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पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी//पार्ट 1)💐

Edmranjit.

पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी//पार्ट 1)💐

मेरा नाम शोर्या हैं अभी बहुत छोटा हु। शिमला मैं  पहाड़ियां और बर्फ से ढ़का मेरा घर बहुत क्युट हैं ।बिल्कुल मेरी तरह में यहाँ माँ पापा के साथ रहता हूँ। पापा एक इलेक्ट्रॉनिक शाँप चलातें हैं और माँ स्कूल टिचर हैं। माँ प्यार से मुझें शिरू बुलाती हैं अभी अभी कुछ दिनों पहले ही मेरा ऐडमिशन हुआ है एक काँनवेंट स्कुल मैं। पर अभी समर की छुट्टियाँ हैं तो बिल्कुल ही बोर हो रहा हूँ। स्कूल में मेरे सब क्लास मिट बाते करते हैं समर मैं नाना नानी के घर जाऐंगे कोई कहता है हम तो छुट्टियाँ मनानें अपनें गाँव जा रहें हैं कोई दोस्त कहता हैं हम कही और हिलस्टेशन जा रहे है घुमनें ।सबकी बातें सुनकर मुझें ऐसा लगता है जैसे सभी को समर का ही इंतजार था ।पर मुझे तो ये सब बिलकुल पंसद नहीं मेरी पसंद तो सिर्फ़ मेरा अपना ये घर हैं। अब देखों आप माँ को ही सुबह से उठी हैं और दो बार मुझे आवाज भी लगा चुकी है। शिरु शिरू बेटा उठ जा चाय पी ले बहुत देर हो चुकी हैं। लेकीन सच बताऐं आपकों माँ ने बोल तो दिया है बेटा उठो चाय पी लो लेकीन चाय अभी बनाई नहीं है। क्योंकि वो तो अपने मोबाइल वालें बेटो से बात कर रही है। सुबह की पोस्ट उस पर आने वाले कमेंट सभी को राम राम सुप्रभात और अपनी कुछ सहेलियों से गप्पे गप्पी। और पापा उठकर चाय बनाकर पी कर मुझें सोता हुआ समझकर दुकान जा चुके हैं। पता है आपको सोचता हु किसने बनाया होगा ये मोबाइल फोन इंटरनेट और इसके साथ ये सोशल साइड। आप ही देखों यहाँ लोग सब कुछ पा रहे है। अब इस पर मिलने वाली माँ बहन मौसी भाई दोस्त कितने खुशनसीब होंगे ना। क्योंकि उन्हें बिना किसी मेहनत झमेले के सारे रिस्ते मोबाइल में ही मिल गये हैं। अभी उठ जाता हूँ। क्योंकि ऐसा लग रहा है जैसे माँ अब मोबाइल मैं थक चुकी है इसलिए 🍵 लेकर कमरे मैं ही आऐगी। और नहीं उठा तो वापस फिर मोबाइल उठा लेगी अब अपने लिये ना सही पर माँ के लिये तो उठना ही चाहिए। नौ बज चुकें हैं धुप आ चुकी है। और अभी तक बेटा तु सोया हुआ है रात को लैट सोया था क्या। नहीं माँ में तो 11बजे ही सो गया था अच्छा अब ये चाय खत्म करो और फ्रेस हो जाओ। जी माँ में जा रही हु तुम्हारे लिये कुछ नास्ता बनाने। माँ फिर चली गई चाय कप मेरे हाथों मैं है और मैं धिरे धिरे चुस्की लेता हुआ अपने रूम की खिड़की खोल रहा हु। मेरे घर के आँगन मैं एक पेड़ हैं आम का पापा ने बहुत पहले लगाया था। 

पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी//पार्ट 1)💐

माँ कहती है जब तुम नहीं हुये थे काफी पहले जब हमारी शादी हुई थी। कुछ तीन साल तक कोई बच्चा नहीं हुआ था। तो गाँव वाले और तुम्हारी दादी के ताने सुनते सुनते हम दोनों ही तंग हो गये थे। हम दोनों अपने काम को लेकर बहुत सिरियस थे हम चाहतें थे एक बार दोनों अच्छे से अपने काम मै सेटल हो जाएं। फिर बच्चा भी कर लेंगे पर दादा दादी को ये बात नहीं नजर आती थी। और फिर एक दिन दादी से माँ की बहुत बहस हो गई। पापा को भी दादा दादी की बातों से दुख हुआ। ये बात अलग थी के उनके भी अरमान थे अपनी जिंदगी मैं पोता  के साथ खेलने की उसको देखने की। पर आज के इस भागमभाग जिंदगी मैं कहाँ कौई किसी के अरमानो को समझता है। माँ पापा को दादा दादी की ममता जबरदस्ती लगी। और उन्होने घर छोड़ना ही उचित समझा। फिर माँ पापा यहाँ शिमला आ गयें मुलरूप से हमारा गाँव उतर प्रदेश के बरेली मैं पड़ता हैं। शिमला आने के बाद पापा इलेक्ट्रॉनिक का काम करने लगें और माँ ने तो अपनी पोस्टिंग ही यहीं चुनी थी वो गौरमेंट टीचर  हो गई थी। तो उस टाइम जब पापा मम्मी शिमला आऐं तभी उन्होने कुछ महीनों बाद ये घर लिया और बड़े प्यार से अपने घर के आँगन मैं ये आम का पौधा लगाया था। माँ कहती हैं अब ये चौदह साल का हो चुका है। मतलब ये मुझसे पुरे पाँच साल बडा़ हैं में अभी नौ साल का हु। सच कहें तो ये पेड़ नहीं है यही मेरा दोस्त हैं बचपन से आज तक में इसके सहारे ही खुश रहता आया हु शाम होती है इस पर चढ़कर बैठ जाता हूँ झुला झुलता हु। और अपनी हर छोटी बड़ी बात इससे ही करता हूँ। मैंने मेरे इस दोस्त का नाम भी रखा है। इसका नाम झुमरू हैं जब भी मुझें कभी थोड़ी गर्मी लगती हैं ये समझ जाता हैं और झुमनें लगता हैं। आज से दो साल पहले में झुमरु के ऊपर ही बैठा हुआ था और उससे बाते कर रहा था। तभी मैनें देखा एक कौआ किसी छोटे से पंछी को मार रहा है वो छोटा पंछी कहीं से झुमरू के ऊपर आकर बैठ गया था। पास ही एक बगीचा था शायद ये छोटा पंछी वहीं से उड़ता हुआ आया था। और कौऐं का शिकार होनें वाला था। तभी झुमरू बहुत तेज हिला जैसे आँधी आ गई हो। मुझे ऐसा लगा जैसे झुमरू मुझसे कह रहा हो उठो शिरु इसकी मद्त करो। मैनें तुरंत उस कौऐं को भगाना चालु किया।तभी दुर से बहुत सारे तोते एक साथ कोऐं के पास आकर उस पर टुट पडे़ और कौआ शैतान भाग गया उन सब तोते मैं एक मिट्ठु की माँ थी। हम सबनें मिलकर उसको बचा लिया था। अब शौर बंद हो चुका था सारे पंछी जा चुके था। छोटा मिट्ठु और उसकी माँ झुमरू के ऊपर ही बैठे थे। शायद उन्हें भी झुमरू मैं अब अपना नया घर मिल गया था उन्हें लगा शायद ये जगह उनके लिये ज्यादा शुरक्षित रहेगी। और उस दिन से ही छोटा मिट्ठु अपनी माँ और झुमरू के साथ हमारे आँगन मैं ही रह गया। मैने कमरें की खिड़की इसलिये ही खोली हैं की अपने दोस्त के दर्शन कर ली। मिट्ठु अब बड़ा हो गया है पहलें जब आया था तो उड़ नहीं पाता था अब देखो शायद सुबह से ही गायब है। वो मुझे सुबह सुबह ही आवाज देता है शिरू शिरू उठो उठो सुबह हो चुकी हैं। माँ भी गुस्सा कर रही है उठ जाओं कुभ करण। और मैं जाग कर भी मजें लेता हूँ ।क्योंकि मुझे इसमें ही खुशी मिलती हैं अब में नीचें जा रहा हु क्योंकि झुमरू को भी पानी पिलाना हैं और माँ के हाथ से नास्ता भी करना है। नहीं गया तो माँ नास्ता भी अपने इंटरनेट वाले बंधुओ को करवा देगी और फिर में भुखा रह जाऊगां। मिलता हु कुछ टाइम बाद। सुप्रभात आप सभी को। आपका(शिरू।

Www.edmranjit.com
Writing by ranjit choubeay .
23/06/2019


पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी//पार्ट 1)💐



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