सपनों का शहर मुम्बई उसमें पल पल बड़े होते छिपकी के ख़्वाब💐भाग 2)

#EDMranjit

Motivational Story 

सपनों का शहर मुम्बई उसमें पल पल बड़े होते छिपकी के ख़्वाब💐भाग 2) 

मुम्बई आज सुबह से बारिस का कहर मौसम ऐसा जैसे मानो चारो तरफ सावन की रिमझिम में डूबती शाम की कहानी। 
इतना सुहाना मौसम देख कर  जी भरता ही नहीं। दिन के कोई बारह बज रहे हैं छिपकी अभी तक आज सो कर जागी नहीं है। उसकी माँ उसे जगा जगा कर थक चुकी हैं। पर ठंडे मौसम का मजा ले रही छिपकी को चैन के कुछ पल आज ही तो मिले हैं। वरना ऐसे कहा़ सो पाती है वो धारावी की कशमकश झुग्गी मै कहाँ गर्मी मैं ऐसी राहत मिलती है उसे । रात की उमस और दिन की गर्मी मैं झुलसते है सभी लोग यहाँ फिर इस नन्हीं सी गुड़िया को आज थोड़ा चैन मिला है तो वो बिलकुल ही सब कुछ भुलकर गुम सुम सोई है। 

बाकी के बच्चे तो बारिस में इधर उधर नाच खेल कुद रहे हैं नहाँ रहे हैं। वाकई कभी कभी देख कर लगता हैं गरीब होना भी किसी वरदान से कम नही अमीर शीशे के घरों मैं रहने वाले लोग भी इतना खुश नजर नहीं आते जिस तरह इस बारिस की बुंदो ने यहाँ के लोगों की आँखों में जो चमक भर दी है अभी। ये सब देखकर कुछ पल ही सही पर सुकुन जरूर होता है हर देखने वालो को। 

बारिस अब हल्की हो गई थी छिपकी की माँ उसके पास बैठकर उसके सर को सहला रही थी और सोच रही है कैसे होगी मेरी गुड़िया की ख्वाहिंशै पुरी। गरीब का विचार भी तो सिर्फ़ चिंता की लकीरों में ही डुबी होती है। तभी छिपकी की आँख खुली उठते ही बोलने लगी क्या माँ आपने मुझे जगाया ही नहीं देखो तो कितनी अच्छी बारिस हो रही है।। माँ को तो बस हँसी छुट गई बोलने लगी अरी शैतान तुझे कब से तो मैं जगा रही रही थी छिपकी भी हँसने लगी बोली माँ में तो आपको हांसाने के लिये ही बोली थी मुझे पता हैं आप मुझे बहुत टाइम से जगा रही हो में ही ठंडी ठंडी हवा की वजह से सोई हुई थी।। माँ आप कुछ बनाओ अब खाने के लिये में जल्दी से नहा  फ्रैस होकर आई।। 

एक छोटी सी परी जैसी लड़की छिपकी भगवान गरीब को ही दे सकता है। ऐसा सोचना भी गलत नहीं होगा। उसकी माँ और उसके पापा दोनों की जान थी वो । बारिस खुल चुकी थी मौसम बहुत ही कमाल का था अगर आप मुम्बई आऐं हो तो समझ सकते हो बारिस मैं जहाँ एक तरफ मुम्बई में पानी भर जाता है जनजीवन अस्त व्यस्त हो जाता है। तो वहीं दुसरी तरफ एक खुशनुमा महौल दिल जीतने वाला सुहाना मौसम भी हो जाता है। मीरा रोड की शाम समुद्र की गड़गड़ाहट झरनो की रौनक और शाम की रोशनी में चमचमाती लाईटे। किसी पैरिस की शाम या आईफिल टावर से कम खुशियाँ नहीं देती।। छिपकी माँ अब कैसे जाऊँ गली तो पुरी पानी से भर गई है । हाँ गुड़िया आज रहने दो कल जाएंगे देखो आज बारिस के कारण में भी तो नहीं गई ना काम पर छिपकी नहीं माँ मुझे जाना है में अपना लैसन नहीं छोड़ सकती।। 

माँ में गली में ही खड़ी हो जाती हैं घर के बाहर से किसी के साथ जाऊगी। नहीं बेटा ऐसा नहीं करो रूको में साथ चलती हु छिपकी नहीं माँ आप कहाँ जाओगी आज आप रहने दो देखो माँ अंकल आ रहे हैं अपने अपनी स्कुटर से वो भी आधा डुबा हुआ है।। क्या छिपकी बेटा यहाँ क्यों खडे़ हो अंकल मूझे भी लेते चलो सोनू भैया के घर पर छोड़ दो। माँ में जा रही अंकल के साथ आते टाइम सोनू भैया के साथ आऊंगी आप चिंता मत करना छिपकी की माँ की आँखों में हल्के से आँसू थे।। छिपकी अंकल ये देखो स्कुटर का पैडल भी  डूब गया है। हाँ बेटा क्या करे अब बारिस का पानी है धिरे धिरे निकल रहा है शाम तक साफ हो जाऐगा। ये लो बैटा आ गया सोनू का घर आराम से उतरो बेटा जी अंकल अच्छा बेटा हम जाते हैं  जी अंकल नमस्ते। नमस्ते बेटा अच्छी पढाई खुब खुब पढ़ो लिखो बेटा। 

सपनों का शहर मुम्बई उसमें पल पल बड़े होते छिपकी के ख़्वाब💐भाग 2)

सोनू भैया अरे छिपकी गुड़िया इतनी बारिस हुई हैं गली में पानी भी भरा हुआ हैं में खुद आज बाहर नहीं जा पाया और तु आ गई। हा भईया नहीं आती तो मेरी आज की पढ़ाई का क्या होता और इसके अलावा कोई और काम भी तो नहीं मेरे पास। सोनू की माँ बोली देखा सोनू इसको कहते हैं। सच्ची लगन देखना अपनी ये गुड़िया एक दिन कुछ बड़ा मुकाम हासिल करेगी हा माँ आप सही कह रही है आप में भी इसके लिये हमेशा यही सोचते रहता हूं। तभी छिपकी बोल पड़ी सोनु भैया और आँटी जी आप दोनों मेरी तारीफ बाद में करना सोनु भैया चलो आप ये कल का काम चैक करो और अभी क्या पढ़ना है मुझे वो काम बताओ।। 

छिपकी अपनी बातों से सामने वाले हर इंसान को अपना बना लेती थी वो गुड़िया जैसी बच्ची थी लेकीन उसकी सोच और समझ एक बड़े बच्चे की तरह थे। उसकी बात सुनकर सोनू की माँ हंसने लगी और बोली सोनु बेटा जाओ इस बुढ़ी अम्मा को ले जाओ और पढ़ाओ नहीं तो ये हम सबकी क्लास लै लेगी।। सोनू ने अपने आप पढ़ने वाले हर बच्चे की मद्त की थी और सोनू पुरी कोशिश करता था हर उसके पास आने वाला बच्चा पढ़ लिखकर कुछ बने। इसलिए सोनू अपनी पढाई के बाद का पूरा टाईम गली मुहल्ले के हर दिखने वाले बच्चों को खुद अपने पास बुलाकर पढ़ने लिखने की बात करता रहता था। जो आते थे उन्हें बड़े ही प्यार से पढ़ता था।। 

छिपकी तो जैसे सोनू की जान ही थी वो छिपकी को बिलकुल अपनी सगी बहन रूताली की तरह ही मानता था। सोनु छिपकी से पुछने लगा ये बताओ गुड़िया तुम आई कैसे अकेले इतने पानी में। छिपकी बोली भैया गली वाले रमेश अंकल के स्कुटर पर बैठकर आ गई वो भी इधर आ रहे थे तो मुझे लिफ्ट मील गई हाहाहाहा यही बोलकर छिपकी हंसने लगी 
फिर बोली भैया स्कुकर तो आज नाव बन गया था आधा तो पानी में ही डुबा हुआ था। सोनू छिपकी तुमने तो कल का सारा काम सही किया है। वैरी गुड अब ये लैसन बैठकर याद करो। छिपकी जी भैया। 

सोनू माँ के पास आया और कहने लगा देखो माँ आज बारिस की वजह से बच्चे भी पढ़ने नहीं आ पाऐं पता इस नहीं हमारी गली की ये प्राब्लम कब ठिक होगी जब भी बारिस होती है सबके काम धाम भी रूक जाते हैं बेटा बात तो सही पर हम सब तो गरीब लोग हैं कर भी क्या सकते हैं। पर बेटा मुझे खुशी है तुम जो काम अभी कर रहे हो जब यही बच्चे बड़े होकर कुछ बन जाएंगे इस धारावी की जिंदगी बदल जाऐगी इस जुग्गी मैं भी रौनक आऐगी और सब कुछ ठिक हो जाऐगा बेटा बस कर्म करते रहो एक दिन इसका फल भी सामने जरूर आएगा। सोनू जब भी निराश होता था माँ की बातों से उसको कुछ राहत जरूर मिल जाती थी। 

सोनू भी यहीं चाहता था की उसके आस पास भी मुम्बई की बाकी गलतियों तरह चकाचौंध रोशनी हो उसकी धारावी का हर बच्चा पढ़ा लिखा हो और कुछ बड़ा करे सोनू खुद भी अपनी बैसिक पढाई पुरी करके आइ एस की तैयारी करने वाला था वो छिपकी को भी एक कामयाबी की बड़ी मंजील पर देखना चाहता था और इसीलिए वो हमेशा सिर्फ़ पढाई की तरफ ध्यान ज्यादा देता था। छिपकी ने आवाज लगाई भैया मैने कर लिया लैसन याद आओ आप सुन लो।। 

सपनों का शहर मुम्बई उसमें पल पल बड़े होते छिपकी के ख़्वाब💐भाग 2)

आगे क्या होगी छिपकी और सोनू की लाइफ की कहानी 
जानने के लिये इंतजार कीजिए।। 👏💐
Www.edmranjit.com
Writing by ranjit choubeay. 
02/09/2019/

Comments

Popular posts from this blog

कुछ पल की जिंदगी हैं कुछ पल में मिट जाना हैं। /There are few moments of life to be erased in a few moments/

Poetry //कितनें सत्य जीवन के💐

अब जिंदगी मैं वापस जाना नहीं है //पोयम//💐