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ईमानदारी उज्जवल भविष्य बुनती है। Honesty weaves a bright future.🇨🇮🙏🏻motivated story

#EDMranjit 

ईमानदारी उज्जवल भविष्य बुनती है। Honesty weaves a bright future.🇨🇮🙏🏻motivated story


  मुझे याद हैं  उस रात  कोई गयारह बज रहे थे और में झबरू रोजाना की तरह अपना काम खत्म करके अपने क्वाटर की तरफ लौट रहा था। मेरा नाम झबरू हैं और मैं असाम के तिनशुकिआ का रहने वाला हु। पेशे से में धोबी हु। 

मेंने अपनी रोजी रोटी के लिये कपड़े आयरन की दूकान डाल रखी है। उस रात दिवाली के त्योहार की वजह से दुकान मैं कपडो़ का अमबार लगा हुआ था। और मेरे पास कोई और कामगार भी नहीं था जो मेरी हेल्प करता इसी कारण में अपनी दूकान पर लैट नाईट काम कर रहा था उस रात काम खत्म करके मुझे कुछ ज्यादा ही लैट हुआ था। 

दिवाली में दो दिन शेष थे लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे आज ही अमावस्या की रात है। आसमान में काले बादल और कुछ मौसम भी तेज हवाओ का था मतलब आँधी की तरह् हवा तेज चल रही थी। कुछ ही कदम मैं और आगे की तरफ चला था। बस बारिस भी शुरू हो गई। मेरे पास पानी से बचने का कोई साधन भी नहीं था। 

इसलिए रात के उस पहर मैं  मेंने  सामने रोड के किनारे एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे शरण ली। मेरे पास बस एक बैटरी थी जिसकी रोशनी कुछ दुर तक जाती थी। वहीं बैटरी उस वक्त मेरा सहारा थी नेशनल हाईवे होने के कारण गाडिया़ बडी़ तेजी से भाग रही थी सभी को घर जाने की जल्दी थी। में ऐसा ही कुछ सोच रहा था और इश्वर से प्रार्थना कर रहा था ये बारिश जल्दी ही बंद कर दो। 

तभी बहुत तेज आवाज आई में डर गया कुछ समझ नहीं आया ।मेने इधर उधर देखा तो भी कुछ समझ नहीं आया ।
अचानक कुछ आवाज आई हैल्प हैल्प मैं  उस दिशा की और भागा तो देखा एक कार पेड़ से टकरा कर बुरी तरह डैमेज हो चुकी थी शायद किसी दुसरी गाडी़ वाले ने ठोकर मारी होगी। 

मेंने कार के अंदर झाँका तो एक सेठ टाईप का आदमी कार की सीट पर झुल रहा था उसका सर बुरी तरह से फट चुका था और तेजी से खुन निकल रहा था। लेकिन वो अभी थोड़ा थोड़ा होश मैं था। कार के पिछे की सीट पर एक दस साल का बच्चा और एक महिला थी जो बेहोश हो चुके थे। घायल आदमी कह रहा था प्लिज हैल्प कीजिये। 

ईमानदारी उज्जवल भविष्य बुनती है। Honesty weaves a bright future.🇨🇮🙏🏻motivated story 



मेने रोड पर कोशिश की दुसरी गाडियों को रोकने की पर असफल रहा। कोई भी गाडी़ नहीं रुक रही थी। मुझे लगा मुझे पुलीस को फोन करना चाहिए। लेकिन उस से पहले सबको गाडी़ से बाहर निकालना उचित समझा। मेंने जल्दी से कार का गेट किसी तरह खोला और उस आदमी को बाहर निकाला उसके सर में एक कपड़ा बाँधा और एम्बुलेंस को फोन किया फिर पुलिस को बुलाया । फोन करने तक तो कोई भी इंसान रोड पर नहीं रूका था। पर जैसे ही एम्बुलेंस और पुलीस की गाड़ी आकर रूकी लोग रुकने लगे। 

पुलीस मुझसे पुछताछ करने लगी क्योंकि तब तक वो आदमी पुरी तरह बेहोश हो चुका था। मेंने जो भी देखा और किया था सब पुलीस को पुरी ईमानदारी से बता दिया। कुछ वक्त पुछताछ के बाद पुलिस अधिकारी ने कहाँ चलो हाँस्पिटल हमारे साथ क्योंकि जब तक इनमे से किसी को होश नहीं आता तब तक तुम्हें साथ रहना होगा। मैने हैल्प की थी इस बात से दिल में एक शुकुन था। पर पुलिस का डर भी मन मैं हो गया था। 

हाँस्पिटल आने के आधे घंटे बाद महिला और बच्चे को होश आ गया था। लेकिन उस व्यक्ति को होश दो घंटे बाद आया जिसकी आवाज सुनकर में हैल्प के लिये गया था। डाँक्टर ने उससे कहाँ  अगर कुछ टाइम और आपके सर से ब्लड बहता तो शायद आप को बचाना मुमकिन ही नहीं होता आपका काफी खुन बह चुका था आप कौमा मैं भी जा सकते थे। जिस इंसान ने आपकी हैल्प की वाकई वो बहुत नेक और समझदार व्यक्ति है। 

इसके बाद उस व्यक्ति ने पुलिस को सारी घटना बताई और बताया की सिर्फ यही दोस्त कही से उस टाइम हमारे पास आया, हमारी हैल्प की। उस व्यक्ति ने मेरा नाम पुछा और पुलिस से कहाँ सर आप इस नैक वंदे को तंग मत कीजिए।    दर असल वो व्यक्ति एक जिला कलेक्टर था जो अपनी फैमिली के साथ खुद अपनी कार ड्राइव करके अपने गाँव जा रहा था। उन्होने पुलिस को अपने बारे में बताया ।

अब लगभग सुबह के चार बजने वाले थे। और मेंने पुलिस अधिकारी और कलेक्टर सर से घर जाने की अनुमति माँगी तो पुलिस वाले अधिकारी कहने लगे रुको भाई हम खुद आपको आपके घर तक छोड़ देंगे डरो नहीं आपने बहुत बड़ा काम किया है। आपको इसका इनाम भी दिया जाऐगा। में खुश था क्योंकि एक परिवार सुरक्षित बच गया था। मुझे कलेक्टर सर ने कहाँ आप नौकरी करोगे सरकारी मेरी तो आवाज ही बंद हो गई थी। मेंने जैसे तैसे कहाँ जी सर नौकरी मिलेगी तो जरूर करूंगा। 

और फिर उन्होने पुलिस वालो से कहाँ  इन्हें घर छोड़ देना आप सब । और मुझे कहाँ  आप दिवाली की छुट्टी बाद हमसे मिलने आईये। हम आपके लिये जरूर कुछ करना चाहेंगे आप ने इनसानियत और इमानदारी से हैल्प की तो आपको इसका फल भगवान जरूर देगा। 

कुछ दिनों बाद खुद कलेक्टर सर ने मुझे फोन करके अपने कलेक्टर आँफिस बुलाया। आज में कलेक्टर आँफिस मैं एक कर्मचारी के तौर पर काम करता हु। मुझे उन्होनै सरकारी नौकरी दिलवाई और बता दिया नैकी ईमानदारी इनसानियत आज भी जिंदा है।  एक आयरन की दुकान वाला कलेक्टर आँफिस मैं आ गया सिर्फ ईमानदारी के कारण। 

मित्रों इंसानियत  कोई अवसर नहीं धर्म हैं। 
इसे आप भी अपनाईये। 
 मद्त करना भी एक धर्म हैं। श्रेष्ठ कर्म है। 

जब भी जितना हो सके किसी की भी कभी भी मद्त किजिए। यही सेवाभाव आपको एक दिन कामयाब इंसान बना देगा। 
जय हिंद वंदेमातरम।। 

ईमानदारी उज्जवल भविष्य बुनती है। Honesty weaves a bright future.🇨🇮🙏🏻motivated story 


Edmranjit.com
Writing ranjit choubeay
22/08/2019






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``मेरी हर कहानी के पन्नों में शामिल।
मेरी जिंदगी के वो पहलू हैं मिलतें।
जहाँ हर कदम लिखी हमनें नफरत।
वो साहिल किनारें से सजदा करें क्यों।
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हर एक आँसू बहकर नादानी लिखेगा।
नहीं होगा कोई तेरा साहिल बनकर।
ये इश्क ही तेरी कहानी कहेगा।
``हमनें खाई हर बार चोट।

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