यही मिज़ाज था💐पौयम -08/09/2019

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Motivational poetry

यही मिज़ाज था💐पौयम -08/09/2019

कर जाऊ कुछ अलग।
यहीं मिज़ाज था।
रहु दुर सबसे यही मिज़ाज था।
साथ रह के जब वो ना लगे साथी।
तो दुर रह के निभाऊ।
यहीं मिज़ाज था।

बंदिशो की जंजीर से जुडा़ था वो।               
रह कर भी नहीं रह रहा था वो।
उसें इल्म हो वो पास था मेरे।
ये एहसास करा जाऊं ।
यही मिज़ाज था।

तुम तुम बन के जिओं ।
किसी के आधिन ना रहो।
मन  कभी घृणा से लज्जित न हो।
ऐसी एक राह सृजन कर जाऊ़।
यही मिजाज़ था।

मन डर की किसी दहलीज़ पर था।
आँखें कुछ आश भरी सी रहती थी।
इन्हीं आँखों की ज्योति बन जाऊं।
यही मिज़ाज था।

कभी दर्पण से मिला तो अच्छा लगा।
कभी मन से मिला तो सच्चा लगा।
फिर क्या करता यही साबित कर जाऊ।
यही मिजाज़ था। 🙏🏻

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Writing by ranjit Choubeay.
Motivational poetry.
Pics from web.

यही मिज़ाज था💐पौयम -08/09/2019


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