Contact Form

Name

Email *

Message *

Search This Blog

Blog Archive

Search This Blog

Popular Tags

Translate

Popular Posts

पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी //पार्ट 3💐

Www.edmranjit


पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी //पार्ट 3💐

ऊफ जैसी गहरी बारिस हो रही थी नींद भी वैसी ही लग गई थी। अब जाके मिट्ठू ने उठाया मुझे। मौसम बहुत ठंडा हो चुका है। झुमरू तो एकदम से नहा धो के बोले तो रफचिक माफिक लग रहा था। अब अंधेरा होने वाला था। बारिस भी लगभग रूक चुकी थी। पापा भी बस आने वाले थे। मिट्ठु मस्ती कर रहा था । में  जो भी में बोल रहा था वो सब दोहरा रहा था। मेरी नकल कर के माँ को हंसा रहा था। सच बोलु तो मिट्ठू ही एक ऐसा था जिससे घर में रौनक रहती थी। वो रियल में बहुत प्यारा था। उसकी वजह से घर में दस बच्चों वाली रौनक लगी रहती थी। वो अकेला ही पुरे घर को उठा कर घुमता रहता था। अब देखो माँ के सर पर बैठ कर बोल रहा है माँ मुझे नीचे उतारों आपकें बालों में मेरे पैर फंस गये हैं। माँ भी अब उसको तंग कर रही है। माँ कह रही है खुद ही निकल इस जाल से। बेचारा मिट्ठू अब जंग लड़ेगा कुछ टाईम फिर माँ खुद ही निकालेगी उसके फंसे पैरो को। पापा आ गये पापा आ गये। देख लिया इसने पापा को भी 👴 माँ मुझे उतारो। मिट्ठु पापा के पास जाने के लिये उतावला हो रहा था। माँ ने जैसे ही उसे उतारा उड़ता हूआ पापा के हाथो पर जाकर बैठ गया। पुछने लगा पापा आप कुछ लाये मेरे और शिरू के लिये। पापा कहने लगे माँ से देखो इसकी शैतानी आदत आते ही खाने के लिये क्या लाया हु पूछने लगा ।ये नहीं पूछा पापा आप चाय पानी पियोगे। मिट्ठु ने कहाँ पापा से अच्छा कैसे लाऊ मैं इतनी छोटी चोंच में पानी चाय। उसकी तोतली आवाज से पापा की सारी थकान टेंशन उड़ जाती थी। वो मुझे और मिट्ठु को फिर पास बैठाकर खुद खिलाते थे। पर आज बारिस की वजह से पापा कुछ ला नहीं पाऐं थे। इसलिये थोड़ा उदास होकर कहाँ बेटा मिट्ठ आज कोई दुकान नहीं खुली सब बारिस में बंद करके चले गये है। 

इतना सुनते ही मिट्ठू पापा से बोला कोई बात नहीं मेरा तो पेट भरा हुआ हैं बहुत आम खाऐं आज मेंने बारिस और आँधी आने से पहले। पापा ने कहाँ गुड मेरा अच्छा बच्चा फिर में और मिट्ठु अपने कमरे मैं आ गये। माँ कहने लगी शिरू मिट्ठू कमरे मैं बैठो कुछ बना कर लाती हु खाने के लिये। में कमरे मैं मिट्ठु से बाते करने लगा जो भी में बोलता उसकी सेम वही भाषा होती थी। हमनें घर के आँगन की सभी लाइट जला दी। बाहर ठंडी ठंडी हवा थी और बहुत खुबसुरत चाँदनी रात चमक रही थी। में और मिट्ठू झुमरू को खिड़की से देख रहे थे। उससे बातें भी कर रहे थे। 

पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी //पार्ट 3💐

आज का मौसम देख कर एक बार तो ऐसा भी लग रहा था मुझे जैसे पेड़ पौधो को भी ज्यादा बारिस और हवा से डर लगता होगा। क्योंकि घर के बाहर रोड के आस पास काफी पेड़ टुट गये थे। कुछ पेड़ की डालियाँ भी टुटकर रोड पर पडी़ हुई थी। रास्ते से गुजरने वाले लोग परेशान तो हो रहे थे। पर कोई भी पेड़ को ठिक से उठाकर साईड में नहीं करता था। ये सब देखकर अच्छा नहीं लग रहा था। मैं और मिट्ठु झुमरू से पुछ रहे थे। आपको कहीं चोट तो नहीं लगी है। झुमरू जवाब मैं थोड़ा हिलता और कहता था नहीं। पर उसको देखकर ऐसा लगता था जैसे वो अपने साथी पेड़ो की चोट देखकर बहुत आहात  था। हम इंसान होकर भी प्राकृतिक के प्रति बहुत लापरवाह होते हैं। ये बहुत गलत बात है। झुमरू बोल नहीं सकता था। क्योंकि वो एक पेड़ हैं परन्तु मिट्ठू एक पंछी होकर भी दुखी था। वो कह रहा था। शिरू भईयाँ आज के आँधी तुफान मैं पता नहीं कितने झुमरू टुट कर गीर गये होगें और उनके साथ हम अनगिनत पंछियों का घर भी उजड़ गये होगें। मिट्ठू कह रहा था शिरू भईया़ हर झुमरू और हर मिट्ठू के पास शिरू जैसे बच्चे दोस्त भाई नहीं होते ना इसलिए दुनियां मैं। हर पेड़ हर पंछी अपनी पुरी जिंदगी नहीं जी पाता और वक्त से पहले ही काल के गाल में समा जाता है। मिट्ठु इतना छोटा था पर वो एक इंसान से ज्यादा समझदार था। उसे इंसान पेड़ पंछी जीव प्राकृतिक सबकी समझ थी। में सोचता हु हम सब तो इ़सान हैं।हमारे पास बहुत बड़ी बुद्धि ज्ञान धन सम्पदा सब कुछ होते हुये भी। एक तरह से कुछ भी नहीं है। मेंने स्कुल की ज्यादातर पढाई जाने वाली समझ अपने पंछी मित्र मिट्ठु में देखी थी। वरना आप खुद ही बता दिजिऐं वो कौन सी पाठशाला मैं गया था। बचपन से सिर्फ़ मेरे साथ था। उड़ना बोलना सब मेरे सामने सिखा था। फिर भी उसकी समझ ज्यादा थी। बस इतना कहनां चाहता हूँ। अगर पेड़ पौधे पंछी नहीं तो सोचो न आप ये दुनियां इनके बीना कैसी बदसुरत दिखेगी। क्या हम अच्छी साँसे ले सकते हैं इनके बीना क्या हम अच्छे फल सब्जियों को उगा सकते हैं इनके बिना। क्या हम एक हरा भरा वातावरण देख सकते हैं इनके बिना क्या हम अपनी जरूरत की सुविधाएं जुटा सकते हैं इनके बिना नहीं जी। हम इंसान प्रराकृतिक की इस सबसे प्रिय रचना के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। आपको पता है मेंने एक विदेशी घटना पढ़ी थी आयरलैंड की। वहाँ रोड बनाते वक्त एक पेड़ रास्ते में आ गया था। तो वहाँ की पब्लिक और सरकार ने मिलकर वो रास्ता ही कई सौ किलोमीटर दुर से बनाया पर उस पेड़ को छती नही होनें दिया। क्या हम भारतीयों का भी यही कर्तव्य नहीं बनता हम अपनी भारत माँ की सुंदर प्रराकृतिक को और भी सुंदर बनाये रखें। अधिक से अधिक पेड़ पौधौ को लगायें पंछी जीव जंतु और प्रत्येक प्राणी की रक्षा करे। और टेक्नाँलिजी का उपयोग कम करे इंटरनेट का उपयोग उतना ही करे जिस से हमारे दैनिक जीवन की परंपरा पर भी असर ना पड़े पंछियों की जान पर ना बने। इस छोटी सी कहानीं का शिरू मिट्ठू और झुमरू आप सभी से यहीं निवेदन करते है। ईश्वर की बनाई इस सुंदर भव्य पृथ्वी को उसके जीवन को अस्त व्यस्त ना करे। तभी हम सभी का जीवन सुखमय सुगम होगा जय हिंद। 
पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी //पार्ट 3💐
######Edmranjit//ranjitchoubeay.blogspot.com
##there is a New path on every step //

No comments:

आपको ब्लाँग अच्छा लगा तो फौलो किजिए। आपका सुझाव हमें प्रेरित करेगा।