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इंटरनेट हमसे हैं या हम इंटरनेट से💐

Edmranjit.

इंटरनेट हमसे हैं या हम इंटरनेट से💐

भाई उमर मै काफी बड़े थे उनसे कुछ बात करने।
मे अक्सर डर लगता था लेकिन मुझे उनकी एक ऐसी बात।
पता थी जो सिर्फ मे जानता था। और वो बात ये थी जब भाई ।
खुश हो तो उनसे अपनी कोई भी बात शेयर करना आसान था।
या फिर उनसे मजाक मस्ती भी करो तो उन्हें उस टाईम सब अच्छा लगता था। भाई जीतना ही सीधा सरल इंसान है।
शायद उससे कही जयादा टेलेंट भी रखता था ।
भाई का सबसे बड़ा टेलेंट था उनका लिखना।
वो कभी भी कहानियाँ कविताएँ लिखते रहते थे।
और मुझे सुनाते और कहते बता छोटे कविता अच्छी है।
मुझे तो उनकी हर कविता अच्छी लगती थी इसलिए बोलता था।

एक दम सुपर है भाई।
पर भाई को लगता था मै झुठ बोलता हु।
वो सोचते थे उनका मन रखने कै लिये मे हमेशा उनकि।
कविता और कहानियों की तारीफ करता हु।
लेकिन  कहते है ना जब तक इंसान को सही इंसान।
नही मिलता तब तक तो वो खुद को पहचान ही नही पाता।
भाई को लेखन से इतना लगाव था। कितनी बार मेनें उन्हें।
पुरी पुरी रात लिखते देखा था।

एक दिन बातो बातो मै मेनें भाई से पुछा भाई आप इतना अच्छा लिखते हो आपको कया लेखक बनना है।
भाई का जवाब था छोटे बनना तो लेखक ही चाहता हु।
पर बन नही पाता।

मेरा अगला सवाल था भाई आप बन जाऔ ना आप तो लिखते भी अच्छा हो फिर प्राब्लम कया है।
तो भाई ने हसतें हुयें कहा ।
छोटे तु जानता है आज हम कोन से युग मे जी रहे है।
मुझै भाई का सवाल बड़ा अजीब लगा ।

इंटरनेट हमसे हैं या हम इंटरनेट से💐

और फिर मुशकुराते हुये मेरा जवाब था बिलकुल भाई ।
मुझे पता हे हम आज कलयुग मै जी रहै है।
भाई वापस हसने लगा और उसने कहा नही पगले।
कलयुग तो सदियों से है और आगे भी सदियों तक ।
रहेगा लेकिन आज हम जीस युग मै जी रहे है।
उसका एक और नाम है।

मैने कहा नही भाई मुझे कुछ समझ नही आया फिर आप।
बोलिये कया है इस युग का नाम।
भाई ने हसतें हुयें कहा आज के युग का नाम है।
इनटरनेट युग गुगल युग ।
जब भाई ने इतना कहा और बताया तो कुछ बाते तो मै ।
समझ गया था लेकिन मै भाई से जानना और सुनना चाहता था। इसलिये मेनें भाई से पुछा तो ।
कया भाई इनटरनेट के होने से आप लेखक नही बन सकते।
भाई का जवाब था छोटे ।

इनटरनेट के आने से बहुत कुछ अच्छा हुआ है।
लेकिन उसका गलत इस्तेमाल भी कही जयादा हुआ।
पहले की तरह अब युवाओं मे ।
कविताएँ या फिर सटोरिया साहित्यिक विषयों पर जानकारी।
हासिल करने की आदते अब एकदम ना के समान हो गई है।
आज जीसको देखो कुछ पढ़ना हैं गुगल महाराज को देखता है।
और भी बहुत कुछ है। जब मै पढ़ता था ।
बुक के लिये पैसे नही होते थे लेकीन आज।
कुछ रुपये के रिचार्ज से पुरा इतिहास गुगल जी दिखा देते है।
लेकिन हम जब बुक्स पढते थे ।
हमारी मानसिकता अच्छी होती थी हमारी सोच अच्छी होती थी।
और आज युवाओं  को इनटरनेट ने इतना बिमार बना दिया है।
उनका दिल इनटरनेट पर है उनका दिमाग भी वही है।
और तो और उनकी 50%बीमारी भी इनटरनेट की वजह ही है।
भाई बिल्कुल सही बोल रहै थे ।
कही ना कही हम अपने अतीत को धिरे धिरे भुलते जा रहे है।
जिसके फायदे तो ना कै बराबर है पर नुकसान इतने है।
जिससे हम सबकी लाइफ खोखली और झुठी सी बनती जा रही है।

इंटरनेट हमसे हैं या हम इंटरनेट से💐

मैने भाई से वापस कहा भाई फिर भी आप या आप की तरह बहुत ऐसे लोग होगें जो लेखक बनना चाहते है।
कया वो इनटरनेट की वजह से लेखक नही बनना चाहेंगे।
भाई ने वापस हसते हुये कहा नही ऐसा कुछ नही है।
इनटरनेट मै वो ताकत नही जो इंसान के दिमाग मै है।
जब तक कोई कविता दिमाग मै नही आयेगी।
जब तक कोई कहानी बुक नही बनेगी।
वो इनटरनेट मै कहा से आयेगी।

और छोटे याद रखो एक इंसान ने ही।
इनटरनेट या फिर उससे जुड़ी टेक्नोलॉजी को बनाया।
इनटरनेट ने अभी कोइ इंसान नही बनाया।
भाई ने जो भी कहा वो एकदम सही था।
पता नही हम इंसान अपनी ही बनाई।
टेक्नोलॉजी क इतने गुलाम कयो हो जाते है।
जो हमारे खुद के असली जीवन को भी हमसे दुर होना
पड़ता है।

एक बार वापस भाई की बातो से मै बहुत प्रभावित हुआ।
और उनसे कहा भाई यु आर बेस्ट लेखक ।
आप ने सच मै मुझे आज और कल मै केसे।
जीना चाहियें बता दिया।।।
।।हम टेक्नोलॉजी से नही टेक्नोलॉजी हम से है।।।
Www.edmranjit.com
Writing by ranjit choubeay.
21/06/2019

इंटरनेट हमसे हैं या हम इंटरनेट से💐


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