Thursday, September 26, 2019

माँ आ रही 💐 नवरात्रि कविता।। Mother is coming 💐 Navratri poem.27/09/2019

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नवरात्रि वंदना माँ भक्ति कविता
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माँ आ रही 💐 नवरात्रि कविता।। Mother is coming 💐 Navratri poem.27/09/2019


माँ आ रही हैं जग को फिर से संवारने। 
तु तन से तु मन से माँ को पुकार ले।। 
जो थम गया था तेरा जीवन का कारवाँ। 
बीन बोले पुरी होगी वो हर मुराद तेरी। 

वो भक्ति में है खोई भक्तों के संग रहती। 
ना भुलती कभी वो नवरात्रि का सबेरा। 
निश्चल हैं मन अगर गुहार फिर लगा ले। 
माँ के चरण मैं झुक कर अब शीश तु नवा ले।। 

वो चर में भी अचर में भी धरा के हर पहर में भी। 
वो नभ भी है और शीत भी स्वर्ग भी स्तह भी है ।।
जगत की हर विरह भी है सुख भी संचय भी है। 
माँ ज्ञान भी संज्ञान भी है शक्ति का वरदान भी है।। 

अब आ गया है फिर से स्नेह का सवेरा। 
जोत भी जल रही है माँ ले कर नाम तेरा।। 
छुटे ना तेरे दर से कोई गरीब शाही।
 आशीष सबको देना ओ कटरा वाली माँई।। 

अभय हैं तेरे दर का हर एक रहगुजारी।। 
तुने तो सबकी दुनियां स्नेह से सजाई।। 
अब आ भी ओ माते हम भी बुला रहे हैं।। 
तेरे धाम की तरफ हम अर्जी लगा रहे हैं।। 

माँ तुझ से ऐसा नाता जो प्राण से भी प्यारा।। 
पुकारते हैं तुझको धरती के सारे लाला।। 
माँ शीतले माँ कोमल हृदय की शीत छाया।। 
तुने बड़े विनय से संसार ये बसाया।। 

नमन हैं माता तुमको धरती के कण कण से।। 
झुमता हैं मन सबका आपके आगमन से।। 
माँ आप सबकी प्यारी हम लाल सब तुम्हारे।। 
आशीष सबको देना सब चरण हैं पखारे।। 
माँ तुझे प्रणाम।। जय माता दी।। 💐🙏🏻🔱
Writing by ranjit choubeay. 
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माँ आ रही 💐 नवरात्रि कविता।। Mother is coming 💐 Navratri poem.27/09/2019🌹🌺🌼☘️





Wednesday, September 25, 2019

कोई भाग्य को कभी मिटा नहीं पाया। पोयय💐Nobody was able to destroy destiny. Poem 26/09/2019

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कोई भाग्य को कभी मिटा नहीं पाया। पोयय💐Nobody was able to destroy destiny.  Poem 26/09/2019

मोटिवेशनल पोयम
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रूक कर चलते चलते चलना ही भुल गये। 
थोड़ा सी खुशी क्या मिली सारे गम ही भुल गये। 
अभी बस चले थे कुछ कदम मस्ती की राह में। 
पता चला चलते ही मंजिल अपनी भुल गये।। 


जुगनू रातों में अक्सर जगाया करते हैं। 
आँखों ही आँखों में कुछ राज बयाँ करते हैं। 
हम पुछे भी तो सिर्फ़ टिमटिमाते है।। 
ना जानें वो सारी उम्र हमसे क्या छुपाया करते हैं।। 

तकदीर तो सबकी वहीं लिखता आया है।। 
तश्बीर  में कुछ बेइमानी करता आया है।। 
तकदीर में कुछ कर्मो का लिहाज बताकर। 
तश्बीर में एक ही रंग परमामेंट भरते आया है।। 

कोई भगवान को कभी हरा नहीं पाया। 
को भाग्य को कभी मिटा नही पाया। 
कौई झुठ को कभी छुपा नहीं पाया। 
तो कोई सत्य को कभी दबा नहीं  पाया।। 

इंसान दुख का पुजारी है इस दुनियां में। 
इंसान ही सुख का भंडारी है इस दुनियां मैं। 
थोड़ा सा गर सर झुकाकर चलना सिख जाओ।। 
तो इंसान ही वफादारी हैं इस दुनिया में।। 

वक्त हरिशचंद से भी सब कुछ ले बैठा था।। 
वक्त रावण को भी मिटा आया है। 

वक्त ने बलि को भी खुद में समाया था।। 
वक्त ने हर बार खुद को दोहराया है।। 

सिखोगे तो हर बात में कुछ मिलना तय है।। 
देखोगे तो हर राह पर कुछ मिलना तय है।। 
समझ जाओगे तो हर इंशा लाजवाब हैं।। 
समझ पाओगे तो खुद से मिलना भी तय है।। 


पहचान न छुपाना कभी आप अपनी। 
क्योंकि ऊपर से सब नजर आ रहा  उसको। 
डर सदेव रखना जीवन में मित्रों अपने। 
 हमको तुमको सबको एक श्री ही चला रहा है💐

💐ऊँ नमोः भग्वते वाशुदेवाय नमः 💐
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Writing by ranjit choubeay. 
26/09/2019
Poetry motivational .


कोई भाग्य को कभी मिटा नहीं पाया। पोयय💐Nobody was able to destroy destiny.  Poem 26/09/2019



पिज्जा डिलीवरी साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'26/09/2019💐part 07)

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 पिज्जा डिलीवरी  साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'26/09/2019💐part 07)


#पार्ट 7
.......
साहिल आज तो बहुत थक गया यार आज तो लगता हैं।
डिलीवरी कर कर के मेरी ही डिलवरी हो जाऐगी।
अरे नही तुम बताओ और कहा करके आना है आकाश में कर आता हु। नही यार साहिल बस एक और बाकी है तु यही रूक मै आता हु अभी यही अशोक नगर ही जाना है।

ठिक जाओ जल्दी आना भुख भी लगी हैं लंच का टाइम भी हो गया ।हा यार बस गया और आया साहिल तब तक तुम एक काम करो वो राजु मिठाई वाले के यहाँ से गरमा गरम ढोकले लेते आओ आज मन कर रहा है ढोकले खाने को ओके में ले आता हु पर आकाश तुम जल्दी आओ। अब जाओ हा मै निकलता हु ।

साहिल ये आकाश भी लंच मे आज ढोकले खाऐगा इसका भी जवाब नही ओके चलो अब उसके ढोकले ले आता हु। हैलो भाई आधा किलो ढोकला पैक कर दो और सुनो थोड़े गरम होने चाहिये। तभी साहिल को कोई पिछे से टच करता है हैलो मिस्टर जी आप हा क्यो हम यहाँ नही आ सकते ये वही लड़की हैं जो साहिल को बार बार कही ना कही मील जाती हैं।

साहिल मैम आप मुझे गलत समझ रही हो मै तो यहाँ ढोकले लेने आया हु । हैलो मिस्टर मैने कुछ नही समझा मै तो बस ये सोच रही हु तुमने वो बुक ली होती तो पढ़ के अब तक लौटा चुके होते ।लेकिन मैम सुनो मेरा नाम सुरभी हैं मैम मत बोला करो साहिल ओके सुरभी जी। हैलो सर आपके ढोकले हा एक मिनट ये लिजिये पैसे। तो मिस्टर आप का नाम जान सकती हु मै। जी मेरा नाम साहिल है।

अच्छा तो साहिल मुझे भी बहुत अजीब सा लगता हैं जब आप वहाँ मील जाते हो जहां मे किसी काम से जाती हु ।
माना की ये महज एक इतिफाक हैं लैकिन अगर ऐसे ही आप हमें मीलते रहे तो फिर मुझे कुछ करना पडेगा। साहिल सुरभी जी ये क्या बोल रही हो आप । सुरभी हसने लगती हैं कहती हैं ओके ओके डरो नही यार में मजाक कर रही हु।साहिल सुरभी जी आप से डर लगता हैं।

 हमे देखिये हम सच मे बस अपना काम करते हैं और काम के बीच ही आप से मुलाकात हो जाती हैं इसमें मेरा कोई मतलब या कुछ इरादा नहीं हैं। सुरभी अरे यार तुम तो सिरियस हो गये। अच्छा मे चलती हु मै भी यहाँ कुछ स्वीट लेने आई थी देखते हैं हमारी अगली मुलाकात कहा होती हैं लेकिन साहिल दुआ करना इस बार आपको हमसे डर ना लगे। बाय ।साहिल बाय बाय जी बाय बाय।

साहिल बाप रे अजीब लड़की हैं कही भी मील जाती हैं ।
पता नही इसके दिमाग मैं चल क्या रहा हैं। आकास का फोन हां भाई आया अभी बस दो मीनट में।
साहिल क्या हुआ तुने बहुत टाइम लगा दिया मैं दस मिनट से यहा बैठा हु ।क्या हो गया साहिल कुछ नही यार आज फिर से वो लड़की मील गई थी आकाश कौन वो बुक वाली।

हा यार वही उसका नाम सुरभी हैं अच्छा त़ो नाम भी बता दिया। खुद बताया या तुने पुछा अरे यार मैं क्यो उसका नाम पुछने लगा उसने ही खुद बताया यार वो अजीब हैं जब देखो कही ना कही मील जाती हैं और कुछ ना कुछ बात करने लग जाती हैं।साहिल यार मुझे तो लगता हैं वो ही तुझे फौलो करती हैं ।नही आकाश ऐसा कुछ नही हैं वो वही मीलती हैं जहां कोई भी काम से ही जाता हैं।

अभी वो भी स्वीट लेने ही आई थी वहाँ ये कोई फौलो करना नही होता। अब मुझे लगता है इस बार मीलेगी तो उससे वो बुक लेकर पढ़ ही लुंगा कम से कम फिर उसके पास कुछ बोलने के लिये नही होगा। आकाश ये हुई ना शेरो वाली बात चलो अब लंच करते हैं बाते तो करनी ही हैं लेकिन अभी पेट पुजा भी जरूरी हैं साहिल हा यार चलो।
।।
अब आगे क्या सुरभी सच मैं साहिल को फौलो।
करती हैं या फिर उनका मीलना बस एक सयोग हैं।
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Writing editing by ranjit choubeay.
26/09/2019

 पिज्जा डिलीवरी  साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'26/09/2019💐part 07)

Tuesday, September 24, 2019

लव शायरी 💐 Love shayari 24/09/2019

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लव शायरी 💐 Love shayari 24/09/2019


उलझे हुए ख्वाबो की एक झलक मिल जाए। 
एतबार कर सके उनसे वो पलक मिल जाए। 
एहसास हो उन्हें वो हमारे सिर्फ़ हमारे है। 
तो इस बेसहारे दिल को भी शुकू मिल जाए।। 

कोई क्या इश्क करेगा आज इस जहां में। 
कोई क्या साथ देगा इस बहती हवा में। 
अब तो शहर से शहर तक सिर्फ वफा फिरती है।। 
कोई बचा ही नहीं अब इस शहरे बेवफ़ा में।। 

पलक झूकती है तो ख्वाबो में चेहरा खिल जाता है। 
याद आती है तो होटो में रंग भर आता है।। 
लोग मोहब्त आज भी दिल से ही करते हैं। 
इसलिए आँखों का झरना आज भी बह जाता हैं।।

किसी शायर की एक कलम लिख रहा हु।
किसी के दिल की ये कसक लिख रहा हु। 💕 
वो जो दिल के पास आते हैं छुपके छुपके। 
सिर्फ उन्हीं के लिए ये गजल लिख रहा हु।। 💕 

नहीं इल्म होता मोहब्त के मतवालों को। 💕 
वो तो सिर्फ़ प्यार किए जाते हैं।। 
जब नफरते जहाँ मैं फिजाएं रोती है रातों मैं।। 
दिवानें उस रात को अपनी महक से सजाते हैं।। 💕 

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Writing by ranjit choubeay. 
24/09/2019.

लव शायरी 💐 Love shayari 24/09/2019

Sunday, September 22, 2019

पिज्जा डिलीवरी साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'22/09/2019💐part 06)

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पिज्जा डिलीवरी  साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'22/09/2019💐part 06)

Pizza boy love story
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साहिल यार आकश आज जब में लास्ट डिलीवरी करके निकल रहा था तो मैने कुछ नोटिस किया पर फिर लगा नही मेरा वहम हैं। लैकिन फिर भी मन कहता है नही वो सच था अब समझ नही आता में सही था या फिर वो और मन कहता है वहम नही है सच है।

 आकाश साहिल लेकिन क्या मुझे अब बतायेगा या फिर खुद ही सही गलत करता रहेगा। बात क्या है खुलकर बता। साहिल यार बीते रविवार को मैने छुट्टी की थी ये तो तुझे पता है आकाश हा पता है।

अब आगे यार उस दिन में प्रगति मैदान गया था वहाँ कुछ पेंटिंग्स और बुक्स कि प्ररद्शनी लगी थी तो मै भी कुछ पुरानी ऐतिहासिक बुक्स देखने लगा मुझे एक बुक पंसद आई लेकिन उसका प्राइज़ बहुत था यार पुरे तीन हजार नौ सौ । फिर मैने वो बुक रख दि लैकिन तभी एक लड़की आई और पुछने लगी हैलो क्या आप ये बुक ले रहे हो।

तो मैने कहा नही तो उसने कहा आप काफी टाईम से इस बुक को पढ़ रहे थे। इसका मतलब आपको पंसद आई हैं तो फिर आप झुठ क्यो बोल रहे हो फिर उसने मुझे गौर से देखा मुझे ऐसा लगा जैसे वो मेरे कपड़े ओर पैरो की तरफ देख कर ये अंदाजा लगाने की कोशिश कर रही थी।

 मे गरीब हु या अमीर इसलिये में निकलने लगा तभी उसने कहा हु लगता हैं आपके पास इस बुक्स को लैने के लिये पुरे पैसे नही हैं क्यो मिस्टर सही कहा ना मैने तो मैने कहा दैखिये आप तो बेमतलब की बात कर रही हैं हम बुक ले या ना ले ये हमारी मरजी है।

 तो वो बोली देखिये मैने ऐसा इसिलिये कहा क्योंकि मुझे भी ये बुक्स पंसद हैं तो क्यो ना हम दोनो मिलकर यै बुक ले और पहले हम पढ़ लेगें और फिर आप का एडरेस दो आपको दे देगें हम लाकर।

आकाश साहिल अजीब लड़की थी बीना जान पहचान के ही गले पड़ रही थी अच्छा अब ये बता आगे क्या हुआ।
यार आगे फिर बोली क्यों मंजूर हैं। तो मैने कहा जी नहीं आप ले लिजिये हमे नही लेनी कोई बुक हम तो बस देखने आऐ है।

उसके बाद उसने कहा ओके और वो बुक उसने ले ली और जाते जाते बाय बाय बोल गई।आकाश अच्छा तो आज क्या हुआ जो तु उस दिन को लेकर आज सोच रहा हैं।साहिल अरे तु सुन यार आज जब मोरनिंग मै गार्ड अंकल से मीलने क्नाट पैलेस गया तो मैने उसको गार्डन मै जागिंग करते दैखा।

आकाश दिल्ली कि हैं यार दिख गई होगी यही आस पास की होगी। साहिल सुन तो लै भाई। उसके बाद जब मै अंकल से मिलकर लौटने लगा तो कार से रास्ते में मीली और हौरन दिया पिछे से जब मे साइड हुआ तो बोली क्यो हिरो मुझे फौलो कर रहे हो ।

 मैने जी नही में यहां अपने अंकल से मीलने आया था।
तो बोली अच्छा ओके सुनो तुम्हें वो बुक पढ़नी हैं तो में फ्री में दे सकती हु क्योंकि मैने पढ़ ली। यार मैने कहा लैकिन मेडम में आपको नही जानता तो आपसे बुक क्यो लु। तो बोली औके तुम्हारी मरजी और बांय बोलकर चली गई।

आकास उसके बाद लास्ट टाईम यार अभी जब में डिलवरी करके लौट रहा था तो मैरे पिछे ही कार का हौरन बजाने लगी।
जब मैने पिछे देखा तो मेरे होश उड़ गये वो दैख कर हंस रही थी। यार आकाश एक तो उसको ये भी पता चल गया मै एक डिलीवरी बोय हु ।

और ऊपर से ये समझ नही आ रहा वो बार बार क्यो मिल रही हैं ये कोई इतिफाक हैं या फिर वो मुझे फौलो कर रही हैं ।आकाश हाहाहाहाहा अरे यार तु बोलता है वो कार वाली हैं इसका मतलब पैसे वाली है।

और आस पास की है ईसलिए दिख जाती है। बस इतनी सी बात हैं और तु परेशान हैं।
लेकिन साहिल तुझे वो बुक ओफर कर रही थी तो ले लेता यार इसी बहाने पहचान हो जाती। साहिल अरे बाप रे नही यार वो बहुत हाईफाई दिखती हैं लगता हैं बहुत बडे़ घर की हैं देखते ही डर लगता हैं यार।

आकाश साहिल तु तो घबरू हैं यार लेकिन अब अगर वो मीले और कुछ बोले तो इसबार इतिफाक नही समझना उससे बात करना। हाहाहाहाहाहा।

क्या भाई तु बहूत खिचाई करता हैं यार।
आकास नहीं साहिल रियली यार तु भी हैंडसम हैं ।
और ये दिल्ली लड़कियों को तुझ सरीखे लड़के बहुत पंसद आते। हाहाहाहाहाहा साहिल बस बस भाई।

अब आगें ।
कौन हैं वो लड़की।
क्या साहिल से वापस उसकी मुलाकात होगी।


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Writing by ranjit choubeay.
22/09/2019

पिज्जा डिलीवरी  साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'22/09/2019💐part 06)

Saturday, September 21, 2019

तराजू भी हमेशा दो तरफ बहता है💐पोयम 22/09/2019

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तराजू भी हमेशा दो तरफ बहता है💐पोयम 22/09/2019

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गिरते गिरते जो उठ जाते हैं।
वक्त रहते जो संभल जाते हैं।
हर वजह को अनदेखा जो करते हैं।
वक्त रहते वहीं कुछ कर जाते हैं।।

वाकिफ होते हैं जो दुनियां से।
वो तो डर डर कर बढ़ते है।
जो निडर होते हैं हर जहाँ से ।
वो सबसे आगे निकल जाते हैं।

कसर कौन छोड़ता है यहाँ जीत की।
हर किमत पर लोग जीतना चाहते हैं।
वजह जैसे ही समझ आती है कुछ खोने की।
बस वहीं हौसले पस्त हो जाते हैं।।

शिकार कहाँ शिकारी को बुलाता है कभी।।
वो अपनी भुख मिटाने की राह तय करता है।
बस कुदरत की मेहरबानी हैं दोनों पर।
कोई शिकार बन जाता है कोई शिकारी कहलाता है।

तराजु भी हमेशा दो तरफ बहता है।
कभी कम तो कभी ज्यादा कहता है।
मगर जैसे ही थोड़ा ज्यादा मिलता है उसे।
वो भी उसी साहुकार का होकर रहता है।।

इंसान का हुनर भी कमाल का होता है।
जहाँ पिटता है जिंदगी की चक्की मैं हर पल।
पता नहीं क्यों उसी चक्की के गुण गाता हैं।
हद तो तब हो जाती हैं एक दिन वहीं दम तोड़ जाता है। 🙏🏻
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22/09/2019.

तराजू भी हमेशा दो तरफ बहता है💐पोयम 22/09/2019

Friday, September 20, 2019

पिज्जा डिलीवरी साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'20/09/2019💐part 05

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पिज्जा डिलीवरी  साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'20/09/2019💐part 05)

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साहिल आकाश से कहता हैं।
यार जब घर से भागा था था तो कुछ पता नही था कहां जाऊंगा क्या करूंगा बस भाग लिया रेलवे स्टेशन पर बैठा बैठा काफी देर तक सोचता रहा कहा जाऊ क्योंकि किसी के पास नही जाना चाहता था जहा भी जाना था बस अकेला ही रहना था।
फिर कितनी ट्रेन आती थी जाती थी बस सबको देखता और सोचता नहीं यहाँ नही कही और।

फिर यही देखते सोचते सुबह हो गई ऐसा लगा जैसे में कोई निर्णय ले ही नही पाऊंगा और फिर अचानक से एक दिल्ली ट्रेन आई कुछ टाइम वो रूकी रही बस फिर मैने भी टिकट लिया और बैठ गया।

आकाश बोला पर साहिल ये सब अभी क्यो सोच रहा हैं। साहिल नही यार तु समझ नही रहा में जो बता रहा हु वो बस ध्यान से सुन शायद जो में नही समझ पाया वो तु समझ जाऐ और मुझे बता सके की आखिर मेरे दिमाग में ऐसा क्या था जो में खुद ब खुद यहाँ आ गया।

आकाश यार तु क्या बोल रहा हैं फिलहाल तो मुझे अभी कुछ समझ नही आया। अच्छा आगे बोल। साहिल मुझे लगता था बचपन में जैसे में बहुत काबील वकील या डाक्टर बन जाऊंगा।

क्योंकि घर और टीचर सबको यही लगता था और मैने खुद से कभी ऐसा नही सोचा था हमेशा घर और टीचर के बीच सोचता रहा कभी कभी ऐसा लगता था जैसे सबकी लाईफ ऐसी ही

होती हैं। पर नही कुछ दोस्त मीलते थे उनकी बाते अलग होती थी पुछते थे साहिल तु क्या करने वाला हैं Study के बाद और में उन्हें कुछ खास  बता ही नही पाता था।

आकाश देता भी कहा से यार तुझे यहाँ पिज़्ज़ा जो बेचना था।
हाहाहाहाहाहा। साहिल नही यार ऐसा कुछ नहीं हैं ऐसा तो कभी नही सोचा था।आकाश साहिल एक बात कहता हु यार ध्यान से सुन अगर तेरी फिलोसोफी खत्म हुई हो तो तु ज्यादा सोचा मत कर 70 year ki तो जिंदगी हैं जिसमे 22 to बिता चुके अब जो बची है।

उसको सोच के नही बल्की कुछ करके बितानी है मेरे भाई। ईसलिए खयालों से बाहर निकलो और देखो। फिलहाल तो हम दिल्ली की गलियों के बस डिलीवरी बोय हैं इससे ज्यादा कुछ भी नही।आकाश तुम्हारी बात सही है ।इसका ये तो बिलकुल भी मतलब नही की हम सोचे ही ना हमे जाना कहां हैं करना क्या हैं।

ये जरूरी तो नही अगर हमने अपने आज को एक डिलीवरी बोय बना लिया तो बस वही काम हमारी लाईफ बन जाऐ।
मैं तो बस ये सोच रहा हु क्या में जो अभी कर रहा हु क्या यही मेरा ऐम था क्या यही मेरी मंजिल थी या फिर मुझे कुछ और करना हैं इससे आगे भी कुछ सोचना है। आकाश साहिल यार तुम्हारी सोच सही हैं ।

पर हम क्या कर सकते हैं नौकरी अच्छी मीलने से रही पहचान और पैसे हैं नही अब अगर ये नौकरी भी ना करें तो फिर वही या तो गांव जाकर जानवरों को चारा डालों या फिर खैती मे काम करो। साहिल मेरे भाई में तो बस यहीं तक सोच पाता हु। तु क्या और कितना सोचता हैं।

मे नही समझ पाता लेकिन एक बात जानता हु तु कुछ अलग जरूर करना चाहता हैं और अगर इश्वर ने चाहा तो जरूर कोई राह मिलेंगी यार। अब हमे सोना चाहियें कल लोगों को पिज्जा भी दैना हैं।
हाहाहाहाहा। औके गुडनाईट यार।

क्या है साहिल के मन में।
क्या करना चाहता हैं वो।
Next day.
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पिज्जा डिलीवरी  साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'20/09/2019💐part 05)

मन उड़ रहा हवा में। पोयम💐20/09/2019

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मन उड़ रहा हवा में। पोयम💐20/09/2019

पोयम
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मन उड़ रहा हवा में।
एक ताजगी एहसास लिए।
दिल जी रहा फिंजा में।
 कुछ खास पल लिए।

कुछ चल रही हवाए।
बीन राह चुन दिशाए।
भटक रही हैं ऐसे।
एक साथ के लिए।

वो दिख रहा है नभ में ।
एक आस का सहारा।
दिल जानता है सबका।
अदृश्य है वो तारा।

हम आ गये हैं चलकर।
कुछ दुर तक वो राहें।
अब लौटना है मुश्किल।
किस हाल है बताए।
मन उड़ रहा हवा में।
कुछ खास पल लिए।

तु चंद है किरण भी।
एक रोशनी की छाया।
अब मील गया हैं  हमको।
इस दीप का उजाला।

कुछ बात कह गई है।
चारों सजी दिशाऐं।
अब नाचती है जग में।
एक छंद में फिजाएं।
मन उड़ रहा हवा में।
कुछ खास पल लिए।।

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Writing by ranjit choubeay.
20/09/2019.

मन उड़ रहा हवा में। पोयम💐20/09/2019

Thursday, September 19, 2019

वो एहसास जो प्यार बन गया💐The feeling that fell in love19/09/2019

लव स्टोरी
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वो एहसास जो प्यार बन गया💐The feeling that fell in love19/09/2019

Story 2002 to 2008

वो शाम कैसे भुल सकता हूँ जब अचानक से एक एहसास ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया था। उससे पहले मुझे कभी वैसा एहसास हुआ   था। हरपल साथ रहना हंसना खेलना पढ़ना लिखना सब अलग बात थी उस वक्त मैं इलेवन का छात्र था ना ही कोई होशियारी थी न कोई खास नादानी थी। सिर्फ़ दोस्ती और पढाई के सिवा मन में कोई ख्याल नहीं था। 

उस दिन दिन के कोई दस बज रहे थे और में अपनी शेविंग कर रहा था। तभी अंटी ने अचानक अपने वाले गेट का दरवाजा खोला था। उनका दरवाजा मेरे खिड़की के सामने ही था दरवाजा खुलते ही उनकी बेटी जिनका नाम शीतल था वो अंदर आई और झूक कर अपने माँ के चरण छुये। इसके बाद वो लड़की की नजर सीधे मेरी खिड़की की तरफ आई शायद उसने भी मुझे देख लिया था। तो देखते ही बोली माँ वो इतना बड़ा हो गया है देखो तो पुरे चेहरे पर क्रीम लगाकर शेविंग कर रहा हैं। 

में सिर्फ उसकी आवाज सुन रहा था उसने अंदर आते ही दरवाजा खटखटाया पर मैने खोलने से मना कर दिया तो आँटी हंसने लगी और बोली चल पहले हाथ मुँह धोकर कुछ खाँ ले आराम कर ले उससे बाद में मील लेना। उसे भी यही सही लगा उसने सोचा ज्यादा भाव खा रहा है और वो चली गई। सच तो ये था की मुझे उस वक्त पता भी नहीं था भाव खाना क्या होता हैं। मुझे सिर्फ़ इतना पता था मेरी दोस्त गाँव से आई है। एग्जाम के बाद छुट्टियाँ माँ पापा के साथ बिताने। मेंने अपनी शैविंग की उसके बाद फ्रैस हुआ नास्ता किया और माँ से बोलकर दोस्तों से मिलने चला गया। 

में कोई रात को नौ बजे घर वापस आया। तो देखा शीतल घर में माँ के पास बैठी उनसे कुछ बाते कर रही थी। मेरे आते ही उसका मुँह बंद सा हो गया में भी कुछ बोल नहीं पाया क्योंकि मेरे पास बोलने के लिए शायद कुछ था ही नहीं।मेरे कमरे मैं जाते ही वो माँ से बोली देखा आँटी कब से इसका इंतजार किया आया तो हैल्लो तक नही बोला। माँ ने मुझे आवाज लगाई और कहाँ सुन बेटा साहिल इसको हैल्लो तो बोल दे कम से कम माँ की बात सुनते ही मेरी हंसी छुट गई माँ भी हँसने लगी फिर शीतल दोड़ते हुए मेरे कमरे मैं आई और मुझसे एक कदम दुरी पर रूक गई। कहने लगी क्या हिरो बचपन भुल गए हो या फिर मुझे देखकर डर लग रहा है तुम्हें। 

वो एहसास जो प्यार बन गया💐The feeling that fell in love19/09/2019

में सच मैं उसकी तरफ देख ही नहीं पा रहा था उस वक्त क्योंकि मुझे उस टाइम अपने किसी काम की ज्यादा टेंशन थी। 
तो मैने उस से कह दिया ना बचपन भुला हु और ना तुझसे डर लगता है मुझे बस मेरे पास फालतु का वक्त नही है ये सुनते ही वो बोलने लगी मेरे पास फालतु टाइम था जो अपनी दोस्ती के लिए गाँव की छुट्टियाँ छोड़ तुझसे मीलने इतनी दुर आ गई हु। मुझे कुछ समझ नहीं आया तो कह दिया तुरन्त मेने भी वं हैल्लो मैने नही बुलाया टिकट करवाकर तुम्हारी मम्मी को तुम्हारी याद आ रही थी इसलिए तुम्हें बुला लिया। शीतल इतना सुनते ही कुछ उदास सा मुँह बनाकर मेरे कमरे से सीधा अपने घर भाग गई ।फिर माँ ने उसे ऐसे जाते देख मुझे बहुत डाँट लगा दी। 

कुछ वक्त बाद मैने खाना खाया और वापस सो गया। कहते हैं स्कुल के दिन बहुत खास होते हैं  मुझे भी अब इसका एहसास होता है। बचपन मैं साथ पढ़ने वाले दोस्त सच मैं बहुत खास होते हैं उनका मन बहुत निर्मल होता है और हम सब अपने हिसाब से अपने मन से अपने दोस्त भी चुन लेते हैं। फिर चाहे लड़की हो या लड़का कौई भेदभाव भी नहीं होता दोस्ती में। ऐसे ही शीतल मेरी बचपन की क्लासमीट थी जो दसवीं तक साथ पढ़ने के बाद अपनी सिटी मे आगे की पढ़ाई के लिए चली गई थी। 

एग्जाम खत्म होते ही उसे सबसे पहले मेरी ही याद आई और वो सीधा अपने मम्मी पापा के पास वहीं आ गई जहाँ हम भी साथ रहा करते थे। पर हम लड़के जब भी लड़कियों से दोस्ती करते हैं उस तरह से नहीं निभा पाते जीस तरह से वो निभाना जानती है। शायद ये इसलिए भी होता हैं क्योंकि हम लड़के ज्यादातर अनाड़ी ही होते हैं। शीतल के मामले में भी मेरी दोस्ती किसी अनाड़ी से कम नही थी। मुझे बस इतना ही पता था की साथ में पढ़ना लिखना खेलना और फिर अपने घर आ जाना फिर अगले दिन स्कुल जाना फिर पढाई करना खेलना  यही दोस्ती भी है। और यही दोस्ती निभाना भी इससे ज्यादा कुछ समझना और जानना कभी चाहा ही नहीं था। 

शीतल अगले दिन में सुबह सोया ही था तो आकर उसने मुझे जगाया में उसे फिर से अपने पास देखकर डर गया मुझे कुछ अजीब सी  शर्म आती थी जब वो मुझे इतने पास से देखती थी तो। इसलिए मेंने उसे कहाँ तुम तुम यहाँ मेरे कमरे में वो  God इस लड़की को मेरा दोस्त बनाया है या दुश्मन इतना सुनते ही वो आगबबुला होकर मुझे मारने लगी बोलने लगी मे तेरी दुश्मन कब से हो गई। बता फिर दोस्त कौन है तेरा। तभी माँ कमरे में आ गई और वो एक तरफ हट गई माँ को देखते ही बोलने लगी आँटी ये साहिल मुझे अपना दुश्मन बोलने लगा है। इसका मतलब में यहाँ से गाँव जाते ही पराई हो गई थी। 
माँ उसकी लुभावनी बातों में आ गई और फिर मुझे डाँटने लगी। ये देखकर वो माँ के पिछे से मुझे चिढा़ने लगी और हमारी वापस नोंक झोक शुरू हो गई। किसी तरह माँ ने हम दोनों को अलग किया और फिर उसे अपने साथ ले गई वो जाते जाते भी मुझे बहुत खतरनाक घुरती गई जैसे मैने उसका कुछ छिन लिया हो। कुछ वक्त बाद जब में बाहर कहीं जाने लगा तो वो अपने घर से मुझे देख रही थी। उसकी आँखें बहुत उदास उदास चेहरा भी बहुत अजीब सा था शायद में भी समझ गया था उस टाइम ये मेरी वजह से दुखी हैं ।क्योंकि उसको आए दो दिन हो गए थे और मैने उससे ठिक से कोई बात नहीं की थी। इसलिए उस पल तो मुझे भी सही नहीं लगा कुछ यही सोचता हुआ में अपने काम से बाहर चला गया। 

आज दोपहर जब मैं घर वापस आया तो लंच के बाद में खुद ही उसके घर गया और देखा तो वो आँटी की गोद में बैठकर अपने हैयर ठिक करवा रही थी मुझे देखते ही दोनों माँ बेटी एक साथ बोली आज तो साहिल खुद ही आ गया बीन बुलाए मेहमान की तरह ये शीतल ने कहाँ आँटी ने उसे डाँटा वो मेहमान नहीं मेरा बेटा है। तु पागल जैसी हरकते मत किया कर फिर में शीतल से बोला अब आँटी की गोद से निकलकर इधर आ तुझसे बात करनी है। वो तो सुनते ही उछल पड़ी अच्छा अच्छा बोल ना क्या बात करनी है जल्दी से बता ये देख कर आँटी को भी हँसी छुट गई वो मुझसे बोली देख लिया साहिल अभी मुझसे तुमहारे लिए ही बोल रही थी मम्मी वो साहिल अब पहले जैसा नहीं रहा। और अब जब तुम आए इससे बात करने तो चिढा़ रही है। मेने कहाँ जी आँटी ये ऐसे ही तंग करती है इसलिए इससे बात करने का मन नहीं होता मेरा। 

फिर शीतल बोलने लगी ज्यादा नखरे मत कर ये बता आजकल कहाँ गायब रहता है घर से पढा़ई कैसी चल रही है एग्जाम कैसे हुए। उसने तो एक बार मे ही बहुत सवाल कर लिए। फिर हम दोनों ने ढेरों बाते की तभी मैने उससे पुछा बता आज जब मैं घर से बाहर जा रहा था तो तु मुझे दुखी होकर क्यों ताक रही थी फिर उसने कहाँ  गधे बस इसलिये की तु मुझसे ठिक से बात नहीं कर रहा था इसलिए। पर अब तुझसे बात करके देख कितनी खुश हु। मेने कहाँ मुझे बना रही हैं तो बोली नहीं यार तु ही समझेगा बस युही हम दोनों बचपन सै दोस्त है ना तो इतना समझ ले की एक दुसरे के बहुत करीब है। वो क्या कह रही थी मेरे पल्ले कुछ उस वक्त नही पड़ रहा था पर ये अच्छा लगा देखकर मेरे कुछ पल उससे बात करने से वो बहुत खुश थी। और दोस्ती की यही वजह मुझे पसंद थी।। 

जल्दी ही हम दोनों का हँसते खैलते बातचीत करते वक्त बीत गया अब वो वक्त फिर से आया जब उसको दाखिला के लिए फिर वाप वहीं जाना था अपनी गाँव वाली सिटी में। बस दो दिन बाकी थे हम दोनों कैरम खैल रहे थे वो बार बार हार रही थी और उदास होती जा रही थी मैने पुछा तेरा खैल मैं तो मन लग ही नहीं रहा है फिर खैल क्यों रही है। तो कहने लगी तु नहीं समझेगा पर मुझे लगता हैं जब वक्त आएगा तु खुद ही समझ जाएगा।। 

उस दिन शीतल को अब जाना था दिन में दो बजे की उसकी ट्रेन थी तब तक मुझे याद हैं मुझे कुछ काम से बाहर जाना था तभी उसकी माँ हमारे घर आई और कहने लगी साहिल तुम भी चलना साथ में शीतल को स्टेशन छोड़ने उसे भी अच्छा लगेगा मेरी माँ ने भी कह दिया हाँ चला जाऐगा। पर पता नहीं क्यो मुझे कुछ अजीब सा लगा उस वक्त दिन के दस बज रहे थे और शीतल एक बार भी दिखी नहीं थी। तो मेंने आँटी से पुछा वो है कहाँ आज घर भी नहीं आई वरना एक महीने से वही मुझे जगाने आ रही थी सुबह। 

वो एहसास जो प्यार बन गया💐The feeling that fell in love19/09/2019

आँटी कहने लगी अभी तो वो खुद ही सोई हुई हैं। ये सुनकर मुझे भी अजीब लगा पर मे तो अनाड़ी था मुझे क्या करना है सोच कर में कुछ काम के लिए बाहर गया। पर मेरा दिल नहीं लगा तो मैं वापस घर आ गया जल्दी ही बारह बजने वाले थे और दो बजे की ट्रैन थी वो अभी तक अपने रूम में बैठी थी फिर में उसके घर गया तो आँटी ने इशारा किया रूम में ही है वो किचन में काम कर रहीं थी। जब में उसके रूम में गया तो रो रो कर उसने अपनी आँखों का बुरा हाल कर लिया था मुझे देखते ही खडी़ हुई और हग कर लिया रोते हुए कहने लगी साहिल तुझसे दुर रहकर नहीं पढ़ना मुझे में कुछ समझ नहीं पा रहा था लेकिन वो बहुत तकलीफ़ में इसलिए मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लगा और मेरा मन बहुत उदाब सा हो गया। 
मैने उसे बैठाया और कहाँ फिर आँटी से कहो यही ऐडमिशन हो जाएगा। तो कहने लगी नहीं पापा नहीं मान रहे हैं मैं सब बता चुकी हु फिर भी मेरी टिकट करवा दी और गाँव में चाचा को फोन कर दिया। अब में बहुत परेशान हो गई हु तु तो समझता ही नहीं कुछ पर मैं यही तेरे साथ ही रहकर पढ़ना चाहती हु। इतने में आँटी आई और सबको समझाने लगी मेने भी उस से कहाँ चलो तैयार हो जाओ गाड़ी का टाइम भी होने वाला है। इतना बोलकर जब में अपने घर में आया तो मेरे अंदर भी बहुत कुछ चल रहा था शीतल के आँसुओ ने पता नहीं मेरे अंदर एक तुफान सा लाकर खड़ा कर दिया था मुझे उस वक्त सब कुछ बेकार सा लग रहा था और पहली बार मुझे ऐसा लगा जैसे सच मैं शीतल का दुर जाना मेरे लिए भी सही नहीं था। 

कुछ वक्त बाद वो तैयार हो गई उसका भाई मुझे बुलाने आया शीतल भी माँ से मीलने आई और फिर वो दोनों मुझे बोलकर एक साथ चले गये अब में बहुत टेंशन में आ गया था में उसे छोड़ने स्टेशन जाना ही नहीं चाहता था क्योंकि मेरी बाँडी में अजीब सी हड़बड़ाहट हो रही थी। नहीं समझ पा रहा था उस दर्द को किसी से बोल भी नहीं सकता था। बस फिर एक ख्याल आया और मैं मार्केट की तरफ दौड़ गया वहाँ गिफ्ट गैलरी गया और शीतल के लिए एक ताजमहल लिया  जिसमे एक सुंदर सी गुड़िया गुड्डा एक साथ बैठे होते हैं। उसे पैक करवाँ लाया फिर जब घर आया तो उसे लै जाकर अपने हाथों  से दे दिया। इतना करते ही मुझे बहुत राहत मिली इसके बाद वापस घर आ गया क्योंकि अब उसे स्टेशन छोड़ने का टाइम आ गया था और ये बहुत मुश्किल घड़ी थी दोनों के लिए। फिर मैने एक ब्लेक गौगल अपनी पहन लिया और शीतल  उसका भाई और आँटी कार में बैठकर स्टेशन आ गये। 

दिल की धड़कन ने तो जैसे साथ ही छोड़ दिया था आँखों के आँसू भी अंदर ही अंदर सुख रहे थे और जुबान एक दम बंद हो गई थी हम दोनों एक मीनट भी चुप नहीं रहे थे इसके पहले की लाइफ में पर उस वक्त मुँह से आवाज भी नहीं निकल रही थी। स्टेशन आते ही जान हलक में  आ गई थी ऐसा लगता था जैसे मेरी जिंदगी मेरे अंदर से निकलकर जा रही हो और में बेबस लाचार बस देख रहा हु। आँटी कुछ पुछती इस से पहले ही ट्रेन आ गई। शीतल ने हाथ मिलाया और कहाँ साहिल अपना ख्याल रखना में जरूर कुछ करूगी और लौट आऊगी उसकी इस बात से उस वक्त मेरे अंदर कुछ जान वापस आ गई थी उसने वापस कहाँ  पागल अब समझ आया उस दिन में उदास क्यों थी फिर कहाँ एक बार अपनी आँखें दिखा मुझे ये चश्मा उतार। लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाया वो समझ गई उसका दोस्त अभी ठिक नहीं है उसने जिद् नहीं की और फिर ट्रेन मैं बैठ गई। लास्ट में उसने कहाँ बस थोड़ा इंतजार करना शीतल यु गई और यु आई। 

फिर ट्रेन चलने लगी और हम एक दुसरे को देखते देखते नजरों से ओझल हो गए। वो एहसास आज भी दिल दुखा जाता है जब तक परवाह नहीं थी उसकी सब कुछ नार्मल ही थी पर जैसे ही एहसास हुआ जिंदगी में सब कुछ बदल सा गया था। घर आ गया मुँह धोया बहुत रोया और बस रोता ही गया जब तक नींद नही आई। अगले दिन सुबह उसका फोन आया उसने कहाँ पागल कितना रोएगा उठ जा अब। मैं बस गाँव ही आई हु लेकिन तु देख तो सही तेरे मन से एक पल भी दुर नहीं साहिल शीतल से कभी दुर हो ही नहीं सकती बच्चू तू देखता जा में कैसी वहीं आती हु और वहीं पढ़ती हु। उसकी इन बातों ने मुझे बहुत राहत दी और में धिरे धिरे फिर से साहिल बन गया।। 

अब आगे।। 

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Writing by ranjit choubeay. 
19/09/2019.

वो एहसास जो प्यार बन गया💐The feeling that fell in love19/09/2019

Wednesday, September 18, 2019

पिज्जा डिलीवरी साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'18/09/2019💐part 04)

#EDMranjit  motivated story. Wid love.

पिज्जा डिलीवरी  साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'18/09/2019💐part 04


#पार्ट 4#
Motivation story pizza boy
Pizza. Edmranjit.com motivated story. 


साहिल यार आकाश हम पुरी दिल्ली में पिज्जा सपलाई करेंगे ना। आकाश हा पर जो ओडर ज्यादा दुर का होता हैं।
वो उस एरिया के शोप से पुरी की जाती हैं।
इसका मतलब ये हैं की अपने सैठ की पुरी दिल्ली में 7 shop और भी हैं। जहाँ से जो पास में पडता हैं  वो एरिया वाईज हो जाता हैं।साहिल यार तु टेनशन ना ले मैं हु ना तेरे साथ जल्दी ही तु। दिल्ली का हो जाएगा और दिल्ली तेरी।
अच्छा साहिल अब तु जल्दी से कुछ Address note kar
और वहाँ का पार्सल दे कर आ जा फिर हम फ्री।

साहिल ओके यार चल फिर में आता हु।
साहिल का आज पहला दिन था उसके मन में थोड़ा डर था तो थोड़ी खुशी भी थी।
उसने अशोक नगर मे अपनी पहली डिलीवरी दी ।
उसके बाद पास में कुछ औफिस की डिलीवरी भी दी।

उसने देखा लोग अपनी लाईफ में इतने बिजी हैं उन्हें लंच तक ओडर करने का टाईम नही मीलता कभी कभी और इसलिए काम के टाइम पिज्जा बरगर खाकर काम में वापस लग जाते हैं लोग यहाँ।
अभी साहिल अपने तिसरे ओडर की तरफ निकल ही रहा था तब तक उसके सैल पर फोन आया हैलो क्या आप हमारा पिज्जा थोड़ा जल्दी डिलीवरी करोगें सर हमने मोर्निग से कुछ नही खाया ।

साहिल पहले तो डर गया फिर बोला यस मेम हम बस फाईव मिनट मे आ जाऐंगे।
ये एक icici bank ki unit मेनेजर निशा जी का फौन था जो इस पिज्जा शोप की रेगुलर कस्टमर थी और तो और इनके दिन की शुरुआत ही साहिल के शोप के पिज्जा से होती थी।

साहिल मेम आपका ओडर । ओह यस मिस्टर साहिल थेंक्यु ।
तो आप नये हो आई एम राईट साहिल जी मेम तो साहिल अब आप को डेली यहाँ पिज्जा लाना हैं पता हैं आपको जी मेम ।
साहिल ये टाइम ठिक हैं या फिर थोड़ा और जल्दी।
ओह साहिल बहुत ही गुड बोय लगते हो औकै ये टाइम सही हैं।
और सुनो थोड़ा इधर उधर भी चलेगा पर जल्दी के चक्कर में।

कही बाईक भी मार सकते हो ना शो आराम से डियर कोई जल्दी नही। साहिल ओके मेम थेंक्यू।
साहिल को यहाँ थोड़ा अच्छा लगा क्योंकि कुछ जगह तो लोगों ने उससे नारजगी ही दिखाई थोड़ा जल्दी आया करो
कल से लैट नहीं होना बहुत सी बाते।

उसने देखा कुछ लोग तो बस अपने सामान की फिकर करते हैं।
और कुछ लोग इनसानियत की भी कदर करते हैं और समझते हैं। अब साहिल ने अपने पुरे आज के ओडर खत्म कर लिये थें।

तभी आकाश की कौल आई भाई कहां हौ आ जा़औ यार लंच भी करना हैं। साहिल हा यार बस आ ही गया।
अब आगे साहिल को आज अच्छा भी लगा और
कुछ अजीब सी बाते भी उसको समझ में आई।

आगे साहिल क्या करेगा कैसे अपनी लाईफ ।
के फैसले लैगा ।
Next day.

पिज्जा डिलीवरी  साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'18/09/2019💐part 04
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सपनों का शहर मुम्बई उसमें पल पल बड़े होते छिपकी के ख़्वाब💐भाग 03) 18/09/2019

#EDMranjit    Motivational Story.

सपनों का शहर मुम्बई उसमें पल पल बड़े होते छिपकी के ख़्वाब💐भाग 03) 18/9/2019

Motivational Story. Chipki.
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छिपकी आज सुबह ही उठ गई पार्क में टहलते हुए एक पास के पड़ोसी अंकल ने उस से सवाल कर लिया ।छिपकी जी अंकल मेंने कल हमारे प्रिय प्रधानमंत्री जी का भाषण सुना उन्होने कहाँ जीवन में स्वस्थ रहना उतना ही जरूरी है जितना के पेट के लिए भोजन जेब के लिए पैसे और पढाई के लिए किताबे अंकल वाह छिपकी बिटिया बहुत सुंदर और शाबाश बेटा ऐसे ही पढ़ते लिखते रहना हमेशा देखना एक दिन बहुत नाम होगा तुम्हारा। छिपकी जी अंकल अब घर जाती हु मेरा वाँकिंग टाईम खत्म हुआ। अंकल हाहाहाहा जी बेटा अपना ख्याल रखना। 

छिपकी माँ आप अभी तक नहीं उठी देखो ना माँ मै तो पार्क भी हो आई। पता है आज वहाँ बहुत भीड़ है अब तो ज्यादा से ज्यादा लोग जोंगिंग के लिये आने लगे हैं वहीं माँ कल तक तो पार्क भी सुना सुना सा लगता था। छिपकी की माँ भी अब उठ गई थी आखिर उसकी बिटियाँ उसको जगा जो रही थी। उसके बाद वो अपने पापा के पास गई और उन्हें भी जगाने लगी उठो उठो पापा सुबह हो गई हैं आप तो बहुत आलसी हो गये हो देखो बाहर जाकर सारी दुनियां योगा व्याम मे लगी हुई हैं वो लोग अब हमेशा स्वास्थ्य लाभ लेंगे और पापा आप हो की चलते ही नहीं हो कितने सारे गली के अंकल वहाँ जाते है सब लोग दोड़ते हैं। छिपकी के पिता अपनी बिटिया को गोद में उठाकर बोले अच्छा ठिक है कल से कोशिश करूंगा मैं भी अपनी बिटियाँ के साथ पार्क जाऊ और दौड़ लगाऊ अब खुश ना बिटियाँ छिपकी जी पापा। 

छिपकी अपने मम्मी पापा को नींद से जगाकर खुद एक चैयर पर बैठ गई उसके मम्मी पापा दोनो ही सुबह के काम में लग गये और छिपकी जो अभी पार्क से दौड़ कर आई थी कुर्सी पर बैठे बैठे नींद भरने लगी उसे पता भी नहीं चला और वो ज्याद थक जाने कारण वहीं पर शौ गई कुछ टाईम बाद जब उसकी माँ बाथरूम से आई तो उसे देख हंसने लगी और फिर  उसके पिता को दिखाया देखो अभी हमें जगाया भाषण किया और खुद इतनी सुबह उठकर भाग गई थी पार्क की थक गई हैं और अब बैठे बैठे शौ गई। उसके पिता ने उसे आराम से उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया। 

कुछ टाईम बाद जब छिपकी की माँ का सब काम निपट गया तो उसने छिपकी को उठाना शुरू कर दिया पर छिपकी आज बहुत थकी हुई थी शायद इसलिए वो उठने का नाम ही नहीं ले रही थी पर उसकी माँ ने उसे अपनी गोद मैं उठाकर बिठा लिया फिर वो धिरे धिरे उठ गई। उठते ही बोलने लगी ये क्या माँ आपने मुझे गोद में कब लिया मे तो अभी वहाँ बैठी थी। उसकी माँ ने कहाँ नहीं गुड़िया अब दिन के नौ बज गये हैं और तुम सात बजे से सोई सोई अब उठ रही हो। छिपकी अरे बाप रे माँ में वापस सो गई थी हे भगवान मुझे तो पढ़ना था अभी तक तो मैने अपना काम भी पुरा नही किया। माँ आप का टाइम भी हो गया होगा ना काम पर जाने का हाँ गुड़िया टाइम तो हो गया है मैने तुम्हारे लिए नास्ता और लंच दौनो बना दिया है अब तुम जल्दी से नहा कर अपना सब् काम करो तब तक में काम पर जाकर आती हु। छिपकी जी माँ आप जाओं में सब कर लुंगी। छिपकी माँ पापा गये हाँ बेटा पापा चले गये जी माँ। 

छिपकी की माँ का नाम गुलबियाँ है और उसके पिता का नाम महतों  हैं दोनो मजदुरी करते हैं इसलिए इस नन्हीं सी आठ साल की गुड़िया को घर पर अकेले ही छोड़कर जाना पड़ता हैं। छिपकी के माता पिता दोनों दिन रात मेहनत कर के पैसा जुटा रहे हैं। सिर्फ़ इसलिए की उनकी बेटी को किसी अच्छे स्कुल में दाखिला दिलवा सके। इश्वर ने इन दोनों माता पिता को बहुत प्यारी गुड़िया दी है जो सच में हर तरह से सुंदर हे पढ़ाई खेल सोच दिमाग चंचलता सब चिज इस छोटी सी बच्ची में अथाह है।  जब भी इस बच्ची से कोई मीलता हैं कुछ पल के लिए अपने सारे गम भुल जाता है और सिर्फ़ इसकी बाते सुनता है। छिपकी की माँ काम पर जा चुकी हैं  और अब छिपकी अपने काम मै लग चुकी हैं। घर में सब समान जो इधर उधर पड़ा होता है उस पर गुस्सा करती है और फिर उसको उसकी जगह पर लगा देती है। 

सपनों का शहर मुम्बई उसमें पल पल बड़े होते छिपकी के ख़्वाब💐भाग 03) 18/9/2019

टाइम देख रही है सब काम कर चुकी है। उसको पता है माँ अब आ जाऐगी इसलिए चुप बठकर अपनी किताबों को देख रही है कभी कुछ पढ़ लेती है कभी कुछ लिख लेती है और कभी कुछ रट्टा भी मारती हैं फिर कभी कभी खुद से बोलती है ओह हो ये पढ़ना लिखना भी कितना मुश्किल काम है। पर पढ़ना तो पड़ेगा वरना मम्मी पापा को आराम कैसे दिला पाऊंगी डैली डैली काम पर जाते हैं। मेरे लिए कितनी मेहनत करते हैं। इसलिए मुझे पढ़लिखकर पैसा कमाना है और सबकी मद्त भी तो करनी है इसलिए इस मुश्किल पढाई को करना ही होगा मुझे।। 

छिपकी के छोटे से दिमाग में बडी़ बडी़ बाते आती हैं। हैरत की बात है सारी बातों को खुब समझती भी है खुद से भी बाते कर लेती है अकेले घर में कभी भी बौर नही होती है। दिवारो से भी हंस के बोलती है। कभी कुछ लिखकर दीवारों से पुछती हैं बताओ मैंने तुम्हारे ऊपर क्या लिख दिया है। फिर खुद से ही उसे बोलती है अच्छा नहीं पता ना तुम्हें चलों इस बार तो बता देती हूँ पर अगली बार से तुम्हें याद कर के मुझे सुनाना होगा। फिर खुद ही दिवाल पर लिखा दिवाल को सुनाती है। और बहुत खुश होती है। जब उसे लगता है उसने इस तरह से अपना लैसन याद कर लिया। 

छिपकी अपनी इन्हीं छोटी छोटी शरारतो से सबका दिल जीत लेती है धारावी के छोटे बड़े सभी अच्छे और बदमाश बच्चों को भी छिपकी से डर लगता है। यहाँ बहुत से छोटे छोटे बच्चे ऐसे भी है जो सिगरेट तम्बाकू की लत के शिकर हो चुके हैं। मगर छिपकी के सामने ऐसा कुछ भी करने से डरते है। ने देख लिया की वो आ रही है तो कहते हैं अरे छुपाओ जल्दी से सगगरेट नहीं तो बहुत मारेगी और दौड़ाऐगी भी। छिपकी से बड़े उम्र के बच्चे भी उसको देख कुछ गलत नहीं करते कहते हैं ये हम सबकी प्यारी गुड़िया हैं इसके सामने कोई गलत काम नहीं करना क्योंकि इसकी आँखो मैं आँसू अच्छे नहीं लगते। शायद इसलिए भी कोई इस नन्हीं गुड़िया के सामने मजबुर हो जाते है। 

बहुत जगह देखा भी जाता है अच्चाई के सामने बुराई हार जाती है। तो ये छिपकी इसका सबसे अच्छा उदहारण है। गली का गुंडा भी जिसे देख शराफत दिखाने लगे उस अच्छाई का नाम है छिपकी। अब उसकी माँ आ चुकी है और छिपकी का काम भी हो गया है। उसे अब अपने टयुशन के लिए निकलना है जिसका इंतजार वो कर रही थी। माँ चलो अब मुझे छोड़ आओ। गुलबियाँ अब छिपकी को लेकर सोनू के घर निकली है रास्ते भर छिपकी सबको छेड़ती खैलथी हंसती जाऐगी और सबको हँसाती जाऐगी। अद्भुत है ये बच्ची कुदरत ने इसमे दुनियां कि सारी खुशियों को एक साथ भर दिया है।
माँ सोनू भैया का घर आ गया आप बैठोगी या चली जाओगी छिपकी बेटा आ गई तु देखते ही सोनू की माँ ने आवाज लगाई। छिपकी जी आँटी आ गई में। जा अंदर सोनू भैया और बाकी सब बच्चे भी अंदर ही है।। 

छिपकी सोनू के पास चली जाती है और गुलबियाँ सोनु की माँ कुछ इधर उधर की बातों में लग जाती है।  सोनू छिपकी का होमवर्क चैक करता है अरे वाह छिपकी सब कर लिया है आज भी शाबाश छिपकी थैंक्यू भैया। सोनू छिपकी को फिर से कुछ याद करने के लिए देता है। और साथ में सभी बच्चों का भी सब होमवर्क चैक कर के सबको काम देता है। छिपकी  और इन सभी धारावी के बच्चों का भविष्य सिर्फ़ एक विश्वास पर चलता हैं।  और इनका विश्वास है उनका ये टिचर सोनू भैया जो अपने साथ साथ इन सभी बच्चों का भविष्य लेकर चल रहा है। ईश्वर  से प्रार्थना है इन सभी को कुछ ना कुछ जरूर बनाए।। 

अब आगे। पड़ते रहिए छिपकी की रोचक जिंदगी की अनोखी कहानीं। 
अगले अंक में।। 
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Writing by ranjit choubeay. 
18/09/2019.

सपनों का शहर मुम्बई उसमें पल पल बड़े होते छिपकी के ख़्वाब💐भाग 03) 18/9/2019

प्रोरोफेशर डाइनामाइट (B5) professor dainamight💐🇨🇮एक ऐसा व्यक्ति जो दूरगामी भविष्य सोच समझ लेता है एक दार्शनिक की भांति 👏🙏🏻18/09/2019

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प्रोरोफेशर डाइनामाइट (B5) professor dainamight💐🇨🇮एक ऐसा व्यक्ति जो दूरगामी भविष्य सोच समझ लेता है एक दार्शनिक की भांति 👏🙏🏻18/09/2019

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प्रोरोफेशर सर से मुलाकात आज की बहुत खुबसुरत रही आज तो कोई भी डर भय वाली समस्या नहीं हुई ना ही आज कोई रिवेन्ज हूआ बस कुछ बाते देश समाज और पर्सनल जिंदगी के पहलुओ पर ही चर्चा होकर रह गई और फिर वक्त ने मुझे फिर वापस एक मौका देने की जिद् छेड़ दी। 

आज जैसे ही में उनसे मिलने पहुँचा तो मुझे एसा लगा जैसे उन्हें पहले से ही मेरा इंतजार हो और हुआ भी ऐसा ही था वो कुछ परेशान उखडे़ उखड़े से नजर आए मैने उनसे कुछ पुछना चाहा। पर वो पहले ही बोल उठे हाँ मिस्टर राइटर कैसे हो बताओ और तुम्हारा काम कैसा चल रहा है मैने भी सब ठिक ठाक कह दिया। सुनते ही बोले चलो सही है। 

फिर मैने वापस कोशिश की और कहाँ सर आप कैसे हो आपका सब एक्सपैरिमेंट कैसा चल रहा हैं तो उन्होने कहाँ कैसा एक्सपेरिमेंट भाई तुम भी मुझे पागल समझ बैठे हो क्या। मैने तुरंत ना मै सर हिलाया और कहाँ नहीं सर वो बात नहीं है आप तो गलत समझ गये मेरी बात को। मैने तो बस उस अजगर के बच्चे का घाव जानना चाहा था क्या ठिक होकर चला गया या फिर अभी यही है। फिर सर ने कहाँ नहीं वो तो चला गया मैने उसे वहीं तालाब के किनारे छोड़ दिया। 

फिर कुछ वक्त चुप रहने के बाद मैने सर से कहाँ सर आप नहीं होते तो वो युहीं मर जाता तड़प तड़प कर लेकिन आप ने ना सिर्फ़ उसकी जान बचाई बल्कि उसका उचित इलाज भी किया उसका ख्याल भी रखा सर आप सच मैं बहुत अच्छे इंसान हो। सर कहने लगे एसा कुछ नहीं बेटा हर इंसान का यही फर्ज होता है वो एक दुसरे कि मद्त करे तभी तो पृथ्वी सुरक्षित रहेगी वरना इस तरह तो जीवन दुभर हो जाएगा प्रकृति पर। उनकी बात बीलकुल सही थी शायद एक दार्शनिक ही देश समाज जीव मनुष्य धरा आसमान सभी को सही दृष्टिकोण से देख पाता है। वरना हम आम इंसान तो सिर्फ़ अपना पराया लोभ लालच के भँवर से निकल ही नहीं पाते।। 

फिर कुछ वक्त मौन के बाद मैने बडी़ हिम्मत से पुछा सर क्या में आप से कुछ पुछ सकता हूँ। तो प्रोरोफेशर सर ने कहाँ बिलकुल पुछ सकते हो तुम । क्योंकि यहाँ मुझे तुम्हारे शिवा कोई और जानता भी नहीं और ना ही में किसी को जानता हूँ ना किसी से बात करने की कोशिश करता हूँ। यहाँ जो भी मेरे पास आता है या तो वो किसी बात से परेशान होता है उसे उसकी परेशानी के अंत का सुझाव चाहिए होता है या फिर कुछ और उदेश्य हेतु आता हैं। में भी उन सब से उतना ही मिलता हु जीतनी उनकी जरुरत होती है। पर तुम कुछ खास हो तुम्हें भी समाज और प्राकृतिक से जुड़ा पाया हे मैने इसलिए तुमसे बात करना पसंद करता हूँ। पुछो जो भी पुछना हैं। 

प्रोरोफेशर डाइनामाइट (B5) professor dainamight💐🇨🇮एक ऐसा व्यक्ति जो दूरगामी भविष्य सोच समझ लेता है एक दार्शनिक की भांति 👏🙏🏻18/09/2019

मैने डरते डरते उनसे पुछा सर जब आज मैं आप से आज मिलने आया तो आज आप मुझे कुछ उदास उदास नजर आए इसलिए में कुछ परेशान सा हु क्योंकि इससे पहले मैने आपको हमेशा खुश और एकदम तरोताजा ही देखा है। सर क्या कोई बिग परेशानी है। प्रोरोफेशर सर एक बार तो मेरी तरफ देखने लगे फिर थोड़ा चुप रहे और फिर एकदम से खड़े हुए मेरा हाथ पकड़कर खड़े हुए बोले आओ मेरे साथ। मै बस चुप से उनके साथ चल दिया कुछ वक्त पैदल चलने के बाद वो एक झाड़ के पास मुझे ले गये और कहने लगे यहाँ से उस पार देखो ।

मै तो कुछ समझ ही नहीं पाया फिर भी उनके कहने के मुताबिक मैने उस झाड़ी के उस पार देखने की कोशिश की मुझे कुछ भी नजर नहीं आया क्योंकि वो झाड़ी बहुत घनी थी। मैने सर से कहाँ सर कुछ भी तो नजर नहीं आ रहा है आप मुझे कुछ समझाने की कोशिश कर रहे हैं पर में समझ नहीं पाया। 

प्रोरोफेशर सर कहने लगे यही तो मेरी चिंता का विषय हैं कोई भी मनुष्य इस पृथ्वी के कण को ठिक से समझने की कोशिश नहीं करता बस अपनी जरूरतों के हिसाब से धरा को बदलने की कोशिश में लगा हुआ है।। फिर मैने उनसे विनती की सर आप मुझे विस्तार से बताईये बात क्या है शायद में समझ जाऊ क्योंकि में आप से जुड़ा हुआ हु। प्रोरोफेशर सर ने बताया अभी अभी जिस झाड़ी के पास तुम खड़े थे क्या तुम्हें पता हैं वो क्या है। मैने ना मै सर हिलाया फिर उन्होनै बताया वो जीवन है। इस जंगल को आज से हजारों वर्ष पूर्व लगाया गया था ।

इसमे विश्व के सबसे ज्यादा आयुर्वेदिक पौधो को लगया गया था। मेरे पचास सालो के शौध के बाद में इस जंगल तक पहुंचा। मेरे शिवा कोई दुसरा इस जंगल के विषय मैं नहीं जानता लोग सरकार अधिकारी या फिर जंगली वासी भी इसे सिर्फ एक आम जंगल ही समझते हैं।। 

सर की बातें सुनकर मेरी तो फटी की फटी रह गई में तो समझ ही नहीं पाया आखिर ये आज तक कोई क्यों नहीं समझ पाया 
प्रोरोफेशर सर ने आगे बताया यहाँ के आदिवासी लोग कुछ छोटी मोटी पेड़ पतियों को पहचानते है पर उन्हें नही पता ये पुरा जंगल आयुर्वेद का घर है। वो लगातार इस जंगल की झाडि़यो को अपने निजी स्वार्थ के लिये बर्बाद कर रहे हैं। सर की बात सब समझ में आ गई थी पर एक बात अभी भी समझनी थी।

 उन्होने झाड़ी के उस पार देखने के लिये क्यों कहाँ था। मैने ये बात पुछी तो उन्होने कहाँ जब तुम सिर्फ एक झाडी़ के उस पास नहीं देख सकते तो सोचो जब ये जंगल ही नहीं रहेगा तो करोडो़ मनुष्य जीव जंतु पंछी इस आयुर्वेदिक जंगल को अपना जीवन मानते है उनका क्या होगा। में देख रहा हु यहा के दबंग आदिवासी जंगल को काटे जा रहे हैं अपनी छोटी छोटी जरूरतों के लिये अरबो लोगों की जिंदगी कि दवा ही मिटा रहे हैं यही मेरी चिंता का विषय था। 

प्रोरोफेशर सर की बातों ने मेरी तो आँखो की रोशनी दुगनी कर दी थी मुझे तो जैसे अब चारो तरफ इस जंगल में जीवन ही जीवन दिखाई दे रहा था। पर अफसोस में एक अदना सा लेखक था लिखने के अलावा मुझे कुछ और आता ही नहीं था फिर भी में समझ चुका था हमारे आस पास हर पेड़ पोधे का अपने आप में अपने गुणों का बहुत महत्व है जरूरत है हम उनके गुणों का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाए ना की उनके प्रति लापरवाही बरते और उनकी जर्नी ही खत्म कर दे।। मेंने सर से कहाँ अगर आप चाहे तो प्रशासन की मद्त से ये सब नुकसान रोक सकते हैं पर उन्होने मना कर दिया उन्होने कहाँ बेटे अगर हमने एसा किया तो वो लोग ही इसे बेच खाँऐगे इसलिए हम इस जंगल को अपने तरीके से बचाऐगें। 

मित्रों प्रोरोफेशर सर की वर्षो की मेहनत ने उन्हें वहाँ लाकर खड़ा कर दिया था जहाँ वो आना चाहते थे। और जब उनकी रिसर्च का फल उन्हें मिला तो उन पर अब इस पुरे आयुर्वेदिक स्थान को सुरक्षित बचाने का संकट भी आ गया था। 

तो मित्रों आगे की जर्नी को समझने और पढ़ने के लिए थोड़ा इंतजार कीजिए सर से अगली मुलाकात का। 

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18/09/2019.

प्रोरोफेशर डाइनामाइट (B5) professor dainamight💐🇨🇮एक ऐसा व्यक्ति जो दूरगामी भविष्य सोच समझ लेता है एक दार्शनिक की भांति 👏🙏🏻18/09/2019


Tuesday, September 17, 2019

प्रेम उद्हारण Love quotes💐 17/09/2019

#EDMranjit.    Love motivation

 प्रेम उद्हारण Love quotes💐 17/09/201

  1. प्यार क्या है
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    1 .प्यार का सबसे पहला अर्थ विश्वास है। जो दो लोगों की आपसी जिंदगी को हरपल खुशियों से सजाए रखता है।
    2. प्यार का दुसरा अर्थ होता है। अपने साथी की खुशियों का हमेशा ध्यान रखना जिसके साथ हम हर पल जुड़े हैं। 
    3. प्यार का तीसरा अर्थ होता है अपने साथी की केयर करना अपने साथी की सही आदतों की सराहना करना और उसकी गलत आदतों को उससे बाहर निकालने मैं उसकी हर तरह से मद्त करना।

    4. प्यार का अर्थ होता है। अपने साथी के दुःख में भी उसे उसी तरह चाहना जैसे दुख जैसा कुछ होता ही नहीं हर पल उसकी जिंदगी को अपनी लाइफ लाइन बना लेना। 
     5. प्यार का अर्थ होता है। अपने साथी को उसकी जिंदगी की सारी खुशियाँँ देना जो वो आपसे बीना कहे ही चाहता है या चाहती है।। 
    6 .प्यार का अर्थ होता है अपने साथी को कभी भी ये एहसास न होने देना के उसकी लाइफ मैं मुझसे ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ और हे ही नहीं क्योंकि प्यार तो त्याग समर्पण और निश्छलता का स्वरूप होता है सच्चे प्रेमी सदेव 
  2. जानते हैं उनकी लाइफ मैं प्रेम का स्थान क्या है।
  3. 07.प्यार का अर्थ होता है एक बार हुआ तो जिंदगी के हर मोड़ पर साथी के साथ चट्टान की तरह खड़े रहना।
  4. 08. प्यार का अर्थ होता है अपने साथी के साथ ताउम्र सरल रहना वही स्वभाव बनाए रखना जो साथी को बेहद पंसद हो या फिर जिसनें दोनों को एक किया था या फिर जो दोनों के लिए उपायुक्त और सहज हो। 
  5. 09. प्यार का अर्थ है कभी भी अपने साथी की किसी बात को दिल पर नहीं लगाना अगर कोई गलतफ़हमी हैं तो बात चित प्रेम से उसे दुर कर लेना क्योंकि एक सुई दर्द का काम भी करती है और दर्द भगाने का काम भी करती है प्रेम बहुत ही सहज भाव से होता है अपनापन समर्पण स्नेह और कोमलता ही प्रेम का भाव होता है।। 
  6. 10. प्यार का अर्थ होता है अपने साथी पर कभी किसी भी प्रकार का दोष न लगाना किसी भी तरह का आरोप न लगाना प्यार का फुल तब हमेशा खिला रहता है जब दोनों प्रेमी सहजता से निर्मलता से एक दुसरे को स्वीकार करते है एक दुसरे की भावनाओं की हमेशा कदर करना जानते हैं। 
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  9. 17/09/2019 

     प्रेम उद्हारण Love quotes💐 17/09/201
















Sunday, September 15, 2019

पिज्जा डिलीवरी साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'15/09/2019💐part 03)

#EDMranjit. Motivational Story.

पिज्जा डिलीवरी  साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'15/09/2019💐part 03)

.....
साहिल खुद से यार में आ तो गया दिल्ली।
अब कुछ करना होगा वरना बहुत बुरा होगा मेरे साथ तो।
ओह हो पर करू क्या कहा जाऊ गार्ड अंकल क्या हुआ साहिल क्या सोच रहे हो साहिल नहीं अंकल सोच रहा हु अब काम मिलेगा भी या नहीं। मैने तो आज तक कोई काम किया भी नहीं हैं। तो अब मुझे कौन काम देगा। गार्ड अंकल हाहाहा अरे तुम तो पहले ही घबरा रहे हो ये बताओं तुम्हें बाईक चलानी आती हैं।साहिल हा बिलकुल आती हैं पर उस से क्या होगा अंकल।
गार्ड अंकल तो साहिल समझो तुम्हें काम भी मील गया चलो अब मेरें साथ साहिल को लेकर गार्ड अंकल एक फुड डिलीवरी की शांप पर जाते हैं जहा उसे पिज्जा डिलीवरी बोय की जांब मील जाती हैं। साहिल खुश जी अंकल बहुत खुश हु सोचा नही था आप जैसे नेक इंसान से मुलाकात होगी। आपका बहुत बहुत धन्यवाद अंकल। अरे नहीं साहिल ये समझो तुम्हें यहाँ आना था और आ गये काम करना था और काम मील गया।
अब अच्छे से काम करो कमाऔ। और खुश रहों बाईक सम्भाल कर चलाना ये दिल्ली हैं । साहिल जी अंकल शोप वाला कहता हैं साहिल बेटे कल से आप काम पर आ जाओ सुबह 7 बजे से 3 बजे तक आप काम करोगे और फिर चाहो तो ओटी के लिये भी रूक सकते हो। क्योंकि 2 Shipt में काम होता हैं ।
दुसरी सिप्ट 3 से 11 pm तक की होगी साहिल औके अंकल।
और खाना लाने की जरूरत नही साहिल आपको नास्ता खाना सब यहाँ मीलेगा और 8हजार रूपय महीने की आपकी सैलरी हैं।आप जब तक चाहों काम करो आपको कोई तकलीफ नहीं होगी। साहिल कहता हैं मुझे रहने के लिये यही कही आस पास ही देखना हौगा गार्ड अंकल सही सोचा साहिल ।
शोप के कुछ लड़के यही तिलक नगर में रहते हैं।
तब एक लडका कहता हैं यार शाहिल आप मेरे साथ रहना चाहों तो आ जाओ। में तो अकेला ही रहता हु रूम शेयर कर लेंगे और हमे कंपनी भी मील जाऐगी एक दुसरे की।
शोंप वाले अंकल कहते हैं लो साहिल बेटे आपकी तो दोस्ती भी हो गई वरना ये आकाश किसी को भी अपने साथ नही रखता था।हाहाहा। साहिल थेंक्स आकाश भाई आपने तो मेरी टेनसन ही खत्म कर दी ।
गार्ड अंकल अच्छा साहिल अब हम चलते हैं बेटे लेकिन भुलना नही मिलने आते रहना अपना खयाल रखना और अपने घर भी फोन करके बता देना तुम बीलकुल ठिक हो काम कर रहे हो।
साहिल जी अंकल आप भी अपना खयाल रखना और में तो आपसे मीलने हर दिन आऊंगा और वैसे भी यहाँ आप ही मेरे  गार्जियन भी हो।।।।।।
''
अब आगें।
क्या साहिल दिल्ली में अपना सपना पुरा कर पाऐगा।
क्या उसको दिल्ली वो सब देगीं जो वो चाहता हैं।
जानने के लिये ।
पढ़िये। अगला भाग।
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Writing by ranjit choubeay.

15/09/2019
पिज्जा डिलीवरी  साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'15/09/2019💐part 03)Www.edmranjit.com

Saturday, September 14, 2019

पिज्जा डिलवरी साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी💐Pizza Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'14/09/2019💐

#EDMranjit.  Motivational Story.

पिज्जा डिलवरी साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी💐Pizza Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'14/09/2019💐part 2)




तो आखिर में साहिल को।
रात बिताने की जगह मिल जाती है।
वो एक सिक्योरिटी से कहता हैं।

सर क्या में यहाँ आप के पास रेस्ट कर सकता हु।
शायद सिक्योरिटी को दया आती हैं और वो कहता हैं।
ठिक हैं तुम आरम कर लो लेकिन सुबह जल्दी ही यहाँ से जाना होगा और वो गार्ड साहिल से पुछता हैं ।
पर तुम कहां से आऐ हो और भटक क्यो रहे हो।

साहिल अपनी पुरी कहानी सच सच बता देता हैं।
वो गार्ड जिसकी उम्र कोई 45 year की होगी।
वो साहिल से कहता हैं बेटा तुमने कदम तो बहुत गलत उठाया हैं।

पर अब करोगे क्या यहाँ तो कोई अपना भी नहीं तुम्हारा फिर कहां जाओगे कैसे रहोगे एक काम करो सुबह वापस घर निकल जाओ। साहिल नही अंकल कुछ भी काम कर लुंगा कही भी रह लुंगा पर घर नही जाना मुझे।
बातो ही बातो में शायद गार्ड को साहिल पर दया आने लगती हैं।

वो कहते हैं सही कहां तुमने तुम पढ़े लिखे तो हो ही कोई काम तो जरूर मिल जाऐगा।
लेकिन उसके लिये भी पहले तुम्हें भटकना होगा।
तब कही जाकर कुछ काम मिलेगा।
साहिल हां अंकल अब थोड़ी तकलीफ तो होगी मुझे पर कोई बात नही ।

लाईफ में तकलीफ ना हो तो फिर मुझे पता कैसे चलेगा मैने क्या सही किया और क्या गलत ।
तो मुझे तकलीफ से डर नहीं लगता बस अब यहाँ रहना हैं और
खुद को साबित करना हैं मैने कोई गलत कदम नह उठाया।
साहिल की बातों से उस गार्ड को भी लगता है इस लड़के में हिम्मत तो हैं।
और वो साहिल से कहते हैं बेटा अभी आप सौ जाऔ।

सुबह कुछ सोचना अच्छे से।
साहिल वही गार्ड रूम में सौ जाता हैं।
सुबह के करीब 6 बजे साहिल की नींद खुलती हैं।
गार्ड अंकल भी झपकी ले रहे होते हैं।
साहिल उन्हें जगाता हैं ।

और कहता हैं अंकल अब में चलु कुछ देखता हु किसी काम की तलाश करता हु। फिर रहने के लिऐ भी मुझे जगह की तलाश करनी हैं।
गार्ड अंकल को लगता हैं क्यो ना में इस बच्चे की कुछ मद्त करू।
वो साहिल से कहते हैं अब कहां जाओगे दिल्ली में यहाँ बीना पहचान के काम मीलेगा ना रहने की जगह ।
अगर तुम चाहों तो जब तक तुम्हें कुछ काम ना मील जाऐ।
तुम मेरी खोली में रह सकते हो ।

साहिल कहता हैं पर अंकल आप तो मुझे जानते भी नहीं।
फिर आप मेरी इतनी मद्त क्यो करना चाहते हैं।
गार्ड अंकल बोलते हैं बेटे अगर एक आम आदमी किसी की हेल्प नहीं करेगा तो फिर कल दुसरा साहिल इतनी हिम्मत कैसे कर पाऐगा अभी तुम बस इतना समझ लो ईश्वर ने तुम्हारी हैल्प के लिये हमे एक छोटा सा मौका दिया हैं।
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Writing by ranjit choubeay.
14/09/2019


पिज्जा डिलवरी साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी💐Pizza Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'14/09/2019💐part 2)

Thursday, September 12, 2019

पिज्जा डिलवरी साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी💐Pizza Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'12/09/2019💐

#EDMranjit

                 

पिज्जा डिलवरी साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी💐Pizza Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'12/09/2019💐

         



पिज्जा डिलवरी साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी💐Pizza Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'12/09/2019💐



कहतें हैं जब इंसान कभी तनहा होता हैं।
तो भीड़ से दुर जाने की कोशिश करता हैं
एक ऐसी ही कोशिश साहिल भी करना चाहता था।
शाहिल जो बनारस का रहने वाला हैं।अभी कुछ महिने पहले ही
उसने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी भुल की हैं।
उसने अपनी पढ़ाई छोड़ दि हैं।

उसे लगता लाईफ में ज्यादा पढ़ना बेवकूफी हैं।
शायद इसके लिये ही उसके पापा ने उसकी बहुत खिचाई की हैं।
और इस बात से परेशान हौकर साहिल को लगता हैं उसका खुद का घर और उसके पापा उसके दुश्मन हैं।
साहिल ने बहुत सोच समझकर घर छोड़ भाग लिया हैं वो घर से और अब इतनी बड़ी दुनिया में वो अकेला हैं।
आज साहिल बनारस से दिल्ली आ गया हैं ।

यहाँ उसे कोई जानता भी नहीं और ना ही वो किसी अपने के पास जाना चाहता हैं। उसके पास बस एक बेग हैं जिसमें उसके कुछ कपड़े हैं।
कुछ पैसे हैं जो ज्यादा दिन तक शायद उसकी मद्त ना कर पाऐ।
साहिल दिल्ली आ तो गया हैं और कुछ खुश भी लग रहा हैं ।
ये सोचकर अब में अपना मालिक खुद हु ना पढाई करनी हैं ।
ना कोई कुछ बोलेगा हमें।

उसके सामने अब एक चुनौती हैं ।
वो रहेगा कहां क्या काम करेगा।
और कुछ बात भी करनी हो तो किस से करेंगा।
अभी वो दिल्ली से कनाट पैलेस के पास आकर बहुत खुश हैं।
वहाँ इधर उधर देख रहा हैं बड़े बड़े लोग बड़ी बडी गाडियां।

बहुत बड़ा मार्किट शापिंग मांल।
लेकिन अफशोस ना तो उसका कोई अपना हैं यहाँ ना ही उसको कोई जानता हैं।
अब शाम हो गई हैं ठंड भी बहुत हैं।
साहिल को फिर भी घर का कुछ याद नही आ रहा।
उसे तो बस अपनी तलास हैं ।

अपने मन की इक्छानुसार जिना हैं।
जिसके लिये उसने सब कुछ पिछे छोड़ दिया हैं।
साहिल अभी मात्र 20 साल का हैं।
देखा जाऐ तो कोई मैच्योरिटी भी नही हैं।

अब रात हौ गई हैं सब लोग अपने अपने घर की तरफ निकल रहे हैं दुकानें बंद हो रही हैं। ओफिस भी बंद हो रहे हैं।
पर साहिल कहां जाऐ ।
उसने एक चाय की दुकान पर कुछ नास्ता किया हैं।
और उनसे पुछा हैं क्या यहाँ रात मैं रूकने के लिये कौई ऐसी जगह हैं जहाँ रहकर पैसे ना देने पड़े।
पहले तो चाय वाले ने साहिल से उसका सब पुछ लिया फिर कहां बहुत पागल लगते हौ जो घर छौड़ कर भागें हो।
अब कहां जाओगे क्या करोगे कहां रहोगे।

साहिल ने कहा इतना बड़ा शहर हैं इतने बड़े लोग हैं।
कही ना कही कुछ काम और रहने का जुगाड़ तो हौ ही जाएगा।
आप कृपया करके आज रात रूकने की कोई जगह बता दिजिये।
!!
पार्ट 2..
Next day.
क्या साहिल दिल्ली जैसे शहर मे खुद की तलाश कर पाऐगा।
जानिऐ आगे।
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Writing by ranjit choubeay. 
12/09/2019

💐पिज्जा डिलवरी साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी💐Pizza Delivery Sahil Surabhi's love story'12/09/2019💐

Wednesday, September 11, 2019

क्या है फेसबुक । what is facebook 11/09/2019

#EDMranjit       Motivation Though

क्या है फेसबुक। what is facebook 11/09/2019

आईये जानते हैं। फेसबुक क्या है  करीब एक दसक पहले इसके फाउनडर मार्क जुकरबर्ग ने फेसबुक नाम का एक एप बनाया 
अपने रिसर्च से एक नाम सोचा और इस एप का नाम फेसबुक रख दिया। जब भी कोई व्यक्ति अपने बिजनेस अपनी कंपनी अपने आँफिस या अपनी दुकान की शुरुआत करता है तो एक अच्छा सा नाम जरूर तलाश करता है। इस मामले में फिर एक विदेशी क्यों पीछे रहता।  ये दुनियां का सबसे ज्यादा युज किये जाने वाला सोशल नेटवर्क शाइड हैं। फेसबुक शूरूआती दौर में अपने देश में ही पोपुलर हुआ। 

इसके कुछ ही सालो में इसने बहुत सफलता हाशिल की और फिर ये विश्व के लगभग सभी देशों में लाँच कर दिया गया आज इसके मलिक के पास इस एक एप का दिया सब कुछ है।।  फेसबुक एक व्यक्ति का दुसरे व्यक्ति से सम्पर्क का माध्यम बना। फेसबुक युथ को इश्क फरमाने का भी माध्यम बना और बनता जा रहा है । विश्व के लगभग हर परिवार के एक व्यक्ति का फेसबुक आइडी जरूर होगा। हमारे देश भारत में आज फेसबुक बहुत ज्यादा पोपुलर हो चुका है। 

आज इसका बुखार इतना ज्यादा है लोग अपना ज्यादातर टाईम या फिर फ्री टाइम यही युज करते हैं। मित्रों अब बात करते है। फेसबुक पर और क्या क्या होता हैं आजकल। 

1) कुछ लोग तो अब इस एप के माध्यम से अपना बिजनेस भी चला रहे हैं। 
अब उनका बिजनेस कैसा हैं आप सब भी समझ ही चुके होंगे। 
कुछ बिजनेस ऐसा भी है जो आज हमारे समाज को युथ को बर्बादी की राह पर ले जा रहा है।। 
 इसके माध्यम से अवैध धंधे भी चल रहे हैं जैसे दैह व्यापर और नशे का बिजनेस भी इसमें शामिल हैं। क्योंकि आज भी समाज के सभ्य और नौकरशाही लोग  नेता लोगों का इसका सही अनुमान नहीं है। की उनके बच्चे सारी सारी रात फेसबुक पर क्या कर रहे हैं कहाँ जा रहे।। 

2) आज समाज जहाँ डिजिटल होता जा रहा है इसका एक और फायदा इस फेसबुक को सबसे ज्यादा होता जा रहा है। 
अब यहाँ कुछ सालो से ढोंगी बाबाओं का परचार भी जोरो से होता जा रहा है।। 
 लगभग हर तबका आज यहाँ इस फेसबुक को प्रचार का माध्यम बना रहा है प्रशासन को सब प्रिय ही नजर आ रहा है। 

3) अब बात करते हैं झुठ और धोकाधडी़ की इसमें भी गँवार से लेकर शिक्षित युथ पोढ़ बड़े बुढ़े महिलाऐं सभी यहाँ  एक दुसरे के साथ बढ़े आराम से संपर्क में आकर अपना काम चला रहे हैं। चाहें फिर परिणाम बाद में बूरा क्यों ना हो। 
इंसान को जब सहुलियत मिलती है वो अक्सर उसका गलत फायदा उठाता है इसका जीता जागता प्रणाम ये सोशलिज्म हो चुका है।। 

4) आज के युथ का कुछ ऐसा रिझान है इस फेसबुक पर जिसके कारण उनका व्यक्तित्व ही बर्बाद होता जा रहा है। एक अंजान के संपर्क में आते ही अपनी जिंदगी के सब पन्नों पर लीपापोती करवा लेना कहाँ की बुद्धिमत्ता हैं। अगर आपके पडो़सी को मुसीबत आए तो वो आप घर से नहीं निकलते वहीं एक अजनबी को हर तरह का स्पोप करने के लिए राजी होते हो। सरासर बेवकूफी हैं। ये फेसबुक चेहरा पढ़ने की किताब नहीं आपकी जिंदगी की किताब को भुला देने वाली काली छाया हैं आपके जीवन में।। आप यहाँ अपना सारा टाईम बर्बाद कर के हजारों दोस्त बना लो पर मुसीबत में यहाँ कोई भी सोशल दोस्त आपके साथ नहीं होगा । this is 100% truth. 

क्या है फेसबुक । what is facebook 11/09/2019


5)इस फेसबुक ने अब एक और युग बना दिया है। आज सभ्य लोग सभ्यता सोसायटी की बात करने वाले सभी महापुरुष घर मंदिर माता पिता बढ़े बुढ़े बाकी सब को भुल जाते हैं पर फेसबुक पर अपनी धार्मिक छवि बनाऐ रखते हैं। मतलब सुबह उठते ही बीना नहाए बीना फ्रेस फ्री हुए ही  लम्बी लम्बी फोटो के साथ अपने सुंदर विचार जरूर व्यक्त करते हैं।। 
मतलब भगवान भी अब आनलाईन ही याद किए जाने लगे हैं पुजे जाने लगे हैं। 

कुछ लोग तो ईश्वर का एक बड़ा सा समूह बनाकर वहाँ भी सोसायटी में रहने वाली अकेली अबला नारियों को अपना शिकार बना रहे हैं। ऐसे बाबाओ के आज हजारों लाखों समुह इस फेसबुक पर फल फुल रहे हैं उनकी पुजा आरती भी हो रही है।। 

6) फेसबुक पर ऐसे कई कृत्य हो चुके हैं जिसके कारण बहुत से मासुम बहनों की इज्जत बर्बाद हो चुकी है हजारों युथ पागल हो चुके हैं लाखों मासुमों का दिल टुट चुका है हजारों परिवार इसके कारण उजण चुके हैं। कितने ही युथ आज ऐसे है जिन्होंने अपना किमती टाईम यहाँ बर्बाद कर लिया और आज डिप्रेरेशन जैसी हाई बिमारी की चपेट में आकर जिंदगी के सही और गलत फैसले का फर्क भुल चुके हैं।।  मित्रों मार्क जुकरबर्ग तो एक विदेशी है उनके कल्चर, में इज्जत का शायद कोई मतलब ही ना हो पर आप भारतीय हो अपनी सभ्याताओं का ऐसा विनाश कैसे सह सकते हैं।। 

अगर मैं लिखना चाहू तो इस फेसबुक की महिमा का अंत ही ना हो। हो सकता है इस फेसबुक से कुछ एक गीने चुने लोगों का भला भी हुआ हो। पर लाखों में  किसी एक का भला होकर भी समाज को क्या मिलता है।  इसलिये में भारत के हर एक युथ से यही प्रार्थना करना चाहता हु।  जिंदगी को सामने से जिओं ना की अंधेरे मैं लडा़ई लड़ो  जीतना हो सके ऐसी फालतु बकवास सोशलिज्म से बचों।  वैसे जैसे जैसे इसके परिणाम एक एक के सामने आऐंगे खुद ही इसका भुत भी उतरता जाऐगा।  

लेकिन प्रशन उठता है जब हमें पता है ये गढ्ढा है तो हमे इसने भरने का कार्य करना चाहिए। 
मित्रों इस फेसबुक रुपी गड्ढे को अपनी जिंदगी से निकालकर ढक दो जहाँ से इसमें गिरने का कोई चांस ही ना हो।। 

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Writing by ranjit choubeay. 

11/09/2019




क्या हैं फेसबुक। what is facebook 11/09/2019

क्या होता होता है फेसबुक।
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क्या हैं फेेेसबुक ।





Monday, September 9, 2019

💐कृष्ण स्नेह वंदन💐09/09/2019

#EDMranjit

💐कृष्ण स्नेह वंदन💐09/09/2019


सुमिरन कर सब धन्य हुये।
मन पुलकित मुश्काय्।
रोम रोम राधे कहे।
कृष्ण कृष्ण दिख जाएं।
प्रभु भक्ति मैं लीन सब ।
नेना दर्शन तरस रही।
मन अखिंयों की आंस मैं।
झर झर भक्ति बरस रही।
आओ अब तो राधेय तुम।
श्याम रूप दिखला जाओ।
राधे राधे भजे सभी।
 तुम मोक्ष रूप दिखला जाओ।
मथुरा वृंदावन बरसाना गोवर्धन गोकुल के लाल।
हर नगरी में गुंजे प्यारे जय श्री श्याम जय श्री कृष्ण💐
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻💐
****जय श्री राधे श्याम जय श्री राधे कृष्ण 💐
💐ऊँ नमो भग्वते वाशुदेवाय नमः💐
💐शुभरात्रि कृष्ण स्नेह वंदन💐
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Writing by ranjit choubeay.
09/09/2019
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💐कृष्ण स्नेह वंदन💐09/09/2019

कहतें हैं राह सच्ची हो तो। पौयम 09/09/2019💐

#EDMranjit

कहतें हैं राह सच्ची हो तो। पौयम 09/09/2019💐


मोटीवेशनल पौयम💐

कहतें है राह सच्ची हो तो ।
मील जाता है खुदा भी।
कहते है नियत अच्छी हो तो।
लग जाती है दुआ भी।
"
कहते हैं दुश्मन बड़ा हो तो।
दुश्मनी जरा प्यार से करो।
कहतें है बनीया बड़ा हो तो।
दोस्ती भी सोच के करो।।
"
कहते हैं शिक्षा अच्छी हो तो।
परिवार बदल जाता हैं।
कहते है नियत अच्छी रहे तो।
हर रोग भी दुर हो जाता हैं।
"
कहते हैं तुफान आता हैं तो।
बहुत बरबादी हो जाती हैं।
कहते है जड़ें पहले से मजबूत हो तो।
हर तुफान टकरा कर ही लौट जाता हैं।
"
कहते है समाज अच्छा हो तो।
हर तरफ विकाश नजर आता हैं।
कहते है नेता बुरा हो तो।
देश बरबाद हो जाता हैं।।।।
"
कहतें है कोई जालिम हैं तो।
तुम शराफत मत दिखाऔ।
कहते हैं पाप सहने वाला भी।
उसका भागीदार बन जाता हैं।
"
कहते हैं हम भी महफिल में।
रोशनी लाना चाहते हैं।
कहते हैं तुम सब भी साथ दो।
हम तो हर तरफ महफिल सजाना चाहते हैं।
"
कहतें है सब अपने इमान से।
आप सब भी कहो इमान से।
कहते हैं देश बदल जाऐगा।
बस जय हिंद बोलो सब शान से।
""

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Writing by ranjit choubeay.

09/09/2019 पौयम 

कहतें हैं राह सच्ची हो तो। पौयम 09/09/2019💐

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आंतकी मुल्क पाक।👆पौयम 09/09/2019

आतंकी मुल्क पाक। पौयम #EDMranjit

आंतकी मुल्क पाक।👆पौयम 09/09/2019


मेरी दुनियां में बस।
में ही रहता हु।
हो गम या खुशी।
हर फैसला यहां।
बस में ही करता हु।

बस आजादी दी उन्हें।
खुलकर जीने की।
पर उनके सोच की नींव।
बस में ही रखता हु।

चलता फिरता आतंक हो।
या हो घुसपैठ की बात।
हर आतंक की  शयाहि।
बस में ही लिखता हु।

सफाई भी देता हु ।
में दुनिया के देशों को।
और आतंक को पनाह भी।
बस में ही देता हु।

दुनिया की नजरो मे।
इमरान नाम हैं मेरा।
लेकिन खून में आतंक का।
उबाल रखता हु।

हारता हर बार हु।
जंग के मेदान पर।
पर झुठ का परचम लिये।
में जशन करता हु।

में नाम का इंसान हु।
जानती हे दुनिया भी।
पर मुल्क में अमन की।
बस बात रखता हु।

भीख में मीला मुझे।
जमीन का कुछ भू भाग।
बड़े ही गर्व से मे।
उसे पाकिस्तान कहता हु।

(जय हिंद जय भारत)
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Writing by ranjit choubeay.
09/09/2019
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आंतकी मुल्क पाक।👆पौयम 09/09/2019


Sunday, September 8, 2019

यही मिज़ाज था💐पौयम -08/09/2019

#EDMranjit

Motivational poetry

यही मिज़ाज था💐पौयम -08/09/2019

कर जाऊ कुछ अलग।
यहीं मिज़ाज था।
रहु दुर सबसे यही मिज़ाज था।
साथ रह के जब वो ना लगे साथी।
तो दुर रह के निभाऊ।
यहीं मिज़ाज था।

बंदिशो की जंजीर से जुडा़ था वो।               
रह कर भी नहीं रह रहा था वो।
उसें इल्म हो वो पास था मेरे।
ये एहसास करा जाऊं ।
यही मिज़ाज था।

तुम तुम बन के जिओं ।
किसी के आधिन ना रहो।
मन  कभी घृणा से लज्जित न हो।
ऐसी एक राह सृजन कर जाऊ़।
यही मिजाज़ था।

मन डर की किसी दहलीज़ पर था।
आँखें कुछ आश भरी सी रहती थी।
इन्हीं आँखों की ज्योति बन जाऊं।
यही मिज़ाज था।

कभी दर्पण से मिला तो अच्छा लगा।
कभी मन से मिला तो सच्चा लगा।
फिर क्या करता यही साबित कर जाऊ।
यही मिजाज़ था। 🙏🏻

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यही मिज़ाज था💐पौयम -08/09/2019


प्रेमी पंछी का जोड़ा 💐08/09/2019

#EDMranjit मोटीवेशनल स्टोरी।

 प्रेमी पंछी का जोड़ा 💐08/09/2019


एक पंछी का जोड़ा।
जो आकाश मै उड़ते हुये इतना दुर चला गया।
दोनोँ की जिद थी या उनका प्रेम था दोनो को।
 ये एहसास तक ना हुआ की वो धरती से। काफी दुर आ गये है। और दोनो की एक दुसरे से लगी शर्तें उन्हें जुदा कर देगी।
दोनो जोड़ा आकश के इतने समीप जा पहुचा था। जहा से दोनो का वापस जिंदा लोटना मुशकिल और नामुमकिन था।
जब नर पंछी को ये ज्ञात हुआ अब अगर मैने हार नही मानी तो शायद मेरे साथ मेरा प्यार भी मारा जायेगा। नर पंछी ने अपनी हार स्विकार कर कहा सुनो हम हार गये यार।
चलो बाबा अब हमने ये भी मान लिया की।
आप हमसे ज्यादा प्यार करती हो।
मादा पंछी अंदर ही अंदर बहुत खुश हुई।
लेकिन वो बहुत थक चुकी थी ।
फिर भी उसने कहा मुझे पता था मे जीत जाउंगी। लैकिन ये नही मालूम था तुम इतनी।
जल्दी हार मान लोगे।मादा पंछी अपनी बेबशी पर अंदर ही अंदर रौ रहा था क्योंकि वो समझ गया था अब हम दोनो कभी एक नही हो पायेंगे। उसने अपनी दोस्त मादा पंछी से कहा हा ठिक हे ठिक है अब जल्दी से निचे।
चलो शाम हो चुकी है और तुम थक चुकी हो।
मादा पंछी बोली हा अब बहुत थक चुकी हु।
चलो चलते है।
दोनो ही दोस्त नीचे की तरफ आने लगे।
लेकिन अब अंधेरा होने लगा था।
और मादा पंछी बोली अब तुम जाओ ।
मुझसे और नही उड़ा जाता नर पंछी बोला।
अरे एसे केसे तुम्हें अकेला छोड़कर चला जाऊ। और आज तो तुम जीती हो।
जब हमे ये पता चल ही गया है।
तुम ही हमे सबसे ज्यादा पयार करती हो।
तो मे भला अपने प्यार को कैसे अकेला।
छोड़ चला जाऊ।
मादा पंछी समझ चुकी थी ।
उसका दोस्त कया कहना चाहता है।
वो जान गई थीं प्यार कम या जयादा नही होता। बल्कि प्यार तो बस प्यार होता है।उसकी आखों मै आंशु थै।
वो चुप थी ।
तभी नर पंछी ने कहा आओ अब।
मैरी पिठ पर बैठ जाओ हम सही से।
नीचे पहुच जाऐंगे।
लेकिन ये तो बस वो अपनी दोस्त को।
खुशी देने के लिये बोल रहा था।
नर पंछी भी थक चुका था उसकी पिठ पर उसकी दोस्त थी और पुरा आसमान काला हो।
चुका था ।वो अपने भगवान से मन ही मन प्रार्थना कर रहा था। वो कह रहा था ।
है भगवान मुझे बस इतना साहस और समय ।
दे दौ की मै अपनी दोस्त को जीवित नीचे।
पहुचा सकु।
नर पंछी चुप उड़ रहा था और मादा थक कर।
उसकी पिठ पर सो गई थी।
नर पंछी का मन चाहकर भी अपने दोस्त को।
जगाना नही चाहता था।
धिरे धिरे उड़ते हुयें नर पंछि जमीन पर।
जैसे ही आया ।
उसे जोर सै चक्कर आया और।
बीना कुछ कहे उसके प्राण निकल गये।
मादा पंछी जब गहरी नींद से जागी तो।
उसे ये समझते देर नही लगी की उसका।
दोस्त अब उसके पास नही है।
और वही रोते चीखते उसने भी अपने प्राण।
त्याग दिये।

।दोस्तों आज भी प्यार किसी शर्तें का।
।मोहताज नही।
।अगर ये कहानी समझ आई है तो
।समझ लो जहा शर्तें है वहा प्यार नहीं।
।कितनी बार ल़ोग यही गलतिया करते है।
।और जब तक प्यार का मतलब समझ पाते
।बहुत देर हो जाती है।
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Writing by ranjit choubeay.
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08/9/2019

प्रेमी पंछी का जोड़ा 💐08/09/2019

Saturday, September 7, 2019

इसरो चेयरमैन सिवन चंद्रयान-2💐मोटीवेशनल मिशन रहा।08/09/2019

#EDMranjit

इसरो चेयरमैन सिवन चंद्रयान-2💐मोटीवेशनल मिशन रहा।08/09/2019

 चंद्रयान-2 ने भले ही चांद की सतह पर कदम रखने में कामयाबी हासिल ना की हो लेकिन पूरे देश ने  इस मिशन से जुड़े ISRO वैज्ञानिकों को पूरी दुनिया से बधाई मिल रही है। इस मिशन और ISRO के चीफ के सिवन को पीएम मोदी ने जब गले लगाया तो पूरा देश उनके साथ भावुक हो गया। आपको बता दें सिवन भी चंद्रयान-2 के साथ एक नई प्रेरणा बन गए हैं।
क्‍या आप जानते हैं कि उन्‍हें कितनी सैलरी मिलती है? उनका जन्म कहां हुआ और वो कैसे इतने बड़े वैज्ञानिक बने। आइए आज आपको बताते हैं।

इस दिन बने थे ISRO के चीफ
सिवन को 10 जनवरी 2018 में बतौर इसरो चीफ नियुक्त किया गया था। के. सिवन का पूरा नाम डॉ. कैलासावडिवू सिवन पिल्‍लई है। वह 62 साल के हैं। उनका जन्‍म 14 अप्रैल 1957 को तमिलनाडु में हुआ था।
इतना वेतन पाते हैं सिवन

इसरो चीफ के तौर पर के सिवन को हर माह करीब 2.5 लाख रुपए की सैलरी मिलती है। इसरो चीफ को एक आईएएस या आईपीएस वाला ओहदा हासिल होता है।

इंडियन स्‍पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन यानी इसरो पिछले कई दशकों से देश का गौरव बना हुआ है।
दुनिया भर में इसकी एक अलग ही प्रतिष्‍ठा है।चेयरमैन से अलग इसरो के बाकी वैज्ञानिकों को करीब 55,000 से लेकर 90,000 तक का वेतन मिलता है।

इसके अलावा उनके काम के घंटे भले ही सुबह नौ बजे से लेकर शाम पांच बजे तो हों लेकिन इतने समय में उन्‍हें कई चुनौतीपूर्ण मिशन का खाका तैयार करना होता है।

इसरो चेयरमैन के सिवन पर संगठन को लेकर कई अहम जिम्‍मेदारियां हैं। उन्‍हें यह सुनिश्चित करना होता है कि हर विभाग में काम-काज सही तरह से चलता रहे। स्‍पेस कमीशन की नीतियों को लागू करने के अलावा वित्‍तीय और प्राशसनिक जिम्‍मेदारियों को भी पूरा करना सिवन का ही काम है।
सिवन बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनका बचपन गरीबी में बीता। उनकी पिता एक किसान थे। उनकी स्कूल की पढ़ाई गांव में ही हुई।

1980 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की डिग्री ली। इसके बाद उन्होंने 1982 में IISC बेंगलूरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में परास्नातक किया। उन्होंने 2006 में IIT बॉम्बे से पीएचडी की डिग्री ली।
ताकि खेती में हाथ बटा सकें सिवन
सिवन को उनके पिताजी ने पास ही के कॉलेज में दाखिला दिलाया। ताकि पढ़ाई के बाद सिवन खेती में भी पिताजी की मदद कर सकें। बीएससी के दौरान गणित विषय में सिवन ने 100 फीसदी नंबर अर्जित किए।

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इसरो चेयरमैन सिवन चंद्रयान-2💐मोटीवेशनल मिशन रहा।08/09/2019

बंसत पंचमी कविता 👏30/01/2020

#EDMranjit बंसत पंचमी कविता👏30/01/2020 बंसत पंचमी कविता  इस माँ के बीना तो संसार अधुरा लगता था। नहीं आती तु तो सब सूना सूना लगता...