प्रोरोफेशर डाइनामाइट (B4) professor dainamight💐🇨🇮एक ऐसा व्यक्ति जो दूरगामी भविष्य सोच समझ लेता है एक दार्शनिक की भांति 👏🙏🏻

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Motivated Story. 

प्रोरोफेशर डाइनामाइट (B4) professor dainamight💐🇨🇮एक ऐसा व्यक्ति जो दूरगामी भविष्य सोच समझ लेता है एक दार्शनिक की भांति 👏🙏🏻

सर आज तो आप मुझसें नाराज होंगे। क्योंकि में आपके व्यस्त शेड्यूल में ही आ गया। नहीं मिस्टर लेखक ऐसा भी नहीं है व्यस्त तो आज हर इंसान हें अपने अपने कामों मैं फिर भी वक्त सभी निकाल लेते हैं जब भी कोई खास उनके पास आता है तो। हाहहा क्या सर में और खास आप के लिए वो कैसे सर जी अभी तक तो आप मेरा नाम भी नहीं जानतें होंगे और अगर नाम पता भी लगा होगा आपको तो आप नाम भुल भी चूके होंगे। 💐

नहीं मिस्टर लेखक हम एक बार कुछ सुन ले तो भुलते नहीं। खेर अपनी बताओ कैसे आना हुआ आज और लेखन कैसा चल रहा है तुम्हारा। सर आपके पास आने के लिए मुझे किसी कारण या वजह की जरूरत नहीं होती पर में तभी आता हूँ जब मुझे लगता हैं मुझे कुछ चाहिए आपसे।। वाह मिस्टर लेखक तो बताओं अभी तक क्या क्या ले चुके हो मुझसें हम भी तो जानें तुम लेखक लोग क्या क्या ले जाते हो बीना कुछ मांगे ही बीना कुछ बताऐ ही। आज मुझे  लग रहा था आज तो मेरी चोरी पकड़ी ही जाएगी पर ऐसा हुआ नहीं क्योंकि मैने बाते ही चेंज कर ली।। 💐

मैने प्रोरोफेशर से कहाँ सर सच तो ये हैं आपके पास जब भी आता हूँ मुझे अलग ही एहसास होता है कुछ पल के लिए अपनी राइटिंग लाइफ से बाहर आ जाता हु। सर आप में ऐसा बहुत कुछ है जो हम आम लोगों में नहीं है। क्योंकि जब भी मेंने आपको यहाँ देखा। कुछ अलग ही तरह से देखा सर आप इस जंगल में अकेले कैसे रह जाते हो। आपके पास यहाँ मूलभूत सुविधाएं भी नहीं जबकी आप हमारे देश के भी नहीं हो बस आपके पास परमिशन है इस देश में रहने की क्योंकि आप एक दार्शनिक हो। फिर भी सर आपका इस तरह से अकेले रहना किसी खास मकशद की तरफ इशारा करता है।💐

सर यहीं सब सोचता हुआ आपके पास हर बार आता हूँ। अपनें सवालो का जबाब तो नहीं लेकर जाता पर कुछ अलग सा सिख कर देखकर लौट जाता हूँ। प्रोरोफेशर सर कहने लगे मिस्टर लेखक तुम्हारी सोच तो मेरे प्रति कुछ ज्यादा ही लम्बी हो गई है। अच्छा ये बताओ अगर तुम्हें पता चल भी जाए की में कौन हु क्या हु। और यहाँ क्यों रूका हुआ हू तो मिस्टर लेखक क्या करोगे। क्या तूम्हारी जिज्ञासा पुरी हो जाएगी। या फिर जितना सुनोगे उतना जाकर मेरे बारे में लिख लोगो। 
सर की बातों से मुझे फिर से हँसी आ गई और में हल्का सा मुश्कुरा लिया।। 💐

इस बार मेरा हंसना उन्हें पंसद नहीं आया उन्होनें मुझसे कहाँ मिस्टर लेखक बेवजह हँसना मुर्खो का काम हें और जहाँ तक में तुम्हें समझता हूँ  तुम बेहद ही तेज चालाक दिमाग वालें बच्चें हो। इतना याद रखों आज तुमनें इस हंसी के कारण कुछ खो दिया जो तुम्हें आज मुझसें मिलने वो अब कुछ और वक्त के लिए थम गया।। मुझे तो उनकी बातों ने हतप्रभ कर दिया मेरी छोटी सी हँसी ने उन्हें कुछ पल के लिए मुझसे नाराज कर दिया था। मेनें तुरन्त उनसे सौरी कहाँ पर में समझ गया था में कुछ गलत कर चुका हूँ इसलिए फिर चुप हो गया।। कुछ पल वो भी चुप रहे फिर बोले मिस्टर लेखक इंसान दुनियां का सबसे चालाक और जिम्मेदार जीव माना जाता है। जी सर मेंने उनकी बातों का समर्थन किया जो सच भी था💐
प्रोरोफेशर सर फिर अब अपनी जगह से खड़े हो चुके थे और उनके हाथो मैं एक काँच की प्लेट थी उन्होने उस प्लेट में कुछ अजीब सा पदार्थ का कुछ हिस्सा डाला और उसे उसमें डालकर एक लकड़ी के बनें छोटे से मुठिया से कुटने लगे में बस देख रहा था एक बार आज डाँट सुन चुका था इसलिए कुछ पूछने और बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था मन ही मन सोच रहा था अब ये क्या करने वाले हैं कहीं ये कुटकर इस जड़ी बुटी को मुझे खिलाऐंगे तो नहीं ये सब सोचकर मुझे डर भी लग रहा था पर मुझे उनसे बहुत कुछ सीखना और जानना था इसलिए सब कुछ मंजूर था इस वक्त तो  मुझे।💐

प्रोरोफेशर डाइनामाइट (B4) professor dainamight💐🇨🇮एक ऐसा व्यक्ति जो दूरगामी भविष्य सोच समझ लेता है एक दार्शनिक की भांति 👏🙏🏻

कुछ पल चुप रहने के बाद जैसे ही उनका काम पुरा हुआ उन्होनें वो प्लेट का मैटेरियल एक लकड़ी के बर्तन में डाल दिया और कहने लगे। क्या हुआ मिस्टर लेखक बहुत चुप शाँत हो गये कहो कुछ। में क्या बोलता मुझे तो डर था कहीं ये दवा मेरे लिये ना बनाई हो इन्होनें क्योंकि पिछली बार तो जहर ही खिला दिया था मुझे और फिर बोले थे इस भोजन का जहर कट चुका हैं कुछ नुकसान नहीं होगा इससे। अब फिर से कुछ नया प्रयोग में  नहीं चख सकता था। तभी सर बोले तुम डरो नहीं ये तुम्हारे लिए नहीं है। जब उन्होने ऐसा कहाँ तब जाकर मेरी जान में जान आई। इसके बाद सर वो बर्तन लेकर बाहर 💐

आए जिसमें वो दवा थी उनके घर के आगे एक विशाल बरगद का पेड़ था जब वो उस पेड़ के समीप जाने लगे तब में भी उनके साथ गया मैंने देखा वहाँ बरगद की जड़ो के नीचे के बहुत मोटा बिल था। प्रोफेसर सर कुछ पल उस बिल को देखते रहे उसके बाद उन्होनें वहाँ हल्की सी आवाज लगाई में सोचने लगा अब ये क्याँ नया जादु करने वाले हैं तभी मेंने देखा उस बिल से एक अजगर सर्प का बच्चा बाहर की तरफ आने लगा। मेंने कहाँ सर ये तो हमे खाँ जाएगा दुर हटिए आप भी 💐

मेरी तो हालत खराब हो रही थी में बीस फिट की दुरी पर चला गया पर सर नहीं हटें और कहने लगे तुम वहीं रहो अगर डर लगता है तो अगर कुछ सीखना है तो पास आ आओ। मैरी डर से साँसे फुल रही थी मेरे हाथ पैर भी काँप रहे थे मतलब आप सब समझ सकते हैं मेरा खुद पर कंन्टरौल नहीं था। मैने सर से कहाँ नहीं सर में यही से देख रहा हूँ। आप करिए जो करना है बस थोड़ा संभल के सर जी आपको नही पता आप मुशिबत के मुंह मैं खुद ही हाथ डाल रहे हैं।। देखते ही 💐

देखते वो आठ से दस फिट का अजगर बिल से पुरा बाहर आया और सर के पास ही अपने शरीर को सीधा फैलाए पड़ा रहा वो और कुछ भी नहीं कर रहाँ था फिर सर उस बर्तन मैं बनाए अपने लैप को उसकी पिठ के पास लगाने लगे। अब मेरी समझ मैं  कुछ कुछ आने लगा था। में धिरे धिरे कदमों से सर के करीब आकर उस पेड़ के पिछे छुपकर देखने लगा 
तभी सर ने कहाँ आ जाओ देखो इसे बेचारा खुद ही घायल है कल मुझे तलाब के किनारे अधमरा सा पड़ा मिला शायद जंगल में आए लकड़हारो ने इसे देख लिया होगा और इस पर हमला किया है। ये चोट खाकर वहाँ से भाग भाग लिया होगा। वहीं में जब तलाब के किनारें पहुँचा ये बेचारा मरने की स्थिति में झाड़ियों में पड़ा मिला 💐

मेंने देखा तो ये अभी जिंदा था फिर मैं समझ गया भगवान ने इससे मुझे क्यों मिलाया हैं। बस फिर इसको किसी तरह उठा कर अपने साथ ले आया जब मेंने इसे कुछ जड़ी बुटियाँ सुंघाई तो इसे होश आया इसके बाद ये मुझे ताकता रहा मेंने इससे इसकी भाषा में बात की तो पता चला ये अपनी माँ से विछड़ गया है। तो मिस्टर लेखक तुम बताओ इंनसानियत तो यही कहती है  राह मैं अगर कोई निसहाय मिलें तो उसकी मद्त करनी चाहिए। और वैसे भी में तो इन्हीं सब के बीच रहता हूँ इस नाते तो ये सब पशु पंछी जीव सर्प सभी मेरे मित्र समान है। में  सिर्फ सर की बातें सुन रहा था और उस अजगर को देख रहा था। जिसके शरीर पर लगातार सर अपने हाथों से लैप लगा रहे थे और वो अजगर आराम से लैटा हुआ था💐

लैप लगाते वक्त प्रोरोफेशर सर उस से कुछ बोल भी रहे थे। कुछ मीनट बाद वो मुझे बोले चलो अब हो गया उनके खड़े होते ही वो सर्प भी धिरे धिरे अपने बिल की और बढ़ने लगा जाते जाते वो उन्हें अपनी आँखों से देखता हुआ अंदर चला गया । जब वो अंदर चला गया तब मेंने कहाँ सर आप बहुत खतरनाक हो आपको डर भी नहीं लगता आप आदमी के अलावा प्राणियों की भी भाषा जानते हो। सर मेंने इससे पहले ये सब वो खैल मदारी को ही सर्प की सेवा करते देखा था 💐
आपने तो आज फिर से मेरी जान सुखा दि थी। रिलेक्स हो जाओ मिस्टर लेखक तुम आते भी तो मेरे पास इसलिए ही हो 💐सर की बातें भी सही थी आखिर में उन्हें जानने समझने की कोशिश ही तो कर रहा था आखिर उनके अंदर है क्या क्या। प्रोरोफेशर सर ना बोलते हुये ना बताते हुये भी हर बार कुछ न कुछ अलग ही दिखा देते थे।। उनसे मिलना हर बार एक रोमांच की तरह होता जा रहा था। आज फिर से पहले डर लगा फिर कुछ सिख और समझ पाया। सर अब पुछने लगे मिस्टर लेखक अब बताओ क्या करे तुम्हें अभी रूकना है या में अपना कुछ और काम कर लू। में समझ चुका था अब 💐

मेरा आज का टाइम समाप्त हो चुका था। इसलिए मेंने कहाँ नहीं सर अब में भी चलता हु आप अपना ख्याल रखिएगा जल्दी ही फिर मुलकात करूगा सर जी।। और फिर में उनसे विदा लेकर लौट आया।। 💐

तो मित्रों प्रोरोफेशर सर को आगे भी जानने के लिये इंतजार कीजिए। 
मिलते हैं सर से अगली मुलाकात पर। 

Www.edmranjit.com
Writing by ranjit choubeay. 
04/09/2019

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