Tuesday, July 30, 2019

अद्भुत है कुदरत भी इसका करिश्मा भी🇨🇮💐👏👏

#Edmranjit

अद्भुत है कुदरत भी इसका करिश्मा भी🇨🇮💐👏👏


 मित्रों कुदरत कभी भी इंसान को हारनें नहीं देती। 
अगर इंसान भी कुदरत के साथ इमानदार रहे तो।। 
एक मोटिवेशनल सत्य है जो सभी की आँखों के सामनें होकर भी अन्भिज्ञ हैं।। 

कुछ भी आप सभी से छुपा नहीं है। 
सब कुछ आप सभी के सामनें हैं।। 
एक बार एक दुध मुँहा  बच्चा किन्हीं कारणों से अपनें माँ  पिता से बिछड़ कर जंगल में  छुट जाता हैं। 
और फिर धरती माँ के आँचल तलें रोते देख कुदरत एक शैरनी के रूप में उसे अपना दुध पिला उसे धरती का सबसे बलवान पुत्र बना देती हैं।।  

वहीं आप सभी ने  ऐसा भी देखा हैं बहुत रहीस औरत जब अपने बच्चें को जन्म देती हैं तो उसके साथ दुनियां भर की  देखभाल करने वाली नर्स डाँक्टर सोसाइटी के पड़ोसी माँ बाप रिस्तेदारों का मेला लगा होता हैं। बड़ा नाम बड़ा हाँस्पिटल सब कुछ होते हुये भी बहुत बार उन्हें निराशा हाथ लगती हैं  क्योंकि कुदरत वहाँ होकर भी नहीं होती।। 

और आपने ऐसा भी देखा होगा एक गरीब औरत जो दिन रात अपनें कोख मैं अपना मासुम बच्चा लियें दुनियाँ भर की परेशानियों को हँस कर सहते हुये। जीवन जी रही होती हैं एक दिन अचानक उसे कार्यस्थल पर ही अथाह दर्द होता हैं।। 
और फिर उसके हाथों मैं कुदरत का सबसे अनमोल रत्न रो उठता हैं।।  शायद यहीं धरती माँ का चमत्कार हैं जो सिर्फ़ उन्हें ही नसीब होता है जो दिन रात धरती माँ से जुड़े होते हैं।। 

वर्षो से   एक सोने की दुकान मैं काम करने वाला कारीगर सिर्फ सोने को बनाना उसके आकर को बदलना अलग अलग डिजायन बनाकर अपने दुकानदार सेठ की तिजोरी का खजाना बढ़ता रह जाता हैं। इसके बदले उसे सिर्फ़ कुछ तनख्वाह और बोनस ही मीलता रहता है उसका गुजारा मजै से होता रहता है।  

अद्भुत है कुदरत भी इसका करिश्मा भी🇨🇮💐👏👏


इसके विपरीत देखा जाऐं तो एक कोयले की खान में काम करने वाले व्यक्ति को काम करते करते कॉफी वक्त बीत जाता है। इस दौरान उसे बहुत सारे धातुओं की जानकारी हो जाती हैं।।  नेचर एक दिन उसे कोयले मैं ही उसके जीवन की मेहनत का फल सोने के रूप में मील ही जाता हैं  जब हम कुदरत से प्यार करते हैं  तो इसका उपहार हमें जीवन में कुदरत जरूर देती है फिर चाहें वो जीस रूप में मिले।। 

सिर्फ पढाई लिखाई कर के ही सब कुछ नहीं पाया जा सकता इस दुनियां से जुड़ी हर प्रराकृतिक भावनाओं को समझना भी जरूरी है  वरना अपने मद् में  धंनानंद जैसा शासक भी एक दिन फकीर की मौत मर गया था।। 
अथाह धन कमा लेना ही जिंदगी का मक़सद नहीं होना चाहिए।। हम इस धरा को कितना समझ पाऐं  हमें यहाँ  क्यों भेजा गया है इस धरा के प्रति हमारा क्या ऋण हैं हमें ये भी समझना होगा।। 

कुछ दार्शनिक लोग अपने जीवन की सारी पढ़ाई लिखाई  किसी एक ही  बिषय को समझने में लगा  जातें हैं  इसका परिणाम ये निकलता हैं  की आनेवाली पिढि़या बडे़ आराम से उस तथ्य को समझ सके। 

हम सभी को भी अपने आस पास अपने देश अपने गाँव जहाँ भी रहें  वहीं से खुद प्रराकृतिक के नियमों का पालन करना चाहिए। हर काम पुरे उत्साह से करना चाहिए लेकिन उसकों करने से हमारी प्रराकृतिक को नुकसान ना हो ये भी ध्यान रखना होगा।। 
    

एक बहुत ही  भले सज्जन महात्म ने कहीं  एक लाइन लिखी थी मैं उनका नाम तो नहीं जानता पर उन्होनै लिखा था।। 

आप अपनी धरा को जीतना सुंदर सजग बनाओगें  जीतना प्रराकृतिक से प्यार करोगें  ये धरा आपको उस से कई गुना ज्यादा लौटायेगी।।।।।।।।  जय हिंद वंदेमातरम।। 

अद्भुत है कुदरत भी इसका करिश्मा भी🇨🇮💐👏👏

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31/07/2019
Writing by (Rk. C) 

Monday, July 29, 2019

दुनियाँ के तीन रहस्यमय इंसान जिनका पुरा रहस्य कोई नहीं जान पाया// The three mysterious people of the world who did not know the secret''

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दुनियाँ के तीन रहस्यमय इंसान जिनका पुरा रहस्य कोई नहीं जान पाया// The three mysterious people of the world who did not know the secret''


मित्रों हमारी दुनियां रहस्यमी घटनाओं से भरी हुई हैं।। 
तो आईये आज जानते हैं कुछ रहस्यमययी इंसानो के विषय मैं ।।
जो कब आऐं कहाँ से आऐं और कब गायब हो गये कहाँ गये कोई नहीं पता कर पाया।। 

1)मैन फ्रॉम तौरेद

साल 1954 में एक व्यक्ति टोक्यो के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा। जब उसे उसके देश के बारे में पूछा गया, तो उसने 
अपने देश का नाम अण्डोरा बताया, जो कि उस वक्त दुनिया के नक्शे में कहीं भी नहीं था। जब उसका पासपोर्ट चैक 
किया गया, तो उससे पता चला कि वो यहां पहले भी कई बार आ चुका है। लेकिन शक होने पर उसे पास ही के एक होटल के रूम में रात को रोक दिया गया, ताकि सुबह वापस पूछताछ की जा सके और उसके कमरे के आगे दो गार्ड खड़े कर दिए गए ताकि वो भाग न जाए। लेकिन हैरान करने वाली बात यह थी कि अगली सुबह जब पुलिस वहां पहुंची तो वो पहले से ही वहां से गायब हो गया था और चौंका देने वाली बात यह है कि कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था और कमरे में कोई भी खिड़की नहीं थी, जहां से वो भाग गया हो। लोगों का मानना था कि वो समय यात्री था, जो गलती से हमारे समय में आ गया होगा। इस घटना को टाइम ट्रेवल से जोड़ा गया है।।।।


2) डीबी कूपर।। 

            
साल 1971 में एक व्यक्ति, जिसे डीबी कूपर के नाम से जाना जाता है। उसने एक हवाई जहाज को हाइजैक कर लिया था। उसका कहना था कि उसके पास एक बंब है, जिससे वो सभी को मार देगा। उसकी मांग थी कि उसे पैराशूट के साथ 2 करोड़ रुपये चाहिए। जब उसकी मांग पूरी कर दी गई तो वो पैराशूट के साथ हवाई जहाज से कूद गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उसका इतने सारे पैसों के साथ नीचे उतरना लगभग नामुमकिन था। फिर भी उस व्यक्ति का आज तक पता नहीं चल पाया कि आखिर वो कौन था और कहां से आया था? क्या वो मर गया था या फिर आज भी जिंदा है? यह अभी तक किसी को भी पता नहीं चल पाया।। और गुगल पर भी इस व्यक्ति की फोटो उपलब्ध नहीं है शायद।। 


दुनियाँ के तीन रहस्यमय इंसान जिनका पुरा रहस्य कोई नहीं जान पाया// The three mysterious people of the world who did not know the secret''


3)आयरन मास्क मैन 




साल 1971 में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया, जो 34 सालों तक जेल में कैद रहा। लेकिन फिर भी किसी ने भी उसका चेहरा कभी भी नहीं देखा था, क्योंकि वो अपने चेहरे पर हमेशा लोहे का मास्क पहनकर रखता था। वो किसी से भी बात नहीं करता था। सिर्फ वही मांगता था, जिसकी उसको जरूरत हो। आज तक भी किसी को यह पता नहीं चल पाया कि आखिर उस मास्क के पीछे किसका चेहरा था। और शायद अब पता चले भी ना।। 


मित्रों  इन तीनों  इंसानो का क्या रहस्य क्या  था मुझें भी नहीं पता मेंने भी गूगल पर ही ये घटनायें पढी़ हैं ।।
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29/07/2019 ........










Friday, July 26, 2019

कुछ पल की जिंदगी हैं कुछ पल में मिट जाना हैं। /There are few moments of life to be erased in a few moments/

#EDMranjit 

कुछ पल की जिंदगी हैं कुछ पल में मिट जाना हैं। /There are few moments of life to be erased in a few moments/

कुछ पल की जिंदगी हैं  कुछ पल में मिट जाना है //

फिर कैसी ये कड़वाहट है कैसा ये टकराना हैं।। 

मिल कर बीता सको एक दूजे का साथ मित्रों  तो मिल जाना।। 

वरना  ये पल तो बस युही निकल जाना हैं। 

फिर कैसी ये कड़वाह कैसा ये टकराना हैं।। 


बड़े शानौ शौकत से मिली हैं  आपको ये प्यारी सी जिंदगी।। 

खुलकर लुटा डालो अपने मन के हर अरमानो को।। 

क्या पता कब ये पल हमें मजबूर कर दे सब कुछ यही छोड़ जाने को। 

लोग कहतें आऐं हैं  तरसते हैं  सब जीव मानव जन्म पाने को।। 


चलों मिलकर सब एक सुंदर सा जहाँ बनाते हैं।। 

राग् द्वेष सब यही पर छोड़ जाते हैं।। 

नहीं कुछ तेरा मेरा सब मिलकर बाँट लेते हैं।। 

श्री के श्री चरणों मैं  सुंदर मन से शीश झुकाते हैं।। 


जय श्री राधे कृष्णा।। कुछ पंक्तियां  मेरे श्री को सम्रप्रित।। 

कुछ पल की जिंदगी हैं कुछ पल में मिट जाना हैं। /There are few moments of life to be erased in a few moments/

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26/07/2019.   Ranjitchoubeay. 

Thursday, July 25, 2019

आपकी सुंदर सोच आपके जीवन को बदल देती हैं/ एक गलत सोच आपको गलत बना देती हैं।पोयम ।

#EDMranjit/

आपकी सुंदर सोच आपके जीवन को बदल देती हैं/ एक गलत सोच आपको गलत बना देती हैं / पौयम। 

 हम जान बुझकर  ही  डुब  जाऐं  तो  सजा जरूरी है।। 

अंजान बनकर ही  दुनियां  ने  बहुत गुनाह कर डाले हैं //

तड़पता है हर सख्स वो  जो डुब रहा होता है //

अपनी गलतियों के भंवर से निकलने की कोशिश में।। 
।।

ऐं दोस्त मेरे तु सीख सखें तो  जान लगा लेना //
थोड़ी सी बुराई जरूर होगीं पर वक्त गवाँ लेना।। 

इस दौर मैं अगर कुछ करना है  तुझे  जीवन के लिऐं।। 

तो कुछ पल दुख भरी जिंदगी भी खुशी से बीता लेना।। 
।।

तु जानता है हर एक कदम गलत बढ़ रहा हैं।। 

तु जानता हैं  तु गरत् में  पल पल गीर रहा हैं।। 

फिर भी जिंदगी को ताक पर रखकर बेवकूफ इंसान।। 

देखो गलतियां पर गलतियां कर रहा हैं।। 
।।

जो लोग कहते हैं वक्त मेरा खराब चल रहा हैं।। 

उनसे क्या वक्त ने कभी शिकायत की होगी।। 

हर कदम पर इलज़ाम की पोटली लिये घुमने वालों।। 

काश अपने कर्मो  का चुनाव भी वक्त की सीख से  किया होता।। 
।।

इंसान वहीं जो हरपल कुछ सीखें  सुंदर विचारों  से।। 

दुर रहे वो लालच और घमंड भरे  अंधियारों से।। 

कौन  जानता है  कब अपना  वक्त बदलने वाला है।। 

अपनी करनी के बदले में  किसको क्या क्या मिलने वाला है।।

 आपकी सुंदर सोच आपके जीवन को बदल देती हैं/ एक गलत सोच आपको गलत बना देती हैं / 


मित्रों अपने विचारों को हमेशा उतम बनाऐं अच्छा सोचे  अच्छा कर्म करे।। 

कविता आपको कैसी लगी अपने विचार जरूर रखे।। 

जय हिंद जय भारत वंदेमातरम।। Edmranjit.com

Writing ranjit choubeay/25/07/2019


किसानों की बदहाली का जिम्मेदार कौन //Who is responsible for the loss of farmers?

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किसानों की बदहाली का जिम्मेदार कौन //Who is responsible for the loss of farmers?


वर्षो से सुनते आये हैं  भारत एक कृषि  प्रधान देश हैं।। 
पर आज मेरे देश का किसान खुद भुखमरी की कगार पर हैं  ये लेख लिखते वक्त मुझे बहुत ही दुख हो रहा हैं।। 
प्रति वर्ष सैकड़ों की संख्या में किसान आत्महत्या कर रहे हैं।। कहते हैं आत्महत्या एक बहुत बड़ा पाप हैं।। अगर किसानों की भाषा में कहुं तो भारतिय संस्कृति पर भारतीय भूमि पर एक दुर्भाग्य का दिन तब होता  जब कोई किसान आत्महत्या करने पर मजबुर होकर खुद को मिटा लेता है।। 

मेरा देश जिसकी गौरव गाथा आज पुरा विश्व गा रहा हैं।।  मेरा देश जो प्रति वर्ष अलग अलग  बिषयों में अपनी एक पहचान बना रहा है। बडे़ दुख के साथ ये स्विकार करना पड़ता हैं  की इसी भारत देश में आज मेरे किसान अन्नदाता खुद बदहाली के शिकार होते जा रहे हैं।। 

एक वक्त ऐसा भी था जब भारत में कृषि नाम का कुछ खास नहीं था  भारत स्वतंत्रता के बाद अपने पैरो को मजबुती प्रदान कर रहा था विकास की और लगातार तेजी से दोड़ रहा था।।  बड़े आश्चर्य के साथ लिखना पड़ रहा हैं ये दौर स्व श्री पूर्व प्रधानमंत्री  लालबहादुर शास्त्री जी  का था। मेरा देश उनके नेतृत्व में युद्ध  लड़ रहा था लेकिन फिर भी मेरे देश के किसानों  की ये दशा नहीं थी।। 

सुना हैं  भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान अमेरिका ने भारत पर दबाव बढ़ाने के  लिये शास्त्री जी से कहाँ की अब युद्ध रोक दीजिए।। वरना आपके देश को हमारे देश से मील रही अनाजों की सहूलियत  पर रोक लगा दि जाऐगी।। बीर प्रधानमंत्री शास्त्री जी ने किसानों से बिना पुछे ही अमेरिका को दो टुक मैं जवाब दिया आप अपना अनाज अपने पास रखिये हम पिछे नहीं हटेंगे।। 

मित्रों आप समझ सकते हो  उस समय हामारे प्रधानमंत्री  जी के जीवन में हमारे किसानों का क्या स्थान था।। उन्होने तुरन्त एक सभा बुलाई  रेडियो  टेलिविज़न के माध्यम से किसानों  से कहाँ भाईयो आज हमारे देश के जवानो के लिये हमे अपने  दैनिक जीवन से एक दिन का अनाज बचाकर बार्डर पर भेजना होगा।। और उन्होने इसके लिये एक दिन सोमवार फिक्स कर दिया  पुरे देश के किसानों ने  अपने प्रधानमंत्री का साथ दिया।। 

किसानों की बदहाली का जिम्मेदार कौन //Who is responsible for the loss of farmers?


सोचता हु क्या ये वहीं मेरा भारत है  नहीं आज मेरा भारत उस वक्त से ज्यादा विकसित है। पर मेरे देश की सोच में  थोड़ा लालच और डकैती पन आ गया है। आज मंत्री सांसद विधायक प्रशासन सब भ्रष्टाचार की चरम पर है। ना तो उन्हें अपने देश के गौरव की चिंता हैं और ना ही देश के अंन्नदाता की तकलिफो का अंदाजा हैं।। 


पिछली उतर प्रदेश अखिलेश सरकार में  मेने एक न्युज देखी गाँव मैं बाढ़ के दौरान उनके कुछ कार्यकर्ता गरीब किसानों का मजाक उडा़ते नजर आऐं लौन माफि के नाम पर पचास रूपये और 💯  रूपये के चैक लेकर बड़े अदब से बाँटते नजर आएं।। उसी दौरान बाढ़ मैं फंसे किसानों को सौ दौ दो सौ ग्राम गुड़ और चिऊरा बाँटते भी न्युज मैं दिखे।। 


क्या ऐसे नैता लोग बता सकते हैं  ये सौ पचास ग्राम गुड़ और चिऊरा से किसका पेट भरता हैं।।  सरकारी गौडाऊन fci में अनाज सड़ जाता है। वो कौन से आपातकाल के लिये होता हैं।।  क्या ऐसे नेतागिरी पर आप फिर से मुहर लगाना चाहोगे।।  जो किसान अनाज उगा रहा हैं।  रात दिन मेहनत कर के अगर उसी को मुसीबत के समय भुखे मरना पड़े तो वो  क्यों देश के लिये इतनी मेहनत करेगा।। 


देश को समाज को उद्योगपति को सरकार को  और राजनीतिक दलो को ये सोचना होगा अगर किसान नहीं रहा तो आप क्या अमेरिकी चिकन  और सुप पिकर सुबह की  शुरुआत करोगे  दिल तो करता है इन सभी लोगो को भर भर के गालियाँ लिखु।।  पर ऐसा करना  मेरे देश की संस्कृति के खिलाफ होगा।। 


बहुत अच्छा लगता था जब चारों तरफ हरियाली हुआ करती थी फिर चाहें  वो हरियाणा हो या पंजाब  उतर प्रदेश हो या मध्यप्रदेश भारत का हर छोटा बडा़ राज्य कृषि में अव्वल था आज वहीं धिरे धिरे अपनी साख खोता  जा रहा है।।  अगर सरकार लाँन देने वाले बेंको की जाँच कराये तो पता चलेगा की  सबसे ज्यादा लाँन रसुख वाले जमींदार टाइप के किसानों के खाते में जमा किये जाते हैं।। 



और फिर यही लोग लाँन माँफी की होंड़ लगाकर सब गपच जाते हैं।  देश के आम गरीब किसानों को तो आज भी  खेती के टाइम  कोआपरेटिव बेंक से पाँच दस हजार् लाँन के लिये पचास चक्कर काँटने होते हैं।।  ये जमीनी स्तर की सच्चाई हैं। अगर कोई  इसका पुरुफ देखना चाहता है तो चले मेरे साथ मैं दिखाऊँगा इस देश के सिस्टम का सारा सच।। 

सरकार को  भी इस तरफ ध्यान देना चाहिए  बैंको से जो किसान बड़े बड़े लाँन लेते  हैं  उनकी जमीनी सच्चाई क्या है।। 
मित्रों  गरीब किसान तो इज्जत  की दो रोटी से भी खुश हैं  क्योंकि उनके खुन मैं इमानदारी आज भी जिंदा है ।कुछ किसान तो अपनी जान इस लिये  ले लेते हैं । उनके पास लिया हुआ छोटा सा लाँन चुकाने का कोई रास्त नहीं होता।। 

उनके दरवाजे पर कोई बैंक अधिकारी आकर जब ये कहता है आप ने लाँन नहीं  चुकाया तो आपकी जमीन हमें  बेचनी पड़ेगी या आपका घर हमें  जब्त करना होगा।। उनकी मद्त करने वाला भी कोई नहीं होता और वो  अंत में जान गवाँ लेते हैं।। 

किसानों की बदहाली का जिम्मेदार कौन //Who is responsible for the loss of farmers?


रक्षा बजट मैं लाखों करोडों का इन्वेस्ट  किसी बड़े नेता की मुर्ती  स्टेचु पर हजारों करोड़ का इन्वेस्ट  एक  विधायक या सांसद की सुरक्षा और  उनके दैनिक जीवन पर भी करोडो़ का इनवेस्ट कुंभ मेला और हजारों ऐसे खर्च करने वाली सरकार कास ये सोचती देश में एक भी  गरीब किसान को अब आत्महत्या की जरूरत ना पड़े । हम कोई ऐसी व्यवस्था बनाऐं तो  हमारा देश फिर से कृषि कुशल खुशहाल देश कहलाता।। 


अगर आप सभी को ये लेख समझ आया हो तो कृपया देश में कृषि किसान योगदान की तरफ सरकार का ध्यान अपने अपने माध्यम से जरूर बढ़ाये।। किसानों का सहयोग करे अंन्न बिना इसान ना ही जीवीत रह सकता है ना ही  जीवन की कल्पना हैं।। 
जय हिंद जय भारत वदेंमातरम ।। लेखक रंजीत चौबे।। 

किसानों की बदहाली का जिम्मेदार कौन //Who is responsible for the loss of farmers?


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Ranjitchoubeay@mail. Com// 25/07/2019🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏


Tuesday, July 23, 2019

मेरी पहली पंचायत भाग 2// my first panchayat 🤫

#EDMranjit 

मेरी पहली पंचायत भाग 2// my first panchayat 🤫

(स्टोरी)

में अल्प कल आपसे मिला था। और शेयर की थी। अपने गाँव और खुद से जुड़ी 

स्टोरी। हम बात कर रहे थे  मेरे मुखिया बनने के सफर का तो मित्रों चुनाव हो चुका था और में अल्प भारी मतो से जीत कर गाँव का पहला यंग मुखियाँ बन गया था। यहाँ तक आने मैं कोई परेशानी मुझे नहीं हुई थी।। 


पुरा गाँव बहुत खुश था पर मुझे कुछ भारी भारी सा लग रहा था ऐसा लग रहा था जैसे मैने बहुत बड़ी जिम्मेदारी अपने कंधो पर ले ली हैं।। मुखियाँ बनने के अगले ही दिन मैने पुरे गाँव की आम सभा अपने गाँव के प्राइमरी स्कुल के प्रागण मैं बुलाई।। 


गाँव के बच्चे बुढे़  जवान सभी सभा में आऐं और सभी अपने अपने विचारों को एक एक करके बताते थे। गाँव से जुड़ी समस्याओं को सबने बड़े सच्चे मन से कह सुनाया।। गाँव की कुछ समस्या तो इतनी जटिल थी मानों उस को सबसे पहले ठिक करवाना पुरे गाँव की आवाज़ थी।

 

और समस्या थी गाँव मैं बाढ़ से आने वाले पानी की निकासी के लिये गाँव मैं एक बड़ा सा पुल बनवाना जिससे गाँव मैं आने वाला पानी अपने सही रास्तें से बहता हुआ छोटी बड़ी खाडि़यो के रास्ते जल्दी से निकल जाएं।। 


मेरे लिये ये एक बहुत बड़ी चुनौती थी। क्योंकि एकाएक इतना बड़ा फंड पास करवाना बहुत मुश्किल काम था लेकिन काम तो करना था। मेरी पंचायत में दस गाँव थे लगभग सभी गाँव की छोटी मोटी समस्या थी और मजे की बात तो ये थी पहले वाले मुखियाँ जी लगभग सभी समस्याओं का फंड गपच चुके थे।। 

मेरी पहली पंचायत भाग 2// my first panchayat 🤫

पिछले पच्चीस सालो से ब्लाँक को मिलने वाले सारे फंड को सभी ने मील बाँटकर खुब पेट भर लिया था ।। और  अब मुझ पर मन ही मन तंज कसा जा रहा था भुतपूर्व मुखियाँ जी तो कहने लगे अब तुम गाँव छोड़कर भाग मत जाना मुखियाँ बने हो तो गाँव की सभी समस्याओं का हल होना चाहिए अब।। 


मुझे तो हंसी आ रही थी पर गाँव के कुछ लोग उनसे सवाल करने लगे विरेन प्रताप जी आपने इतने सालो मे कितने झंडे गाड़े है पुरे गाँव और समाज को पता है।। रही बात हमारे नये मुखियाँ अल्प की तो हम सब इनके साथ है।। एक कहु तो गाँव के लोगों का स्नेह देख कर लगता था सारे काम सारी समस्याओं को चुटकी बजा कर मिटा दु पर थोड़ा मुश्किल था लेकिन नामुमकिन नहीं था।। 


मैने गाँव की समस्याओं पर मिली सभी अर्जिया ली और सभी का अभिवादन किया सभी से मिला और फिर आमसभा खत्म करके घर वापस आ गया वहाँ आमसभा मैं मेरे घर का कोई भी सदस्य नही था। इसलिये घर आते ही माँ पुछने लगी बेटा क्या क्या हूआ केसे मैनेज करेगा तु इतना सब माँ तो बस माँ ही होती हैं सारी बाते जब तक नहीं पुछ ली तब तक चुप नहीं हुई।। 


शाम हुई पिताजी के आने के बाद मैने अपने गाँव के कुछ खास दोस्तों को अपने घर बुलाया और पिताजी से गाँव की समस्याओं पर चर्चा की।  क्योंकि वो गाँव की समस्याओं को बहुत अच्छे से जानने के बाद उन्हें सुलझाने का उपाय बता सकते थे।। लेकिन उन्होने पहले ही कहाँ अभी मुखियाँ बने हो।। 


पुरा गाँव तुम्हें स्पोट भी करता है और मैं भी साथ हु।। पहले तुम अपने दिल से अपने मन से विचार करो कैसे क्या किया जा सकता है।। उसके बाद अपने मित्रों के साथ मिलकर किसी एक समस्या का हल निकालो जब एक काम सफलता पूर्वक कर लोगे फिर में अपनी राय जरूर दूँगा।। 

मेरी पहली पंचायत भाग 2// my first panchayat 🤫

उस टाइम में समझ गया पिताजी मेरा इम्तिहान लेना चाहते थे। इसलिए में अपने मित्रों के साथ फिर गाँव के समुदायकिक भवन की तरफ चला आया और वहाँ हमने अपना एक छोटा सा आफिस बनाया था।। हमने वहीं बैटकर चर्चा की मेरे दिमाग में एक प्लान आया पर वो काम करेगा या नहीं में नहीं जानता था।। 


पर काम भी करना था और फैसला भी लेना था।। अपने मित्रों को मैने गाँव में भेजकर कुछ ऐसे लोगो को बुलवाया जौ बहुत समझदार और शहनशील बुद्धी जीवी थे।। उन्हीं मैं एक बहुत ही सज्जन अंकल थे जीनका नाम श्री श्याम जी था मेने उनसे कहाँ श्याम अंकल जी गाँव मैं पुल बनवाना मेरी प्रथम प्राथमिकता मैं शामिल हैं।। 


और मैं इस काम को जल्दी से जल्दी शुरु करवाना चाहता हूँ।।  और समस्या आप जानते हैं पिछले कई सालो का पुल के लियै मिला हुआ फंड हमारे पास नहीं है।। में चाहता हूँ हम खुद ही अपने पुरे गाँव की मदत से इस पुल का निर्माण कार्य शुरु करू।। इसके लिये श्याम अंकल आप सभी मेरी मद्त कीजिए।। 


श्याम अंकल और उनके साथ आऐं गाँव के  सदस्य मेरी बात से सहमत हुये।। उन्होने कहाँ बेटा इस मुसीबत से निकलने के लिये पुरा गाँव आपका साथ देगा बताओ हमें क्या करना होगा।।  मेंने उनसे कहाँ अंकल मुझे बस आज का समय दिजिऐ मैं कल आप सबको पुरे विस्तार से बताऊगां हमें कैसे शुरूआत करनी है।। 


अल्प ने आगे अपने गाँव की सबसे बड़ी समस्या का हल कैसे निकाला ये जानने के लिये इंतजार किजिए अगले भाग का।। 

मेरी पहली पंचायत भाग 2// my first panchayat 🤫

जय हिंद वंदेमातरम लैखक रंजीत चौबे।। Edmranjit.com

23/07/2019

Monday, July 22, 2019

मेरी जिंदगी मैं खुद बनाऊगाँ//Top five motivation. I will make myself in my life. Motivation 💐

#EDMranjit 

मेरी जिंदगी मैं खुद बनाऊगाँ//Top five motivation.  I will make myself in my life. Motivation💐

   लाईफ एक गेंद की तरह गोल हैं आप जब चाहों जैसे चाहो उछालो फर्क नहीं पड़ता। फर्क का असर तब पड़ता हैं। जब ये गेंद गोल गोल घुमते घुमते रूक जाती हैं। क्यों सही कहाँ न मित्रों न बिलकुल गलत क्योंकि अभी आप सब ये नहीं समझ सकते जब आपकी गेंद कहीं रूक जाऐगी शायद तब समझ जाओ।। तो सोचो अगर हम अपनी गेंद रूकने ही ना दे तो कितना अच्छा हो सकता है 

Motivational  1 /अगर आप कुछ कर रहे हो तो करते रहो ना। तब तक करते रहों जब तक खुद को ना लगे हाँ मुझे थोड़ा रूकना हैं।। Point 

ये आपका विचार है। अब आपको कितना रूकना हैं। और फिर कब रैड्डी हो जाना हैं। यकीनन अगर आप अपनी दिमाग की चाभी अपने पास रखो आप को कोई रोक नहीं सकता।। आप सफल हो सकते हो़


2/ मैं जानता हूँ मुझमे ये कला नहीं है की मैं ज्यादा दैर तक दौड़ पाऊ  मित्र ये आप जानते हो आप ज्यादा नहीं दौड़ सकते तो आप अपनी कमजोरी को खुद ही दुनियाँ के सामने क्यों ला रहे हो।। 


अपनी योग्यता हम बढ़ा सकते हैं बस एक त्याग करना है दुसरो से पहले हम खुद ही अपनी कमियों को पहचान कर उस पर काम करे।। 


3/ जिंदगी मैं जब भी ऐसा लगे में हार रहा हूँ।। बस एक बार अपनी माता जी से पुछनाँ माँ जब मैं छोटा था तो अपने पैरों से चलने की कोशिश में कितनी बार गीर जाता था।।  मित्रों यकीनन माँ के पास भी उतर यही होगा बहुत बार या फिर हजारों बार।। 


Point हम सिर्फ़ अपने पैरों पर खडे़ होने के लिये बचपन में हजारों बार गीरकर उठतें हैं।।  मित्रों यहाँ तो जिंदगी को stand करना है। तो कोशिश जारी रखों लक्ष्य गोल डिजायर सब जीत जाओगें।। 

मेरी जिंदगी मैं खुद बनाऊगाँ//Top five motivation.  I will make myself in my life. Motivation 💐


4/ एक मुफ्त की सलाह दुँगा आप चाहो तो ले सकते हो।। और कभी मत भुलना।। जब भी आप को ऐसा लगे मैं कुछ बड़ा करने जा रहा हूँ। या फिर अपने फ्युचर की प्लानिंग कर रहा हु।। 


मेरे दोस्त बस ये मुफ्त की सलाह देने वाले लोगों से मत मिलना जो आपके आस पास पडो़सी या फिर मामा चाचा दोस्त बनकर मडराते रहते हैं।। 


Point /जिंदगी आपकी फ्युचर आपका डिजायर आपका मेहनत आपकी तो मित्रों सलाह किसी और की कभी नहीं।। ये फैसला भी आपका ही होना चाहिए आपको दिल्ली जाना है या मुम्बई या फिर अमेरिका।। 


 सब आप का होना चाहिए।।  जब हम सब कुछ खुद से  करते हैं तो हार कर भी दुख कम होता हैं। और जिंदगी हजारों रास्तें और खोल देती है हमें फिर से उठाती हैं औल बार बार गिरकर उठने वाले ही तो इतिहास बनाते हैं।। 


5/ अगर आप को दुनियाँ मैं किसी पर भी विश्वास ना हो तो दुखी कभी नहीं होना।। अगर आप दुनियां मैं एकदम अकेले हो तो भी दुखी मत होना और अगर आपका नाम लुजर फैलियर भी रख दिया जाऐं तो भी दुखी मत होना।। 


Point / सबसे पहले तो आपके पास दुनियां का सबसे अच्छा मित्र हैं आपका अपना मन तो जो भी बातें करनी हो उससे कर सकते हो वो तुम्हें कभी धोका भी नहीं देगा और निराश भी नहीं करेगा।। 


मैनें कुछ लोगों को देखा हैं जो अपने काम को ही अपना यार मित्र दोस्त सब बना लेते हैं। और इतना दिल लगाकर काम मैं डुब जाने के बाद भी हमेशा फ्रैस रहते हैं खुश रहते हैं।। तो मित्रों काम से प्यार करो दोस्ती करो जिंदगी सलाम करेंगी।। 


कोई लुजर कहे कोई फैलियर कहें तो मुश्कुरा लैना वो आपको आपकी खोई हुई ताकत वापस दिला रहा है आपकी ऐनर्जी वापस बढ़ती जाऐगी जब जब जीस पर जग हँसा है उसी सख्स ने कमाल किया है।। इतिहास भी गवाह हैं और हम सब साक्षी भी है।। 


तो मित्रों पढ़ते रहिये आपका अपना ब्लाँग इडियम रंजित।। जय हिंद वंदेमातरम।।

मेरी जिंदगी मैं खुद बनाऊगाँ//Top five motivation.  I will make myself in my life. Motivation 💐

Motivational thought. Edmranjit.com

22/07/2019// writer thinker blogger ranjitchoubeay.

Sunday, July 21, 2019

मेरी पहली पंचायत /My first panchayat💐💐

#EDMranjit//


मेरी पहली पंचायत /My first panchayat💐💐

भाग 1/ पंचायत का मेरा पहला दिन था गाँव के लोग बहुत उत्साहित थे।। पिछले  पच्चीस सालो  से मुखियाँ विरेन प्रताप ने गाँव मैं राज किया  था।। एक राजपुत होने के साथ विरेन प्रताप थोड़ा स्वभाव से भी कठोर था।। पुरा गाँव उसकी इज्जत दिल से तो बिलकुल भी नहीं करता था।। हाँ लेकिन डर से सर झुकाना मजबुरी थी गाँव वालो की।। जब से में चुुनाव में खड़ा हुआ था उसका गाँव वालो से रोष और भी ज्यादा हो गया था।।  जबकी मुझसे उसकी कोई खास रंजीश भी नहीं थी उसके बडे़ बेटे के साथ ही मेरी स्कुली पढाई हुई थी।।  गाँव की समस्या का उसके पास सिर्फ एक ही जवाब होता था। हम का करे सरकार से कोई फंड ही नहीं मिलता है।। पंचायत राज का ये दौर वैसे तो बहुत ही अच्छा था आज भी है।। लेकिन अस्सी और नब्बे के दशक में और भी बेहतर थी।। सरकार के बड़े बड़े कर्मचारी खुद गाँव गाँव का मुयायना करते रहते थे।। और लोककल्याण योजनाओं की विस्तारिता की और सरकार का ध्यान बटाँते रहते थे।। में बचपन से ही गाँव की समस्याओं को बड़े ध्यान से समझता था। वक्त के साथ में भी बडा़ हो गया और धिरे धिरे गाँव के सभी बड़े बूजूर्गो का ध्यान मेरी तरफ बढ़ने लगा गाँव के सभी लोग पिताजी से कहते  थे।। एक दिन इस बचुआ को ही गाँव का मुखिया बनाऐगें।। पर पिताजी को ये कभी सही नहीं लगा वो हमेशा से चाहते थे की में पढ़लिखकर एक डाँक्टर बनु।। मेरा गाँव चारो तरफ से छोटी छोटी नदीं और तलाबो से घिरा तो है ही। लेकिन जमीनी  समतलता मैं भी बहुत नीचे था।।

मेरी पहली पंचायत /My first panchayat💐💐

 इसलिये बारिश के टाइम घरो मैं पानी घुस जाना और फसल को नुकसान पहुचँना प्रत्येक साल का ये खैल स्वभाविक था।। वहीं कुछ लोग गाँव मैं जमींदार टाइप भी थे।। उनके पास ज्यादा जमीनें थी इसलिए गाँव की सबसे बड़ी समस्या थी बाढ़ का हर साल आना और फसलों को अपनी चपेट में लेना।। गाँव के ये कुछ जमींदार लोग इसका भरपुर फायदा उठाते थे।। गरीब किसानों सेे उनकी जमींनो को कुछ पैसे अनाज ले देकर लिखवाँ लेते थे।। ऐसा तो मैनें बहुत सी फिल्मो में भी देखा था। पर मेरा गाँव तो भुक्तभोगी था।। उसकी कथा तो सच्ची है।। बहुत से गरीब किसानों की जमीन तो खुद मुखियाँ विरेन ही हड़प चुका था।। इसलिये मैं कहीं ना कहीं अपने गाँव की इस दशा से बचपन से ही परेशान था। मन ही मन तो मैं यहीं चाहता था एक दिन बड़ा होकर गाँव की इस बदहाली को खुशहाली मैं बदलने की पुरी कोशिश करूगा।। कहते हैं अगर मन पवित्र हो लक्ष्य उचित और सार्वजनिक हो तो खुद प्रराकृति ही उसे पुरा करवाने मैं हमारा साथ देती हैं।। ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ था।। मुझे ये नेतागिरी करने का और पंचपरमेशवर बनने का कोई इरादा नहीं था। लेकिन नेचर ने ऐसा ही करवा दिया में लगभग MBBS का एगजाम भी कम्पलिट कर चुका था। गाँव मैं कुछ पल माँ पापा और गाँव वालो के साथ बीताकर शहर में शिफ्ट होनै वाला था। और फिर वहीं अपना क्लिनिक खोलने का इरादा था।। पर स्टडी के बाद जब गाँव आया तो गाँव के प्यार में फिर से पागल ही हो गया।। मुझे आज भी तैरना नहीं आता और मेरे गाँव में छोटे छोटे दस से आठ साल के बच्चे भी नदीं पार कर जाते हैं तैर कर।। पिताजी टिचर थे तो में बहुत अनुशासन में ही रहा कोई भी उछल कुद नहीं कर पाया बचपन बस पढ़ने खाने और पिताजी को हमेशा गाँव वालो की तकलिफों को सुनता समझता देखा।। यही से कुछ अलग। किरदार मैं में खुद भी ढलता गया।। 

मेरी पहली पंचायत /My first panchayat💐💐

पिताजी से पुरे गाँव का विषेश आग्रह था की वो मुझे पंचायत इलेक्शन मैं खडे़ हौने की अनुमति दे।। लेकिन एक तरफ गाँव वालो को ये भी पता था की मेरी पढाई भी अच्छी हुई थी और मैं डाँक्टर भी लगभग बनने ही वाला था।।   इसलिये कहीं ना कहीं सभी दुविधा मैं पड़े थे। वैसे तो गाँव कै और भी बहुत सभ्य लोग इस काम के लिये उचित थे।। पर गाँव का विश्वास और प्यार मुझ पर ज्यादा था पिताजी ने शाम को खाना खाते वक्त ही मुझसे पुछा क्या तुम अपने गाँव के लिये अपने इस कैरियर का त्याग करना उचित समझते हो।। अगर देखा जाऐ तो मेरे लिये ये एक खूशी का मौका था। पर पिताजी का सपना भी मेरे अंदर पलकर बड़ा हुआ था इसलिए में बहुत अजीबोगरीब स्तिथि मैं पहुँच गया था।। तभी पिताजी ने कहाँ अब में चाहता हु तुम गाँव के लिये भी कुछ करो। मेरे लिये तो तुमने डाँक्टरी पढ़ी और मेरी नजर में बन भी चुके हो।। अब गाँव की समस्याओं को सुलझाओ फिर आगे का सोचते फिलहाल तो तुम्हारा यही धर्म हैं। अगले ही दिन पुरे गाँव ने बड़े धुमधाम से नामंकन पर्चा भरवा दिया।। मुखिया जी आग की तरह बरसने लगे अब ये दो दिन का लड़का गाँव की जिम्मेदारी सम्भालेगा।। कुछ वक्त था वोट वाले दिन में। इसलिये गाँव के मेरे दोस्त जो साथ में पढ़ा करते थे।। सबने एक बड़ा सा गुरूप बना लिया और मेरे लिये अपने ब्लाँक के बाकी गाँवो में भी मेरा परचार करने लगे।। साथ मैं में खुद भी हुआ करता था। मेरा नाम अल्प हैं।। तो अल्प नाम से कुछ बैनर और पोस्टर भी छपवाऐं गये। फुल हवा बयार की तरह गाँव के सभी लोग मेरे साथ थे।। माँ पिताजी को तो विश्वास ही नहीं था की उनके अल्प को गाँव इतना चाहता था।। 

मेरी पहली पंचायत /My first panchayat💐💐

आगे जानने के लिये थोड़ा इंतजार कीजिए।। 
धन्यवाद।। Edmranjit.com
मेरी पहली पंचायत।। 21/07/2019####//लेखक रंजीत चौबे।। 


Friday, July 19, 2019

Yes this is the same// हा ये वही हैं //Poetry motivational 💐💐

#EDMranjit//////

Yes this is the same// हा ये वही हैं //Poetry motivational💐💐

हा ये वही हैं। कुछ वक्त पहले था जो आस पास।। 

देखो इसका रंग भी वही है इसका ढंग भी वही हैं।। 

कुछ बात करने से पहले बोला जो करता था बस वहीं हैं।। 

हा ये वही हैं।। 

हजारों लोगों मैं थी इसकी पहचान देखो।। 

कागज से पन्नों पर जो उतर आया था एक रोज।। 

चार लोगों की नहीं वो खुद मैं लिखा करता था।। 

हा ये वही हैं।। 

कभी कभी उसके लिखे तमाशै मैं मैनें।। 

खुद को भी मेहसूस किया था।। 

क्या सुदंर लिखकर देखो उसने मेरा नाम किया था।। 

हा ये वही हैं।। 

सुना है गाँव मैं वो बहुत मशहुर हो गया था।। 

जलन वालो की आँखो से वो दुर आ गया था।। 

उसकी किस्मत तो समुंदर के आस पास रहती थी।। 

अब वर्षो बाद नजर आया है।। 

हा ये वही हैं।। 

क्या नाम कमाया  है खुद से इसने।। 

बहुत दुर हो चला है अब ये उन दिनों की यादों से।। 

मशहूर होकर भी तो छुपा नहीं पाया खुद को।। 

क्योंकि मेरी आँखों ने देखते ही कहाँ।। 

हाँ ये वही हैं।। 

बातें इसकी आज भी याद आती हैं।। 

वो मस्ती उसकी आज भी रूलाती है।। 

जब डाँट दिया था उसकी आँखों में आँखे डालकर।। 

उसकी आँखो की लालिमा आज भी दिख जाती हैं।। 

हाँ ये वही हैं।। 

खुश हु की अब उसकी पहचान हैं।। 

इस छोटी सी दुनियाँ मैं उसका भी एक नाम हैं।। 

अब दिल का हर कौना खुशी से झुम सा गया है।। 

क्योंकि आँखों से देख लिया मेरा दोस्त कामयाब हो गया है।। 

हाँ ये वही हैं।। 

Yes this is the same// हा ये वही हैं //Poetry motivational💐💐

हमारी जर्नी ही हमारी सबसे बड़ी मार्गदर्शक हैं।। 

जय हिंद वंदेमातरम।। 

रंजीतचौबे।। Edmranjit.com motivational thought poetry.

19/07/2019 


Motivation //How much faith do we have on ourselves? हम खुद पर कितना विशवास करते हैं।

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 Motivation //How much faith do we have on ourselves? हम खुद पर कितना विशवास करते हैं। 


मित्रों जीवन में चार स्टेप बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं।  जैसे ही हम सब दुनियाँ में आते हैं। हमारे साथ साथ परिवार की उम्मिदों का भी 

जन्म हो जाता है। अथाह स्नेह और बहुत सारी शुभाशीष से शुरुआत होती है हम सभी के बचपन की ।समय के साथ जब थोड़े बड़े होते हैं। स्कूल की यात्रा का शुभारंभ होता है। 

घर में अगर शुरू से ही शिक्षा का माहौल हो तो स्कुल में और भी हमसे महात्वकांक्षा रखी जाती है। और कही ना कहीं ज्यादातर बच्चें इसमे सफल भी होते हैं। 

जीवन चरित्र पर भी निर्भर होता है। ऐसा कुछ शास्त्र भी कहते हैं। जीवन संस्कारी हो इसके लिये बचपन से ही घर और विद्यालय दोनो जगह हमें प्रतिदिन प्रेरणा भी मिलती रहती है। 

कुछ बातों का असर हम पर बचपन मैं बहुत ज्यादा होता है। जैसे की कहानियाँ आज के दौर मैं गेम्स या फिर टेक्नाँलिजी फ़िल्म. खेल वगैरह वगैरह। 

इसी तरह जिंदगी का एक सबसे खूबसूरत पल धीरे धिरे माँ पापा भाई बहन टिचर दोस्त सबके साथ गुजरता रहता है। और हम सब बचपन से कुछ आगे की तरफ बढ़ते बढ़ते एक दिन किशौर अवस्था मैं आ जाते हैं। 

इस स्टेज पर आते आते हमने बहुत सी चीजों को सिखा होता हैं अच्छा बुरा सही गलत धर्म अधर्म भले ही हमने इन बातों को अपने अंदर ना अपनाया हो पर हम समझ चुके होते हैं एक सही जिंदगी को। उसके मायनो को। 

Motivation //How much faith do we have on ourselves? हम खुद पर कितना विशवास करते हैं। 

क्योंकि मित्रों अगर हम जीवन में कुछ सबसे अच्छा और महत्वपूर्ण सिखते हैं तो वो बचपन से किशौर अवस्था तक ही सिखते हैं। ये बात गौर से समझ जाओ। क्योंकि ज्यादातर कैरियर में सफल होने वाले महापुरुष वहीं हुये है जिन्होंने अपने बचपन से  किशौर अवस्था तक की लाईफ के पन्नों को अपनेे आगे की लाइफ मैं स्थान  दिया है। 

आज वक्त बदला है दौर भी बदला है। पर याद रखो जीवन का शुरूआती दौर आज भी वही है।  अब आप जवान हो चुके हो इसका मतलब ये बिलकुल भी नहीं की आपके जीवन का वो सुंदर अनुभव आपमे नहीं है। 

में पुछनाँ चाहता हूँ क्यों हम ये सोचकर वक्त बरबाद करे की हमें क्या बनना हैं क्या नहीं बनना। क्यों हम लोगो की सलाह ले।। क्यों हम अपने उन सपनों को मार दे जो हमें बचपन में आगें बढ़ने की प्रेरणा दैते थे। 

मैं यहाँ किसी भी महापुरुष का नाम नहीं लेना चाहता क्योंकि में जानता हूँ हर एक इंसान में वो सारे गुण हैं जो उसे महान बनाने के लिये सक्षम होते हैं। कहने का मतलब सिर्फ इतना है। मित्रों आपको आपसे क्या चाहिए ये दुनियां आपको नहीं दे सकती। ना ही बता सकती है। 

करो अपने भविष्य का चुनाव बचपन से किया है तो अब जब शिक्षा पुरी हुई तो इसे पुछना उस से पुछना क्यों। ये गलत है। सही ये है खुद जागो पुछो खुद से सवाल करो खुद से क्या सपने थे आपके ।क्या सपना था आपके माता पिता का । आपका डिजायर क्या था बंद करो ये इधर उधर का चक्कर बस शूरू करो । जो  आपकी जिंदगी का सबसे बड़ा मकशद था वो जरूर पुरा होगा। मित्रों बस डगमागाना नहीं। 

Motivation //How much faith do we have on ourselves? हम खुद पर कितना विशवास करते हैं। 

और अगर डगमगाऐं भी तो कैसा डर जिंदगी अपनी सपने अपने चुनाव अपना। एक सवाल आपके मन मै होगा फैल हुये तो क्या होगा।

तो जवाब आपके पास खुद ही मिल जाएगा। आपकी चुक आपकी लापरवाही आपकी कमिमाँ दुर कर लेना। जिंदगी आपका महान सपना पुरा करवाने से पहले। आपका इम्तिहान तो जरूर लेगी। कुम्हार भी मटके को दस से बीस बार ठोक कर जरूर देखता है। कहीं इसमें छेंद तो नहीं। 

यहाँ तो आपकी जिंदगी मैं आपके सपनों का सवाल है आपकी काबलियत का सवाल है इम्तिहान तो बनता है मेरे दोस्त। जब भी हम खुद से गिरते हैं। चोट चाहें जितनी गहरी हो उठते जरूर है। और वजह समझ जाते हैं फिर वहीं भुल नहीं करते। 

एक बात मैने बचपन से ही समझी हैं सिर्फ़ अपना मत सोचना क्योंकि ये सोच उचित नहीं ये हमारे स्वाभिमान का हिस्सा नहीं। लाईफ मैं चाहें जितनी भी कठिनाइयों से सामना क्यों ना हो बस हर बार मुस्कुरा देना विशवास करो मित्रों दुख भी आपसे जुदा होते वक्त यहीं कहेगा वाह मेरे दोस्त तुझ सा नहीं देखा। 

जब आप जिंदगी मैं कामयाब हो जाओ आप कामयाब होना अपनी कामयाबी को कामयाब नहीं होने देना वरना फिर आपकी कामयाबी में और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रम्प की कामयाबी में कोई खास फर्क नहीं रह जाएगा। कामयाबी में अवरशरवादी ना बने। ना ही कामयाबी को अवशरवादी बनाये। याद रहें तभी जिंदगी आपको आपकी उम्मीद से ऊपर ले जाएगी। 

Motivation //How much faith do we have on ourselves? हम खुद पर कितना विशवास करते हैं। 

कुछ लोगों का मानना होता हैं। बीस या तीस साल तक ही कैरियर बन पाता है या मौका मीलता है। मित्रों ये सोच निहायति घटियाँ हैं।  मेहनत लगन से हम अपने मुकाम को पाना चाहें तो कोई भी उम्र मायने नहीं रखती।  जिंदगी मैं बिना कुछ खास किये हारने से तो अच्छा होगा हम बार बार अपने सपनो के लिये प्रयास करते रहे। 

आप सभी ने ऐसे तमाम कामयाब लोगो के बारे में पढ़ा ही होगा। मेरे नजरिये से कामयाबी की कोई उम्र नहीं होती। आप धिरूभाई अमबानी जी को पढ़ लिजिऐगा। आप अमिताभ बच्चन जी को पढ़ लिजिऐगा। आप बोमन ईरानी जी को भी पढ़ सकते हैं। 

मित्रों हमारी शुरूआत कहाँ से होती हैं । ये हमारे लिये मायने नहीं रखता लेकीन हमें इसको एक अंजाम तक ले जाना है ये जरूर मायने रखता है ।

दुरगामी सोच हमेशा कामयाबी को जन्म देती हैं। आप हमेशा अपने विजन को ध्यान मैं रखकर लगातार वर्क कीजिए । यकीनन आप कामयाब हो जाएंगे। 

moral of the Story... 

एक रिक्सा वाला काफी टाइम तक मेहनत करता रहा उसने अपनी मेहनत से कुछ ही सालो मैं एक कार खरीद ली। और अब वो कार चलाने लगा लेकिन एक दिन उसकी कार का एक्सीडेंट हो गया कोई व्यक्ति उसकी कार से बहुत घायल हो गया। अब उसको उस व्यक्ति के इलाज के लिये अपनी कार वापस बेचनी पड़ी। वापस फिर से उसने रिक्सा चलाना शुरू किया धिरे धिरे वक्त बदला और उसकी मेहनत और लगन ने आज उसे दस हजार रिक्सो का मालिक बना दिया। 

कामयाबी का सबसे बड़ा मंत्र तो यही है अपने पथ पर लगातार प्रयासरत लगे रहना डटे रहना। एक दिन वक्त भी हम पर गर्व करे ऐसा कुछ कर जाना। डटे रहना है लगे रहना है। वक्त चाहें जैसा भी आऐं उसे हस के गले लगाना हैं। 

एक बार फिर से कहता हु। 

कामयाबी एक ख्वाब हैं उसे हर रात देखना। एक दिन वो हकीकत का रूप लेकर आपसे मिलने जरूर आऐगी।।।। 

Motivation //How much faith do we have on ourselves? हम खुद पर कितना विशवास करते हैं। 

जय हिंद वंदेमातरम।। 

लेख रंजीत चौबे।। Edmranjit.com motivational thought. 

19/07/2019


Wednesday, July 17, 2019

समाज की नैतिकता पर कुछ सवाल//Some questions on the morality of society💐

#Edmranjit######

 समाज की नैतिकता पर कुछ सवाल//Some questions on the morality of society💐

जब समाज एकजुट होकर  किसी एक भाषा शैली किसी एक 

जातिधर्म किसी एक भविष्य का विरोधाभास करता है। तो वाकई ये एक

 सोचने और समझने का बिषय बन जाता है। 

समाज सभी समुह के वर्ग से ही बनता हैं। ये सभी जानते हैं। 

फिर आज क्यों समाज एक परिपक्वता वाली नीति नहीं अपनाता। आज समाज के लोग क्यों समाजिक गतिविधियों को सिर्फ एक तरफा कर जाते हैं। 

ऊँच नीच भेदभाव जातिगत व्यवहार्यता की व्यवस्था किसने बनाई और क्यों बनाई। 

ये एक बहुत ही गूढ बिषय हैं। मैं पुछना चाहता हूँ। इस समाज से क्या आप अपने पूर्वज को मूर्ख बता सकते हो। अगर बोल सकते हो और इसका


 सबुत दे सकते हो तो फिर आप कहीं ना कहीं समाजिक नीतियों मैं बदलाव के हक मैं हो। और अगर आप ऐसा नहीं करतें तो फिर आप से बड़ा दोगला सामाजिक व्यक्ति इस समाज मैं रहने योग्य ही नहीं है।  

मुझे लिखकर बडा़ अजीब लग रहा है। देश के कुछ बुद्धि जीवी भी खुद को इस दोगले व्यवहार और व्यवस्था मैं ऐसे भागीदार बना रहे हैं। जैसे उन्हें कोहिनुर मीलने वाला है। ऐसें मूर्ख राजनीतिज्ञ के लिये बस दो बातें ही लिखुंगा। 

तुम अपनी आत्मा को बेचकर कभी अमीर नहीं बन सकते। 

अपनें पूर्वज को गिराकर कोई सम्मान नहीं पा सकते। 

ये देश चाहे इक्कीसवी स्ताब्दी मैं हो या बहतरवीं स्ताब्दी मनाऐं जब तक आप समाज को एक नजर एक भाव और एक भाषा में नहीं लाओगें। 

तब तक कुछ भी संभव नहीं। क्योंकि आज हर एक समाज सिर्फ़ अपने धर्म को महान बताने अपनी संस्कृति को उतम बतानें के लिये लड़ रहा हैं। 

समाज की नैतिकता पर कुछ सवाल//Some questions on the morality of society💐

जब की एक सत्य ये भी हैं सही मायने में धर्म और संस्कृति की लाज रखने वाले वो गरीब लोग जो गाँव के समाज मैं रहते हैं। उन्हें कभी कोई तकलीफ़ नहीं होती। 

हिंदु दलित समाज और मुसलिम समाज को भी ये समझ लेना चाहिए की क्या उनका कोई अस्तित्व हैं भी या नहीं। क्यों एक पागल समाज की दोगलियत को नहीं समझ रहें हो। 

जो धर्म आपका हैं उसे स्वीकार करें। अपने अपने समाज की उन्नति के लिये कार्य करें। मित्रों एक बात हमेशा याद रखने योग्य हैं। किसी भी धर्म या जाती को हानि पहुँचाकर कोई भी वर्ग महान नहीं बन सकता। 

एक राजपुत कभी अपने धर्म से समझौता नहीं करता। एक ब्राह्मण को कभी अपनी मर्यादा से बाहर जाकर किसी वर्ग का अपमान नहीं करना चाहिए। 

यहीं बात समाज के सभी धर्म के अनुयायीयों पर भी लागु होती हैं। सभी को सभी धर्म के प्रति जवाबदेह होना चाहिए ।।

एक बात और बोलना चाहता हूँ।  युथ के लिये फिर चाहें वो लड़की हौ या लड़का आप सभी का आपके जीवन मैं सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण स्थान आपके माता पिता का होता हैं। कृपया उनकी परवरिश का देश समाज मैं मजाक ना बनाएं। 

आप पढ़ लिखकर जवान होते ही सारे फैसले  खुद से  करने लग जाते हो। आप भुल जाते हो आपके जीवन की डोर आपके माता पिता ने संभाली हैं। उनका सबसे ज्यादा योगदान हैं। जैसे आप सब इश्वर के समक्ष बोलते हो। हमारा अच्छा और बुरा सब आपको सोचना है। वही काम माता पिता करते आये हैं आपके जीवन में। 

तो मित्रों धर्म जाति माता पित्रा इश्वर गुरू सभी का महत्व जीवन में वंदनीय हैं। अगर आप इन तथ्यों को नहीं अपना सकते तो आपके जीवन का कोई अर्थ नहीं। (🙏जय हिंद वंदेमातरम 🙏)☝लेखक रंजीत चौबे। 

समाज की नैतिकता पर कुछ सवाल//Some questions on the morality of society💐


17/07/2019



वक्त और मंजील का मिलना //poetry 💐

#EDMranjit 

 वक्त और मंजील का मिलना //poetry 💐

वक्त और मंजील।

का मिलना।

आसान नहीं होता।

बिन कोशिश मेहनत।

से मिली सफलता।

का कोई मुल्यांकन नहीं होता।।

।।

कभी कभी सबने देखा होगा।

हवा का कोई रूख नहीं होता।

वो हर दिशा मे बहती चली जाती हैं।

बस वैसे ही दिशाहिन वक्ति का।

कभी विकाश नहीं होता।।

।।

धरती का हर जीव प्रर्यतनशिल हैं।

चिंटी से लेकर हाथी तक।

फिर कुछ मनुष्य अभी भी।

बिन किये सब मिल जाऐं।

कि तमन्ना लिये रहते हैं।।

।।

हर बार देखता आया हैं।

अंजाम तु अपनी आँखों से।

फिर लालच का ये परदा क्यों।

अब भी तुझमें जिंदा हैं।

।।

कुछ करम तेरे हैं बाकी तो।

उनको ऐसे बदनाम ना कर।

अब आदि से आदर्श नगर।

तु कर्मो का प्रस्थान कर।।

।।

पहलें भी लिखता आया हु।

आगें भी लिखता जाउँगा।

जो समझें हैं वो अपने हैं।

औरों को भी समझाऊँगा।।

वक्त और मंजील का मिलना //poetry 💐

#रंजीतचौबेलेखक।।

#दिनांक17/07/2019

Tuesday, July 16, 2019

हवा की तलाश जारी है //poetry 💐

#EDMranjit 

हवा की तलाश जारी है //poetry 💐

हवा की तलास जारीहै ।

मन की वो आस अभी जारी है ।


पल पल गुजर रहा है वक्त फिर भी। 

मिलें ओश की वो बुंद तन को। 


आँखों की वो प्यास आज भी जारी है। 

कैसा हैं इंसान आज का देखो जरा।


घुम रहा बेईमान बन के देखो जरा। 

वो कहता हैं चलों बस चलते ही रहो।


मिलेगा एक रोज वो अजर अमर भी। 

क्योंकि सत्य की तलाश अभी जारी है।


एक एक पग हौसले का बढा़ओं। 

मन की सारी शक्ति सारी उर्जा लगाओं। 


अब वक्त आ गया है युग परिवर्तन का यारों। 

क्योंकि भारत माता से गद्दारी अभी भी जारी है। 

हवा की तलाश जारी है //poetry 💐

16/07/2019#रंजीत चौबे ।।



Sunday, July 14, 2019

धिरे धिरे आहिस्ता से कदम बढ़ाते रहना //poetry 💐

#EDMranjit 

धिरे धिरे आहिस्ता से कदम बढ़ाते रहना //poetry 💐

  कभी कभी सब समझ कर किया जाता हैं। 

कभी कभी वक्त अपनी करवा लेता है। 

जिंदगी तो इंसान को बस इशारो पर रखना चाहती हैं। 

जब चाहा जहाँ चाहा लाकर खड़ा कर देती हैं। 

कौन चाहता है दरबदर फिरता रहे। 

मुकाम की चाहत लियें मुक्कदर मैं। 

यहाँ आजकल लोग तरक्की जैबो से तोला करते हैं। 

दुनियाँ भर में दुकानदारी हो रही हैं। 

सिफारिशों की भरमारी हो रही हैं। 

आप चलतें रहो अपना हुनर ख्वावों में सजाऐं। 

यहाँ तो दोस्तों रूपयो से इमानदारी हो रही है। 

दिल तो कहता हैं ऐं दुनियाँ तुझे सलाम करू। 

तुझ जैसा ही बनु तेरा किरदार करू। 

पर संस्कारों के दामन को भी भुला नहीं सकता। 

 ऐ जिंदगी मैं तुझे बेईमान बनाकर रुला नहीं सकता।

 सब कुछ बदल जाएगा अगर तु डटा रहा तो। 

वो सब पा सकता है अगर तु लगा रहा तो। 

क्योंकि हार कर जीत लेते हैं जो दिलो को। 

सच कहें इस जहां में मुकाम वहीं पातें हैं।

धिरे धिरे आहिस्ता से कदम बढा़ते रहना। 

वक्त चाहें जैसा हो मुस्कुराते रहना।

उन्हें भी साथ लेना जो थके हुये थे राह में। 

अपनी कामयाबी के साथ उन्हें भी उठाते रहना ।।

धिरे धिरे आहिस्ता से कदम बढ़ाते रहना //poetry 💐

Motivational thought Mr ranjit choubeay//

दोस्तों कामयाबी एक ख्वाब हैं उसे हर रात देखना। 

वो एक दिन हकीकत का रूप लेकर आपसे मिलने जरूर आएगी।।। 

date 14/07/2019writing by Rkc. Edmranjit.com











Friday, July 12, 2019

हम निभा नहीं पाऐं// poetry💐

#EDMranjit

हम निभा नहीं पाऐं// poetry💐

देखो तुम मीलो हमसे।
पर बस अजनबी रहों।
क्योंकि अपनों का साथ।
हम निभा नहीं पाऐं।
।।
जब भी कोशिश की हमनें।
अब सम्भल जाऐ हम।
बस फिर गिर गये ऐसे।
 वापस फिर चल ना पाऐं।
।।
रूकी मंजिल मेरी।
रूका रूका सा कारवाँ रहा।
जब भी कदम से कदम मिलाऐ।
वक्त ने हमें तनहा किया।
।।
वो मिशाल बनें कुछ पल।
जिन पलों मे मेरा साथ रहा।
लेकिन समझें वो बात नहीं।
क्यों हमसे वक्त उदास रहा।
।।
कभी नहीं जान पाऐं हम।
वक्त की चाह क्या रही हमसे।
अगर जानते तो शायद आज।
यहाँ अलफ़ाज़ कुछ और होते।
।।
अभी तलक दबें से रहते हैं।
कोशिश नहीं करते उठने की।
क्योंकि जिंदगी ने चाहा ही नहीं।
हम भी उठकर उसे सलाम करें।

हम निभा नहीं पाऐं// poetry💐

।।लेखन रंजीत चौबे।।
।।दिनांक 12/07/2019 ?
......

Wednesday, July 10, 2019

दुनियाँ की भीड़ में अक्सर एक ऐसा चेहरा भी होता हैं //poetry 💐

###ranjit//

दुनियाँ की भीड़ में अक्सर एक ऐसा चेहरा भी होता हैं //poetry 💐

अक्सर दुनियाँ को झुकाने वालें।
हजारों बार झुकते आऐं हैं।
अक्सर गालियां खानें वाले ने।
कुछ इतिहास भी बनाऐं हैं।।
।।
दुनियाँ की भीड़ में अक्सर।
एक ऐसा चेहरा भी होता हैं।
जो लाखों सपने लेकर रोज।
फुटपाथ पर सौता हैं।
।।
हममे से सबकी लाईफ।
कभी एक सी नहीं हौती।
वरना कभी किसी की लाईफ।
में आवरगी नहीं हौती।
।।
कुछ किस्से कभी मजबुरियां।
में भी बनाऐं जातें हैं।
अक्सर गरीबों का मजाक।
भी बनाया जाता हैं।
।।
दुनियाँ में हम सबके बीच।
कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ।
गलत हौता रहता हैं।
और कभी ना कभी।
सच्चाई से सामना भी हौता हैं
।।
कहानियाँ कहां छुपाने से।
छुपा करती हैं।
कहानियाँ अक्सर सच्चाई।
बयाँ किया करती हैं।
कुछ लोग सच को छुपानें।
की कोशिश भी करते हैं।
पर अंत में यही कहानियाँ।
इतिहास बयाँ करती हैं।।
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#रंजीतचौबे

दुनियाँ की भीड़ में अक्सर एक ऐसा चेहरा भी होता हैं //poetry 💐

#दुनियाँकीभीड़मेअक्सरएकऐसाचेहराभीहौताहै।।
#लेखनरंजीतचौबे
#दिनांक10/07/2019

Tuesday, July 9, 2019

Poetry //कितनें सत्य जीवन के💐

###ranjit//

Poetry //कितनें सत्य जीवन के💐

इतना गैरत भी नहीं के गिर जाऊ।
बीना पंख के भी मन सबसें तेज है ।
दुर निगाहों से देखता इंसान चाँद को।
आसमां मैं भी बहुत सारें छेंद हैं ।
कभी नदियों का बहना गौर करो।
समुन्दर के विशाल आकार को निहारों।
सब कुछ समाहित कर जानें वाला भी।
अपनी खामोशियों से शान्ति फैला रहा है ।
अदम्य साहस भर कर भी हाथी डरता हैं ।
एक छोटी सी चींटी से सिंहरता हैं।
सब कुछ पाना ही जिंदगी का राज नहीं।
जन्म और मृत्यु के बीच में संघर्ष सत्य है ।
कभी भटक जाता हैं ज्ञानी पुरूष भी।
धर्म सत्य ज्ञानी और अज्ञानी के बीच सदैव।
जो फैला रहा फैला रहेगा वही जीवन मतभेद है।
अगर खुद ही विकार संबल हो जाएं।
मन खुद ही प्रबल हो जाएं।
तो अंधकार सा लगने वाला जीवन भी जल ऊठे।
फिर कैसा रंगभेद सारा जहाँ अपना स्वदेश हैं ।
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Poetry //कितनें सत्य जीवन के💐

#रंजीत चौबे। 09/07/2019

Monday, July 8, 2019

Writing kaise kre sklis

https://youtu.be/E76FUUVQhkA

अब जिंदगी मैं वापस जाना नहीं है //पोयम//💐

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अब जिंदगी मैं वापस जाना नहीं है //पोयम//💐

अब जिंदगी में वापस।
जाना नहीं हैं।
किसी से भी दिल ये।
लगाना नहीं हैं।
कोई इसकों तोड़ें खिलौना।
समझकर।
ऐसें लोगों की बातों में ।
आना नहीं हैं।

```नहीं कोई मेरी तमन्ना रही अब।
नहीं कोई सपनें सजाएंगे हम।
जो अपना समझकर पराया हैं करता।
ऐसे लोगों से मीलने ना जाऐंगें हम।

``मेरी हर कहानी के पन्नों में शामिल।
मेरी जिंदगी के वो पहलू हैं मिलतें।
जहाँ हर कदम लिखी हमनें नफरत।
वो साहिल किनारें से सजदा करें क्यों।
``हर एक पन्ना मेरी कहानी कहेगा।

हर एक आँसू बहकर नादानी लिखेगा।
नहीं होगा कोई तेरा साहिल बनकर।
ये इश्क ही तेरी कहानी कहेगा।
``हमनें खाई हर बार चोट।

फिर भी कुछ सीख ना पाएं।
एक नई शुरुआत के लिये।
हम क्यो लौट आएं।
```क्यों आशिक ही बरबाद होतें हैं।

उनकीं खता क्या हैं दुनियाँ वालों।
तुम बताओं नफरत के ठेकेदारों।
क्या दिल जलाने की ठेकेदारी मिलती हैं।
```दुनियाँ में भलें ही घर ।

चारदिवारी होतें हैं।
पर दिल की तो एक ही दिवार हैं।
क्या करेंगेः अब सच्चे दिवाने।
दिल की दिवारों पर चल रही तलवार हैं।
``टुटा हैं दिल अब जोड़ना नहीं चाहेंगे।

राह बिछ़डी हैं अब जोड़ना नहीं चाहेगें।
जला दे़गें अपनें दिल को इस तुफान में।
पर अब लौट कर मीलना नहीं चाहेंगें।
```जैसे बिन हवा के लौ नहीं उठती।

जैसे जल के भी दियें को अपनी।
रोशनी नहीं मीलती।
शायद ऐसी हैं इस दिवानें की मोहब्बत।
इसें  मोहब्बत कर के भी।
मोहब्बत नहीं मीलती।

अब जिंदगी मैं वापस जाना नहीं है //पोयम//💐

#रंजीतचौबे।
#अबजिंदगीमेवापसजानानहीहै।

9/07/2019 www.edmranjit.com

Writing editing by ranjit choubeay.

Sunday, July 7, 2019

सत्य अटल हैं सत्य की सतह पर//पोयम💐

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सत्य अटल हैं सत्य की सतह पर//पोयम💐

सत्य अटल हैं सत्य की सतह पर।
तुम चलकर देखो।
हौसला बढ़ता जाएगा।
कुछ बदलाव ला सकोगें तो।
चमक उठेगा और सत्य कोमल हृदय पर।
सत्य अटल हैं सत्य की सतह पर।
कभी सत्य से तुम कुछ माँग लेना।
वो पुलकित मन से तुम्हें वरदान देगा।
जब भी घबराओगे तुम धरा मैं ताल के नियमों से।
वो तुम्हारी बागडोर खुद ही थाम लेगा।
सत्य अटल हैं सत्य की सतह पर।
अर्जुन को याद करना जब मन अधीर हो।
कृष्ण को साथ अवश्य पाओगें।
भटक नहीं सकतें कभी तुम जीवन मैं ।
जो सत्य राह अपनाओगे।
सत्य अटल हैं सत्य की सतह पर।
चलता रहेगा यें सत्य का पहिया।
जब तक तुम तन मन कर्म से इसे बढा़ओगें।
रास्ते मैं कांटो पर भी फुल सा बना पुल पाओगे़।
क्योंकि सत्य अटल हैं सत्य की सतह पर।
हिमालय से भी ऊँचा जीसका यस रहा हो।
उस राह को विचरना अद्भुत योग होगा।
झुठी माया के बंवडर से निकलकर देखो।
सिर्फ धर्म विजय सत्य का संयोग होगा।
सत्य अटल हैं सत्य की सतह पर। 🙏🏻
क्योंकि सत्य अटल हैं सत्य की सतह पर।

सत्य अटल हैं सत्य की सतह पर//पोयम💐

#रंजीत #चौबे
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07/07/2019

Saturday, July 6, 2019

Pubg ये गेम नहीं आप के भविष्य की बरबादी है। आर्टिकल //💐

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Pubg ये गेम नहीं आप के भविष्य की बरबादी है। आर्टिकल //💐

हैल्लो friends आज मैं बात करने वाला हूँ ।pubg game ko लेकर ।

क्योंकि हमारा युथ इस गेम को लेकर कुछ ज्यादा ही सिरियस जौन मैं हैं। 

आप सब जानते हैं आज देश में स्किल इंडिया डिजिटल इंडिया का का एक नारा दिया जाता है ।

माननीय प्रधानमंत्री जी ने दिया है । 

दोस्तो गेम ही क्यों ।

स्किल इंडिया क्यों नहीं ।आप सौलह साल से लेकर पच्चीस तीस चालीस साल तक के युथ इस गेम मैं अपना काफी वक्त बरबाद कर रहे है ।

कुछ बहुत कम उम्र के बच्चें भी अपनी स्टडी को ठिक से नहीं कर पा रहें ।

सिर्फ़ इस गेम के पीछे। 

वाह बहुत डिजिटल हो रहा है मेरा भारत ।

महान है देश के पेरेंस भी। 

दुनियां ही नहीं पुरा विश्व जानता है।

भारत विश्व का सबसे बड़ा यूथ वाला देश हैं। 

चीन जापान अमेरिका रूस और इंगलैंड जैसे देशों मैं ।

एक 10 साल का बच्चा एक नया गेम बना देता है ।

वहाँ के बच्चें खेलने से ज्यादा गेम बनाने स्किल सिखनें के शौकीन होते हैं ।

और आप मेरे देश के महान युथ महान भविष्य बच्चों को   बडे़ बड़े मोबाइल फोन हाथों में पकडा़ कर दुसरे देशों का। 

भविष्य उज्जवल कीजिए। 

क्या आप सब जानतें हैं ।इन तमाम गेमों की वजह से कितना बुरा प्रभाव हो रहा हैं ।

बच्चों के सेहत पर उनकी पढाई लिखाई पर सब जानबूझकर हो रहा है ।

Pubg ये गेम नहीं आप के भविष्य की बरबादी है। आर्टिकल //💐

एक मार्क जुकर बर्ग आया फेसबुक बना दिया । फिर किसी चीनी ने पबजी बना दिया। 

क्यों भारत ऐसा क्यों। 

कम से कम अपनें बच्चों में इतने संसकार तो रहने दो। 

की वो बूढापे मैं। आपको दो रोटी खिलायै। 

वरना आप रोटी के लिये रोते रोते मर जाओगे। 

और आपके बच्चें कुछ गेम वाली दुनियां मैं। अपने माँ बाप को तलासते रहेंगे।

अभी कुछ वक्त पहलें ही इस गेम की वजह से कुछ एक बच्चों की बिमारी से जान गई।

अगर कोई भी बच्चां दिन के दो या तीन चार घंटे गेम खेल रहा है तो इसके फायदे तो कुछ नहीं पर नुकसान मैं सौ से ज्यादा बता सकता हु। 

मंथ के साठ या अस्सी घंटे की किमत एक प्राइवेट कंपनी में जाँब करने वालें उस कर्मचारी से पुछना जो काम खत्म होने के बाद भी काम पर रूकता हैं। 

सिर्फ़ इसलिये की उसके बच्चों को कोई तकलीफ ना हो। 

और वहीं बच्चे बड़े आरम से पापा के अरमानों को पबजी मैं बंदुखो से उड़ा रहे है। 

जरा सोचियें अगर ये वेस्ट टाइम कुछ सिखने या रिंडीग मैं लगाया तो बच्चों का भविष्य क्या हो सकता है। 

सोचो अगर सचिन तेंदुलकर पबजी खेलता तो फिर क्या वो महान प्लेयर बन पाते। 

विराट कोहली या रोहित शर्मा भी अपनी प्रैक्टिस छोड़ कर पबजी या फिर कोई और गेम खेल रहे होते तो कहाँ होते। 

इसलिये खैलना भी है ।

तो उस राह मैं खैलिये जहाँ आपका भविष्य हो। 

इतना समझ जाओं भारत का हर बच्चा गेम तो नहीं बना सकता लैकिन इसकों खेलकर बर्बादी के रास्ते पर जरूर जा रहा है ।

मैं सभी भारतीय पेरेंस से अनुरोध करना चाहता हूँ। 

अपने बच्चों को वक्त दीजिए। 

उनसे बाते किजिऐ । उनको  इतना स्पेस मत दिजिऐ की बस वो एक दस इंच के डिस्प्ले मैं ही समा कर रह जाएं। 

क्योंकि आप का स्नेह ही उन्हें समाज मैं हो रही। 

बुराईयो से बचा सकता है।

 कुछ पल जिंदगी को दिजिऐं आप सब देखिये तो सही। 

दुनियां मैं जिंदगी खुद आपके साथ कितने अनोखे गेम खेलती हैं। 

कुछ आकडों के अनुसार आज भारत में सबसे ज्यादा बच्चे गेम का शिकार हो रहे हैं। 

और गेम बनाने वाली कंपनियां रातों रात अरबो कमा रही हैं। जिसमें 95% कंपनियां विदेशी हैं ।

बाकी आप सब समझदार ही है ।जय हिंद। 

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रंजीत चौबे। 07/7/2019

Pubg ये गेम नहीं आप के भविष्य की बरबादी है। आर्टिकल //💐

 

सब भाव बिखर गयें हैं। पोयम💐

###ranjit//

सब भाव बिखर गयें हैं। पोयम💐

सब भाव बिखर गये है
अब भाव कहा से लाऊगा
चींता और लकीरो की।
वो चाव कहा से लाऊगा।
पतझड़ गुजरा सावन भादो
पनपी अब जीवन की आशा।
पहलें से ही डुब गई जो
अब वो नाव कहा से लाऊगा।
तलब लिये बारिश की प्यास।
धरती पुरी सुख गई थी।
लिये थाम हाथों में पगहा।
अब खूट कहा से लाऊगा।
टोला था जो पूरब पश्चिम।
दक्षिण उतर भी टोला था
घर सारे ढहे गये थे।
अब गाँव कहा से लाऊगा।
त्राहि माम जीवन का ऐसा
बारिश ने जो काम किया।प
उजड़ गया बगियाँ सा जीवन।
अब फुल कहा से लाऊँगा।
मंदिर मश़जिंद और चर्च का।
ऐसा जो विधवंश हुआ।
पुजत थे जो बांट बांट कर।
अब वो जात कहा से लाऊँगा।
तड़प रहा अब भटक रहा हु।
दुख ऐसा जो अंतहीन है।
बता सकु ये जीवन दर्शन।
अब इंसान कहा से लाऊँगा।

सब भाव बिखर गयें हैं। पोयम💐

।। #लेखक।। #रंजीत #चौबे।॥
#राधे #राधे##दिनांक 06/07/2019

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Friday, July 5, 2019

बनों तुम बेहतर इंसान बनों//पौयम💐

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बनों तुम बेहतर इंसान बनों//पौयम💐

करो कुछ बेहतर ।
मानवता की पहचान बनों।
नहीं कुछ भी अच्छी बातें यहाँ।।
कुछ अच्छी फिजाँ कि बयार बनों।।
।।
तुम फुलों फलों और आगे बढ़ो।।
अपनें साथी जनों को ले साथ चलों।
हम जीवन परिन्दे धरा पर हैं सब।
में तु से निकलकर सब एक बनों।।
।।
ये जीवन की रहिया।।
सबकी एक हैं भईया।।
तुम आऐं थें जैसे ।
हम भी आऐं हैं वैसे।।
।।
ये धरती गगन आकाश हमारा।
इसने हमकों और तुमको।
सबको मिलकर संवारा।
फिर काहे का लालच हमारा तुम्हारा।
एक मिट्टी से बनता तन मन ये हमारा।।
।।
चलें जब बयार धरा पर तो देखों।
हर प्राणी को मिलता हैं कितना शुकुन।।
ये शीतल ये माया प्राकृतिक ये छाया।
छुपा इसमें कोमल सतु एक विचार।।
।।
रब ने एक ही मिट्टी और भाषा गढ़ी।।

तन में एक ही रंग कि धारा बही।

फिर भी भटके हैं मन के छकून्दर ये चौर।
क्यों समझें ना रब की भाषा सही।।
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बनों तुम बेहतर इंसान बनों//पौयम💐


#कवितालेखकरंजीतचौबे
#दिनांक007/2019
#बनोतुमबेहतरइंसानबनों।।

Thursday, July 4, 2019

थोड़ी सी खोई हैं जिंदगी //थोड़ी उलझी भी है //💐

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थोड़ी सी खोई हैं जिंदगी //थोड़ी उलझी भी है //💐

थोड़ी सी खोई हैं जिंदगी।
थोड़ी उलझी भी हैं।
थोड़ी चल पड़ी हैं गाड़ी।
थोड़ी सुलझी भी हैं।

:

सहज हैं भाव मेरे अब।
कभी जो बिखर गयें थे।
नजर जो राह से अपनी।
अधर में भटक रहे थें।

:

किताबों की झलक से।
लौट आई ।
अब आश अपनी।
जो पतझड़ में तड़प कर।
साख से यु गिर रहें थें।

:

नहीं हैं दरम्यां कोई।
नहीं हैं दुरियाँ कोई।
जो बचकर दुर हमसे।
अजनबी से हो रहे थे।

:
नहीं हैं आरजू की लत।
नहीं थी मोशिकी कोई।
जो उलफत बन रहे थे तुम।
वो यादें अब मेरी खोई।
वो यादें अब मेरी खोई।
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✌👈👉☝👆🖕

थोड़ी सी खोई हैं जिंदगी //थोड़ी उलझी भी है //💐

#लेखन
#चौबेरंजीत
#दिनांक

#04..07.2019

Wednesday, July 3, 2019

बरबस उलझें आसमान में /मैं और उलझता गया//💐

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बरबस उलझें आसमान में /मैं और उलझता गया//💐

आज फिर से निगाहे ।
आसमान से टकराई।
कितनी ही सुरतो से।
सजा आसमान नजर आया।
।।
दिमाग ने जौर दिया ।
आँखों ने मुआयना किया।
दिल ने तो ना जानें कितनी।
सुरतो को मानों देख लिया।।
।।
बरबस उलझें आसमां में।
मैं और उलझता गया।
मजा तो तब आया मुझे।
में जितना डुबता गया।
मुझे उतना सुकून मिलता गया।
।।
एक बार तो आसमान में।
केलाश भी नजर आया।
पर फिर आँखों से ओझल।
मानों अद्शय सा हो गया।
।।
मैने कोशिश बहुत की।
बिराट आसमान को समझने की।
पर मन को एक सुकून के आलावा।
और कुछ ना मिला।
।।
जिज्ञासा बढती गई।
इंसान जो ठहरा।
और हम सब तो परछाइयाँ ।
से भी बाते कर लेतें हैं।।
।।
वापस ताकता रहा।
में सजें आसमान को।
विचार आया ऐसा जैसे।
वो भी हमें ही ताक रहा हो।
।।
पर हमेशा की तरह ।
 ऐसा कुछ ना हुआ।
देखतें ही देखते आज।
एकबार फिर आसमां साफ हो गया।
।।
मन में हजारों प्रशन उभरें।।
जिज्ञासाओं ने डेरा जमाया।
आशाओं की झौली ने।
एक फिर से उम्मीद की।
किरण पर आश लगा ली।।
।।
कवि कुछ ना समझा आसमां को।
पर एक बात लिख गया।
विशाल आसमान और।
विशाल मन का कोई अंत नहीं।
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Writing by ranjit choubeay.

बरबस उलझें आसमान में /मैं और उलझता गया//💐

#दिनांक
#03/07/2019
#लेखनरंजीतचौबे
#

Monday, July 1, 2019

फलता फुलता एक सामाजिक परदा//इसका सच भी समझ लीजिए//💐

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फलता फुलता एक सामाजिक परदा//इसका सच भी समझ लीजिए//💐

परदा क्या है इसके पिछे भी एक छुपी सोच हैं#
#परदे के पिछे#॥॥
।।
दोस्तों आशचर्य की बात है लेकिन कोइ झुठ तो बिलकुल भी नही।
आईये हम आपको बताते हैं।
ये परदा क्या है आखिर इसके पिछे कि स्टोरी क्या है।
दोस्तों भारतीय संस्कृति में परदे का बड़ा महत्व हैं।
और इस युग मे तमाम तरह के परदे भी हैं।
आप सोच रहे होंगे ।
आखिर ये परदा हैं कैसा। तो में आपको परदे के कई रूप दिखाना चाहुंगा।
और फिर इसके पिछे का हर रहस्य आप खुद ही समझ जाओगे।
लेकिन दोस्तों परदे के पिछ जो स्टोरी आप अभी पढोगे उसमे मैं आप हम सब आ सकते हैं और हम सब पर कही ना कही ये परदा लागु हैं।
तो आप सभी से अनुरोध हैं इसे एक मनोरंजक स्टोरी समझ कर ही स्वीकार करें।
इसमे किसी के निजी जीवन या निजी व्कतित्व की झलक मील सकती हैं पर वो बस लेखक की सोच हैं।
लेकिन फिर भी एक लेखक होने के कारण।
में आप से कहना चाहुंगा ये लेख पढने के बाद।
अगर आपको लगता हैं आप को खुद में कुछ चेंजेस की जरूरत।
हैं तो आप से अनुरोध हैं आप खुद में वो बदलाव जरूर लाइऐ।
क्योंकि लेखक ने इस लेख को लिखते वक्त इंसान की उन तमाम खुबियों को ध्यान में रखा हैं।
जो सही हो या गलत हम सब छुप छुपाकर अपनी आत्मा को।
गलत करके भी करतें हैं और ना चाहतें हुये  भी उन्हें अपनाते हैं।
क्योंकि हमारा जीवन तो सरल हैं पर उसमे आने वाले तुफान।
व पथरिले रास्ते वो बड़े जटिल हैं।
हम चाहें तो उस जटिलता को बड़ी आसानी से तय कर सकते हैं।
लेकिन हम अक्सर कुछ ऐसी भुमिकाओं को भुल जाते हैं।
जो हमे बिरासत में मिली हैं।
जिसके जरिये हम हर मंजिल हर रास्ता व हर कोशिश में।
कामयाब हो सकतें हैं।
दोस्तों ये जो परदा हैं जो हमने ऊपर लिखा हैं।
दरअसल ये कही और नहीं होता ।
सबसे पहले तो ये हमारे पास होता हैं।
मेनें ऊपर लिखा हैं परदे के कई रूप होते हैं।

फलता फुलता एक सामाजिक परदा//इसका सच भी समझ लीजिए//💐

दरअसल अपने आसपास कई बार हम खुद मेहसूस करते हैं।
कि हमने कुछ ऐसा काम किया जो हमे नहीं करना चाहिये।
एक उदाहरण।
जेसे कि मेने शराब पी ली और सबसे पहले खुद से ही झुठ बोलना हमने नहीं पी।
और उसके बाद सामने वालें से छुपाने कि तमाम कोशिश।
जब की हम अच्छी तरह से समझते हैं।
ना तो हम नशे को छुपा सकते हैं ना ही नशेबाज को।
अब यहाँ जो हम छुपानें वाला काम कर रहे हैं।
उसको भी हम एक परदा कह सकते हैं।
वैसे ये बाते जानते सब है पर जान कर अंजान बनने की कला को भी परदा कहां जा सकता हैं। क्योंकि कुछ बातो को कुछ लोग ओपन नहीं करते और समाज उसे परदे का नाम देता हैं।
आज हम जो भी काम करते हैं।
उसमे ज्यादातर काम मतलब लगभग 70%हिस्सा तो छुपा कर ही। करतें हैं और क्यो करते हैं वो भी आप सब खुब समझते हैं।
जैसे कि में एक डांक्टर हु।
और वो भी गौरमेंट हास्पिटल का सरवेन्ट हु।
लेकिन समाज का सेवक भी हु।
पर वो सब भुलकर हम पहले कमाई करते नजर आते हैं।
और नाम छुपाकर रहते हैं बैइमानि का।
ये भी परदा ही हुआ ना।
ईनजिनिअर एडवोकेट बिजनेसमैन और फिर पौलिटिशियन।
ये लोग बड़े शौक से अपने नाम के आगे।
बड़ी बड़ी उपलब्धियां जोड़ते फिरते हैं ।
पर अगर आप इनका बायोडाटा चैक करोगे तो पाओगे।
कि किसी का भी परदा ओपन नहीं हैं।
सबका परदा एक हद तक गिरा ही हुआ हैं।
सब परदे के पिछे छुपे हुये हैं इसके आगे आने की।
इनकी कोई तमन्ना नहीं हैं।
क्योंकि इन्हें डर हैं कही परदे का राज खुला तो इनकें।
जीवन का राज खुल जाऐगा।
दोस्तों सच और झुठ के पिछे छुपे इस तिसरे राज का।
नाम ही परदा हैं।
क्योकि हम सच तो बोलते नहीं और झुठ को ही सच साबित करने में परदे का जन्म होता हैं। और फिर हर इंसान के पिछे एक परदा बना ही रहता हैं।
एक सबसे बड़ी सच्चाई हमारे कानून की आंखों पर पट्टी।
इसका सबसे बड़ा सबुत हैं।
वो भी सच को अपने आंखों के पिछे रखना ही पंसद करता हैं।
तो हम आप हम सब वहीं सिखते हैं।
जो हमे दिखाया जाता हैं जो हमारे सामने होता हैं।
और फिर आने वाले कल को भी वही मैसेज देते हैं।
और फिर आगे उसी का विस्तार से वर्णन होता आया हैं।
क्योंकि एक कहावत बहुत प्रचलित हैं जैसा बीज बोयेगा।
वैसा ही फसल काटेगा।
हम भी आज जैसे समाज का निर्माण करेंगे जैसा माहौल पैदा करेंगे बिलकुल वैसा ही आने वाला कल होगा।
दोस्तों आप किसी भी एक बड़े वर्ग को देखो वो।
अपनी सम्पुर्ण गलतियाँ को समाज के सामने लाना ही नहीं चाहता।
चलो मान लिजिये ये इनकी जटिल सम्स्या हैं।
पर इन्हें समाज को कम से कम वो सब तो देना चाहिए जो समाज को इन सबसे चाहिए।
अगर हम खुद परदे में रहना चाहते हैं तो रहे पर।
हम अपने समाज को इस दौहरे रूप से बचा सकते हैं।
लेकिन नहीं यहाँ भी राजनितिक हैं हर जगह चोरी की बू आती हैं।
कोई भी खुद को इमानदार नहीं रखना चाहता।
बस ऊपर से बुट पांलिश हैं पर अंदर तो सब सड़ा हुआ हैं।
मतलब साफ हैं आज हर तरफ सड़े हुये पोलिटिशियन।
अपनी सडी़ हुई सोच से।
जनता समाज को सडा़ती हैं।
और हम भी सड़ने को तैयार बैठे हैं।
क्योंकि डाक्टर इंनजिनियर पोलिटिशियन बिजनेसमैन।
सब इसी वर्ग मतलब हमारे बीच से गयें हैं।
अगर सुरू में ही हमने इन्हें एक अच्छा समाज दिया होता।
तो इनकी सोच भी बिकशित होती ।
और इन्हें अपने समाज को बिकशित बनाने मे मद्त मीलती।
पर अफसोस ये लोग खुद बीमार हैं ।
तो ये क्या किसी का ईलाज किसी की मद्त या फिर कोई अच्छा संदेश संचार करेंगे।
आप खुद देखिये किसी गरीब का घर एक साहुकार हड़प लेता हैं। गरीब कोर्ट में जाता हैं वहाँ एडवोकेट का कर्तव्य ये हुआ कि।
वो उस गरीब की उचित मद्त करे उससे उचित फिस ले और गरीब को उसका हक दिलाऐ।
पर ऐसा होता नहीं हैं।
बेचारें गरीब का घर भी जाता हैं मैहनत से कमाऐ पैसे भी जाते हैं।
और वकील साहब दोनों तरफ से कमा लेते हैं।
कहा रहा ईमान कहा रहा सभ्य समाज और कहा रही ऊचीं शिक्षा।
खुद को समाज का रखवाला कहने वाला वकील तो ।
समाज को लुटने और बैचने का काम कर रहा हैं।
अब वर्दी की ताकत देखिये।
आज एक आम आदमी एक पुलिस की नौकरी के लिये।
वर्दी पाने के लिये उचित शिक्षा के बाद भी एक मोटी रकम भरकर पुलिस बनता हैं जनता समाज हम आज और कल दोनो की जिम्मेदारी लेता हैं और फिर शुरू होती हैं उसकी डियुटी।
और काम वहीं जो इनके बड़े भाई वकील साहब करते हैं।
कहां कोई परदे से आगे आकर काम करना चाहता हैं।
हम एक बात और बता दे यहाँ एक छोटा अधिकारी हो या कोइ बड़ा पोलिटिशियन सब एक साथ मीले हुयें होते हैं।
भले ही इन्होंने कभी एक दुसरे की शकल ना देखी हो।
पर परदे की आड़ मे इनका काम इन्हें एक दुसरे से जोड़ता हैं।
दोस्तों हम सोचते हैं समझते हैं और गुमराह बनते हैं।
आप समझ सकते हैं लेखक ने इस लेख का नाम परदे के पिछे।
क्यो रखा हौगा।
ये एक गहरी सोच और गहरी समझ हैं हम और आप इसे भंलि भान्ति समझ सकते हैं।
क्योंकि हर परदे की जड़ हमारा समाज हैं।
अगर समाज चाहें समुह चाहे तो हर परदा ओपन हो सकता हैं।
हर राज का खुलासा हो सकता हैं हर काम सफल हो सकता हैं।
पर उसमे अहम भुमिका उस पिछड़े हुयें समाज की ही हौनी चाहिये।
जो इस परदे को अमलिया जामा पहनाने में सबकी मद्त करता हैं।

फलता फुलता एक सामाजिक परदा//इसका सच भी समझ लीजिए//💐


जो भी अपना बिकास चाहता है उसे खुद की सोच का जामा पहनना हौगा ।
अपनी सोच मे सच्चाई लानी होगी।
आप सोच सकते हैं गांधी जी लाला बहादुर शाशत्री जी।
सुबास चंद्र बोस जी सरदार पटेल जी की सबकी अपनी सोच थी।
अपनी समझ थी।
अगर एक सोच ना होती तो आज हम आजाद ना होते।
जीतने भी महापुरुष हुयें ऊन सबने आम जनता से स्नेह किया।
उनके लिये ही बलिदान दिया।
भगत सिंह की हर सांस देश और जनता कै लिये थी।
गांधी जी की हर भाषा आम जनता समझती थी।
पर आज ऐसा कुछ भी नही हैं।
ना कोई गांधी जी हैं ना ही कोई भगत सिंह।
अब हर आदमी की सोच में लालच।
सिर्फ ईसलिए क्योंकि परिवार का मुखिया ही गलत हैं हर तरफ।
पहले के महापुरुषों का कोई परदा ही नही था।
उनकी सांस तक मे जनता की खुशबू थी।
बस इसलिये वो दौर वो लोग और थे।
और आज इसलिये हर तरफ सिर्फ परदा हैं।
लेखक कहता हैं पहले अपना परदा हटाओ।
समाज खुद सामने आऐगा।
आने वाले कल को एक सभ्य बिकसित ।
और ओपन समाज दो ।
जहाँ कोई झुठ कोई फरेब कोई शिकायत ना हो।
।।।।जय हिंद जय भारत माता।
।।लेखन रंजीत चौबे।।
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फलता फुलता एक सामाजिक परदा//इसका सच भी समझ लीजिए//💐

।।।दिनांक 01

/07/2019

कोई शायर एक दिन आऐगा //शायरी 💐

###Edmranjit.

कोई शायर एक दिन आऐगा //शायरी 💐

में मुश्किलें आशान कर दुंगा।
अपनी जिंदगी तेरे नाम कर दुंगा।
तु एक इशारा तो कर ऐ दिल मेरे।
अपनी हशरते निलाम कर दुंगा।
।।
नहीं तुफानों का डर मुझे।
ना दुनियाँ से डरता हु।
एक सच हैं तो बस यही हैं।
खुद से मोहब्बत करता हु।
।।
मेरी सोच एक आशियाना हैं।
मेरी लेखनी मेरा खजाना हैं।
तु बता तुझे हम क्या सुनाये।
यहाँ हर लब्ज एक नजराना हैं।
।।
हमराज अपनी सोच का।
हम बन गये तो क्या हुआ।
तु आज भी चाहे तो हम।
तेरे साथ जिना चाहेंगे।
।।
कुछ बात दिल की अनकही।
हर शक्श में दब जाती हैं।
पर याद बीतें कल का पल।
हर दिल को याद आती हैं।
।।
में लिख रहा उनके लिये।
जो खो गये सब भुलकर।
बस याद वो भी किया करें।
इन लाईनों को याद कर।
।।
अब जा रहे हैं हम वहाँ।
पंक्तियाँ ये तुम्हें सोंप कर।
कोई शायर एक दिन आऐगा।
यें दाश्ता सुनाऐगा।।

कोई शायर एक दिन आऐगा //शायरी 💐

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।#लेखन #रंजीतचौबे
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1/07/2019
#कोईशायरएकदिनआएगा

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