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एक सफर जो कभी रूक रूक सा जाता हैं। पौयम 💐

Edmranjit.

एक सफर जो कभी रूक रूक सा जाता हैं। पौयम 💐

एक सफर जो कभी ।
रूक रूक सा जाता हैं।
अथाह चलता हैं।
कुछ अपनें ही अंदाज में।
।।
मुशकुराता हैं गुन गुनाता हैं।
राह चलतें ही।
कभी कभार शिटिया बजाता हैं।
फिर ना जानें क्यों।
वो थम सा जाता हैं।।
।।
उमंग में कभी कभी।
वो सब भुल जाता हैं।
लियें हुये तरंग में।
वो खुब डुब जाता हैं।।
।।
अहम का कोई रस नहीं।
वो दुर दुर खुशमिजाज हैं।
लहर हवा सा बन के वो।
खुद में लाजवाब हैं।
।।
धरा से ले गगन तलें।
सफर हरा भरा मीले।
ये सोच में जीता हैं वो।
अब सफर मुझें नया मीले।
।।
वो धुप में भी खुश रहा।
नशा सफर के रंग तलें।
हिली जमी हिला गगन।
सफर के अंतकाल में।
Www.edmranjit.com
Writing by ranjit choubeay.

दिंनाक20/06/2019

एक सफर जो कभी रूक रूक सा जाता हैं। पौयम 💐

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