कैसी ये मोहब्त हैं 💐 पौयम।

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कैसी ये मोहब्त हैं 💐पौयम। 

साहिलों की अक्सर ये कहानियाँ रही हैं।
खुशियों की मेहफ़िल विरानी हुई हैं।
ना गम का तराज़ू ना शिकवा शिकायत।
बस सहना और तनहा निशानी हुई हैं।
।।
कौई एक फजल हो या या लम्बी जुदाई।
ना आहट ना आँसु किसी काम आई।
मिली उनको नफरत मोहब्बत में हरदम।
जिन्होंने मोहब्बत में कसमें हैं खाई।
।।
करू क्या बयाँ में जमाने का आलम।
मोहब्बत की बातें तो हर दिल में रहती।
नहीं कोई बचता ये ऐसी बयार ।
किया इसने लाखोँ दिलो को बेकार।
।।
हौ सच्ची या झुठी पर होती जरूर।
नहीं कोई बचता ये कैसा फितुर।
जमी से गगन तक फैला बुखार।
चली इसमें गोली चली हैं तलवार।
।।
ना दोस्त ना दुश्मन ना कोई मशीहा।
ना राही ना मंजील ना कोई सवैरा।
मोहब्बत के राही की एक ही मंजिल।
जहाँ चाहैे जाऔ फैलाऔ मोहब्बत।f
।।
बसाई हैं कितनी महफिल ही इसने।
उजाड़े हैं लाखों घरों के  चिराग।
नहीं इसकी किमत लगा पाया कोई।
ना बच पाया कोई ना जी पाया कोई।

कैसी ये मोहब्त हैं 💐 पौयम। 

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Writing by ranjit choubeay.
Poerty.01/09/2019


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