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poetry कुछ सोचता ही नहीं अब तो।💐

Edmranjit

poetry कुछ सोचता ही नहीं अब तो।💐


कुछ सोचता ही नहीं।
अब तो।
बस सोया रहता हु।
अतीत को याद कर
उसमें खोया रहता हु।।
""'"कौन हकीकत का जीता हैं।
सब तो दो चेहरे लगाऐं रहतें हैं।।
कुछ पल किसी के होतें हैं।
बाकी ढोंग रचाएं रहतें हैं।।
"""फलसफा जीवन का अब।
हैं कहां।
यहाँ बस तशबीर दिखाई जाती हैं।।
खुशी इश्क मजहब अब हैं नहीं।
इनके नाम बस जिंदा हैं।।
जिसमें अब किस्मत की लकीर।
बताई जाती हैं।।
"""हुनर भी सिखाया जाता हैं।।
पता हैं अब जिने का।
सोचता हु क्या दादा जी ने।
कुछ गलत सिख सिखाईं थी।।
फिर लगता हैं।
अब लोग कुछ बदले बदलें से हैं।।
""""अजीब सी सुगबुगाहट हैं।
हर तरफ हलचल ही दिखती हैं।
फिर भी ना सावन बदला हैं।
ना पतझड़ खोया हैं।
ना मौसम ने रंग कभी बदलें हैं।
सच कहुँ तो सब वही का वहीं हैं।
बस बदलें हैं तो सिर्फ वहीं इंसान।
बदलें हैं।।
"""बस वहीं इंसान बदलें हैं।।

poetry कुछ सोचता ही नहीं अब तो।💐

Www.edmranjit.com
#ranjit choubey
#Writing
#Poetry
#Date 24/06/2019

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