही होते हैं। शीतल के मामले में भी मेरी दोस्ती किसी अनाड़ी से कम नही थी। मुझे बस इतना ही पता था की साथ में पढ़ना लिखना खेलना और फिर अपने घर आ जाना फिर अगले दिन स्कुल जाना फिर पढाई करना खेलना  यही दोस्ती भी है। और यही दोस्ती निभाना भी इससे ज्यादा कुछ समझना और जानना कभी चाहा ही नहीं था। 

शीतल अगले दिन में सुबह सोया ही था तो आकर उसने मुझे जगाया में उसे फिर से अपने पास देखकर डर गया मुझे कुछ अजीब सी  शर्म आती थी जब वो मुझे इतने पास से देखती थी तो। इसलिए मेंने उसे कहाँ तुम तुम यहाँ मेरे कमरे में वो  God इस लड़की को मेरा दोस्त बनाया है या दुश्मन इतना सुनते ही वो आगबबुला होकर मुझे मारने लगी बोलने लगी मे तेरी दुश्मन कब से हो गई। बता फिर दोस्त कौन है तेरा। तभी माँ कमरे में आ गई और वो एक तरफ हट गई माँ को देखते ही बोलने लगी आँटी ये साहिल मुझे अपना दुश्मन बोलने लगा है। इसका मतलब में यहाँ से गाँव जाते ही पराई हो गई थी। 
माँ उसकी लुभावनी बातों में आ गई और फिर मुझे डाँटने लगी। ये देखकर वो माँ के पिछे से मुझे चिढा़ने लगी और हमारी वापस नोंक झोक शुरू हो गई। किसी तरह माँ ने हम दोनों को अलग किया और फिर उसे अपने साथ ले गई वो जाते जाते भी मुझे बहुत खतरनाक घुरती गई जैसे मैने उसका कुछ छिन लिया हो। कुछ वक्त बाद जब में बाहर कहीं जाने लगा तो वो अपने घर से मुझे देख रही थी। उसकी आँखें बहुत उदास उदास चेहरा भी बहुत अजीब सा था शायद में भी समझ गया था उस टाइम ये मेरी वजह से दुखी हैं ।क्योंकि उसको आए दो दिन हो गए थे और मैने उससे ठिक से कोई बात नहीं की थी। इसलिए उस पल तो मुझे भी सही नहीं लगा कुछ यही सोचता हुआ में अपने काम से बाहर चला गया। 

आज दोपहर जब मैं घर वापस आया तो लंच के बाद में खुद ही उसके घर गया और देखा तो वो आँटी की गोद में बैठकर अपने हैयर ठिक करवा रही थी मुझे देखते ही दोनों माँ बेटी एक साथ बोली आज तो साहिल खुद ही आ गया बीन बुलाए मेहमान की तरह ये शीतल ने कहाँ आँटी ने उसे डाँटा वो मेहमान नहीं मेरा बेटा है। तु पागल जैसी हरकते मत किया कर फिर में शीतल से बोला अब आँटी की गोद से निकलकर इधर आ तुझसे बात करनी है। वो तो सुनते ही उछल पड़ी अच्छा अच्छा बोल ना क्या बात करनी है जल्दी से बता ये देख कर आँटी को भी हँसी छुट गई वो मुझसे बोली देख लिया साहिल अभी मुझसे तुमहारे लिए ही बोल रही थी मम्मी वो साहिल अब पहले जैसा नहीं रहा। और अब जब तुम आए इससे बात करने तो चिढा़ रही है। मेने कहाँ जी आँटी ये ऐसे ही तंग करती है इसलिए इससे बात करने का मन नहीं होता मेरा। 

फिर शीतल बोलने लगी ज्यादा नखरे मत कर ये बता आजकल कहाँ गायब रहता है घर से पढा़ई कैसी चल रही है एग्जाम कैसे हुए। उसने तो एक बार मे ही बहुत सवाल कर लिए। फिर हम दोनों ने ढेरों बाते की तभी मैने उससे पुछा बता आज जब मैं घर से बाहर जा रहा था तो तु मुझे दुखी होकर क्यों ताक रही थी फिर उसने कहाँ  गधे बस इसलिये की तु मुझसे ठिक से बात नहीं कर रहा था इसलिए। पर अब तुझसे बात करके देख कितनी खुश हु। मेने कहाँ मुझे बना रही हैं तो बोली नहीं यार तु ही समझेगा बस युही हम दोनों बचपन सै दोस्त है ना तो इतना समझ ले की एक दुसरे के बहुत करीब है। वो क्या कह रही थी मेरे पल्ले कुछ उस वक्त नही पड़ रहा था पर ये अच्छा लगा देखकर मेरे कुछ पल उससे बात करने से वो बहुत खुश थी। और दोस्ती की यही वजह मुझे पसंद थी।। 

जल्दी ही हम दोनों का हँसते खैलते बातचीत करते वक्त बीत गया अब वो वक्त फिर से आया जब उसको दाखिला के लिए फिर वाप वहीं जाना था अपनी गाँव वाली सिटी में। बस दो दिन बाकी थे हम दोनों कैरम खैल रहे थे वो बार बार हार रही थी और उदास होती जा रही थी मैने पुछा तेरा खैल मैं तो मन लग ही नहीं रहा है फिर खैल क्यों रही है। तो कहने लगी तु नहीं समझेगा पर मुझे लगता हैं जब वक्त आएगा तु खुद ही समझ जाएगा।। 

उस दिन शीतल को अब जाना था दिन में दो बजे की उसकी ट्रेन थी तब तक मुझे याद हैं मुझे कुछ काम से बाहर जाना था तभी उसकी माँ हमारे घर आई और कहने लगी साहिल तुम भी चलना साथ में शीतल को स्टेशन छोड़ने उसे भी अच्छा लगेगा मेरी माँ ने भी कह दिया हाँ चला जाऐगा। पर पता नहीं क्यो मुझे कुछ अजीब सा लगा उस वक्त दिन के दस बज रहे थे और शीतल एक बार भी दिखी नहीं थी। तो मेंने आँटी से पुछा वो है कहाँ आज घर भी नहीं आई वरना एक महीने से वही मुझे जगाने आ रही थी सुबह। 

वो एहसास जो प्यार बन गया💐The feeling that fell in love19/09/2019

आँटी कहने लगी अभी तो वो खुद ही सोई हुई हैं। ये सुनकर मुझे भी अजीब लगा पर मे तो अनाड़ी था मुझे क्या करना है सोच कर में कुछ काम के लिए बाहर गया। पर मेरा दिल नहीं लगा तो मैं वापस घर आ गया जल्दी ही बारह बजने वाले थे और दो बजे की ट्रैन थी वो अभी तक अपने रूम में बैठी थी फिर में उसके घर गया तो आँटी ने इशारा किया रूम में ही है वो किचन में काम कर रहीं थी। जब में उसके रूम में गया तो रो रो कर उसने अपनी आँखों का बुरा हाल कर लिया था मुझे देखते ही खडी़ हुई और हग कर लिया रोते हुए कहने लगी साहिल तुझसे दुर रहकर नहीं पढ़ना मुझे में कुछ समझ नहीं पा रहा था लेकिन वो बहुत तकलीफ़ में इसलिए मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लगा और मेरा मन बहुत उदाब सा हो गया। 
मैने उसे बैठाया और कहाँ फिर आँटी से कहो यही ऐडमिशन हो जाएगा। तो कहने लगी नहीं पापा नहीं मान रहे हैं मैं सब बता चुकी हु फिर भी मेरी टिकट करवा दी और गाँव में चाचा को फोन कर दिया। अब में बहुत परेशान हो गई हु तु तो समझता ही नहीं कुछ पर मैं यही तेरे साथ ही रहकर पढ़ना चाहती हु। इतने में आँटी आई और सबको समझाने लगी मेने भी उस से कहाँ चलो तैयार हो जाओ गाड़ी का टाइम भी होने वाला है। इतना बोलकर जब में अपने घर में आया तो मेरे अंदर भी बहुत कुछ चल रहा था शीतल के आँसुओ ने पता नहीं मेरे अंदर एक तुफान सा लाकर खड़ा कर दिया था मुझे उस वक्त सब कुछ बेकार सा लग रहा था और पहली बार मुझे ऐसा लगा जैसे सच मैं शीतल का दुर जाना मेरे लिए भी सही नहीं था। 

कुछ वक्त बाद वो तैयार हो गई उसका भाई मुझे बुलाने आया शीतल भी माँ से मीलने आई और फिर वो दोनों मुझे बोलकर एक साथ चले गये अब में बहुत टेंशन में आ गया था में उसे छोड़ने स्टेशन जाना ही नहीं चाहता था क्योंकि मेरी बाँडी में अजीब सी हड़बड़ाहट हो रही थी। नहीं समझ पा रहा था उस दर्द को किसी से बोल भी नहीं सकता था। बस फिर एक ख्याल आया और मैं मार्केट की तरफ दौड़ गया वहाँ गिफ्ट गैलरी गया और शीतल के लिए एक ताजमहल लिया  जिसमे एक सुंदर सी गुड़िया गुड्डा एक साथ बैठे होते हैं। उसे पैक करवाँ लाया फिर जब घर आया तो उसे लै जाकर अपने हाथों  से दे दिया। इतना करते ही मुझे बहुत राहत मिली इसके बाद वापस घर आ गया क्योंकि अब उसे स्टेशन छोड़ने का टाइम आ गया था और ये बहुत मुश्किल घड़ी थी दोनों के लिए। फिर मैने एक ब्लेक गौगल अपनी पहन लिया और शीतल  उसका भाई और आँटी कार में बैठकर स्टेशन आ गये। 

दिल की धड़कन ने तो जैसे साथ ही छोड़ दिया था आँखों के आँसू भी अंदर ही अंदर सुख रहे थे और जुबान एक दम बंद हो गई थी हम दोनों एक मीनट भी चुप नहीं रहे थे इसके पहले की लाइफ में पर उस वक्त मुँह से आवाज भी नहीं निकल रही थी। स्टेशन आते ही जान हलक में  आ गई थी ऐसा लगता था जैसे मेरी जिंदगी मेरे अंदर से निकलकर जा रही हो और में बेबस लाचार बस देख रहा हु। आँटी कुछ पुछती इस से पहले ही ट्रेन आ गई। शीतल ने हाथ मिलाया और कहाँ साहिल अपना ख्याल रखना में जरूर कुछ करूगी और लौट आऊगी उसकी इस बात से उस वक्त मेरे अंदर कुछ जान वापस आ गई थी उसने वापस कहाँ  पागल अब समझ आया उस दिन में उदास क्यों थी फिर कहाँ एक बार अपनी आँखें दिखा मुझे ये चश्मा उतार। लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाया वो समझ गई उसका दोस्त अभी ठिक नहीं है उसने जिद् नहीं की और फिर ट्रेन मैं बैठ गई। लास्ट में उसने कहाँ बस थोड़ा इंतजार करना शीतल यु गई और यु आई। 

फिर ट्रेन चलने लगी और हम एक दुसरे को देखते देखते नजरों से ओझल हो गए। वो एहसास आज भी दिल दुखा जाता है जब तक परवाह नहीं थी उसकी सब कुछ नार्मल ही थी पर जैसे ही एहसास हुआ जिंदगी में सब कुछ बदल सा गया था। घर आ गया मुँह धोया बहुत रोया और बस रोता ही गया जब तक नींद नही आई। अगले दिन सुबह उसका फोन आया उसने कहाँ पागल कितना रोएगा उठ जा अब। मैं बस गाँव ही आई हु लेकिन तु देख तो सही तेरे मन से एक पल भी दुर नहीं साहिल शीतल से कभी दुर हो ही नहीं सकती बच्चू तू देखता जा में कैसी वहीं आती हु और वहीं पढ़ती हु। उसकी इन बातों ने मुझे बहुत राहत दी और में धिरे धिरे फिर से साहिल बन गया।। 

अब आगे।। 

Www.edmranjit.com
Writing by ranjit choubeay. 
19/09/2019.

वो एहसास जो प्यार बन गया💐The feeling that fell in love19/09/2019

Comments

Popular posts from this blog

कुछ पल की जिंदगी हैं कुछ पल में मिट जाना हैं। /There are few moments of life to be erased in a few moments/

Poetry //कितनें सत्य जीवन के💐

अब जिंदगी मैं वापस जाना नहीं है //पोयम//💐