हमनें तो आज कितने जानवर देखें। पौयम 07/09/2019☝

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हमनें तो आज कितने जानवर देखें। पौयम 07/09/2019☝

एक इंसान ही किसी के काम आऐगा।
और ये एहसास भी उसके पास होता हैं।
फिर जमाना क्यों अच्छाई भुलकर।
बस बुराई को याद रखता हैं।
।।
हमनें तो आज कितने जानवर देखें।
एक जानवर बड़ा खतरनाक दिखा।
मुशकिल में हम उस वक्त पड़ गये।
जब वो जानवर हम पर भी गुर्राया।
।।
फिर एक बात अजीब सी हुई।
जानवर वापस मुशकुराया।
और हंसते हंसते हमरे पास आया।
और कहाँ डरो नहीं हमसें आप।
असली जानवर हम नहीं हैं साहब।
असली तो उ हैं जिससें अभी आपने हाथ मिलाया।
।।
अब तो हम भी संभल गये हैं।
पता जो चला जमाना बदल गये हैं।
जानवर से डरने की बात अब ना रही हैं।
क्योंकि सारे इंसान जानवर बन गये हैं।
अफसोस कि ये बतीया हमें देर से समझ आई।
पर खुशी हुई की जानवरों को कुछ तो शरम आई हैं।🤫
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Writing by ranjit choubeay

हमें जरा भी शरम नहीं हैं।
ये लिखने में की आज कुछ।
 इंसान जानवर कहनें के लायक भी।
नहीं रहे बस देश और समाज को लूटों और खाऔ।
ऐसे में अपनी ये कविता उनको ही अरपण करता हु।

हमनें तो आज कितने जानवर देखें। पौयम 07/09/2019☝

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