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इंसान के स्वामित्व को उसका चरित्र ही दर्शाता हैं। The character of a person's ownership is shown by him.💐🇨🇮🙏🏻👏

#EDMranjit

इंसान के स्वामित्व को उसका चरित्र ही दर्शाता हैं। The character of a person's ownership is shown by him.💐🇨🇮🙏🏻👏


मनुष्य की प्रवृत्ति जन्म से लेकर मृत्यु तक अलग अलग धारणाओं के इर्द गिर्द घुमती है। वो जिस कुल में जन्म लेता है उस के प्रति धिरे धिरे सहज भाव हो जाता है। हम कह सकते हैं वो पूण्तह अपने धर्म कर्म के प्रति रूचिबद्ध हो जाता हैं।। 

जन्म के कुछ वक्त बाद वो पाठशाला जाता है वहाँ  वो भिन्न स्वभाव के सहपाठियो से मिलता हैं अलग अलग सोच रहन सहन खान पान धर्म कर्म और सोच विचार का सामना उसे करना पड़ता है। बड़े आश्चर्य की बात होती हैं उस वक्त उस माहौल का कुछ ज्यादा असर उस पर नहीं पड़ता। 

अगर कोई असर होता हैं तो सिर्फ शिक्षा का ही असर होता है इसके पिछे एक लाँजिक वर्क करता है। और वो कोई लाँजिक नहीं उसके घर का माहौल होता है। क्योंकि मनुष्य का मस्तिष्क सबसे ज्यादा कुछ ग्रहण करता है तो सिर्फ़ घर के माहौल से ही करता है। हमारे संस्कारो में बेसिक शिक्षा हमे घर से ही मिल जाती है। अब इसका परिणाम पुरी लाइफ मैं दिखाई भी देता है असर भी करता है और सामने भी आता है।

कहते हैं हर निर्माण की एक आधारशिला होती हैं। मेरी समझ में यही आता है एक मनुष्य के सम्पूर्ण जीवन का आधार उसकी जड़ता से ही जुड़ा होता है। फिर भी आज इंसान अपनी जड़ो से दुर होता दिखाई देता है। क्योंकि आज मनुष्य वक्त के साथ कम। और समाज के स्वभाव से खुद को जोड़ता अग्रसर होता जा रहा है। इसका एक और कारण है दिखावा जलस लालच भेदभाव और दोगलापन। 

इंसान के स्वामित्व को उसका चरित्र ही दर्शाता हैं। The character of a person's ownership is shown by him.💐🇨🇮🙏🏻👏


यह किसी भी पाठशाला में ये नहीं पढ़ाया जाता की आप अपने परिवार में भेदभावपूर्ण व्यवहार करो। जो एक परिवार को जोड़ता है वो एक समान स्नेह एक समान शिक्षा एक समान व्यवस्था होती है। पर आज ऐसा नहीं होता आज कहीं ना कहीं इसकी कमी समाज के हर वर्ग में पाई जाती है परिणाम जड़ता ढिली और लचर हालत में बिखर जाती है एकता खत्म हो जाती हैं समुल विनाश हो जाता है।। 

चरित्र तभी उतम होता है जब घर से निकला व्यक्ति घर का स्नेह साथ रखता है चरित्र का निर्माण भी स्नेह से ही होता है अगर आप के पास अपने लिये सबसे किमती कुछ होता है तो सिर्फ़ परिवार का स्नेह ही होता है अगर आप उससे वंचित हो तो आप सबसे बहुत दुर हो। इसमें आपका कोई दोष नहीं ।
इस दुनियां का हर कोना उस मनुष्य के लिये जीवंत होता है जिसमें कुछ अलग करने की क्षमता होती है। घर समाज और रूतबा आप खुद से भी हासिल कर सकते हो सिर्फ आप में सबक होना चाहिए।। 

 अगर हिमालय सोचता मेरा कोई घर नहीं तो परिणाम क्या होता। संसार को अपना मानने वाले ईश्वर का भी कोई घर नहीं।।  बस सोच का अंतर है वरना घर तो सिर्फ़ रैन बसेरा है।। 

इंसान के स्वामित्व को उसका चरित्र ही दर्शाता हैं। The character of a person's ownership is shown by him.💐🇨🇮🙏🏻👏


Writing ranjit choubeay. 
Www.edmranjit.com
24/08/2019


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कुछ पल की जिंदगी हैं कुछ पल में मिट जाना हैं। /There are few moments of life to be erased in a few moments/

#EDMranjit  कुछ पल की जिंदगी हैं कुछ पल में मिट जाना हैं। /There are few moments of life to be erased in a few moments/कुछ पल की जिंदगी हैं  कुछ पल में मिट जाना है //फिर कैसी ये कड़वाहट है कैसा ये टकराना हैं।। मिल कर बीता सको एक दूजे का साथ मित्रों  तो मिल जाना।। वरना  ये पल तो बस युही निकल जाना हैं। फिर कैसी ये कड़वाह कैसा ये टकराना हैं।। 
बड़े शानौ शौकत से मिली हैं  आपको ये प्यारी सी जिंदगी।। खुलकर लुटा डालो अपने मन के हर अरमानो को।। क्या पता कब ये पल हमें मजबूर कर दे सब कुछ यही छोड़ जाने को। लोग कहतें आऐं हैं  तरसते हैं  सब जीव मानव जन्म पाने को।। 
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जय श्री राधे कृष्णा।। कुछ पंक्तियां  मेरे श्री को सम्रप्रित।। कुछ पल की जिंदगी हैं कुछ पल में मिट जाना हैं। /There are few moments of life to be erased in a few moments/Www.edmranjit.com 26/07/2019.   Ranjitchoubeay. 

Poetry //कितनें सत्य जीवन के💐

###ranjit//
Poetry //कितनें सत्य जीवन के💐 इतना गैरत भी नहीं के गिर जाऊ।
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सब कुछ समाहित कर जानें वाला भी।
अपनी खामोशियों से शान्ति फैला रहा है ।
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धर्म सत्य ज्ञानी और अज्ञानी के बीच सदैव।
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अगर खुद ही विकार संबल हो जाएं।
मन खुद ही प्रबल हो जाएं।
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Www.edmranjit.com
Poetry //कितनें सत्य जीवन के💐 #रंजीत चौबे। 09/07/2019

अब जिंदगी मैं वापस जाना नहीं है //पोयम//💐

###ranjit//
अब जिंदगी मैं वापस जाना नहीं है //पोयम//💐 अब जिंदगी में वापस।
जाना नहीं हैं।
किसी से भी दिल ये।
लगाना नहीं हैं।
कोई इसकों तोड़ें खिलौना।
समझकर।
ऐसें लोगों की बातों में ।
आना नहीं हैं।

```नहीं कोई मेरी तमन्ना रही अब।
नहीं कोई सपनें सजाएंगे हम।
जो अपना समझकर पराया हैं करता।
ऐसे लोगों से मीलने ना जाऐंगें हम।

``मेरी हर कहानी के पन्नों में शामिल।
मेरी जिंदगी के वो पहलू हैं मिलतें।
जहाँ हर कदम लिखी हमनें नफरत।
वो साहिल किनारें से सजदा करें क्यों।
``हर एक पन्ना मेरी कहानी कहेगा।

हर एक आँसू बहकर नादानी लिखेगा।
नहीं होगा कोई तेरा साहिल बनकर।
ये इश्क ही तेरी कहानी कहेगा।
``हमनें खाई हर बार चोट।

फिर भी कुछ सीख ना पाएं।
एक नई शुरुआत के लिये।
हम क्यो लौट आएं।
```क्यों आशिक ही बरबाद होतें हैं।

उनकीं खता क्या हैं दुनियाँ वालों।
तुम बताओं नफरत के ठेकेदारों।
क्या दिल जलाने की ठेकेदारी मिलती हैं।
```दुनियाँ में भलें ही घर ।

चारदिवारी होतें हैं।
पर दिल की तो एक ही दिवार हैं।
क्या करेंगेः अब सच्चे दिवाने।
दिल की दिवारों पर चल रही तलवार हैं।
``टुटा हैं दिल अब जोड़ना नहीं चाहेंगे।

राह बिछ़डी है…