Poetry //कितनें सत्य जीवन के💐

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Poetry //कितनें सत्य जीवन के💐

इतना गैरत भी नहीं के गिर जाऊ।
बीना पंख के भी मन सबसें तेज है ।
दुर निगाहों से देखता इंसान चाँद को।
आसमां मैं भी बहुत सारें छेंद हैं ।
कभी नदियों का बहना गौर करो।
समुन्दर के विशाल आकार को निहारों।
सब कुछ समाहित कर जानें वाला भी।
अपनी खामोशियों से शान्ति फैला रहा है ।
अदम्य साहस भर कर भी हाथी डरता हैं ।
एक छोटी सी चींटी से सिंहरता हैं।
सब कुछ पाना ही जिंदगी का राज नहीं।
जन्म और मृत्यु के बीच में संघर्ष सत्य है ।
कभी भटक जाता हैं ज्ञानी पुरूष भी।
धर्म सत्य ज्ञानी और अज्ञानी के बीच सदैव।
जो फैला रहा फैला रहेगा वही जीवन मतभेद है।
अगर खुद ही विकार संबल हो जाएं।
मन खुद ही प्रबल हो जाएं।
तो अंधकार सा लगने वाला जीवन भी जल ऊठे।
फिर कैसा रंगभेद सारा जहाँ अपना स्वदेश हैं ।
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Poetry //कितनें सत्य जीवन के💐

#रंजीत चौबे। 09/07/2019

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