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तु कितना भी इंसान बन।💐

Edmranjit.

तु कितना भी इंसान बन।💐

तु कितना भी इंसान बन।
चाहे कर्मों का गुणगान कर।
यहाँ भला नहीं अब जग में कोई।
पर तु तो बस निजकाम कर।
```बहुत खेल हैं दुनियाँ के।
तु सीधा साधा बंदा हैं।
इस दो रंग के रंगों को।
तु दुर से प्रणाम कर।
```हैं अदभूत तुझमें क्षमता भी।
तु खुद को अब पहचान ले।
जो संग नहीं आने वालें।
उन सबकों अब प्रणाम कर।।
```तु जान हैं अपनी सोच का।
खुद भाषा तेरा जीवन हैं।
कुछ लोगों की बातों में आकर।
ना अपना तु नुकसान कर।
```जल की धारा सा शीतल तु।
तुझें समझ ना पायेगा कोई।
सब मतलब से ही मीलते हैं।
तु अपना पुरा काम कर।
```ये धरती सबकी माता हैं।
अंबर पृत समान हैं।
सब आऐं हैं सब जाऐंगे।
बस राहों से अंजान हैं।
```तु रोयेगा तु खोयेगा।
सब कुछ बिफल हो जाऐगा।
बस अटल सच है ये पुरा।
तु इसको आत्मसात कर।
```इस बगियाँ रुपी जीवन में।
तु फुलों जैसा जीवन जी।
जो आऐं उसके साथ जा।
जो छुयें उसकों खुशबू दे।
```तु नन्हें बालक की भांति।
अब जीवन जीना छोड़ जा।
जीसने भी तुझकों कष्ट दिया।
उन सबसें नाता छोड़ जा।
Www.edmranjit.com
Writing by ranjit choubeay.

तु कितना भी इंसान बन।💐

दिनांक06/27/2019###रंजीतचौबे। पोयम

ranjitchoubeay.blogspot.com 
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