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बेटियाँ वरदाँन क्यों नहीं💐

 Edmranjit.

बेटियाँ वरदाँन क्यों नहीं💐

 मन की अकुलाहट तो देखो।
बेटी हुई तो घबराया हैं ।
बाप की बौखलाहट तो देखो।
आज ही से सर झुकाया हैं ।
क्यों घृणा लियें जिया ये समाज हैं।
उसी कोख से जब निकलें।
तो क्या ये पाप हैं ।

अपनी जीवन की रेखा का ध्यान क्यों नहीं ।
अपनी बेटी पर आपकों गर्व क्यों नहीं ।
कुछ गलत दरिंदो ने सर झुकाया हैं ।
वहाँ ध्यान नहीं जहाँ बेटियों ने परचम लहराया हैं।
बेटी हुई तो सर झुकाया हैं।

अगर समझदानी खराब है तो ठिक करों।
शर्म बेटियों पर नहीं अपने कर्म पर करो।
क्षितिजा से आसमां तक उन्हें सम्मान हैं ।
कहीं लक्ष्मी सरस्वती देवी उनके नाम हैं।
ईश्वर कहता हैं  बेटियाँ धरती का वरदान हैं ।

अब तक नहीं समझा तो कैसा बेवकूफ ये समाज है।
वक्त आया तो धरा पर वो झाँसी की रानी बनी।
कभी वो पदमावती तो कभी कल्पना चावला बनी।
समय बदलता गया बेटियों का वर्चस्व बढ़ता गया।
पर इस समाज की धारणाऐं गिरती गई ।
मर्द जाती की नीयत गर्त होती गई ।
बेटियाँ इनके पापों को सहती गई ।

दुनीयां शरमसार होती गई।
कही दामनी तो कही गुडियां ।
मासुमो की जानें जाती रही।
ये दुनियां होली दिवाली ईद मुहर्रम क्रिसमस मनाती रही।
मर्दो को जन्म से ही बेटियाँ अलग नजर आती रही।

काश बदल जाती जननी के लिये सोच सबकी।
तो हर घर में एक सीता जरूर होती।
ना होती कहीं दर्द की गुनजाईश किसी बाप के सीने मैं ।
किसी भाई की कलाई कभी खाली ना होती।
किसी भाई की कलाई कभी खाली ना होती।

बेटियाँ वरदाँन क्यों नहीं💐

Www.edmranjit.com
Writing by ranjit choubeay.
21/06/2019


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