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ऐं जिंदगी मैं तुझ पर कैसी किताब लिखु##//पौयम💐

Edmranjit.

ऐं जिंदगी मैं तुझ पर कैसी किताब लिखु##//पौयम💐

ऐ जिंदगी में तुझ पर ।
कैसी किताब लिखु।
तेरी रोज रोज की हलचल का।
में कैसा हिसाब लिखुं।।
।।
सुबह से लेकर शाम तक।
तु हर पल बदलता हैं।
अनगिनत चाहत लिये।
तु चलता ही रहता हैं।।
।।
तेरा तो कोई ख्वाब भी नहीं।
मुक्म्मल कोई दांस्ता भी नहीं।
चलना और बदलना ही फितरत हैं।।
तेरा तो कोई आसंमा भी नहीं।।
।।
क्या तुझें कोई समझ पाया हैं।
क्या तुने किसी से दिल लगाया हैं।
कभी तुने साथ दिया किसी का।
या बस इलजाम ही पाया हैं।
।।
हम तेरा कैसा संसार लिखें।।
तेरा पल पल का अवतार लिखें।
काश कोई एक आईना होता।।
जिसमें तेरा भी परिवार दिखें।।
।।
हम तेरे इतनें करीब हैं।
तुझे समझना भी अजीब हैं।
हम चाहकर भी बहुत दुर तुझसे।।
जिंदगी अपना कैसा नसीब हैं।।
।।
हम क्या लिखेंगे तुझ पर।
तेरे तो हजारों रंग हैं।।
बस एक बात समझ पाऐं हैं।।
तु चाहें तो हम तेरे संग हैं।
वरना तो जिंदगी एक जंग हैं।
जिंदगी एक जंग हैं।।
Www.edmranjit.com
Writing by ranjit choubeay

ऐं जिंदगी मैं तुझ पर कैसी किताब लिखु##//पौयम💐


।।#दिनांक29/06/2019
॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥

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