निराश न हो बिरादर।पौयम मोटीवेशनल☝07/9/2019

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निराश न हो बिरादर।पौयम मोटीवेशनल☝07/9/2019

निराश ना हो बिरादर।
दुख के ये बादल भी।
जल्दी  छंट जाऐंगे।
मौसम सावन बंसत।
मिलकर सुख की बीन।
बजाऐंगे।
।।
कहें संत फकीर सब मिलकर।
अपनी तुम पहचान करो।
जरा सा मौसम बदला भी तो।
धीरज संग तुम धीर धरों।
।।
अभी तलक सुख भोगें हो तुम।
 दुख से ना घबराओं अब।
करो प्रबल संचार सुगंधित।
मन को ना सकुचाने दो।
।।
बीर पुरूष की भांति देखों।
शेरों सी दहाड़ भरो।
खुद ही अपनों की सेवा में।
शक्ति का प्रवाह भरो।
।।
नहीं हैं जग में मानव जैसा।
दूजा कोई बीर फकीर।
पल में राजा पल में भिक्षुक।
ऐसी हैं कुछ एक तकदीर।
।।
अभी अभी तुम जागें हो।
अब तन मन धन से लग जाऔ।
बदलों इस तकदीर को ऐसा।
तुम साहस का प्रमाण बनों।
Writing by ranjit choubeay. 

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निराश न हो बिरादर।पौयम मोटीवेशनल☝07/9/2019


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