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ये दुनियाँ एक मुखौटा हैं। कविता ***💐

Edmranjit. 

ये दुनियाँ एक मुखौटा हैं। कविता ***💐

कहते हैं जिंदगी इबादत है। 
कोई कहता हैं ये वरदान हैं।
फिर भी इसकी हिफाजत नहीं।
कोई जमकर पीता हैं शराब।
कोई हत्या कर खाता हैं कबाब।
वाह रे इबादत वाह रे वरदान।
```में तो हु बहुत छोटा।
कभी कभी बोल जाता हु ।
खोटा खोटा।
हमें समझ आती हैं बस माँ की।
दुनियाँ ही।
बाकी सब लगता हैं मुखोटा।
````मैंने जब से होश सम्भाला हैं।
कही कुछ बुरा देखा तो कही देखा।
काला काला हैं।
दुनियाँ से सुनता आया हु।
जग का खैल निराला हैं।
पर जो समझ पाया वो इतना ही।
बाकी सब घोटाला हैं।
बस मातृ प्रेम ही सच्चा हैं।
वो ही अमृत का प्याला हैं।
````एक एक पग में चलता हु।
तुम सब जैसेः चलतें हो।
पर तुम में मुझमें फर्क बहुत।
तुम मतलब बनकर चलतें हो।
मैं चलता हु बस चलने को।
``` कभी समझ ना पाओगे।
तुम जब तक खुद का सोचोगे।
जिस माटी का खाओगे तुम।।
उस माटी को बेचोगे।
````कुछ लोग तमाशा करतें हैं।
सब लोग वहाँ थम जातें हैं।
वो लोग जो मतलब के साथी।
वो लोग बड़े बन जातें हैं।
``` सब तीर निशाने पर होगें।
ऐसी तो कोई साध नहीं।
जो लोग जीयें अच्छा बनकर।
वो जीवन तो बरबाद नहीं।
````हर फुल मैं आशा हौती हैं।
वो देव पास ही जाऐगा।
पर किस्मत अपनी अपनी हैं।
कोई पुजा तक ही जाऐगा।
कोई गलत हाथ लग जाऐगा।
``` एक बात हमें भी चुभती हैं।
ये दुनियाँ जैसी दिखती हैं।
वैसा इसका स्वभाव नहीं।
तुम चाहे जितनें अच्छे हो।
पर सबका एक बर्ताव नहीं।

ये दुनियाँ एक मुखौटा हैं। कविता ***💐

Www.edmranjit.com
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#लेखन रंजीत चौबे
#दिनांक26/06/2019

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