Sunday, June 30, 2019

कहीं मिलती हैं निगाहें कही मिलते हैं इंसान//पोयम💐

Edmranjit

कहीं मिलती हैं निगाहें कही मिलते हैं इंसान//पोयम💐

कहीं मिलती हैं निगाहें।
कहीं मिलते हैं इंसान।
कहीं सजती हैं बारातें।
कहीं सजते हैं शमशान।
।।
कहीं दिखता हैं अपनापन।
कहीं दिखता हैं सुनापन।
कही चलती हैं तनहाई।
कहीं दिखती हैं शहनाई।
।।
कहीं आती हैं बरसात।
कहीं चलता हैं तुफान।
कहीं बसता हैं घर आंगन।
कहीं उजड़ा हैं बागान।
।।
कहीं मिलती हैं शाबाशी।
कहीं मिलती हैं शौगात।
कही मीलता जीवन अच्छा।
कहीं तड़पे हैं इंसान।
।।
कहीं सजी हुई हैं धरती।
कहीँ जंगल हैं सुनसान।
कहीं हरियाली हैं दिखती।
कहीं सुखा खेत किसान।
।।
कहीं सजी हुई हैं भाषा।
कहीं बंद पड़ी हैं जुबान।
कहीं दिखे ठाट और बंगला।
कही बदहाली इंसान।
।।
कहीँ बजे राज मे डंका।
कही सून पड़ी हैं गलियां।
कहीं चिंगारी दिखती हैं।
कहीं तड़प रही हैं जान।
।।
कही पुज रहे हैं मंदिर।
कही शौर करे रमजान।
कही झुकें मिले गुरूद्वारे।
कहीं दिखे शांत चर्च सारे।।
।।
कहीँ भटक रहे है नेता।
कही भटक रहा जनमानस।
कही सुन पड़ी हैं सेवा।
कहीं जाग रहा हैं सैनिक।।
।।
कहीं आशा हैं कुछ जागी।
कही दिखें आँख में आश।
कहीं इश्वर सबका मालिक।
कहीं बड़ा बने इंसान।
कहीं बड़ा बने इंसान।।

कहीं मिलती हैं निगाहें कही मिलते हैं इंसान//पोयम💐

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#दिनांक30/06/2019


Saturday, June 29, 2019

ऐं जिंदगी मैं तुझ पर कैसी किताब लिखु##//पौयम💐

Edmranjit.

ऐं जिंदगी मैं तुझ पर कैसी किताब लिखु##//पौयम💐

ऐ जिंदगी में तुझ पर ।
कैसी किताब लिखु।
तेरी रोज रोज की हलचल का।
में कैसा हिसाब लिखुं।।
।।
सुबह से लेकर शाम तक।
तु हर पल बदलता हैं।
अनगिनत चाहत लिये।
तु चलता ही रहता हैं।।
।।
तेरा तो कोई ख्वाब भी नहीं।
मुक्म्मल कोई दांस्ता भी नहीं।
चलना और बदलना ही फितरत हैं।।
तेरा तो कोई आसंमा भी नहीं।।
।।
क्या तुझें कोई समझ पाया हैं।
क्या तुने किसी से दिल लगाया हैं।
कभी तुने साथ दिया किसी का।
या बस इलजाम ही पाया हैं।
।।
हम तेरा कैसा संसार लिखें।।
तेरा पल पल का अवतार लिखें।
काश कोई एक आईना होता।।
जिसमें तेरा भी परिवार दिखें।।
।।
हम तेरे इतनें करीब हैं।
तुझे समझना भी अजीब हैं।
हम चाहकर भी बहुत दुर तुझसे।।
जिंदगी अपना कैसा नसीब हैं।।
।।
हम क्या लिखेंगे तुझ पर।
तेरे तो हजारों रंग हैं।।
बस एक बात समझ पाऐं हैं।।
तु चाहें तो हम तेरे संग हैं।
वरना तो जिंदगी एक जंग हैं।
जिंदगी एक जंग हैं।।
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ऐं जिंदगी मैं तुझ पर कैसी किताब लिखु##//पौयम💐


।।#दिनांक29/06/2019
॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥

आर्टिकल। आपका इमोशन आपकी मोहब्त आपको जोकर बना सकती है💐

Edmranjit

आर्टिकल। आपका इमोशन आपकी मोहब्त आपको जोकर बना सकती है💐


आज बात करेंगें प्यार क्या है।इसके साईड इफेक्ट क्या है मित्रों आदमी हो या औरत पशु हो या पंछी सभी मैं इमोशन नाम का एक जहर भगवान ने कुट कुट कर भर दिया। में इमोशन को जहर इसलिये भी बोलता हु। क्योंकि ज्यादातर इसके ही साईड इफेक्ट से इंसान की जिंदगी मैं तबाही होती है। ये बात अलग है ।कुछ एक परशेंट इसके फायदे भी हुये होगें। इस दुनियां मैं कदम रखतें ही बहुत सारे रिस्ते नाते हमारी जिंदगी में आ जाते हैं । एक मनुष्य होने के तौर पर सभी को रिस्तों में पोरोटेक्टिव होना पड़ता हैं। पशु पक्षी भी इसके प्रभाव मैं होतें हैं ।अब कौन सी प्रजाति ज्यादा इमोशनल होती हैं ।इसका पता लगाना मुश्किल है। लेकिन एक बात समझना बहुत ही ज्यादा जरूरी है। जो हर एक आम आदमी बचपन से ही भुल जाता है। और ये होता भी इसी इमोशन के कारण है ।एक साइक्लोजिस्ट की तरह जब में सोचता हु। तब मुझे लगता हैं की इंसान को अपनी जिंदगी मैं सबसे पहलें खुद के व्यक्तिगत जीवन पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए ।क्योंकि इसका हमारी आने वाली पुरी लाइफ पर असर रहेगा। और अगर हम यहीं चीज नहीं कर पायेंगे तो फिर आपको कोई नहीं बचा सकता। मेरे ख्याल से तो शायद भगवान भी नहीं ।में दुनियां भर के अपने हम उम्र दोस्तों से मिला और उन सभी से हर तरह की बहस डिबेट की उनकी हर परेशानी की अगर कोई खास वजह थी। तो पहला जो रिजन मेरे सामने था वो इमोशनल रिस्ते थे। कहीं ना कहीं कुछ मिंशिंग था। हर दोस्त परेशान कोई अपने माँ पापा से परेशान कोई पत्नी से तो कोई भाई से कोई दोस्त और ज्यादातर दोस्त अपनी लव लाईफ से तंग मिले। 

आर्टिकल। आपका इमोशन आपकी मोहब्त आपको जोकर बना सकती है💐

जानतें हैं क्या गायब था मेरे अजीज दोस्तों की लाईफ से। उनका खुद का व्यतित्व उनका खुद का आत्मविश्वास उनकी खुद की क्षमताऐं। रिजन सिर्फ़ वहीं था। इमोशनल रिस्ते। जरा ध्यान से समझो मेरी बातों को गौर करो। अगर आप अपनी अपनी लाइफ में सिर्फ़ इमोशन को सबसे ऊपर रखोगें तो क्या जिंदगी की तकलिफों से निकल पाओगें। नहीं। दो बातें लिख रहा हु इन्हें अपना सको तो देर नहीं करना लाईफ चेंज हो सकती है। मेरी पहली बात आप सबसे पहले अपने खुद के व्यक्तिव पर ध्यान दो। अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुये। मेरे कहने का मतलब यही है ।माता पिता हमारी जर्नी हैं। हमारी लाईफ हैं । उनके साथ बेठकर बातें करो अपनी हर बात हर परेशानी उनसे शेयर करो। मेरा मानना हैं। दुनियां मैं अगर कोई हमारा सही मार्ग दर्शन कर सकता है ।तो वो माता पिता ही हो सकते हैं ।वहाँ से आपको कभी निराशा नहीं मिलेगी। अब मेरी दुसरी बात आप दुनियां के किसी भी फिल्ड में काम करो वहाँ पुरी ईमानदारी और लगन से लग जाओ। क्योंकि कामयाबी आपका भविष्य तय करती है इमोशन नहीं। इंसान में इमोशन होना चाहिए सिर्फ रिस्तो को निभाने इंसानियत को जिंदा रखनें के लिये। ना कि अपने भविष्य को ताक पर रख कर मौत के मुह में जाने के लिये। कभी भी किसी ऐसे व्यक्ति का चुनाव अपनी लाइफ में ना करो जो। प्यार के नाम पर आपको सिर्फ एक जोकर बना कर आपकी पुरी लाइफ बरबाद कर दे। आप समझो ना समझ आयें तो फिर माता पिता से बात करो। और अगर फिर भी समझ ना आऐं तो अपनी अंतर आत्मा से पुछों फिर निर्णय लो। गलतियां होती रहेंगी जिंदगी युहीं चलती रहेगी। पर दोस्तों अपने डिजायर अपने आत्मसम्मान अपने व्यक्तित्व। को कभी मत खोना। जिंदगी एक बार मिलती हैं इसे सही मायने जिंदगी बनाओं।

आर्टिकल। आपका इमोशन आपकी मोहब्त आपको जोकर बना सकती है💐

## अगर आपको अपनी दैनिक जीवन में कोई समस्या है तो कमेंट में बता सकते हैं। आपकी प्राबलम से रिलेटड ब्लाँग पोस्ट किया जाएगा । जय हिंद####रंजीत चौबे। 

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Friday, June 28, 2019

तु कितना भी इंसान बन।💐

Edmranjit.

तु कितना भी इंसान बन।💐

तु कितना भी इंसान बन।
चाहे कर्मों का गुणगान कर।
यहाँ भला नहीं अब जग में कोई।
पर तु तो बस निजकाम कर।
```बहुत खेल हैं दुनियाँ के।
तु सीधा साधा बंदा हैं।
इस दो रंग के रंगों को।
तु दुर से प्रणाम कर।
```हैं अदभूत तुझमें क्षमता भी।
तु खुद को अब पहचान ले।
जो संग नहीं आने वालें।
उन सबकों अब प्रणाम कर।।
```तु जान हैं अपनी सोच का।
खुद भाषा तेरा जीवन हैं।
कुछ लोगों की बातों में आकर।
ना अपना तु नुकसान कर।
```जल की धारा सा शीतल तु।
तुझें समझ ना पायेगा कोई।
सब मतलब से ही मीलते हैं।
तु अपना पुरा काम कर।
```ये धरती सबकी माता हैं।
अंबर पृत समान हैं।
सब आऐं हैं सब जाऐंगे।
बस राहों से अंजान हैं।
```तु रोयेगा तु खोयेगा।
सब कुछ बिफल हो जाऐगा।
बस अटल सच है ये पुरा।
तु इसको आत्मसात कर।
```इस बगियाँ रुपी जीवन में।
तु फुलों जैसा जीवन जी।
जो आऐं उसके साथ जा।
जो छुयें उसकों खुशबू दे।
```तु नन्हें बालक की भांति।
अब जीवन जीना छोड़ जा।
जीसने भी तुझकों कष्ट दिया।
उन सबसें नाता छोड़ जा।
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तु कितना भी इंसान बन।💐

दिनांक06/27/2019###रंजीतचौबे। पोयम

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Thursday, June 27, 2019

पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी //पार्ट 3💐

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पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी //पार्ट 3💐

ऊफ जैसी गहरी बारिस हो रही थी नींद भी वैसी ही लग गई थी। अब जाके मिट्ठू ने उठाया मुझे। मौसम बहुत ठंडा हो चुका है। झुमरू तो एकदम से नहा धो के बोले तो रफचिक माफिक लग रहा था। अब अंधेरा होने वाला था। बारिस भी लगभग रूक चुकी थी। पापा भी बस आने वाले थे। मिट्ठु मस्ती कर रहा था । में  जो भी में बोल रहा था वो सब दोहरा रहा था। मेरी नकल कर के माँ को हंसा रहा था। सच बोलु तो मिट्ठू ही एक ऐसा था जिससे घर में रौनक रहती थी। वो रियल में बहुत प्यारा था। उसकी वजह से घर में दस बच्चों वाली रौनक लगी रहती थी। वो अकेला ही पुरे घर को उठा कर घुमता रहता था। अब देखो माँ के सर पर बैठ कर बोल रहा है माँ मुझे नीचे उतारों आपकें बालों में मेरे पैर फंस गये हैं। माँ भी अब उसको तंग कर रही है। माँ कह रही है खुद ही निकल इस जाल से। बेचारा मिट्ठू अब जंग लड़ेगा कुछ टाईम फिर माँ खुद ही निकालेगी उसके फंसे पैरो को। पापा आ गये पापा आ गये। देख लिया इसने पापा को भी 👴 माँ मुझे उतारो। मिट्ठु पापा के पास जाने के लिये उतावला हो रहा था। माँ ने जैसे ही उसे उतारा उड़ता हूआ पापा के हाथो पर जाकर बैठ गया। पुछने लगा पापा आप कुछ लाये मेरे और शिरू के लिये। पापा कहने लगे माँ से देखो इसकी शैतानी आदत आते ही खाने के लिये क्या लाया हु पूछने लगा ।ये नहीं पूछा पापा आप चाय पानी पियोगे। मिट्ठु ने कहाँ पापा से अच्छा कैसे लाऊ मैं इतनी छोटी चोंच में पानी चाय। उसकी तोतली आवाज से पापा की सारी थकान टेंशन उड़ जाती थी। वो मुझे और मिट्ठु को फिर पास बैठाकर खुद खिलाते थे। पर आज बारिस की वजह से पापा कुछ ला नहीं पाऐं थे। इसलिये थोड़ा उदास होकर कहाँ बेटा मिट्ठ आज कोई दुकान नहीं खुली सब बारिस में बंद करके चले गये है। 

इतना सुनते ही मिट्ठू पापा से बोला कोई बात नहीं मेरा तो पेट भरा हुआ हैं बहुत आम खाऐं आज मेंने बारिस और आँधी आने से पहले। पापा ने कहाँ गुड मेरा अच्छा बच्चा फिर में और मिट्ठु अपने कमरे मैं आ गये। माँ कहने लगी शिरू मिट्ठू कमरे मैं बैठो कुछ बना कर लाती हु खाने के लिये। में कमरे मैं मिट्ठु से बाते करने लगा जो भी में बोलता उसकी सेम वही भाषा होती थी। हमनें घर के आँगन की सभी लाइट जला दी। बाहर ठंडी ठंडी हवा थी और बहुत खुबसुरत चाँदनी रात चमक रही थी। में और मिट्ठू झुमरू को खिड़की से देख रहे थे। उससे बातें भी कर रहे थे। 

पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी //पार्ट 3💐

आज का मौसम देख कर एक बार तो ऐसा भी लग रहा था मुझे जैसे पेड़ पौधो को भी ज्यादा बारिस और हवा से डर लगता होगा। क्योंकि घर के बाहर रोड के आस पास काफी पेड़ टुट गये थे। कुछ पेड़ की डालियाँ भी टुटकर रोड पर पडी़ हुई थी। रास्ते से गुजरने वाले लोग परेशान तो हो रहे थे। पर कोई भी पेड़ को ठिक से उठाकर साईड में नहीं करता था। ये सब देखकर अच्छा नहीं लग रहा था। मैं और मिट्ठु झुमरू से पुछ रहे थे। आपको कहीं चोट तो नहीं लगी है। झुमरू जवाब मैं थोड़ा हिलता और कहता था नहीं। पर उसको देखकर ऐसा लगता था जैसे वो अपने साथी पेड़ो की चोट देखकर बहुत आहात  था। हम इंसान होकर भी प्राकृतिक के प्रति बहुत लापरवाह होते हैं। ये बहुत गलत बात है। झुमरू बोल नहीं सकता था। क्योंकि वो एक पेड़ हैं परन्तु मिट्ठू एक पंछी होकर भी दुखी था। वो कह रहा था। शिरू भईयाँ आज के आँधी तुफान मैं पता नहीं कितने झुमरू टुट कर गीर गये होगें और उनके साथ हम अनगिनत पंछियों का घर भी उजड़ गये होगें। मिट्ठू कह रहा था शिरू भईया़ हर झुमरू और हर मिट्ठू के पास शिरू जैसे बच्चे दोस्त भाई नहीं होते ना इसलिए दुनियां मैं। हर पेड़ हर पंछी अपनी पुरी जिंदगी नहीं जी पाता और वक्त से पहले ही काल के गाल में समा जाता है। मिट्ठु इतना छोटा था पर वो एक इंसान से ज्यादा समझदार था। उसे इंसान पेड़ पंछी जीव प्राकृतिक सबकी समझ थी। में सोचता हु हम सब तो इ़सान हैं।हमारे पास बहुत बड़ी बुद्धि ज्ञान धन सम्पदा सब कुछ होते हुये भी। एक तरह से कुछ भी नहीं है। मेंने स्कुल की ज्यादातर पढाई जाने वाली समझ अपने पंछी मित्र मिट्ठु में देखी थी। वरना आप खुद ही बता दिजिऐं वो कौन सी पाठशाला मैं गया था। बचपन से सिर्फ़ मेरे साथ था। उड़ना बोलना सब मेरे सामने सिखा था। फिर भी उसकी समझ ज्यादा थी। बस इतना कहनां चाहता हूँ। अगर पेड़ पौधे पंछी नहीं तो सोचो न आप ये दुनियां इनके बीना कैसी बदसुरत दिखेगी। क्या हम अच्छी साँसे ले सकते हैं इनके बीना क्या हम अच्छे फल सब्जियों को उगा सकते हैं इनके बिना। क्या हम एक हरा भरा वातावरण देख सकते हैं इनके बिना क्या हम अपनी जरूरत की सुविधाएं जुटा सकते हैं इनके बिना नहीं जी। हम इंसान प्रराकृतिक की इस सबसे प्रिय रचना के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। आपको पता है मेंने एक विदेशी घटना पढ़ी थी आयरलैंड की। वहाँ रोड बनाते वक्त एक पेड़ रास्ते में आ गया था। तो वहाँ की पब्लिक और सरकार ने मिलकर वो रास्ता ही कई सौ किलोमीटर दुर से बनाया पर उस पेड़ को छती नही होनें दिया। क्या हम भारतीयों का भी यही कर्तव्य नहीं बनता हम अपनी भारत माँ की सुंदर प्रराकृतिक को और भी सुंदर बनाये रखें। अधिक से अधिक पेड़ पौधौ को लगायें पंछी जीव जंतु और प्रत्येक प्राणी की रक्षा करे। और टेक्नाँलिजी का उपयोग कम करे इंटरनेट का उपयोग उतना ही करे जिस से हमारे दैनिक जीवन की परंपरा पर भी असर ना पड़े पंछियों की जान पर ना बने। इस छोटी सी कहानीं का शिरू मिट्ठू और झुमरू आप सभी से यहीं निवेदन करते है। ईश्वर की बनाई इस सुंदर भव्य पृथ्वी को उसके जीवन को अस्त व्यस्त ना करे। तभी हम सभी का जीवन सुखमय सुगम होगा जय हिंद। 
पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी //पार्ट 3💐
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##there is a New path on every step //

Wednesday, June 26, 2019

मेरा दिल और भगवान। पौयम💐

मेरा दिल और भगवान। पौयम💐

तु भी अजीब हैं भगवान।

जो सही हैं उसकों भी।

रुला देता हैं।

और गलत लोगों को।

आसमान में बैठा देता हैं।

```तेरी भी करनी हमें नहीं भाती।

सारें इलजाम ।

तु दुसरों पर लगाता हैं।

आज एक वादा करता हु तुझसे।

तेरे दर पर अब ना आऊंगा।

ना ही तुझसे कुछ अरज रहेंगी।

ना ही अपना दर्द सुनाऊंगा।

```में तो नादान हु।

पर तु तो भगवान हैं ना।

में समझ नहीं पाता किसी को।

पर तु तो अंजान नहीं ना।

````कितना दर्द हुआ हैं आज तेरे कारण।

क्या गुनाह हैं बता जरा।

कहां छुपा बैठा हैं ।

आ हमसें नजरें मीला जरा।

```बहुत शांत हैं तु भी।

हमेशा गुनाह देखता आया हैं।

बाद में तु भी।

औरों की तरह पछताया हैं।

```हम तो तुझें मानतें थें।

हर पल तुझें साथ पाया था।

लेकिन आज भग्वन तुने हमें।

फुट फुटकर रूलाया हैं।

```तु बता जीनें की वजह मेरी।

एक मकशद की तलाश दे।

कहीं दुर जाना चाहता हु।

भग्वन एक लम्बा सा वनवास दे।

```तुझसे मेरी लड़ाई में जीत मेरी होगी।

तु एक दिन हारेगा मेरे दोस्त।

क्योंकि तु इश्वर् हैं।

और में इंसान हु।

तुझपर लगी हैं लोगों की।

आशाएं और में आजाद हु।

मेरा दिल और भगवान। पौयम💐

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#रंजीतचौबे।

#मेरादिलऔरभग्वन

#06
/26/2019

ये दुनियाँ एक मुखौटा हैं। कविता ***💐

Edmranjit. 

ये दुनियाँ एक मुखौटा हैं। कविता ***💐

कहते हैं जिंदगी इबादत है। 
कोई कहता हैं ये वरदान हैं।
फिर भी इसकी हिफाजत नहीं।
कोई जमकर पीता हैं शराब।
कोई हत्या कर खाता हैं कबाब।
वाह रे इबादत वाह रे वरदान।
```में तो हु बहुत छोटा।
कभी कभी बोल जाता हु ।
खोटा खोटा।
हमें समझ आती हैं बस माँ की।
दुनियाँ ही।
बाकी सब लगता हैं मुखोटा।
````मैंने जब से होश सम्भाला हैं।
कही कुछ बुरा देखा तो कही देखा।
काला काला हैं।
दुनियाँ से सुनता आया हु।
जग का खैल निराला हैं।
पर जो समझ पाया वो इतना ही।
बाकी सब घोटाला हैं।
बस मातृ प्रेम ही सच्चा हैं।
वो ही अमृत का प्याला हैं।
````एक एक पग में चलता हु।
तुम सब जैसेः चलतें हो।
पर तुम में मुझमें फर्क बहुत।
तुम मतलब बनकर चलतें हो।
मैं चलता हु बस चलने को।
``` कभी समझ ना पाओगे।
तुम जब तक खुद का सोचोगे।
जिस माटी का खाओगे तुम।।
उस माटी को बेचोगे।
````कुछ लोग तमाशा करतें हैं।
सब लोग वहाँ थम जातें हैं।
वो लोग जो मतलब के साथी।
वो लोग बड़े बन जातें हैं।
``` सब तीर निशाने पर होगें।
ऐसी तो कोई साध नहीं।
जो लोग जीयें अच्छा बनकर।
वो जीवन तो बरबाद नहीं।
````हर फुल मैं आशा हौती हैं।
वो देव पास ही जाऐगा।
पर किस्मत अपनी अपनी हैं।
कोई पुजा तक ही जाऐगा।
कोई गलत हाथ लग जाऐगा।
``` एक बात हमें भी चुभती हैं।
ये दुनियाँ जैसी दिखती हैं।
वैसा इसका स्वभाव नहीं।
तुम चाहे जितनें अच्छे हो।
पर सबका एक बर्ताव नहीं।

ये दुनियाँ एक मुखौटा हैं। कविता ***💐

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#लेखन रंजीत चौबे
#दिनांक26/06/2019

Monday, June 24, 2019

वक्त तो एक रोज बदल ही जाएगा।कविता 💐

वक्त तो एक रोज बदल ही जाएगा।कविता 💐



वक्त तो एक रोज बदल ही जाऐगा ।
कभी आऐंगा तो कभी जाऐगा।
तुम मौसम की तरह मजें लेना।
तुम्हारा कल भी आज पर शरमाऐंगा। 🤔
जिंदगी मैं दगा ना करो किसी से भी।
ये रंग की तरह लौट आता है वापस।
वक्त जब निकल जाता हैं नेकी करने का।
तो इंसान सिर्फ़ पछताता है वापस। 🤢
कुछ इम्तिहान तो आप का दिल भी लेगा।
कभी हसाऐंगा तो कभी रूलाऐंगा।
आप सम्भल कर चलना इसकी राह पर।
वरना ये बहुत आगें निकल जाएगा। 🤕
हम में ना जिना कभी यारों
ये बहुत अंहकार से भरा लगता है ।
जब मुश्किलों से टकराती हैं राहे।
तो ये गला फाड़ फाड़ कर हंसता हैं। 🤡25/06/2019 ✊
तूफ़ान बनकर जीना मगर शांत रहना।
जूबां को तराज़ू की तरह निश्पाप रखना।
हाथों की लकीरों पर एतबार मत करना।
अपनें कर्म की जर्नी पर ध्यान रखना। 🤔
जब भी रास्ता मुश्किल लगे लम्बी सांस लेना।
कुछ पल रूक जाना अपना विश्वास लेना।
काटों का तो काम ही होता है इम्तिहान मैं।
ह्दय को कोमल रखना उसे भी साथ लेना।
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Writing by ranjit choubeay.

वक्त तो एक रोज बदल ही जाएगा।कविता 💐



#मन #के #अलफांज #रंजीत#चौबे।

poetry कुछ सोचता ही नहीं अब तो।💐

Edmranjit

poetry कुछ सोचता ही नहीं अब तो।💐


कुछ सोचता ही नहीं।
अब तो।
बस सोया रहता हु।
अतीत को याद कर
उसमें खोया रहता हु।।
""'"कौन हकीकत का जीता हैं।
सब तो दो चेहरे लगाऐं रहतें हैं।।
कुछ पल किसी के होतें हैं।
बाकी ढोंग रचाएं रहतें हैं।।
"""फलसफा जीवन का अब।
हैं कहां।
यहाँ बस तशबीर दिखाई जाती हैं।।
खुशी इश्क मजहब अब हैं नहीं।
इनके नाम बस जिंदा हैं।।
जिसमें अब किस्मत की लकीर।
बताई जाती हैं।।
"""हुनर भी सिखाया जाता हैं।।
पता हैं अब जिने का।
सोचता हु क्या दादा जी ने।
कुछ गलत सिख सिखाईं थी।।
फिर लगता हैं।
अब लोग कुछ बदले बदलें से हैं।।
""""अजीब सी सुगबुगाहट हैं।
हर तरफ हलचल ही दिखती हैं।
फिर भी ना सावन बदला हैं।
ना पतझड़ खोया हैं।
ना मौसम ने रंग कभी बदलें हैं।
सच कहुँ तो सब वही का वहीं हैं।
बस बदलें हैं तो सिर्फ वहीं इंसान।
बदलें हैं।।
"""बस वहीं इंसान बदलें हैं।।

poetry कुछ सोचता ही नहीं अब तो।💐

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#ranjit choubey
#Writing
#Poetry
#Date 24/06/2019

पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी,,, पार्ट( 2)💐

Edmranjit. 


पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी,,, पार्ट( 2)💐

आज तो नास्ते पर माँ बहुत गुस्सा होने वाली थी। पर अचानक से मौसम चेंज सा हो गया आसमान मैं तेज हवाऐं चलने लगी और साथ साथ माँ के चेहरे पर रौनक सी आ गई। वो तेज तेज मुझे आवाज लगाने लगी। शिरू शिरू बेटा देखो मिट्ठु कहाँ है।आया है या नहीं तेज हवा और बारिस का मौसम बन गया है। चिन्ता की बात थी क्योंकि मिट्ठु सुबह से ही गायब था और अब हल्की हल्की बारिस होनी शुरू हो चुकी थी। तभी मुझे खिड़की से आवाज आई। शिरू शिरू खिड़की खोलो खोलो मैं भींग रहा हूँ मै समझ गया ये मिट्ठु ही है। उसकी आवाज सुन माँ भी कमरे मैं आ गई और मुझसे पहले माँ ने खिड़की खोली। खिड़की खुलते ही मिट्ठु उड़ता हुआ माँ माँ बोलता माँ से चिपक गया। और बोलने लगा माँ शिरू में गिला हो गया हु मुझसे उड़ा नहीं जा रहा माँ मिट्ठु से बहुत प्यार करती थी कभी कभी तो मुझे लगता था जैसे इसने मेरी जगह ही छिन ली हैं। पर में जानता था मिट्ठु भी बहुत प्यारा हैं।  मैं  भी उसे बहुत प्यार करता हु। माँ ने मिट्ठु के पंख हल्के कपडे़ से पोछ दिये अब वो मस्ती करने लगा फिर माँ चली गई। मेने उससे पूछा कहाँ गया था तू तो कहने लगा शिरू तुम तो सारे दिन घर में रहते हो या झुमरू के साथ बाते करते हो। इसलिए में अपने दोस्तों के साथ बगीचे मैं आम खाने चला गया था भर पेट मीठे मीठे आम खायें और जब पेट भरा तो आ गया । मैने पुछा अपने झुमरू के आम क्यों नहीं खाता तू तो कहने लगा रोज रोज एक ही आम खा कर जी भर गया था। माँ ने भी मिट्ठु की बात सुनी तो हँसने लगी। और उससे कहाँ मिट्ठू बेटा अकेले ही सारे आम चख आऐं माँ के लिये नहीं लाऐं मिट्ठू कहने लगा केसे लाता केसे लाता माँ मेरी छोटी सी चोंच हैं। माँ फिर हँसने लगी वो बोलता ही ऐसे था कोई भी हँस दे। झुमरू आज तेज बारिस और हवा का आनंद ले रहा है उसकी डालियाँ आम और बारिस के पानी से दबकर काफी नीचे नीचे लटक रही हैं। डर भी लग रहाँ हैं कहीं कोई डाली टुट ना जाऐं। पर ऐसा नहीं होगा क्योंकि झुमरू को घर की छत से अच्छा सा स्पोट मिला हुआ है।पापा ने तो शाम को ही झुमरू की उन डाँलियों पर ध्यान से स्पोट लगा दिया था। 

पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी,,, पार्ट( 2)💐

जिन पर ज्यादा आम आ गये हैं। मिट्ठू भी अब सो गया शायद भिगनें की वजह से उसको अब नींद आ गई हैं। मुझे भी बारिश बहुत पसंद हैं। पर ये शिमला की बारिश हैं यहाँ पानी की बुंदो के साथ बरफ भी
बरसती हैं। इसलिए माँ परमिशन नही देगी पर मुझे एक आयडिया पता है। में हर बार बारिस का मजा ले लेता हु और माँ की डाँट से भी बच जाता हूँ। ये आयडिया भी मुझे झुमरू से ही मिला था एक बार बारिस बंद होने के बाद में झुमरू के पास गया उसके नीचे खडा़ होकर बोलने लगा काश माँ मुझे भी बारिस मे नहानें की परमिशन देती तो मुझे भी मजा आता। बस फिर क्या झुमरू ने सुनते ही हिलना शुरू कर दिया। जितना भी बारिस का पानी झुमरू ने अपने पतो पर रोक रखा था सारी की सारी बुंदे मेरे ऊपर आ गिरी और में एक तरह से बारिस का आनंद ले रहा था। तब से जब भी बारिस होती हैं मैं यहीं करता हूँ। झुमरू भी मेरे लिये ज्यादा पानी रोके रहता है। हाहाहा। कभी कभी सोचता हु अगर मेरी लाइफ मैं झुमरू और मिट्ठू नहीं होते तो मैं कितना अकेला होता। क्योंकि पापा तो अपने काम पर ही रहते हैं। और माँ भी अपने इंटरनेट गुरू मैं  ही बिजी रहती है। उन्हें सिर्फ़ नास्ता डिनर और सुबह शाम शिरू दिखना चाहिए बाकी का टाइम स्कुल हैं तो वहां नहीं तो मोबाइल युज ही ज्यादा रहता है।  इसलिये शायद सभी बच्चे आजकल गेंम्स और फिल्मो पर फोकस करते हैं।लेकिन मुझे तो मोबाइल फोन भी नहीं दिया जाता माँ कहती हैं बिगड़ जाओगे अभी उम्र नहीं तुम्हारी मोबाइल चलाने की। और क्या बताऊं बारिस रूकने का इंतजार है खिड़की खोली हुई हैं बाहर देख कर खुश हो रहा हु। ये इस साल की पहली बारिस भी है शायद मानसुन आ गया है। वैसे मेरे पास बातें तो बहुत हैं पर बात करने वाला अभी कोई नहीं है मेरे दोनों दोस्त अपनी दुनियां में मस्त हैं। कुछ टाइम बाद मिट्ठु उठ जाऐगा अपनी तोतली आवाज के साथ घर में हंगामा करेगा। तब माँ भी मोबाइल रख देगी  क्योंकि मिट्ठु को 

पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी,,, पार्ट( 2)💐

मोबाइल पंसद नहीं वो उस पर चोंच मारना शुरू कर देता है। इसलिए माँ डरती है कही मिट्ठ माँ का मोबाइल ना तोड़ दे। दोपहर हो चुकी हैं और बारिस तो खुलने का नाम ही नहीं ले रही अब शायद मैं भी सो जाऊगाँ क्योंकि ठंडी ठंडी हवाऐं चलने लगी है। ऐसे में पता नहीं क्यों नींद आ रही हैं ठिक हैं मैं आप सभी से मिलता हु कुछ टाइम बाद अगर आप के भी शहर या गाँव मैं बारिस आ रही है तो उसका मजा लीजिए तब तक में भी एक हल्की नींद लेता हूँ। फिर आप से मीलता हु। आप सभी से बाते शेयर कर के मुझे अब बहुत अच्छा लग रहा है ऐसा लगता हैं जैसे अब मेरै पास बहुत सारे दोस्त है। आप सभी को (शोर्या उर्फ शिरू का बहुत सारा प्यार झुमरू और मिट्ठ की तरफ से भी बहुत बहुत प्यार) रंजीत चौबे। 

पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी,,, पार्ट( 2)💐

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24/06/2819,,,,,,,,,,,,🏠🙏 

मेरी जिंदगी की अदभुत कहानी रही हैं //Poetry motivational.💐

Edmranjit.

 मेरी जिंदगी की अदभुत कहानी रही हैं //Poetry motivational.💐

मेरी जिंदगी की अदभुत।
कहानी रही हैं।
कभी चलतें चलतें।
कभी ठहरें ठहरें।
बस रुकती और चलती।
रवानी रही हैं।
```सुकूँ में भी आलम।
वो तनहा सी रातें।
कभी सर्द मौसम कभी।
कभी सुर्ख साँसें।
ना रूकती ना चलती।
वो ठहरी सी चंचल।
दिशा हिन मानों ।
रवानी रही हैं।
मेरी जिंदगी की अदभूत।
कहानी रही हैं।
```चलें हम तो मानों।
हवायें भी चल दी।
हमरी जीवन की रुकती।
दिशायें भी चल दी।
नहीं कोई इसका।
सहारा था अपना।
फिर औझल सी राहों को।
तकती ही चली दि।
```रहा दिल भी तनहा।
उमंगों के संग में।
वो साथी और रथ के।
सहारे रही हैं।
मेरी जिंदगी की अदभुत।
कहानी रही हैं।
```हैं सुना सा रस्ता ।
  मेरा सुन ले साहिल।
तु अपना नहीं था तो आया ही।
क्यों था।
चलें हम थें तनहा तो।
तनहा ही रहतें।
मेरें ख्वाबों का दिया ।
जलाया ही क्यो था।
```में जल में भी खुश था।
कोई चाहत ना थी।
पहाड़ों की कोई आहट ना थी।
ये जीवन तो मुझकों छोटा लगा था।
कोई लम्बा सपना सजाया ना था।
वो बगियाँ की खुशबु में।
खोई सी बुंदे।
मेरी खुशियाँ की हल्की निशानी रही हैं।
मेरी जिंदगी की अदभुत।
कहानी रही हैं।
```मेरी दुनियाँ तो थी एक।
छोटी सी बगियाँ।
एक माली था उसमें।
जो प्यार था सबका।
नहीं कोई झगड़ा नहीं कोई।
शिकवा।
शिकायत की कोई भाषा भी ना थी।

 मेरी जिंदगी की अदभुत कहानी रही हैं //Poetry motivational.💐

सुबह सो के उठता था सुरज से पहले।
ऐसा लगता था जैसे सवेरा हो उसका।
कभी शौर करता कभी चुप ही रहता।
उसकी अपनी तो कोई अभिलाषा नहीं थी।
कभी लिखता खुद को।
कभी परखा खुद को।
ये मिलना बिछड़ना रवानी रही हैं।
मेरी जिंदगी की अदभुत।
कहानी रही हैं।
````थोड़ा विचलित हु अब में।
पर हारा नहीं हु।
तुम सा तो बिल्कुल आवारा नहीं हु।
में रो कर भी हंसना सीखुंगा फिर से।
और तुम सा तो बिल्कुल बेचारा नहीं हु।
में आशिक हु पागल दिवाना भी हु में।
जो छलक के ना छलकें वो परवाना भी हु में।
हैं दिल मेरा सच्चा और प्यार भी सच्चा।
बस समझें जो इसको वो यारा नहीं हैं।
मेरी जिंदगी की अदभुत ।
कहानी रही हैं।
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#दिनांक024/06/2019

 मेरी जिंदगी की अदभुत कहानी रही हैं //Poetry motivational.💐

Sunday, June 23, 2019

ऐं मुहब्बत तु हार गई।💐

Edmranjit.

ऐं मुहब्बत तु हार गई।💐

दिल की चोट बहुत।
गहरी हैं ।
उम्मीद का दामन छोटा था।
मेरा प्यार उसमें समाता ही कैसे।
उसके दिल में घंमड का पहरा था।
```चाहत की सीमा नहीं होती।
ये हम जानतें हैं।
मोहब्बत में चोट खाईं हैं हमनें।
तो दर्द भी पहचानतें हैं।
```और क्या बोलता में।
एक साथ मांगा था उनसें।
उन्हें उसमें भी मेरी कोई।
साजिश नजर आई थी।
```क्या पता लोग क्या चाहतें हैं।
मोहब्बत तो बस मोहब्बत ही।
चाहेगी।
किस्मत आजमाने वालों को।
मोहब्बत कहाँ मील पाऐंगी।
```हम हार गयें पर  गम नहीं।
क्योंकि हमनें दिल दिया था।
वो जीतें भी तो क्या मिला होगा।
पता नहीं क्या सौदा किया था।
```मेंरी तड़प भी मेरी अपनी हैं।
उस पर तो किसी का जोर नहीं।
अब चाहें जैसे जीऊँगा में।।
खुशी या गम पिऊँगा में।
```माना के सब इंसान हैं।
पर करनी एक समान कहाँ।
कोई हिरो हैं कोई जीरों हैं।
सबकी अपनी पहचान हैं।
````थोड़ा थम सा गया था में।
करता भी क्या।
दिल हैं यें कोई मशीन नहीं हैं।
इसको समझाना बड़ा मुशकिल हैं।
जल्दी बस में हो जाऐं।
ऐसी कोई तरकीब नहीं।
```कहतें हैं एक दिल में।
सागर भी समा जाता हैं।
अगर उसका गम उफान।
पर हो तो।
सारी दुनियाँ की खुशियों पर।
 मानों पानी फिर जाता हैं।
```हमनें भी खुद को डुबते ही पाया।
पर वो शायर ही क्या जो।
कश्तियों के साथ बह जाऐं।
मोहब्बत सच्ची वहीं होती हैं।
जो मर कर भी जिंदा रह जाऐं।
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#दिनांक23/06/2019
Writing by ranjit choubeay

ऐं मुहब्बत तु हार गई।💐

पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी//पार्ट 1)💐

Edmranjit.

पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी//पार्ट 1)💐

मेरा नाम शोर्या हैं अभी बहुत छोटा हु। शिमला मैं  पहाड़ियां और बर्फ से ढ़का मेरा घर बहुत क्युट हैं ।बिल्कुल मेरी तरह में यहाँ माँ पापा के साथ रहता हूँ। पापा एक इलेक्ट्रॉनिक शाँप चलातें हैं और माँ स्कूल टिचर हैं। माँ प्यार से मुझें शिरू बुलाती हैं अभी अभी कुछ दिनों पहले ही मेरा ऐडमिशन हुआ है एक काँनवेंट स्कुल मैं। पर अभी समर की छुट्टियाँ हैं तो बिल्कुल ही बोर हो रहा हूँ। स्कूल में मेरे सब क्लास मिट बाते करते हैं समर मैं नाना नानी के घर जाऐंगे कोई कहता है हम तो छुट्टियाँ मनानें अपनें गाँव जा रहें हैं कोई दोस्त कहता हैं हम कही और हिलस्टेशन जा रहे है घुमनें ।सबकी बातें सुनकर मुझें ऐसा लगता है जैसे सभी को समर का ही इंतजार था ।पर मुझे तो ये सब बिलकुल पंसद नहीं मेरी पसंद तो सिर्फ़ मेरा अपना ये घर हैं। अब देखों आप माँ को ही सुबह से उठी हैं और दो बार मुझे आवाज भी लगा चुकी है। शिरु शिरू बेटा उठ जा चाय पी ले बहुत देर हो चुकी हैं। लेकीन सच बताऐं आपकों माँ ने बोल तो दिया है बेटा उठो चाय पी लो लेकीन चाय अभी बनाई नहीं है। क्योंकि वो तो अपने मोबाइल वालें बेटो से बात कर रही है। सुबह की पोस्ट उस पर आने वाले कमेंट सभी को राम राम सुप्रभात और अपनी कुछ सहेलियों से गप्पे गप्पी। और पापा उठकर चाय बनाकर पी कर मुझें सोता हुआ समझकर दुकान जा चुके हैं। पता है आपको सोचता हु किसने बनाया होगा ये मोबाइल फोन इंटरनेट और इसके साथ ये सोशल साइड। आप ही देखों यहाँ लोग सब कुछ पा रहे है। अब इस पर मिलने वाली माँ बहन मौसी भाई दोस्त कितने खुशनसीब होंगे ना। क्योंकि उन्हें बिना किसी मेहनत झमेले के सारे रिस्ते मोबाइल में ही मिल गये हैं। अभी उठ जाता हूँ। क्योंकि ऐसा लग रहा है जैसे माँ अब मोबाइल मैं थक चुकी है इसलिए 🍵 लेकर कमरे मैं ही आऐगी। और नहीं उठा तो वापस फिर मोबाइल उठा लेगी अब अपने लिये ना सही पर माँ के लिये तो उठना ही चाहिए। नौ बज चुकें हैं धुप आ चुकी है। और अभी तक बेटा तु सोया हुआ है रात को लैट सोया था क्या। नहीं माँ में तो 11बजे ही सो गया था अच्छा अब ये चाय खत्म करो और फ्रेस हो जाओ। जी माँ में जा रही हु तुम्हारे लिये कुछ नास्ता बनाने। माँ फिर चली गई चाय कप मेरे हाथों मैं है और मैं धिरे धिरे चुस्की लेता हुआ अपने रूम की खिड़की खोल रहा हु। मेरे घर के आँगन मैं एक पेड़ हैं आम का पापा ने बहुत पहले लगाया था। 

पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी//पार्ट 1)💐

माँ कहती है जब तुम नहीं हुये थे काफी पहले जब हमारी शादी हुई थी। कुछ तीन साल तक कोई बच्चा नहीं हुआ था। तो गाँव वाले और तुम्हारी दादी के ताने सुनते सुनते हम दोनों ही तंग हो गये थे। हम दोनों अपने काम को लेकर बहुत सिरियस थे हम चाहतें थे एक बार दोनों अच्छे से अपने काम मै सेटल हो जाएं। फिर बच्चा भी कर लेंगे पर दादा दादी को ये बात नहीं नजर आती थी। और फिर एक दिन दादी से माँ की बहुत बहस हो गई। पापा को भी दादा दादी की बातों से दुख हुआ। ये बात अलग थी के उनके भी अरमान थे अपनी जिंदगी मैं पोता  के साथ खेलने की उसको देखने की। पर आज के इस भागमभाग जिंदगी मैं कहाँ कौई किसी के अरमानो को समझता है। माँ पापा को दादा दादी की ममता जबरदस्ती लगी। और उन्होने घर छोड़ना ही उचित समझा। फिर माँ पापा यहाँ शिमला आ गयें मुलरूप से हमारा गाँव उतर प्रदेश के बरेली मैं पड़ता हैं। शिमला आने के बाद पापा इलेक्ट्रॉनिक का काम करने लगें और माँ ने तो अपनी पोस्टिंग ही यहीं चुनी थी वो गौरमेंट टीचर  हो गई थी। तो उस टाइम जब पापा मम्मी शिमला आऐं तभी उन्होने कुछ महीनों बाद ये घर लिया और बड़े प्यार से अपने घर के आँगन मैं ये आम का पौधा लगाया था। माँ कहती हैं अब ये चौदह साल का हो चुका है। मतलब ये मुझसे पुरे पाँच साल बडा़ हैं में अभी नौ साल का हु। सच कहें तो ये पेड़ नहीं है यही मेरा दोस्त हैं बचपन से आज तक में इसके सहारे ही खुश रहता आया हु शाम होती है इस पर चढ़कर बैठ जाता हूँ झुला झुलता हु। और अपनी हर छोटी बड़ी बात इससे ही करता हूँ। मैंने मेरे इस दोस्त का नाम भी रखा है। इसका नाम झुमरू हैं जब भी मुझें कभी थोड़ी गर्मी लगती हैं ये समझ जाता हैं और झुमनें लगता हैं। आज से दो साल पहले में झुमरु के ऊपर ही बैठा हुआ था और उससे बाते कर रहा था। तभी मैनें देखा एक कौआ किसी छोटे से पंछी को मार रहा है वो छोटा पंछी कहीं से झुमरू के ऊपर आकर बैठ गया था। पास ही एक बगीचा था शायद ये छोटा पंछी वहीं से उड़ता हुआ आया था। और कौऐं का शिकार होनें वाला था। तभी झुमरू बहुत तेज हिला जैसे आँधी आ गई हो। मुझे ऐसा लगा जैसे झुमरू मुझसे कह रहा हो उठो शिरु इसकी मद्त करो। मैनें तुरंत उस कौऐं को भगाना चालु किया।तभी दुर से बहुत सारे तोते एक साथ कोऐं के पास आकर उस पर टुट पडे़ और कौआ शैतान भाग गया उन सब तोते मैं एक मिट्ठु की माँ थी। हम सबनें मिलकर उसको बचा लिया था। अब शौर बंद हो चुका था सारे पंछी जा चुके था। छोटा मिट्ठु और उसकी माँ झुमरू के ऊपर ही बैठे थे। शायद उन्हें भी झुमरू मैं अब अपना नया घर मिल गया था उन्हें लगा शायद ये जगह उनके लिये ज्यादा शुरक्षित रहेगी। और उस दिन से ही छोटा मिट्ठु अपनी माँ और झुमरू के साथ हमारे आँगन मैं ही रह गया। मैने कमरें की खिड़की इसलिये ही खोली हैं की अपने दोस्त के दर्शन कर ली। मिट्ठु अब बड़ा हो गया है पहलें जब आया था तो उड़ नहीं पाता था अब देखो शायद सुबह से ही गायब है। वो मुझे सुबह सुबह ही आवाज देता है शिरू शिरू उठो उठो सुबह हो चुकी हैं। माँ भी गुस्सा कर रही है उठ जाओं कुभ करण। और मैं जाग कर भी मजें लेता हूँ ।क्योंकि मुझे इसमें ही खुशी मिलती हैं अब में नीचें जा रहा हु क्योंकि झुमरू को भी पानी पिलाना हैं और माँ के हाथ से नास्ता भी करना है। नहीं गया तो माँ नास्ता भी अपने इंटरनेट वाले बंधुओ को करवा देगी और फिर में भुखा रह जाऊगां। मिलता हु कुछ टाइम बाद। सुप्रभात आप सभी को। आपका(शिरू।

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Writing by ranjit choubeay .
23/06/2019


पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी//पार्ट 1)💐



Saturday, June 22, 2019

जीवन एक चक्की। पोयम💐

Edmranjit.

जीवन एक चक्की। पोयम💐

आज से बेहतर सीख।
कल कभी दे नहीं सकता।
और सच ये भी हैं यारों।
जो तेरा हैं उसें कोई।
ले  नहीं सकता।।
""""एक ही तो गाड़ी हैं।।
दुनियाँ में।
बाकी तो सब मोह माया हैं।
ये ऊपर वालें की चक्की हैं।
भईया इसें कौन समझ पाया हैं।।
""""ना तुम जानों ना हम जानें।
बस इरादे लिये आऐं हैं।।
कोई किसी को समझाऐगा।
कोई तो खुद ब खुद समझ जाऐगा।
"""कभी इरादें कमजोर भी होतें हैं।
ना समझ तो बोर भी होतें हैं।
कोई सीखता हुआ भी खाली रह जाता हैं।
कोई मेहसूस कर सीख जाता हैं।।
""""ये तो जीवन की डोर हैं।
काफी उलझा एक छोर हैं।
ज्यादा सोचना नहीं बस चलतें जाओं।
हो सकता हैं मंजिल खुद अपनी ओर हैं।
"""पता नहीं एक पल में इंसान पराएँ।
भी हो जातें हैं।
कहीं मीलते हैं अपनें बनकर।
फिर दुर कहीं खो जातें हैं।
ये तो उलफत की बात हैं।
वरना हमने तो बहुत और भी सुना हैं।
दिवाने तो मर कर भी जिंदा हो जातें हैं।
""""उनका क्या कहें बस समझ लो।
वो साँस हैं।
कहीं उनकी याद हैं तो कही कुछ आस हैं।
वो बिछड़े नहीं बस खफा हैं प्यार से।
इस दिल को तो उनकी हर बात का।
एहसास हैं।।
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Writing by ranjit chubeay
#poetry
#date23/06/2019

जीवन एक चक्की। पोयम💐

दार्शनिक के विचार💐

Edmranjit.

दार्शनिक के विचार💐

एक दार्शनिक लिखता है।
निराश कौन नहीं हौता।
अद्भुत विचारों को परोशने।
वाला वक्ति भी निराश हौ जाता हैं।
।।
जीवन चक्र बहुत सरल नहीं हैं।
अपितु कुछ लोग अपनी कुशलता से।
अपनें आसाधारण ज्ञान से।
अपना जीवन लक्ष्य समझ लेतें हैं।
।।
हममें से अधिंकाश लोग खुद की।
सफलता के लिऐ हमेंशा सघर्ष करते हैं।
और अपने जीवन की बहुत सी मुलभूत।
आवशयकताओं को भुल जाते हैं।
।।
सरलतापूर्वक भी कुछ लोग वो।
सब हासिल कर लेतें हैं।
जो अस्मान्य सा प्रतित हौता हो।
क्योंकि उनहोंने पहले अपने।
अंदर कि शक्ति को पहचान लिया हौता हैं।
।।
एक कामयाब मनुष्य हमेशा ही।
दुनियाँ की सोच से कुछ अलग।
अपनी दुनियाँ देख लेता हैं।
और फिर बाद में दुनियाँ उसकी।
कामयाबी का बखान करती हैं।
।।
एक बात और  हैं जो खास हैं।
कुछ खास हौते हैं वो बिरले लोग।
जो पुरे समाज को कुछ ऐसा दे जातें हैं।
जो हम और आप कभी नहीं दे पातें।
और वो खास बात हौती हैं हर बार ।
गिरकर फिर से संभल जाने कि क्षमता।

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Writing by ranjit choubeay.
02/09/2019

दार्शनिक के विचार💐

क्या प्यार जैसा भी कुछ होता हैं💐

Edmranjit.

क्या प्यार जैसा भी कुछ होता हैं💐

#आज #बात #करेंगे #लव #लाइफ #पर#
दोस्तों ईश्वर ने मनुष्य को एक बहुत बड़ा तोहफा दिया#जिसें हम सब जिंदगी कहतें है#
साथ में दिया जिंदगी से भी खूबसूरत एहसास इमोशन रिस्ते वगेराह वगेराह#चाहें तो इस पर हम सारी जिंदगी लिखते रहे पर ये खत्म ना हो जिंदगी वो पन्ना हैं जो कभी भर नहीं सकता। क्या होता हैं प्यार what is love...अगर बात करे तो हम सब की जिंदगी मैं सिर्फ कुछ ही पल हैं और उसमे पलने वाले ख्वाबों की फेरहिस्त बहुत लम्बी हैं।क्या कभी किसी के सारे ख्वाब  पुरे हुये हैं। अगर बात करे इमानदारी से तो नहीं। कभी इस दुनियां मैं आने वाले किसी भी इंसान के सारे सपने पुरे नहीं हुये सिंकन्दर महान शब्द नाम लेकर दुनियां से गया बेचारे ने अपने अंतिम शब्द में कहाँ मैं खाली जा रहा हूँ।
एक सीख दे गया दुनियां को। एक ऐसा साशक जिसने मोहब्त भी की और दुनियां भी जीती पर फिर भी कुछ अधुरा रह गया। जो वो भी पुरा पा नही सका।आप सभी जानते ही होंगे जब सिंकन्दर जिंदगी से मोहब्त करना चाहता था तब जिंदगी ने उसका साथ छोड़ दिया वो जीना चाहता था पर जी न सका।
प्यार शब्द बहुत बड़ा हैं।अगर समझ आ जाऐं तो आप की सारी एचिवमेंट पर प्यार ही काबीज होता हैं। अगर आप समझ सकों तो आपके हर पल मैं प्यार हर वर्क में प्यार आप की फेमली मैं प्यार साथ समाज हर तरफ सिर्फ प्यार प्यार परिभाषित करना बहुत कठिन है पर समझना और इस एहसास में समा जाना कुछ सरल है। सबसें पहलें माँ फिर ईश्वर फिर गुरू और फिर रिस्ते। क्या समझे यही है वो बंधन जहाँ से एहसास के परिंदे जन्म लेते हैं। लिखते वक्त मुझें भी ये पता नहीं है मैं क्या लिख रहा हु मैं इतना जानता हूँ। बस एहसास लिख रहा हु। आप कभी तम्मना के सागर में न जाया करो पता है क्यों। वो बहुत गहरा है इतना गहरा है। जहाँ हिर और रांझा गये शिरी  फ़रहाद गये रोमियो जुलियट गये अफसोस उस अथाह सागर में वो सब गये जो लैला और मजनू बने। हासिल क्या हुआ एक लव इतिहास बन गया जिंदगी और लव के बीच एक किताब बन गये। प्यार चाहिए यस चाहिए पर साथ में जिंदगी भी चाहिए। आज एक कहानी सुनाता हु आपके काम जरूर आऐगी। एक आति नाम का लड़का था वो सोशल साइड पर लव कर बैठा। अपने इमोशन खो बैठा लड़की भी उसे चाहने लगी दोनों ने मिलने की ठान ली लड़का कही दुर रहता था ।लड़की से अब उसे मिलना था। लड़का सुरू से ही तन्हा था उसे बस वो लड़की चाहिए थी। उसने अपना सारा डिजायर उस को पाने के लिये लगा लिया। क्योंकि लड़की भी यहीं चाहती थी। एक वक्त आया फिर दोनों मिले।

क्या प्यार जैसा भी कुछ होता हैं💐

बहुत खुश हुये उस पल उन दोनों से ज्यादा दुनियां मैं शायद कोई और खुश भी न हो। ये एक लव बर्ड सही से समझ जाऐगा। उन्हें लगा आज हमने सब कुछ हासिल कर लिया। कुछ वक्त साथ मै बिताया बहुत खुश थे। दोनों ने मिलने से पहले बहुत सी कसमें खाई थी वादें किये न जाने क्या क्या बाते  हुई थी। आति को तो अपने प्यार पर ईश्वर से भी ज्यादा विश्वास हो चला था। वो तो सांस भी अपने लव के साथ ही लेना चाहता था। अगर एक वर्ड मैं कहु तो आति की जिंदगी थी वो लड़की। वो कहता था तु नही तो मैं भी नहीं। लड़की का रौल भी वही था। कुछ और वक्त बीता दोनों फिर से मिले।और अब आति बिछड़ना नहीं चाहता था अब वो अपने लव के साथ ही रहना चाहता था। पर उसका लव इस बात से पिछे हटने लगा वो उससे कहने लगी। आति मैं तुम्हें ही चाहती हु सारी जिंदगी चाहुंगी भी पर साथ नहीं रह सकती। ये वही लड़की थी जो आति के लिये बोल चुकी थी तुम मिलने नहीं आऐं तो मैं घर छोड़ कही चली जाऊगीं। मैं अब और तुम्हारे बीना यहाँ इस घर में नहीं रह सकती।मुझे मेरा घर काटने को दोड़ता हैं। मै पागल हो जाएगी। जिसने आति को मिलने के लिये मजबुर कर लिया था आज वहीं उससे दुर रहने की सलाह लिये घुम रही थी।
कसुर किसका था क्या पता। पर दोस्तों आति टूट चुका था उसका सपना चकनाचुर हो गया था। आति के पास जिने का कोई मकशद नहीं था। आति ने अपनी सोच की हद तक उसे समझाया पर उसका लव सिर्फ़ जवाब मैं ना के आँसू बहा देता था। आति बहुत मुश्किल मैं था भटक रहां था इधर उधर उसके जीवन का डिजायर फेल हो चुका था। उसे सिर्फ़ यही एहसास होता था। उसका लव जो एक पल मैं उसके लिये बेचैन हुआ करती थी। वो अब अपने घर में आँसू बहा कर दिन काट रही थी। कुछ मिंशिंग था दोनों की कहानी मैं। में चाहुं तो लिख सकता हु सच मैं क्या मिंशिंग था। जो दोनों को एक होनै से रोक रहा था। पर दोस्तों आज एक सवाल सभी के मन मै होता है। लोग लव मैं धोका खाते हैं क्यों खाते है। और धोका दैने वाला और धौखा खाने वाला दोनों ही खुद को निर्दोष कहते हैं।
क्या ये सच नहीं है।अगर मैं आज किसी एक का पक्ष लेना चाहू तो मैं एक पक्छपाती लेखक बोला जाऊगां। सच तो यहीं हैं।जो दुनियां हमेशा से एक सुझाव के तौर पर या मजबुरी का नाम देकर अलग होते गये हैं या फिर मतलब साधते गये हैं। जानते हैं सच कौन बता सकता हैं। सच वहीं इंसान बता सकता है जिसनें सच मैं प्यार निभाया हो या निभाया था। आज इस कहानी का पात्र आति जिसें शायद मैं जानता हूँ।
अब आज मैं प्यार मैं पड़ने वालों को।
अलग होने का वो राज बता देता हु जिसे हम सब बडी़ ही आसानी से मजबुरियों बता कर   उसके भविष्य को निगला जाता है। ये समाज ये लोग ये सोसायटी।
लड़की हैं तो उसकी मजबुरियां।
मैं अपने माता पिता भाई बहन की इज्ज़त नहीं बरबाद कर सकती अपने घर के अगेन नहीं कुछ भी कर सकती।
दुसरा सच आप लड़की हो आप अपने माँ बाप सभी से छुपकर

क्या प्यार जैसा भी कुछ होता हैं💐

दोस्त बना सकती हो ।आप दस्ती से आगे आकर प्यार भी कर सकती हो आप लड़के के साथ सच्चे प्यार का नाम लेकर नाईट भी बीता सकती हो। पर जब बात आऐगी लाइफ मैं आगे बढ़ कर एकदुसरे के साथ जीने की तो फिर मजबुरियां और इज्जत धोका भरोसा सब एक साथ युज कर के अपने लव से किनारा किया जाना न्यायपूर्ण लगता हैं आप सभी को।
अब अगर किसी शादी शुदा औरत ने किसी लड़के से प्यार किया संबंध बना लिये क्योंकि शायद वो अपने पति से खुश नहीं थी। लेकिन परिवार चला रही है। और पिछे से चाहती है ख़ुशी। अपनी खुशि के लिये किसी आति जैसे लड़के से प्यार कर लिया। वादे कर लिये और फिर निभाने के टाईम लव को अपनी शादीशुदा जिंदगी और बच्चे याद आ गये। वाह रे प्यार और वाह वाह समाज। यहाँ दो बातें बोल सकता हूँ। ये प्यार नहीं है। ये एक तरह का दोगलापन है। आज इस समाज मैं सिर्फ मर्द जाती बदनाम ज्यादा होती है। जानते हो  क्यों क्योंकि महिलाओं का सम्मान करना इज्जत करना बगेराह बगेराह सब हमारी संस्कृति हैं। फिर चाहें यहीं महिलाओं यही लड़कियाँ इसी  पर्दे मोह और इज्जत की आड़ का सहारा लेकर मासुमों की जिंदगी खाती रहे। प्यार हो या सम्मान दोनों पर महिला और पुरूष दोनों का समानता का अधिकार है। कृपया अपने निजी स्वार्थ के लिये ।आप प्यार शब्द का सहारा ना ले। इस समाज मैं बहुत सारे आति जैसे लड़के की कहानियां है। जो दम तोड़ रही है। पर फिर भी लोग सोशलिस्ट होते जा रहे हैं। कोई भी लेखक कभी नहीं  चाहता अपने समाज मैं कुछ गलत हो रहा है तो उसका पक्ष  ले।
प्यार समर्पण है।
प्यार विश्वास है।
प्यार निश्छल है।
प्यार कोमल है।
प्यार त्याग है।
प्यार एक धारा हैं।
अंत मैं बस यहीं कहना चाहता हु प्यार ईश्वर हैं और अगर आप अपने ईश्वर से मिलों तो क्या उसे छोड़ पाओगें मुझे लगता है नहीं। क्योंकि ईश्वर से अलग तो कुछ भी नहीं।
#लेख मैं बार बार प्यार को समझने का अंश है।
उम्मीद है आप सब समझ पाओगें।
कहानीं का अंश सोशल साइड से शुरू होता है।
मैं  चाहता हूँ दोस्तों आप सब चाहें आति हो या लव।
कृपया फेसबुक या किसी अन्य साइड पर अफेयर ना करे।
आप सभी का जीवन सुखमय हो आपका लवपूर्ण हो बस यहीं कामनां करता हूँ। जय हिंद।
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Writing by
#दिनांक 21/062019

क्या प्यार जैसा भी कुछ होता हैं💐


ऐं आज के मुसाफिर जरा बाहर तो निकल(Poetry )💐

Edmranjit.

 ऐं आज के मुसाफिर जरा बाहर तो निकल(Poetry )💐

ऐं आज के मुशाफिर जरा बाहर तो निकल।
अब शाम ढल रही है।
कुछ थोड़ा तो संम्भल।
ये आशमां भी तेरा।
ये हर दिशा भी तेरी।
तु घुरता ही रहता।
एहसास भी तो कर।
ऐं आज के मुशाफिर जरा बाहर तो निकल।

तु धरा का मोती बनकर ।
एक माला भी बनेगा।
तु समझ के आईने का।
एक चेहरा भी बनेगा।
तु सबर की शाम बनकर उस मुकाम को छुऐगा।
तु डर ना ऐं मुशफिर जरा बाहर तो निकल।
ऐं आज के मुशाफिर''+

जो डरा जमी पे आकर।
वो पहुंचा ना किनारें।
जो खुद ना डग बढाऐं।
उसे मिलतें नहीं सहारें।
तु चल सहस निडर मन
ओ मुकाम के मुशाफिर.
दुनियाँ भी चल रही हैं
तेरे साथ साथ साहिल।
ऐं आज के मुशाफिर""+

तु जानता है मंजिल।
तु बीर हैं निडर हैं।
ये जहान तेरा अपना तु जहाँ का एक शहर हैं।
चल एक राही बन जा।
तु भीड़ से अलग.हैं।
तुझे जानता हैं अम्बर
पहचान उसकी तु हैं।
ऐं आज के मुशाफिर जरा
बाहर तो निकल"""
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Writing by ranjit choubeay.
##22/06/2019********
 ऐं आज के मुसाफिर जरा बाहर तो निकल(Poetry )💐

फिशटेंक। एक इमोशनल टच💐

Edmranjit

फिशटेंक। एक इमोशनल टच💐

#फिशटेंक
         अगर मैं कहुँ आप जिंदगी मैं कामयाब नहीं हुये तो आप सच मैं अंधे हो? हो सकता है मेरी कही बात आपको अंदर तक मेरे प्रति गलत धारणा बनाने के लियें इतनी काफी हो ।वहीं अगर मैं आपकें सामने कुछ ऐसा उदहारण दु जो आपने ना कभी सोचा हो और ना ही देखा हो और अगर देखा भी हो तो आपका नजरिया वो नहीं समझ पाया हो जो समझने और देखने की जरूरत आपकों उस टाइम शायद थी या नहीं थी?इंसान परिस्थितियों के हिसाब से अपनें सामनें होनेवाली क्रियाओं को लेकर सोचने के लियें आजाद होता है?सबसें पहली बात हम सब भावात्मक प्राणी है तो आप को मेरा एक संदेश है आप अपनी भावनाओं को जिवित रखिये उसमें आप पक्छपात वाली कोई गलती न रखिये न किजिऐगा।अब आप को मै  एक दुसरी बात बोलता हु अगर आपकें आस पास किसी जीव की हत्या हो गई हो तो आपका रियेक्शन क्या होता है oh yar ya fir omg ya fir ye sahi nhi hua इसके बाद हम आगें की तरफ निकल जातें है?बस बात खत्म और फिर कुछ ही टाइम मैं हमारी भावनाओं का भी अंत।क्या आप के किसी अपनें के साथ गलत होगा तो आप अपनें इस रियेक्शन को इतनी जल्दी बदल सकतें हो नहीं बदल सकतें क्योंकि यहाँ आपकी भावनात्मक क्रियाओं मैं पक्छपात नहीं होगा वहां अपनापन स्नेह और जिम्मेदारी नजर आऐगी आपकों बस यहाँ सही रहोगे आप और कुछ ठिक ठिक रहेगा?नेचर प्राकृतिक कभी आपकें साथ अन्यान्य नही करती इंसान की कामयाबी मैं सबसे बड़ा स्थान एजूकेशन का नहीं होता अगर कुछ सबसे ज्यादा होता है तो वो है आपका सही नजरिया आपकी सोच आपका थीम आपका विश्वास आपकी मेहनत और फिर खुद आप?आज मैने सुनैना को देखा क्या लगता हैं आपको कौंन हो सकती है सुनैना बता दुँगा पहले एक ऐसा दृश्य बता दु आपको जो मुझे बहुत संघर्षमय लगा?मैने देखा एक फिश टेंक आपने भी देखा ही होगा या फिर आपके घर मैं भी हो सकता हैं?

फिशटेंक। एक इमोशनल टच💐

 उसमें मैने एक ऐसा जीवन देखा जो वाकई देखने से ज्यादा मुझे मेहसूस हुआ छोटी बड़ी सभी मछलियों का मेला है बहुत प्यार भी है इन सभी मछलियों मैं उसमें एक बड़ी मछली भी है? इंसान के जीवन मैं पैसा बहुत महत्व रखता है पर क्या जीवन से ज्यादा भी महत्वपूर्ण हो सकता है पैसा मेरे हिसाब से तो नहीं?फिश टेंक मैं दाना डालतें ही एक ऐसा सीन सामने आ गया जो बहुत ही अद्भुत था मैने कल्पना भी नहीं की थी की ऐसा भी मुमकिन हो सकता है एक मछली जीसकी आँखें ही नहीं हैं शायद उन्ही मछलियों मैं से
 किसी के साथ लडा़ई मैं उस बेचारी की आँखें फुट चुकी थी?
लेकिन गजब की प्रेक्टिस गजब का जुनून और गजब की फूर्ति थी उस अंधी मछली मैं जानते हैं आप क्यों क्योकी  जीवन भी एक जुनून एक प्रेक्टिस और फूर्ती का नाम हैं अगर आप जीवन मैं किसी एक घटना या दर्द से जीना छोड़कर हार जाओगे तो संसार के उजाले मैं जीनें वालें ये लोग आपको अंधा समझ आपका हिस्सा भी खा जाएंगे?मैंने देखा उस ब्लाईंड फिश को मन मैं स्नेह का वो स्थान उमड़ा जो अद्भुत था सीख ये मीली की जीवन भले ही छोटा हो पर उसमें जीनें की चाहत भरपूर होनी चाहिए रास्ते की रूकावटों से नहीं अपने आप से लड़कर चलें तो वहीं रास्ता रोशनी बन जाता हैं जो हमें कल तक हमें डरा रहा था?आपकी भावनाओं मैं अगर अपनापन है अगर वो
 सच मैं निश्छल हैं तो फिर आप भी एक सही और सच्चे इंसान हो ?वरना फिर कोई फिश टेंक की मछली हो या फिर कोई अंधा इंसान आपकें लिये तो सिर्फ दोनों को ही दबोच कर खत्म कर देने वाली बात होगी?मैंने तो उस फिश का नाम भी बता दिया है आपको अब आप को पता चल ही गया होगा उस प्यारी मछली का ही नाम हैं #सुनैना मैं समझता हु अब आप भी अपने आस पास प्राकृतिक की किसी भी वस्तु जीव या प्राणी से सीख लेंगे और अपने आपको खुशी और शहनशीलता की और ले जानें की कोशिश करेंगे?🙇
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फिशटेंक। एक इमोशनल टच💐

22/06/2019

Friday, June 21, 2019

बेटियाँ वरदाँन क्यों नहीं💐

 Edmranjit.

बेटियाँ वरदाँन क्यों नहीं💐

 मन की अकुलाहट तो देखो।
बेटी हुई तो घबराया हैं ।
बाप की बौखलाहट तो देखो।
आज ही से सर झुकाया हैं ।
क्यों घृणा लियें जिया ये समाज हैं।
उसी कोख से जब निकलें।
तो क्या ये पाप हैं ।

अपनी जीवन की रेखा का ध्यान क्यों नहीं ।
अपनी बेटी पर आपकों गर्व क्यों नहीं ।
कुछ गलत दरिंदो ने सर झुकाया हैं ।
वहाँ ध्यान नहीं जहाँ बेटियों ने परचम लहराया हैं।
बेटी हुई तो सर झुकाया हैं।

अगर समझदानी खराब है तो ठिक करों।
शर्म बेटियों पर नहीं अपने कर्म पर करो।
क्षितिजा से आसमां तक उन्हें सम्मान हैं ।
कहीं लक्ष्मी सरस्वती देवी उनके नाम हैं।
ईश्वर कहता हैं  बेटियाँ धरती का वरदान हैं ।

अब तक नहीं समझा तो कैसा बेवकूफ ये समाज है।
वक्त आया तो धरा पर वो झाँसी की रानी बनी।
कभी वो पदमावती तो कभी कल्पना चावला बनी।
समय बदलता गया बेटियों का वर्चस्व बढ़ता गया।
पर इस समाज की धारणाऐं गिरती गई ।
मर्द जाती की नीयत गर्त होती गई ।
बेटियाँ इनके पापों को सहती गई ।

दुनीयां शरमसार होती गई।
कही दामनी तो कही गुडियां ।
मासुमो की जानें जाती रही।
ये दुनियां होली दिवाली ईद मुहर्रम क्रिसमस मनाती रही।
मर्दो को जन्म से ही बेटियाँ अलग नजर आती रही।

काश बदल जाती जननी के लिये सोच सबकी।
तो हर घर में एक सीता जरूर होती।
ना होती कहीं दर्द की गुनजाईश किसी बाप के सीने मैं ।
किसी भाई की कलाई कभी खाली ना होती।
किसी भाई की कलाई कभी खाली ना होती।

बेटियाँ वरदाँन क्यों नहीं💐

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Writing by ranjit choubeay.
21/06/2019


जीवन एक संघर्ष हैं स्वीकार करते हैं। और आज जीवन से जुड़ी कुछ बातों पर विचार करते हैं💐

Edmranjit.

जीवन एक संघर्ष हैं स्वीकार करते हैं। और आज जीवन से जुड़ी कुछ बातों पर विचार करते हैं💐

जीवन एक संघर्ष है, यह स्वीकार करते हैं.और आज जीवन से जुड़ी कुछ बातों पर विचार करते हैं। क्या है जीवन।
 क्या है इसमें सुख दुख के रहस्य। हम सब कहीं ना कहीं बस फंसे हूये है और फंसते ही जा रहे हैं। जल में मछली का जीवन होता हैं परन्तु वो सिर्फ़ वहीं जी सकती है जंगल में सिंह का राज होता है वो भी सिर्फ़ वहीं जी सकता है सिंह का जीवन कुछ हम मानवीय जीवन से मिलता जुलता है पर मछली का नहीं । एक सिंह अपने आसपास के समुचे वातावरण को अपने आधीन करने की कोशिश में लगा होता है।मछली पुरे जीवन अपने संघर्ष का अन्न खाती है। और सिंह अपने खौफ अपनी ताकत अपने रूतबे अपनी कूटनीति का सहारा लेकर समुचे जंगल को अपना शिकार बना लेता है। क्या आप नही जानते आज देश और दुनियां का 80%हिस्सा वहीं जल में जी रही मछली के समान हो चुका है जी हां यही सच्चाई हैं आज जो गरीबी भुखमरी बेरोजगारी का हिस्सा बना हुआ है उसे देख सोच और समझ कर तो यही लगता है की हम बस वहीं पानी में जी रही  कमजोर मछली ही है जो सिर्फ वहीं जीवन जीना चाहती है और एक दिन किसी बड़ी शार्क का शिकार होना चाहती है। क्या नहीं हो सकता सब कुछ हो सकता है अगर आप इस समाज मैं बड़े हो रहे सिंह का शिकार होना बंद कर दे  क्यो आज का समाज पहले जैसा संसकारी नही रहा मजबुत नही रहा इमानदार नही रहा क्यो कोई भी आऐगा और आपको छल कर खा कर चला जाऐगा। क्या आप और आप का समाज विवेकहीनता की और बढ़ रहा हैं।जी हां बढ़ रहा हैं  जानते हो क्यों।
लालच हिंसा जलन और दिखावा। में बहुत इमानदारी से कह रहा हु यही है आज का अंखड समाज मैं जानता हूँ अगर आप का पड़ोसी आज बेंज कार लाऐगा तो आप पहलें जलोगें फिर लोगों से बातें बनाओगें और कहोगे साला दो नंबर से लाया होगा गलत तरीके से कमाया पैसा होगा। सोच तो सही  भी सकती है आपकी हो सकता हैं। फिर बाद में आपको लालच भी आएगा आप अपने पडो़सी से नजदिकियां बनाओगै क्योंकि अब आपको लालच भी आऐगा। और अगर आपकी मंसा समझ कर या आपको खुद से गरीब समझ कर पड़ोसी नै अनदेखा कर दिया आप को अपने स्टेटस से कम आंक दिया तो फिर आप हिंसा पर भी उतर जाते हो।

जीवन एक संघर्ष हैं स्वीकार करते हैं। और आज जीवन से जुड़ी कुछ बातों पर विचार करते हैं💐

अब अगर आप को दिखावा करना ही है तो अपने पडो़सी की तरह सोचो समझो वर्क करो बन जाओ अमीर और खत्म करो अपने दुख को।
याद रखो आपका पडो़सी वहीं सिंह हैं जो बहुतो पर राज कर रहा है वो उन्हीं 20%लोगो मैं है जो दुनियां को मुट्ठी मैं करना चाहते हैं। व्यक्ति का सबसे बड़ा संघर्ष खुद से है अपनी सोच अपनी समझ और अपने विचारों से है ।किसी पडो़सी से जलने की जरूरत नहीं । ना किसी दिखावे की जरूरत है बस अपने आसपास मैं हो रहे वर्क को को समझो सही और गलत समाज की परख करों अगर आप का नेता सही नहीं तो चेंज करो ।अगर आप का टीचर सही नहीं  तो चेंज करो
अगर आपके घर का महौल सही नहीं तो सबको साथ लेकर समझ कर माहौल सही करो।खुद अपने आपको सही करो अपने साथ चलने वाले समाज कुटुंब की समझ को समझो। अगर आप उनसे ज्यादा परिपक्व हो तो उन्हें सक्षम बनाओ।
किसी सिंह का निवाला नहीं बनना हैं। बल्कि समाज मैं बढंते जा रहे इस जंगलरूपी 20%भेंडियों को सबक सिखाना है जीवन को उस मछली की तरह न जीना है और ना ही किसी सार्क का निवाला बनना हैं ।बताओं उन चंद अमीरो को जो आपके अपने ही देश की अखंडता पर वार कर रहे हैं।
खत्म करों इस जातिवादी राजनीति पर मिटा दो ये पूजिंवादी राजनीति को मिटा दो वंशवाद की राजनीति को हमारा भारत सम्राट अशोक चंद्रगुप्त मोर्या और आचार्य चाणक्य का देश हैं हमारा भारत स्वामी विवेकानंद  स्वामी रामाकृष्ण परमहंस का देश है ये भगवान राम श्री कृष्ण का देश हैं।
मिटा दो ऐसे चंद राक्षस राजनीति करने वाले कायरो को जो सिर्फ और सिर्फ़ देश की जनता को गुमराह कर रहे है जनमानस के भाईचारे को मिटा कर देश को बेच रहे हैं।
कोई गरीब आरक्षण नहीं चाहता गरीब मेहनत और ईमानदारी की रोटी चाहता हैं उसे सिर्फ़ उसकी इमानदारी का उचित मुल्य दिया जाना चाहिए। आप स्वय विचार कीजिए कौन सिर्फ अपना अपना सोचता हैं। अंसर होगा सिर्फ अमीर नेता और उद्योगपति। उचित होगा आज समाज एकजुट होकर खुद इन चंद हरामखोरो को इनकी जगह दिखाऐं.
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दिंनाक 21/6/2019
Writing by ranjit choubeay

जीवन एक संघर्ष हैं स्वीकार करते हैं। और आज जीवन से जुड़ी कुछ बातों पर विचार करते हैं💐

Thursday, June 20, 2019

मन के करीब से मंजील की तरफ💐

Edmranjit.

मन के करीब से मंजील की तरफ💐

हर बार की तरह इस बार  भी हार कर अटक गया हु।।
मन शुन्य हैं दिल परेशान सा हैं। कहानी हैं या रियल अजीब सी।
कुछ हालत हैं।।सोच कर लिखना और फिर बार बार मिटा चुका हु।।
नहीं चाहता हु अब हारना पुरी करना चाहता हु इस अधुरी कहानी को।।

मन कहता हैं आज सब ठिक होगा।
पर हालात उनका क्या बार बार हमें वहीं ले आते हैं।
हमारी कलम को वहीं पहुँचा देते हैं जैसें हम निकलना ही नहीं चाहते हो वहाँ से।। क्या करूं क्यों हो रहा हैं ये सब हमारें साथ क्या इसका कोई ऐसा रास्ता नहीं जो हमें यहाँ से बाहर ले आऐं।।
क्या हम अपनी कहानी को पुरी नहीं कर सकतें। जब हम लिखतें हैं तो मन कहता हैं सही हैं लेकिन कुछ और सही हो सकता था। फिर आगें और लिखतें हैं तो लगता हैं इससें अच्छा तो नहीं हो सकता था।।

उफफ ये कलम ये आदत ये कहानी और ये कोशिश। सब मिलकर बस हमें सताना जानती ह। एक मन हैं जो हर किसी पर विशवास करता हैं।
वहीं एक आत्मा जो बहुत कम बार यस बोलती हैं।।
पता हैं जानता भी हु अपनें ही शब्दों के जाल में सजी हैं हमारी कहानी।।

अब निपटना ही होगा इस कहानी से भी पर इस बार ऐसा लगता हैं जैसेः बहुत उलझी हुई हैं हमारी कोशिश लेकिन हम निराश नहीं हैं ।
जानतें हैं वो हर लाईन हमें मिलेगी जब हम उस केरेक्टर के करीब जाऐंगे।मन का तो काम ही होता हैं तेज हवाओं से भी ज्यादा तेज उड़ना और शांत हो जाना।। अब अपना मन कब शांत होता हैं
और कब हम अपनी कहानी में लौट आतें हैं ये तो कुछ वक्त और कुछ हम  जानतें हैं।।फिर भी सोचतें हैं शायद कोई दुसरा रास्ता भी हो अपनी क्योंकि लेखक वहीं सही होता हैं।।
जो एक के अलावा भी कुछ और रास्ते बनाएं या फिर कुछ न्यू सोचें।।आतें हैं लौटकर कुछ वक्त बाद तब तक कहानी भी मील जाऐं शायद उसकों भी हमारा ही इंतजार होगा और किसी को अपना इंतजार कराना गंदी बात हैं।।

इसलिये मन को लिये जा रहें हैं पर वादा करतें हैं इस बार जब आऐंगे तो निराश नहीं करेंगे कहानी जरूर पुरी करेंगे।।
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Writing by ranjit choubeay.
21/06/2019 धन्यवाद👏

मन के करीब से मंजील की तरफ💐

एक सच्चा एहसास जो दबा रह जाता है💐

Edmranjit.

एक सच्चा  एहसास जो दबा रह जाता है💐

कितना तंग आ गया था वो जिंदगी से।
उसे घुटन होने लगी थी वो जीना चाहता था।
लेकिन इस तरह नही  वो खुलकर सांस लेना ।
चाहता था वो हर पल हसना चाहता था ।
उसके जज्बात अब उसके काबु मे नही थे।

उसकी फैमली से उसे कभी वो सब नही मिला जो वो चाहता था। उसकी फैमली तो मानो जैसे बस पैसे की भुखी थी जब तक आति काम करता गया हर महीने अपने पापा को।
सैलरी लाकर देता गया तब तक वो अच्छा बेटा था ।आति कै पास काम था वो घर मै सबका खयाल भी रखता था फिर चाहे आति की बहन हो या भाई आति ने सबकी जरूररते पुरी की। लेकिन आति को उसकी माँ की कमी हमेशा से खलती रही।

 जीसको देखो वो आति को हमेशा जरूरत भरी निगाहों से ही देखता था उसकी लाइफ मै कोई ऐसा नही था जो उसको समझ पाता एक इंसान केवल दुसरो की जरूरतों के लिये नही होता जब उसको ये
एहसास होता है। की फैमली और दुनीया सिर्फ
उसको अपनी जरूरतों के लिये ही पुछती है तो। वो टुट जाता है। आति भी इसी तरह बिलकुल अकेला हो गया था वो हमेशा अपनी सोच को गलत साबित करता रहा और अपने पापा भाई बहन का साथ देता रहा

लेकिन इंसान की शक्ति भी सीमित ही होती है। जब वो अपने मन के बिचारो को अनदेखा कर
उन्हीँ कामो को करता है ।जो उसकी इच्छा के
विरुद्ध हो तब भगवान भी उसका साथ छोड़ देते है। आति के साथ भी अब वही सब हुआ।
आज कुछ कारणों की वजह से आति के पास
काम नही है। वो कुछ टाईम से बैरोजगार है।
तो जिंदगी के सारे सच से उसका सामना हो।
रहा है। जिन्हें वो अपनी फैमली समझता है।

वही लोग उसे बैरोजगार और लूजर समझते है। आति को लगता है जैसे वो ये सब जानता ही नही था लेकिन सच तो ये है दूनीया के हर उस इंसान की यही कहानी है।
 जो इमानदार ह़ोता है जो कभी खुलकर लाइफ मै कुछ अपने लिये सोचने लगता है।
तो सारे अपनो की सचाई सामने आ जाती है।
आति भी अपनो का शिकार है। वो समझ नही पा रहा उसे कया करना चाहिऐ।एक तरफ आति का खुद का भविष्य है।

एक सच्चा  एहसास जो दबा रह जाता है💐

 जो उसे एसा लगता है की वो ऐसे जी नही सकता ।
उसने अपनी लाइफ जीनी है कुछ बड़ा करना है। और दुसरी तरफ वो लोग है जो आति को
सारा जीवन बस अपने लिये युज करना चाहते है। आति को लगता है की बस ये उसकी ही कहानी है।
लेकिन मै जानता हु दुनीया मै तमाम ऐसे आति है जिनके अपने सपने अपनी दुनीया।
बस अपनो कै बोझ तले ही गुजर जाती हे।
जिनका ना कोइ आज होता है।
ना कोई कल अगर कुछ होता है।
तो बस उनके सपनों का अंत उनके
भविष्य का अंत उनकी दुनियां का अंत।।
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एक सच्चा  एहसास जो दबा रह जाता है💐


मै नही जानता समाज परिवार और पिढ़िया
अपने बच्चों से क्या  चाहती है।
पर एक बात जरूर कहना चाहुँगा
अगर समाज अपने बच्चों को उनके।
सपने नही जीने देगा तो ना सही।
पर उन पर ऐसा बोझ भी ना डाले।
जिसके कारण कोई बेटा कोई भाई
अपने जीवन का लक्ष्य ही भुल जाऐ।।
21/06/19

इंटरनेट हमसे हैं या हम इंटरनेट से💐

Edmranjit.

इंटरनेट हमसे हैं या हम इंटरनेट से💐

भाई उमर मै काफी बड़े थे उनसे कुछ बात करने।
मे अक्सर डर लगता था लेकिन मुझे उनकी एक ऐसी बात।
पता थी जो सिर्फ मे जानता था। और वो बात ये थी जब भाई ।
खुश हो तो उनसे अपनी कोई भी बात शेयर करना आसान था।
या फिर उनसे मजाक मस्ती भी करो तो उन्हें उस टाईम सब अच्छा लगता था। भाई जीतना ही सीधा सरल इंसान है।
शायद उससे कही जयादा टेलेंट भी रखता था ।
भाई का सबसे बड़ा टेलेंट था उनका लिखना।
वो कभी भी कहानियाँ कविताएँ लिखते रहते थे।
और मुझे सुनाते और कहते बता छोटे कविता अच्छी है।
मुझे तो उनकी हर कविता अच्छी लगती थी इसलिए बोलता था।

एक दम सुपर है भाई।
पर भाई को लगता था मै झुठ बोलता हु।
वो सोचते थे उनका मन रखने कै लिये मे हमेशा उनकि।
कविता और कहानियों की तारीफ करता हु।
लेकिन  कहते है ना जब तक इंसान को सही इंसान।
नही मिलता तब तक तो वो खुद को पहचान ही नही पाता।
भाई को लेखन से इतना लगाव था। कितनी बार मेनें उन्हें।
पुरी पुरी रात लिखते देखा था।

एक दिन बातो बातो मै मेनें भाई से पुछा भाई आप इतना अच्छा लिखते हो आपको कया लेखक बनना है।
भाई का जवाब था छोटे बनना तो लेखक ही चाहता हु।
पर बन नही पाता।

मेरा अगला सवाल था भाई आप बन जाऔ ना आप तो लिखते भी अच्छा हो फिर प्राब्लम कया है।
तो भाई ने हसतें हुयें कहा ।
छोटे तु जानता है आज हम कोन से युग मे जी रहे है।
मुझै भाई का सवाल बड़ा अजीब लगा ।

इंटरनेट हमसे हैं या हम इंटरनेट से💐

और फिर मुशकुराते हुये मेरा जवाब था बिलकुल भाई ।
मुझे पता हे हम आज कलयुग मै जी रहै है।
भाई वापस हसने लगा और उसने कहा नही पगले।
कलयुग तो सदियों से है और आगे भी सदियों तक ।
रहेगा लेकिन आज हम जीस युग मै जी रहे है।
उसका एक और नाम है।

मैने कहा नही भाई मुझे कुछ समझ नही आया फिर आप।
बोलिये कया है इस युग का नाम।
भाई ने हसतें हुयें कहा आज के युग का नाम है।
इनटरनेट युग गुगल युग ।
जब भाई ने इतना कहा और बताया तो कुछ बाते तो मै ।
समझ गया था लेकिन मै भाई से जानना और सुनना चाहता था। इसलिये मेनें भाई से पुछा तो ।
कया भाई इनटरनेट के होने से आप लेखक नही बन सकते।
भाई का जवाब था छोटे ।

इनटरनेट के आने से बहुत कुछ अच्छा हुआ है।
लेकिन उसका गलत इस्तेमाल भी कही जयादा हुआ।
पहले की तरह अब युवाओं मे ।
कविताएँ या फिर सटोरिया साहित्यिक विषयों पर जानकारी।
हासिल करने की आदते अब एकदम ना के समान हो गई है।
आज जीसको देखो कुछ पढ़ना हैं गुगल महाराज को देखता है।
और भी बहुत कुछ है। जब मै पढ़ता था ।
बुक के लिये पैसे नही होते थे लेकीन आज।
कुछ रुपये के रिचार्ज से पुरा इतिहास गुगल जी दिखा देते है।
लेकिन हम जब बुक्स पढते थे ।
हमारी मानसिकता अच्छी होती थी हमारी सोच अच्छी होती थी।
और आज युवाओं  को इनटरनेट ने इतना बिमार बना दिया है।
उनका दिल इनटरनेट पर है उनका दिमाग भी वही है।
और तो और उनकी 50%बीमारी भी इनटरनेट की वजह ही है।
भाई बिल्कुल सही बोल रहै थे ।
कही ना कही हम अपने अतीत को धिरे धिरे भुलते जा रहे है।
जिसके फायदे तो ना कै बराबर है पर नुकसान इतने है।
जिससे हम सबकी लाइफ खोखली और झुठी सी बनती जा रही है।

इंटरनेट हमसे हैं या हम इंटरनेट से💐

मैने भाई से वापस कहा भाई फिर भी आप या आप की तरह बहुत ऐसे लोग होगें जो लेखक बनना चाहते है।
कया वो इनटरनेट की वजह से लेखक नही बनना चाहेंगे।
भाई ने वापस हसते हुये कहा नही ऐसा कुछ नही है।
इनटरनेट मै वो ताकत नही जो इंसान के दिमाग मै है।
जब तक कोई कविता दिमाग मै नही आयेगी।
जब तक कोई कहानी बुक नही बनेगी।
वो इनटरनेट मै कहा से आयेगी।

और छोटे याद रखो एक इंसान ने ही।
इनटरनेट या फिर उससे जुड़ी टेक्नोलॉजी को बनाया।
इनटरनेट ने अभी कोइ इंसान नही बनाया।
भाई ने जो भी कहा वो एकदम सही था।
पता नही हम इंसान अपनी ही बनाई।
टेक्नोलॉजी क इतने गुलाम कयो हो जाते है।
जो हमारे खुद के असली जीवन को भी हमसे दुर होना
पड़ता है।

एक बार वापस भाई की बातो से मै बहुत प्रभावित हुआ।
और उनसे कहा भाई यु आर बेस्ट लेखक ।
आप ने सच मै मुझे आज और कल मै केसे।
जीना चाहियें बता दिया।।।
।।हम टेक्नोलॉजी से नही टेक्नोलॉजी हम से है।।।
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21/06/2019

इंटरनेट हमसे हैं या हम इंटरनेट से💐


एक सफर जो कभी रूक रूक सा जाता हैं। पौयम 💐

Edmranjit.

एक सफर जो कभी रूक रूक सा जाता हैं। पौयम 💐

एक सफर जो कभी ।
रूक रूक सा जाता हैं।
अथाह चलता हैं।
कुछ अपनें ही अंदाज में।
।।
मुशकुराता हैं गुन गुनाता हैं।
राह चलतें ही।
कभी कभार शिटिया बजाता हैं।
फिर ना जानें क्यों।
वो थम सा जाता हैं।।
।।
उमंग में कभी कभी।
वो सब भुल जाता हैं।
लियें हुये तरंग में।
वो खुब डुब जाता हैं।।
।।
अहम का कोई रस नहीं।
वो दुर दुर खुशमिजाज हैं।
लहर हवा सा बन के वो।
खुद में लाजवाब हैं।
।।
धरा से ले गगन तलें।
सफर हरा भरा मीले।
ये सोच में जीता हैं वो।
अब सफर मुझें नया मीले।
।।
वो धुप में भी खुश रहा।
नशा सफर के रंग तलें।
हिली जमी हिला गगन।
सफर के अंतकाल में।
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दिंनाक20/06/2019

एक सफर जो कभी रूक रूक सा जाता हैं। पौयम 💐

एक सत्यवादी राजा💐

Edmranjit

एक सत्यवादी राजा💐

आज #एक #राजा #की #कहानी #सुनाता #हु।

एक राजा आपने कुशल राज्य को शकुशल चला रहा था।
उसके राज्य में सब जन सुखी थे। राजा स्वय भेष बदलकर आपने राज्य मे घूम घूमकर प्रजा का हाल चाल पुछा करता था। जब भी उसे कुछ गलत काम होता नजर आता तो वो तुरंत प्रभावी कदम उठाता और सब ठिक करवा देता था। गरीब असहाय की राजा खुब सेवा करता था।साधु संत भी राजा की बहुत प्रशंसा करते नहीं थकते थै।देखते ही देखते राजा की किर्ती दुर दुर तक फेलने लगी। राजा का नाम चारों तरफ फैलने लगा।समय बीतता गया सब कुछ ठिक से चल रहा था।
एक बार राजा के दरबार मैं एक फकीर आया।
राजा ने बडे़ ही मान सम्मान से फकीर की सेवा की। फकीर राजा से कुछ वार्तालाप करना चाहता था। परन्तु फकीर राजा से अपनी बात कह नहीं पाता था। वो स्वयं बोलता था।राजन मैं आपसे कुछ कहना चाहता हु। पंरन्त अभी कह नहीं पा रहा हूँ।
राजा भी फकीर की बात सुनकर बहुत उतशुकता पूर्वक बोलता  महात्मा आप जो भी कहना चाहतें हैं आप निंश्नकोच होकर कहिये हम भी सुनना चाहते हैं। आप की समस्या अगर हम आपके लिये कुछ भी कर पाये तो अवश्य ही हमारे भाग्य का उदय होगा। फकीर राजा की कार्यकुशलता से उसके राजकाज और राजधर्म से बहुत प्रभावी था। फकीर की चिंता का विषय राजा से ही जुड़ा हुआ था। जीस फकीर को राजा फकीर समझ रहा था वो फकीर एक तेजस्वी संत था। राजा का एक बहुत ही होशियार तेज और चालाक मंत्री था। उसने राजा से कहा। 

  एक सत्यवादी राजा💐


महाराज ये कोई मामुली फकीर नहीं लगता इनके मुख से किसी ज्ञानी पुरूष की तरह वचन निकलते है। और ये कोई महान संत रिषि लगते हैं। और फकीर के भेष मैं आपकी परिक्षा लेने आऐं हैं। अपने मंत्री के मुख से ऐसी बात सुनकर राजा चिंतित हो गया। और फकीर की सेवा में निरन्तर लगा रहा। इधर वक्त बितता जा रहा था और फकीर  की चिंता भी बढ़ती जा रही थी। राजा भी फकीर से हर दिन मिलता हाल चाल उनकी सेवा सुनिश्चित करता रहा। अब वक्त आ गया था जब फकीर को राजा सै वो राज बताना था जो उसकी चिंता का विषय था। फकीर ने बहुत सोचा और पूनर विचार किया क्या ऐसे राजा का पतन होना चाहिए जो अपनी प्रजा को अपने पुत्र के समान और अतिथि को भगवान के समान सम्मान करता हो। अपने राज्य और सभी के लिये हर पल प्रस्तुत रहता हो।

राज्य की उन्नति के लिये अपनी जान तक लगा देने की मंशा रखता हो। फकीर को ईश्वर पर उसकी बनाई योजना पर बहुत निराशा हो रही थी। उस फकीर को राजा की अल्प आयु का ज्ञान हो चला था। जो स्वय राजा भी नहीं जानता था। राजा की मृत्यु होने वाली थीं और फिर राज्य का विनाश होने वाला था। ये राजा के पूर्व जन्म का डंड था जो उसे इस जन्म मै मिलना था। फकीर बहुत निराशा था उसने इश्वर का चिंतन किया और कहा हैं प्रभु आप तो सर्वज्ञानी हैं आप तो कृपालु हैं। फिर जो भी आपकी सरण मैं आता है।

या फिर अपने पुनःकर्मो से सभी का भला सम्मान करना है। आप की भक्ति करता है। आप तो उसका कल्याण करते हैं।
फिर इस राजन की ऐसी सेवा भक्ति से आप कैसे मुख मोण सकते हैं। फकीर के ध्यान मैं ईश्वर ने उनकी पार्थना सुन उन्हें दर्शन दिये। और कहाँ हैं मुनी श्रेष्ठ आपकी भक्ति भावना और विचार उचित है। परंतु ये राजन अपने पिछले जन्मो मैं बहुत अपराधिक थे। इन्होनै बहुत दुर्गमचारी कार्य किये हैं। इसी के अनुरूप इनकी ये अल्पाआयु और विनाशकारी परिणाम भुगतने की अवधी का आरंभ होने वाला है। फकीर संत ने ईश्वर से कहाँ भग्वन क्या राजा के इस जीवन की सेवा का भक्ति का कोई मुल्य नहीं आप तो स्वयं ही अंतर्यामी है प्रभु आपनें ने देखा ही है राजन ने बिना किसी भेद के  मुझे फकीर समझ कर बहुत सेवा की। कृपया दया कीजिए भग्वन।

फकीर ने ईश्वर से कहाँ  भग्वन आज भक्त और भगवान दोनो मीलकर क्या एक देवतुल्य राजा के पूर्ण जन्मों के अपराध को क्षमा नहीं कर सकते। जन कल्याणकारी राजा को जीवन दान नहीं दे सकते।

फकीर ने कहाँ प्रभु आप चाहे तो मेरे सारे पुन्य कर्म का में त्याग कर देता हूँ। बस आप राजन को डंड मुक्त कर दीजिए।
फकीर ईश्वर के अन्नय भक्तों मैं एक थे। और भग्वान तो भक्त वंशल होते हैं। उन्होंनन संन्यासी महान फकीर की प्रार्थना स्वीकार की। और राजन को जीवन दिया और राज्य को सर्वनाश से बचा लिया। कहतें हैं मायने ये नहीं रखता हमने पहले क्या किया।
मायने ये रखता है। हम आज क्या कर रहे हैं।
जब हम अच्छे कर्म करते हैं तो।
हमारे लिये संत महात्मा और इश्वर सब हमारे कर्म मैं निहित होकर हमारा और हमसे जुड़े समाज का कल्याण करते हैं।

#रंजीतचौबे।।।।।।।।।।। #कर्मो #ही #धर्म #है #और #धर्म #ही #ईश्वर #हैं #दिनांक
21/06/2019***********एक नई सुबह योगा दिवश के साथ सभी को सुप्रभात 🌱
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Writing by ranjit choubeay.

एक सत्यवादी राजा💐


पेड़ लगायें जीवन और प्राकृतिक बचाये।पौयम💐

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पेड़ लगायें जीवन और प्राकृतिक बचाये।पौयम💐

आओं चलों एक पौधा लगातें हैं।
दोनों मीलकर एक गमला बनातें हैं ।
हम सुबह शाम उससें भी जुड़ते जाएंगे ।
सुबह हम पानी डाल देंगे।
शाम को दोनों उससें बतियाऐंगे।

पता हैं इनमें भी जीवन होता हैं।
पर कोई समझता नहीं बहुत दुख होता हैं।
हमारे जीवन की डोर हैं इनसे।
पतझड़ सावन वर्षा चारों और हैं इनसे।
इनकी कोमल ठंडी हवाओं का कितना स्वाद हैं।
इनके सामने तो ऐसी कुलर फेन सब बकवास हैं।

मुझे ही नहीं सभी को इन्हें बचाना चाहिए।
ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधा लगाना चाहिऐ।
अपने जीवन की बगियां की तरह इन्हें भी प्यार करो।
सुबह शाम सिंचो थोड़ा दुलार करो।
इनके साथ रहने से दुख भी कम हो जाता है।

प्राकृतिक संपदा है ये इन्हें बढा़ना चाहिए।
दोस्तों ज़्यादा से ज्याद पेड़ लगाना चाहिए।
अपनें आस पास इन्हें भी सजाना चाहिए ।
कितना अच्छा लगता है जब बाग जाते हो।
कितना मजा आता है जब आम चुरातें हो।
अपनें बचपन की यादों मैं जाना चाहिए।
दोस्तों चारो तरफ हरियाली फैलानी चाहिऐ ।

एक वृक्ष सिर्फ़ वृक्ष नहीं होता।
इससे तो कितनी जानें जुडी़ होती है।
पता हैं जैसे ही एक पेड़ आप काटतें हो।
धरती माता भी रोती हैं।
कभी गौर करना जब मन उदास होता हैं।
तो दिल आपकों कहाँ ले जाता हैं।

जब धुप से तन जलता है तो मन क्या तलाश करता है।
एक ही उतर है मन शीतलता ढुड़ता रहता है।
बड़े हो आप तो एक पौधा जरूर लगा जाना।
ये आपकी याद सबकों दिलाता रहेगा।
छोटे़ हो आप तो एक पौधा जरूर लगाना।
ये आपकों अपने साथ बड़ा बनाता रहेगा आपका हौसला बढा़ता रहेगा।
आपके जीवन को सुखमय सुगंधित सुस्जित संस्कारी सकारात्मक तेजोमय बनाता रहेगा।।
####🌲 लगाईये प्राकृतिक को बचाईये। #रंजीत चौबे।
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Writing by ranjit choubeay.
02/09/2019

पेड़ लगाये जीवन और प्राकृतिक बचाये।पौयम💐


बंसत पंचमी कविता 👏30/01/2020

#EDMranjit बंसत पंचमी कविता👏30/01/2020 बंसत पंचमी कविता  इस माँ के बीना तो संसार अधुरा लगता था। नहीं आती तु तो सब सूना सूना लगता...