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ऐं मुहब्बत तु हार गई।💐

Edmranjit.

ऐं मुहब्बत तु हार गई।💐

दिल की चोट बहुत।
गहरी हैं ।
उम्मीद का दामन छोटा था।
मेरा प्यार उसमें समाता ही कैसे।
उसके दिल में घंमड का पहरा था।
```चाहत की सीमा नहीं होती।
ये हम जानतें हैं।
मोहब्बत में चोट खाईं हैं हमनें।
तो दर्द भी पहचानतें हैं।
```और क्या बोलता में।
एक साथ मांगा था उनसें।
उन्हें उसमें भी मेरी कोई।
साजिश नजर आई थी।
```क्या पता लोग क्या चाहतें हैं।
मोहब्बत तो बस मोहब्बत ही।
चाहेगी।
किस्मत आजमाने वालों को।
मोहब्बत कहाँ मील पाऐंगी।
```हम हार गयें पर  गम नहीं।
क्योंकि हमनें दिल दिया था।
वो जीतें भी तो क्या मिला होगा।
पता नहीं क्या सौदा किया था।
```मेंरी तड़प भी मेरी अपनी हैं।
उस पर तो किसी का जोर नहीं।
अब चाहें जैसे जीऊँगा में।।
खुशी या गम पिऊँगा में।
```माना के सब इंसान हैं।
पर करनी एक समान कहाँ।
कोई हिरो हैं कोई जीरों हैं।
सबकी अपनी पहचान हैं।
````थोड़ा थम सा गया था में।
करता भी क्या।
दिल हैं यें कोई मशीन नहीं हैं।
इसको समझाना बड़ा मुशकिल हैं।
जल्दी बस में हो जाऐं।
ऐसी कोई तरकीब नहीं।
```कहतें हैं एक दिल में।
सागर भी समा जाता हैं।
अगर उसका गम उफान।
पर हो तो।
सारी दुनियाँ की खुशियों पर।
 मानों पानी फिर जाता हैं।
```हमनें भी खुद को डुबते ही पाया।
पर वो शायर ही क्या जो।
कश्तियों के साथ बह जाऐं।
मोहब्बत सच्ची वहीं होती हैं।
जो मर कर भी जिंदा रह जाऐं।
~~~~~~~~~~~~~~~
Www.edmranjit.com
#दिनांक23/06/2019
Writing by ranjit choubeay

ऐं मुहब्बत तु हार गई।💐

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