प्रेमी पंछी का जोड़ा 💐08/09/2019

#EDMranjit मोटीवेशनल स्टोरी।

 प्रेमी पंछी का जोड़ा 💐08/09/2019


एक पंछी का जोड़ा।
जो आकाश मै उड़ते हुये इतना दुर चला गया।
दोनोँ की जिद थी या उनका प्रेम था दोनो को।
 ये एहसास तक ना हुआ की वो धरती से। काफी दुर आ गये है। और दोनो की एक दुसरे से लगी शर्तें उन्हें जुदा कर देगी।
दोनो जोड़ा आकश के इतने समीप जा पहुचा था। जहा से दोनो का वापस जिंदा लोटना मुशकिल और नामुमकिन था।
जब नर पंछी को ये ज्ञात हुआ अब अगर मैने हार नही मानी तो शायद मेरे साथ मेरा प्यार भी मारा जायेगा। नर पंछी ने अपनी हार स्विकार कर कहा सुनो हम हार गये यार।
चलो बाबा अब हमने ये भी मान लिया की।
आप हमसे ज्यादा प्यार करती हो।
मादा पंछी अंदर ही अंदर बहुत खुश हुई।
लेकिन वो बहुत थक चुकी थी ।
फिर भी उसने कहा मुझे पता था मे जीत जाउंगी। लैकिन ये नही मालूम था तुम इतनी।
जल्दी हार मान लोगे।मादा पंछी अपनी बेबशी पर अंदर ही अंदर रौ रहा था क्योंकि वो समझ गया था अब हम दोनो कभी एक नही हो पायेंगे। उसने अपनी दोस्त मादा पंछी से कहा हा ठिक हे ठिक है अब जल्दी से निचे।
चलो शाम हो चुकी है और तुम थक चुकी हो।
मादा पंछी बोली हा अब बहुत थक चुकी हु।
चलो चलते है।
दोनो ही दोस्त नीचे की तरफ आने लगे।
लेकिन अब अंधेरा होने लगा था।
और मादा पंछी बोली अब तुम जाओ ।
मुझसे और नही उड़ा जाता नर पंछी बोला।
अरे एसे केसे तुम्हें अकेला छोड़कर चला जाऊ। और आज तो तुम जीती हो।
जब हमे ये पता चल ही गया है।
तुम ही हमे सबसे ज्यादा पयार करती हो।
तो मे भला अपने प्यार को कैसे अकेला।
छोड़ चला जाऊ।
मादा पंछी समझ चुकी थी ।
उसका दोस्त कया कहना चाहता है।
वो जान गई थीं प्यार कम या जयादा नही होता। बल्कि प्यार तो बस प्यार होता है।उसकी आखों मै आंशु थै।
वो चुप थी ।
तभी नर पंछी ने कहा आओ अब।
मैरी पिठ पर बैठ जाओ हम सही से।
नीचे पहुच जाऐंगे।
लेकिन ये तो बस वो अपनी दोस्त को।
खुशी देने के लिये बोल रहा था।
नर पंछी भी थक चुका था उसकी पिठ पर उसकी दोस्त थी और पुरा आसमान काला हो।
चुका था ।वो अपने भगवान से मन ही मन प्रार्थना कर रहा था। वो कह रहा था ।
है भगवान मुझे बस इतना साहस और समय ।
दे दौ की मै अपनी दोस्त को जीवित नीचे।
पहुचा सकु।
नर पंछी चुप उड़ रहा था और मादा थक कर।
उसकी पिठ पर सो गई थी।
नर पंछी का मन चाहकर भी अपने दोस्त को।
जगाना नही चाहता था।
धिरे धिरे उड़ते हुयें नर पंछि जमीन पर।
जैसे ही आया ।
उसे जोर सै चक्कर आया और।
बीना कुछ कहे उसके प्राण निकल गये।
मादा पंछी जब गहरी नींद से जागी तो।
उसे ये समझते देर नही लगी की उसका।
दोस्त अब उसके पास नही है।
और वही रोते चीखते उसने भी अपने प्राण।
त्याग दिये।

।दोस्तों आज भी प्यार किसी शर्तें का।
।मोहताज नही।
।अगर ये कहानी समझ आई है तो
।समझ लो जहा शर्तें है वहा प्यार नहीं।
।कितनी बार ल़ोग यही गलतिया करते है।
।और जब तक प्यार का मतलब समझ पाते
।बहुत देर हो जाती है।
Www.edmranjit.com
Writing by ranjit choubeay.
Pics from Google
08/9/2019

प्रेमी पंछी का जोड़ा 💐08/09/2019

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