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Showing posts from June, 2019

कहीं मिलती हैं निगाहें कही मिलते हैं इंसान//पोयम💐

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Edmranjit
कहीं मिलती हैं निगाहें कही मिलते हैं इंसान//पोयम💐 कहीं मिलती हैं निगाहें।
कहीं मिलते हैं इंसान।
कहीं सजती हैं बारातें।
कहीं सजते हैं शमशान।
।।
कहीं दिखता हैं अपनापन।
कहीं दिखता हैं सुनापन।
कही चलती हैं तनहाई।
कहीं दिखती हैं शहनाई।
।।
कहीं आती हैं बरसात।
कहीं चलता हैं तुफान।
कहीं बसता हैं घर आंगन।
कहीं उजड़ा हैं बागान।
।।
कहीं मिलती हैं शाबाशी।
कहीं मिलती हैं शौगात।
कही मीलता जीवन अच्छा।
कहीं तड़पे हैं इंसान।
।।
कहीं सजी हुई हैं धरती।
कहीँ जंगल हैं सुनसान।
कहीं हरियाली हैं दिखती।
कहीं सुखा खेत किसान।
।।
कहीं सजी हुई हैं भाषा।
कहीं बंद पड़ी हैं जुबान।
कहीं दिखे ठाट और बंगला।
कही बदहाली इंसान।
।।
कहीँ बजे राज मे डंका।
कही सून पड़ी हैं गलियां।
कहीं चिंगारी दिखती हैं।
कहीं तड़प रही हैं जान।
।।
कही पुज रहे हैं मंदिर।
कही शौर करे रमजान।
कही झुकें मिले गुरूद्वारे।
कहीं दिखे शांत चर्च सारे।।
।।
कहीँ भटक रहे है नेता।
कही भटक रहा जनमानस।
कही सुन पड़ी हैं सेवा।
कहीं जाग रहा हैं सैनिक।।
।।
कहीं आशा हैं कुछ जागी।
कही दिखें आँख में आश।
कहीं इश्वर सबका मालिक।
कहीं बड़ा बने इंसान।
कहीं बड़ा बने इं…

ऐं जिंदगी मैं तुझ पर कैसी किताब लिखु##//पौयम💐

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Edmranjit.
ऐं जिंदगी मैं तुझ पर कैसी किताब लिखु##//पौयम💐 ऐ जिंदगी में तुझ पर ।
कैसी किताब लिखु।
तेरी रोज रोज की हलचल का।
में कैसा हिसाब लिखुं।।
।।
सुबह से लेकर शाम तक।
तु हर पल बदलता हैं।
अनगिनत चाहत लिये।
तु चलता ही रहता हैं।।
।।
तेरा तो कोई ख्वाब भी नहीं।
मुक्म्मल कोई दांस्ता भी नहीं।
चलना और बदलना ही फितरत हैं।।
तेरा तो कोई आसंमा भी नहीं।।
।।
क्या तुझें कोई समझ पाया हैं।
क्या तुने किसी से दिल लगाया हैं।
कभी तुने साथ दिया किसी का।
या बस इलजाम ही पाया हैं।
।।
हम तेरा कैसा संसार लिखें।।
तेरा पल पल का अवतार लिखें।
काश कोई एक आईना होता।।
जिसमें तेरा भी परिवार दिखें।।
।।
हम तेरे इतनें करीब हैं।
तुझे समझना भी अजीब हैं।
हम चाहकर भी बहुत दुर तुझसे।।
जिंदगी अपना कैसा नसीब हैं।।
।।
हम क्या लिखेंगे तुझ पर।
तेरे तो हजारों रंग हैं।।
बस एक बात समझ पाऐं हैं।।
तु चाहें तो हम तेरे संग हैं।
वरना तो जिंदगी एक जंग हैं।
जिंदगी एक जंग हैं।।
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Writing by ranjit choubeay
ऐं जिंदगी मैं तुझ पर कैसी किताब लिखु##//पौयम💐
।।#दिनांक29/06/2019
॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥

आर्टिकल। आपका इमोशन आपकी मोहब्त आपको जोकर बना सकती है💐

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Edmranjit आर्टिकल। आपका इमोशन आपकी मोहब्त आपको जोकर बना सकती है💐
आज बात करेंगें प्यार क्या है।इसके साईड इफेक्ट क्या है मित्रों आदमी हो या औरत पशु हो या पंछी सभी मैं इमोशन नाम का एक जहर भगवान ने कुट कुट कर भर दिया। में इमोशन को जहर इसलिये भी बोलता हु। क्योंकि ज्यादातर इसके ही साईड इफेक्ट से इंसान की जिंदगी मैं तबाही होती है। ये बात अलग है ।कुछ एक परशेंट इसके फायदे भी हुये होगें। इस दुनियां मैं कदम रखतें ही बहुत सारे रिस्ते नाते हमारी जिंदगी में आ जाते हैं । एक मनुष्य होने के तौर पर सभी को रिस्तों में पोरोटेक्टिव होना पड़ता हैं। पशु पक्षी भी इसके प्रभाव मैं होतें हैं ।अब कौन सी प्रजाति ज्यादा इमोशनल होती हैं ।इसका पता लगाना मुश्किल है। लेकिन एक बात समझना बहुत ही ज्यादा जरूरी है। जो हर एक आम आदमी बचपन से ही भुल जाता है। और ये होता भी इसी इमोशन के कारण है ।एक साइक्लोजिस्ट की तरह जब में सोचता हु। तब मुझे लगता हैं की इंसान को अपनी जिंदगी मैं सबसे पहलें खुद के व्यक्तिगत जीवन पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए ।क्योंकि इसका हमारी आने वाली पुरी लाइफ पर असर रहेगा। और अगर हम यहीं चीज नहीं कर पाये…

तु कितना भी इंसान बन।💐

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Edmranjit.
तु कितना भी इंसान बन।💐 तु कितना भी इंसान बन।
चाहे कर्मों का गुणगान कर।
यहाँ भला नहीं अब जग में कोई।
पर तु तो बस निजकाम कर।
```बहुत खेल हैं दुनियाँ के।
तु सीधा साधा बंदा हैं।
इस दो रंग के रंगों को।
तु दुर से प्रणाम कर।
```हैं अदभूत तुझमें क्षमता भी।
तु खुद को अब पहचान ले।
जो संग नहीं आने वालें।
उन सबकों अब प्रणाम कर।।
```तु जान हैं अपनी सोच का।
खुद भाषा तेरा जीवन हैं।
कुछ लोगों की बातों में आकर।
ना अपना तु नुकसान कर।
```जल की धारा सा शीतल तु।
तुझें समझ ना पायेगा कोई।
सब मतलब से ही मीलते हैं।
तु अपना पुरा काम कर।
```ये धरती सबकी माता हैं।
अंबर पृत समान हैं।
सब आऐं हैं सब जाऐंगे।
बस राहों से अंजान हैं।
```तु रोयेगा तु खोयेगा।
सब कुछ बिफल हो जाऐगा।
बस अटल सच है ये पुरा।
तु इसको आत्मसात कर।
```इस बगियाँ रुपी जीवन में।
तु फुलों जैसा जीवन जी।
जो आऐं उसके साथ जा।
जो छुयें उसकों खुशबू दे।
```तु नन्हें बालक की भांति।
अब जीवन जीना छोड़ जा।
जीसने भी तुझकों कष्ट दिया।
उन सबसें नाता छोड़ जा।
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Writing by ranjit choubeay.

तु कितना भी इंसान बन।💐
दिनांक06/27/2019###रंजीतचौ…

पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी //पार्ट 3💐

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Www.edmranjit
पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी //पार्ट 3💐 ऊफ जैसी गहरी बारिस हो रही थी नींद भी वैसी ही लग गई थी। अब जाके मिट्ठू ने उठाया मुझे। मौसम बहुत ठंडा हो चुका है। झुमरू तो एकदम से नहा धो के बोले तो रफचिक माफिक लग रहा था। अब अंधेरा होने वाला था। बारिस भी लगभग रूक चुकी थी। पापा भी बस आने वाले थे। मिट्ठु मस्ती कर रहा था । में  जो भी में बोल रहा था वो सब दोहरा रहा था। मेरी नकल कर के माँ को हंसा रहा था। सच बोलु तो मिट्ठू ही एक ऐसा था जिससे घर में रौनक रहती थी। वो रियल में बहुत प्यारा था। उसकी वजह से घर में दस बच्चों वाली रौनक लगी रहती थी। वो अकेला ही पुरे घर को उठा कर घुमता रहता था। अब देखो माँ के सर पर बैठ कर बोल रहा है माँ मुझे नीचे उतारों आपकें बालों में मेरे पैर फंस गये हैं। माँ भी अब उसको तंग कर रही है। माँ कह रही है खुद ही निकल इस जाल से। बेचारा मिट्ठू अब जंग लड़ेगा कुछ टाईम फिर माँ खुद ही निकालेगी उसके फंसे पैरो को। पापा आ गये पापा आ गये। देख लिया इसने पापा को भी 👴 माँ मुझे उतारो। मिट्ठु पापा के पास जाने के लिये उतावला हो रहा था। माँ ने जैसे ही उसे उतारा उड़ता हूआ पापा के हा…

मेरा दिल और भगवान। पौयम💐

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मेरा दिल और भगवान। पौयम💐 तु भी अजीब हैं भगवान। जो सही हैं उसकों भी। रुला देता हैं। और गलत लोगों को। आसमान में बैठा देता हैं। ```तेरी भी करनी हमें नहीं भाती। सारें इलजाम । तु दुसरों पर लगाता हैं। आज एक वादा करता हु तुझसे। तेरे दर पर अब ना आऊंगा। ना ही तुझसे कुछ अरज रहेंगी। ना ही अपना दर्द सुनाऊंगा। ```में तो नादान हु। पर तु तो भगवान हैं ना। में समझ नहीं पाता किसी को। पर तु तो अंजान नहीं ना। ````कितना दर्द हुआ हैं आज तेरे कारण। क्या गुनाह हैं बता जरा। कहां छुपा बैठा हैं । आ हमसें नजरें मीला जरा। ```बहुत शांत हैं तु भी। हमेशा गुनाह देखता आया हैं। बाद में तु भी। औरों की तरह पछताया हैं। ```हम तो तुझें मानतें थें। हर पल तुझें साथ पाया था। लेकिन आज भग्वन तुने हमें। फुट फुटकर रूलाया हैं। ```तु बता जीनें की वजह मेरी। एक मकशद की तलाश दे। कहीं दुर जाना चाहता हु। भग्वन एक लम्बा सा वनवास दे। ```तुझसे मेरी लड़ाई में जीत मेरी होगी। तु एक दिन हारेगा मेरे दोस्त। क्योंकि तु इश्वर् हैं। और में इंसान हु। तुझपर लगी हैं लोगों की। आशाएं और में आजाद हु। मेरा दिल और भगवान। पौयम💐 Www.edmranjit.com #रंजीतचौबे…

ये दुनियाँ एक मुखौटा हैं। कविता ***💐

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Edmranjit.  ये दुनियाँ एक मुखौटा हैं। कविता ***💐 कहते हैं जिंदगी इबादत है।  कोई कहता हैं ये वरदान हैं।
फिर भी इसकी हिफाजत नहीं।
कोई जमकर पीता हैं शराब।
कोई हत्या कर खाता हैं कबाब।
वाह रे इबादत वाह रे वरदान।
```में तो हु बहुत छोटा।
कभी कभी बोल जाता हु ।
खोटा खोटा।
हमें समझ आती हैं बस माँ की।
दुनियाँ ही।
बाकी सब लगता हैं मुखोटा।
````मैंने जब से होश सम्भाला हैं।
कही कुछ बुरा देखा तो कही देखा।
काला काला हैं।
दुनियाँ से सुनता आया हु।
जग का खैल निराला हैं।
पर जो समझ पाया वो इतना ही।
बाकी सब घोटाला हैं।
बस मातृ प्रेम ही सच्चा हैं।
वो ही अमृत का प्याला हैं।
````एक एक पग में चलता हु।
तुम सब जैसेः चलतें हो।
पर तुम में मुझमें फर्क बहुत।
तुम मतलब बनकर चलतें हो।
मैं चलता हु बस चलने को।
``` कभी समझ ना पाओगे।
तुम जब तक खुद का सोचोगे।
जिस माटी का खाओगे तुम।।
उस माटी को बेचोगे।
````कुछ लोग तमाशा करतें हैं।
सब लोग वहाँ थम जातें हैं।
वो लोग जो मतलब के साथी।
वो लोग बड़े बन जातें हैं।
``` सब तीर निशाने पर होगें।
ऐसी तो कोई साध नहीं।
जो लोग जीयें अच्छा बनकर।
वो जीवन तो बरबाद नहीं।
````हर फुल मैं आशा हौती …

वक्त तो एक रोज बदल ही जाएगा।कविता 💐

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वक्त तो एक रोज बदल ही जाएगा।कविता 💐

वक्त तो एक रोज बदल ही जाऐगा ।
कभी आऐंगा तो कभी जाऐगा।
तुम मौसम की तरह मजें लेना।
तुम्हारा कल भी आज पर शरमाऐंगा। 🤔
जिंदगी मैं दगा ना करो किसी से भी।
ये रंग की तरह लौट आता है वापस।
वक्त जब निकल जाता हैं नेकी करने का।
तो इंसान सिर्फ़ पछताता है वापस। 🤢
कुछ इम्तिहान तो आप का दिल भी लेगा।
कभी हसाऐंगा तो कभी रूलाऐंगा।
आप सम्भल कर चलना इसकी राह पर।
वरना ये बहुत आगें निकल जाएगा। 🤕
हम में ना जिना कभी यारों
ये बहुत अंहकार से भरा लगता है ।
जब मुश्किलों से टकराती हैं राहे।
तो ये गला फाड़ फाड़ कर हंसता हैं। 🤡25/06/2019 ✊
तूफ़ान बनकर जीना मगर शांत रहना।
जूबां को तराज़ू की तरह निश्पाप रखना।
हाथों की लकीरों पर एतबार मत करना।
अपनें कर्म की जर्नी पर ध्यान रखना। 🤔
जब भी रास्ता मुश्किल लगे लम्बी सांस लेना।
कुछ पल रूक जाना अपना विश्वास लेना।
काटों का तो काम ही होता है इम्तिहान मैं।
ह्दय को कोमल रखना उसे भी साथ लेना।
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Writing by ranjit choubeay.

वक्त तो एक रोज बदल ही जाएगा।कविता 💐

#मन #के #अलफांज #रंजीत#चौबे।

poetry कुछ सोचता ही नहीं अब तो।💐

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Edmranjit
poetry कुछ सोचता ही नहीं अब तो।💐
कुछ सोचता ही नहीं।
अब तो।
बस सोया रहता हु।
अतीत को याद कर
उसमें खोया रहता हु।।
""'"कौन हकीकत का जीता हैं।
सब तो दो चेहरे लगाऐं रहतें हैं।।
कुछ पल किसी के होतें हैं।
बाकी ढोंग रचाएं रहतें हैं।।
"""फलसफा जीवन का अब।
हैं कहां।
यहाँ बस तशबीर दिखाई जाती हैं।।
खुशी इश्क मजहब अब हैं नहीं।
इनके नाम बस जिंदा हैं।।
जिसमें अब किस्मत की लकीर।
बताई जाती हैं।।
"""हुनर भी सिखाया जाता हैं।।
पता हैं अब जिने का।
सोचता हु क्या दादा जी ने।
कुछ गलत सिख सिखाईं थी।।
फिर लगता हैं।
अब लोग कुछ बदले बदलें से हैं।।
""""अजीब सी सुगबुगाहट हैं।
हर तरफ हलचल ही दिखती हैं।
फिर भी ना सावन बदला हैं।
ना पतझड़ खोया हैं।
ना मौसम ने रंग कभी बदलें हैं।
सच कहुँ तो सब वही का वहीं हैं।
बस बदलें हैं तो सिर्फ वहीं इंसान।
बदलें हैं।।
"""बस वहीं इंसान बदलें हैं।।
poetry कुछ सोचता ही नहीं अब तो।💐 Www.edmranjit.com
#ranjit choubey
#Writing
#Poetry
#Date 24/06/2019

पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी,,, पार्ट( 2)💐

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Edmranjit. 
पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी,,, पार्ट( 2)💐 आज तो नास्ते पर माँ बहुत गुस्सा होने वाली थी। पर अचानक से मौसम चेंज सा हो गया आसमान मैं तेज हवाऐं चलने लगी और साथ साथ माँ के चेहरे पर रौनक सी आ गई। वो तेज तेज मुझे आवाज लगाने लगी। शिरू शिरू बेटा देखो मिट्ठु कहाँ है।आया है या नहीं तेज हवा और बारिस का मौसम बन गया है। चिन्ता की बात थी क्योंकि मिट्ठु सुबह से ही गायब था और अब हल्की हल्की बारिस होनी शुरू हो चुकी थी। तभी मुझे खिड़की से आवाज आई। शिरू शिरू खिड़की खोलो खोलो मैं भींग रहा हूँ मै समझ गया ये मिट्ठु ही है। उसकी आवाज सुन माँ भी कमरे मैं आ गई और मुझसे पहले माँ ने खिड़की खोली। खिड़की खुलते ही मिट्ठु उड़ता हुआ माँ माँ बोलता माँ से चिपक गया। और बोलने लगा माँ शिरू में गिला हो गया हु मुझसे उड़ा नहीं जा रहा माँ मिट्ठु से बहुत प्यार करती थी कभी कभी तो मुझे लगता था जैसे इसने मेरी जगह ही छिन ली हैं। पर में जानता था मिट्ठु भी बहुत प्यारा हैं।  मैं  भी उसे बहुत प्यार करता हु। माँ ने मिट्ठु के पंख हल्के कपडे़ से पोछ दिये अब वो मस्ती करने लगा फिर माँ चली गई। मेने उससे पूछा कहाँ गया था तू त…

मेरी जिंदगी की अदभुत कहानी रही हैं //Poetry motivational.💐

Edmranjit.
 मेरी जिंदगी की अदभुत कहानी रही हैं //Poetry motivational.💐 मेरी जिंदगी की अदभुत।
कहानी रही हैं।
कभी चलतें चलतें।
कभी ठहरें ठहरें।
बस रुकती और चलती।
रवानी रही हैं।
```सुकूँ में भी आलम।
वो तनहा सी रातें।
कभी सर्द मौसम कभी।
कभी सुर्ख साँसें।
ना रूकती ना चलती।
वो ठहरी सी चंचल।
दिशा हिन मानों ।
रवानी रही हैं।
मेरी जिंदगी की अदभूत।
कहानी रही हैं।
```चलें हम तो मानों।
हवायें भी चल दी।
हमरी जीवन की रुकती।
दिशायें भी चल दी।
नहीं कोई इसका।
सहारा था अपना।
फिर औझल सी राहों को।
तकती ही चली दि।
```रहा दिल भी तनहा।
उमंगों के संग में।
वो साथी और रथ के।
सहारे रही हैं।
मेरी जिंदगी की अदभुत।
कहानी रही हैं।
```हैं सुना सा रस्ता ।
  मेरा सुन ले साहिल।
तु अपना नहीं था तो आया ही।
क्यों था।
चलें हम थें तनहा तो।
तनहा ही रहतें।
मेरें ख्वाबों का दिया ।
जलाया ही क्यो था।
```में जल में भी खुश था।
कोई चाहत ना थी।
पहाड़ों की कोई आहट ना थी।
ये जीवन तो मुझकों छोटा लगा था।
कोई लम्बा सपना सजाया ना था।
वो बगियाँ की खुशबु में।
खोई सी बुंदे।
मेरी खुशियाँ की हल्की निशानी रही हैं।
मेरी जिंदगी की अदभुत।
कहानी रह…

ऐं मुहब्बत तु हार गई।💐

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Edmranjit.
ऐं मुहब्बत तु हार गई।💐 दिल की चोट बहुत।
गहरी हैं ।
उम्मीद का दामन छोटा था।
मेरा प्यार उसमें समाता ही कैसे।
उसके दिल में घंमड का पहरा था।
```चाहत की सीमा नहीं होती।
ये हम जानतें हैं।
मोहब्बत में चोट खाईं हैं हमनें।
तो दर्द भी पहचानतें हैं।
```और क्या बोलता में।
एक साथ मांगा था उनसें।
उन्हें उसमें भी मेरी कोई।
साजिश नजर आई थी।
```क्या पता लोग क्या चाहतें हैं।
मोहब्बत तो बस मोहब्बत ही।
चाहेगी।
किस्मत आजमाने वालों को।
मोहब्बत कहाँ मील पाऐंगी।
```हम हार गयें पर  गम नहीं।
क्योंकि हमनें दिल दिया था।
वो जीतें भी तो क्या मिला होगा।
पता नहीं क्या सौदा किया था।
```मेंरी तड़प भी मेरी अपनी हैं।
उस पर तो किसी का जोर नहीं।
अब चाहें जैसे जीऊँगा में।।
खुशी या गम पिऊँगा में।
```माना के सब इंसान हैं।
पर करनी एक समान कहाँ।
कोई हिरो हैं कोई जीरों हैं।
सबकी अपनी पहचान हैं।
````थोड़ा थम सा गया था में।
करता भी क्या।
दिल हैं यें कोई मशीन नहीं हैं।
इसको समझाना बड़ा मुशकिल हैं।
जल्दी बस में हो जाऐं।
ऐसी कोई तरकीब नहीं।
```कहतें हैं एक दिल में।
सागर भी समा जाता हैं।
अगर उसका गम उफान।
पर हो तो।
सारी दुन…

पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी//पार्ट 1)💐

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Edmranjit.
पंछी बच्चा पेड़ और टेक्नाँलिजी//पार्ट 1)💐 मेरा नाम शोर्या हैं अभी बहुत छोटा हु। शिमला मैं  पहाड़ियां और बर्फ से ढ़का मेरा घर बहुत क्युट हैं ।बिल्कुल मेरी तरह में यहाँ माँ पापा के साथ रहता हूँ। पापा एक इलेक्ट्रॉनिक शाँप चलातें हैं और माँ स्कूल टिचर हैं। माँ प्यार से मुझें शिरू बुलाती हैं अभी अभी कुछ दिनों पहले ही मेरा ऐडमिशन हुआ है एक काँनवेंट स्कुल मैं। पर अभी समर की छुट्टियाँ हैं तो बिल्कुल ही बोर हो रहा हूँ। स्कूल में मेरे सब क्लास मिट बाते करते हैं समर मैं नाना नानी के घर जाऐंगे कोई कहता है हम तो छुट्टियाँ मनानें अपनें गाँव जा रहें हैं कोई दोस्त कहता हैं हम कही और हिलस्टेशन जा रहे है घुमनें ।सबकी बातें सुनकर मुझें ऐसा लगता है जैसे सभी को समर का ही इंतजार था ।पर मुझे तो ये सब बिलकुल पंसद नहीं मेरी पसंद तो सिर्फ़ मेरा अपना ये घर हैं। अब देखों आप माँ को ही सुबह से उठी हैं और दो बार मुझे आवाज भी लगा चुकी है। शिरु शिरू बेटा उठ जा चाय पी ले बहुत देर हो चुकी हैं। लेकीन सच बताऐं आपकों माँ ने बोल तो दिया है बेटा उठो चाय पी लो लेकीन चाय अभी बनाई नहीं है। क्योंकि वो तो अपने मोबाइ…

जीवन एक चक्की। पोयम💐

Edmranjit.
जीवन एक चक्की। पोयम💐 आज से बेहतर सीख।
कल कभी दे नहीं सकता।
और सच ये भी हैं यारों।
जो तेरा हैं उसें कोई।
ले  नहीं सकता।।
""""एक ही तो गाड़ी हैं।।
दुनियाँ में।
बाकी तो सब मोह माया हैं।
ये ऊपर वालें की चक्की हैं।
भईया इसें कौन समझ पाया हैं।।
""""ना तुम जानों ना हम जानें।
बस इरादे लिये आऐं हैं।।
कोई किसी को समझाऐगा।
कोई तो खुद ब खुद समझ जाऐगा।
"""कभी इरादें कमजोर भी होतें हैं।
ना समझ तो बोर भी होतें हैं।
कोई सीखता हुआ भी खाली रह जाता हैं।
कोई मेहसूस कर सीख जाता हैं।।
""""ये तो जीवन की डोर हैं।
काफी उलझा एक छोर हैं।
ज्यादा सोचना नहीं बस चलतें जाओं।
हो सकता हैं मंजिल खुद अपनी ओर हैं।
"""पता नहीं एक पल में इंसान पराएँ।
भी हो जातें हैं।
कहीं मीलते हैं अपनें बनकर।
फिर दुर कहीं खो जातें हैं।
ये तो उलफत की बात हैं।
वरना हमने तो बहुत और भी सुना हैं।
दिवाने तो मर कर भी जिंदा हो जातें हैं।
""""उनका क्या कहें बस समझ लो।
वो साँस हैं।
कहीं उनकी याद हैं तो कही कुछ आस हैं।
वो बिछड़े न…

दार्शनिक के विचार💐

Edmranjit.
दार्शनिक के विचार💐 एक दार्शनिक लिखता है।
निराश कौन नहीं हौता।
अद्भुत विचारों को परोशने।
वाला वक्ति भी निराश हौ जाता हैं।
।।
जीवन चक्र बहुत सरल नहीं हैं।
अपितु कुछ लोग अपनी कुशलता से।
अपनें आसाधारण ज्ञान से।
अपना जीवन लक्ष्य समझ लेतें हैं।
।।
हममें से अधिंकाश लोग खुद की।
सफलता के लिऐ हमेंशा सघर्ष करते हैं।
और अपने जीवन की बहुत सी मुलभूत।
आवशयकताओं को भुल जाते हैं।
।।
सरलतापूर्वक भी कुछ लोग वो।
सब हासिल कर लेतें हैं।
जो अस्मान्य सा प्रतित हौता हो।
क्योंकि उनहोंने पहले अपने।
अंदर कि शक्ति को पहचान लिया हौता हैं।
।।
एक कामयाब मनुष्य हमेशा ही।
दुनियाँ की सोच से कुछ अलग।
अपनी दुनियाँ देख लेता हैं।
और फिर बाद में दुनियाँ उसकी।
कामयाबी का बखान करती हैं।
।।
एक बात और  हैं जो खास हैं।
कुछ खास हौते हैं वो बिरले लोग।
जो पुरे समाज को कुछ ऐसा दे जातें हैं।
जो हम और आप कभी नहीं दे पातें।
और वो खास बात हौती हैं हर बार ।
गिरकर फिर से संभल जाने कि क्षमता।

Www.edmranjit.com
Writing by ranjit choubeay.
02/09/2019
दार्शनिक के विचार💐

क्या प्यार जैसा भी कुछ होता हैं💐

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Edmranjit.
क्या प्यार जैसा भी कुछ होता हैं💐 #आज #बात #करेंगे #लव #लाइफ #पर#
दोस्तों ईश्वर ने मनुष्य को एक बहुत बड़ा तोहफा दिया#जिसें हम सब जिंदगी कहतें है#
साथ में दिया जिंदगी से भी खूबसूरत एहसास इमोशन रिस्ते वगेराह वगेराह#चाहें तो इस पर हम सारी जिंदगी लिखते रहे पर ये खत्म ना हो जिंदगी वो पन्ना हैं जो कभी भर नहीं सकता। क्या होता हैं प्यार what is love...अगर बात करे तो हम सब की जिंदगी मैं सिर्फ कुछ ही पल हैं और उसमे पलने वाले ख्वाबों की फेरहिस्त बहुत लम्बी हैं।क्या कभी किसी के सारे ख्वाब  पुरे हुये हैं। अगर बात करे इमानदारी से तो नहीं। कभी इस दुनियां मैं आने वाले किसी भी इंसान के सारे सपने पुरे नहीं हुये सिंकन्दर महान शब्द नाम लेकर दुनियां से गया बेचारे ने अपने अंतिम शब्द में कहाँ मैं खाली जा रहा हूँ।
एक सीख दे गया दुनियां को। एक ऐसा साशक जिसने मोहब्त भी की और दुनियां भी जीती पर फिर भी कुछ अधुरा रह गया। जो वो भी पुरा पा नही सका।आप सभी जानते ही होंगे जब सिंकन्दर जिंदगी से मोहब्त करना चाहता था तब जिंदगी ने उसका साथ छोड़ दिया वो जीना चाहता था पर जी न सका।
प्यार शब्द बहुत बड़ा हैं।अगर सम…

ऐं आज के मुसाफिर जरा बाहर तो निकल(Poetry )💐

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Edmranjit.
 ऐं आज के मुसाफिर जरा बाहर तो निकल(Poetry )💐 ऐं आज के मुशाफिर जरा बाहर तो निकल।
अब शाम ढल रही है।
कुछ थोड़ा तो संम्भल।
ये आशमां भी तेरा।
ये हर दिशा भी तेरी।
तु घुरता ही रहता।
एहसास भी तो कर।
ऐं आज के मुशाफिर जरा बाहर तो निकल।

तु धरा का मोती बनकर ।
एक माला भी बनेगा।
तु समझ के आईने का।
एक चेहरा भी बनेगा।
तु सबर की शाम बनकर उस मुकाम को छुऐगा।
तु डर ना ऐं मुशफिर जरा बाहर तो निकल।
ऐं आज के मुशाफिर''+

जो डरा जमी पे आकर।
वो पहुंचा ना किनारें।
जो खुद ना डग बढाऐं।
उसे मिलतें नहीं सहारें।
तु चल सहस निडर मन
ओ मुकाम के मुशाफिर.
दुनियाँ भी चल रही हैं
तेरे साथ साथ साहिल।
ऐं आज के मुशाफिर""+

तु जानता है मंजिल।
तु बीर हैं निडर हैं।
ये जहान तेरा अपना तु जहाँ का एक शहर हैं।
चल एक राही बन जा।
तु भीड़ से अलग.हैं।
तुझे जानता हैं अम्बर
पहचान उसकी तु हैं।
ऐं आज के मुशाफिर जरा
बाहर तो निकल"""
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Writing by ranjit choubeay.
##22/06/2019********
 ऐं आज के मुसाफिर जरा बाहर तो निकल(Poetry )💐

फिशटेंक। एक इमोशनल टच💐

Edmranjit
फिशटेंक। एक इमोशनल टच💐 #फिशटेंक
         अगर मैं कहुँ आप जिंदगी मैं कामयाब नहीं हुये तो आप सच मैं अंधे हो? हो सकता है मेरी कही बात आपको अंदर तक मेरे प्रति गलत धारणा बनाने के लियें इतनी काफी हो ।वहीं अगर मैं आपकें सामने कुछ ऐसा उदहारण दु जो आपने ना कभी सोचा हो और ना ही देखा हो और अगर देखा भी हो तो आपका नजरिया वो नहीं समझ पाया हो जो समझने और देखने की जरूरत आपकों उस टाइम शायद थी या नहीं थी?इंसान परिस्थितियों के हिसाब से अपनें सामनें होनेवाली क्रियाओं को लेकर सोचने के लियें आजाद होता है?सबसें पहली बात हम सब भावात्मक प्राणी है तो आप को मेरा एक संदेश है आप अपनी भावनाओं को जिवित रखिये उसमें आप पक्छपात वाली कोई गलती न रखिये न किजिऐगा।अब आप को मै  एक दुसरी बात बोलता हु अगर आपकें आस पास किसी जीव की हत्या हो गई हो तो आपका रियेक्शन क्या होता है oh yar ya fir omg ya fir ye sahi nhi hua इसके बाद हम आगें की तरफ निकल जातें है?बस बात खत्म और फिर कुछ ही टाइम मैं हमारी भावनाओं का भी अंत।क्या आप के किसी अपनें के साथ गलत होगा तो आप अपनें इस रियेक्शन को इतनी जल्दी बदल सकतें हो नहीं बदल सकतें क्…

बेटियाँ वरदाँन क्यों नहीं💐

Edmranjit.
बेटियाँ वरदाँन क्यों नहीं💐  मन की अकुलाहट तो देखो।
बेटी हुई तो घबराया हैं ।
बाप की बौखलाहट तो देखो।
आज ही से सर झुकाया हैं ।
क्यों घृणा लियें जिया ये समाज हैं।
उसी कोख से जब निकलें।
तो क्या ये पाप हैं ।

अपनी जीवन की रेखा का ध्यान क्यों नहीं ।
अपनी बेटी पर आपकों गर्व क्यों नहीं ।
कुछ गलत दरिंदो ने सर झुकाया हैं ।
वहाँ ध्यान नहीं जहाँ बेटियों ने परचम लहराया हैं।
बेटी हुई तो सर झुकाया हैं।

अगर समझदानी खराब है तो ठिक करों।
शर्म बेटियों पर नहीं अपने कर्म पर करो।
क्षितिजा से आसमां तक उन्हें सम्मान हैं ।
कहीं लक्ष्मी सरस्वती देवी उनके नाम हैं।
ईश्वर कहता हैं  बेटियाँ धरती का वरदान हैं ।

अब तक नहीं समझा तो कैसा बेवकूफ ये समाज है।
वक्त आया तो धरा पर वो झाँसी की रानी बनी।
कभी वो पदमावती तो कभी कल्पना चावला बनी।
समय बदलता गया बेटियों का वर्चस्व बढ़ता गया।
पर इस समाज की धारणाऐं गिरती गई ।
मर्द जाती की नीयत गर्त होती गई ।
बेटियाँ इनके पापों को सहती गई ।

दुनीयां शरमसार होती गई।
कही दामनी तो कही गुडियां ।
मासुमो की जानें जाती रही।
ये दुनियां होली दिवाली ईद मुहर्रम क्रिसमस मनाती रही।
मर…

जीवन एक संघर्ष हैं स्वीकार करते हैं। और आज जीवन से जुड़ी कुछ बातों पर विचार करते हैं💐

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Edmranjit.
जीवन एक संघर्ष हैं स्वीकार करते हैं। और आज जीवन से जुड़ी कुछ बातों पर विचार करते हैं💐 जीवन एक संघर्ष है, यह स्वीकार करते हैं.और आज जीवन से जुड़ी कुछ बातों पर विचार करते हैं। क्या है जीवन।
 क्या है इसमें सुख दुख के रहस्य। हम सब कहीं ना कहीं बस फंसे हूये है और फंसते ही जा रहे हैं। जल में मछली का जीवन होता हैं परन्तु वो सिर्फ़ वहीं जी सकती है जंगल में सिंह का राज होता है वो भी सिर्फ़ वहीं जी सकता है सिंह का जीवन कुछ हम मानवीय जीवन से मिलता जुलता है पर मछली का नहीं । एक सिंह अपने आसपास के समुचे वातावरण को अपने आधीन करने की कोशिश में लगा होता है।मछली पुरे जीवन अपने संघर्ष का अन्न खाती है। और सिंह अपने खौफ अपनी ताकत अपने रूतबे अपनी कूटनीति का सहारा लेकर समुचे जंगल को अपना शिकार बना लेता है। क्या आप नही जानते आज देश और दुनियां का 80%हिस्सा वहीं जल में जी रही मछली के समान हो चुका है जी हां यही सच्चाई हैं आज जो गरीबी भुखमरी बेरोजगारी का हिस्सा बना हुआ है उसे देख सोच और समझ कर तो यही लगता है की हम बस वहीं पानी में जी रही  कमजोर मछली ही है जो सिर्फ वहीं जीवन जीना चाहती है और एक दिन …

मन के करीब से मंजील की तरफ💐

Edmranjit.
मन के करीब से मंजील की तरफ💐 हर बार की तरह इस बार  भी हार कर अटक गया हु।।
मन शुन्य हैं दिल परेशान सा हैं। कहानी हैं या रियल अजीब सी।
कुछ हालत हैं।।सोच कर लिखना और फिर बार बार मिटा चुका हु।।
नहीं चाहता हु अब हारना पुरी करना चाहता हु इस अधुरी कहानी को।।

मन कहता हैं आज सब ठिक होगा।
पर हालात उनका क्या बार बार हमें वहीं ले आते हैं।
हमारी कलम को वहीं पहुँचा देते हैं जैसें हम निकलना ही नहीं चाहते हो वहाँ से।। क्या करूं क्यों हो रहा हैं ये सब हमारें साथ क्या इसका कोई ऐसा रास्ता नहीं जो हमें यहाँ से बाहर ले आऐं।।
क्या हम अपनी कहानी को पुरी नहीं कर सकतें। जब हम लिखतें हैं तो मन कहता हैं सही हैं लेकिन कुछ और सही हो सकता था। फिर आगें और लिखतें हैं तो लगता हैं इससें अच्छा तो नहीं हो सकता था।।

उफफ ये कलम ये आदत ये कहानी और ये कोशिश। सब मिलकर बस हमें सताना जानती ह। एक मन हैं जो हर किसी पर विशवास करता हैं।
वहीं एक आत्मा जो बहुत कम बार यस बोलती हैं।।
पता हैं जानता भी हु अपनें ही शब्दों के जाल में सजी हैं हमारी कहानी।।

अब निपटना ही होगा इस कहानी से भी पर इस बार ऐसा लगता हैं जैसेः बहुत उलझी …

एक सच्चा एहसास जो दबा रह जाता है💐

Edmranjit.
एक सच्चा  एहसास जो दबा रह जाता है💐 कितना तंग आ गया था वो जिंदगी से।
उसे घुटन होने लगी थी वो जीना चाहता था।
लेकिन इस तरह नही  वो खुलकर सांस लेना ।
चाहता था वो हर पल हसना चाहता था ।
उसके जज्बात अब उसके काबु मे नही थे।

उसकी फैमली से उसे कभी वो सब नही मिला जो वो चाहता था। उसकी फैमली तो मानो जैसे बस पैसे की भुखी थी जब तक आति काम करता गया हर महीने अपने पापा को।
सैलरी लाकर देता गया तब तक वो अच्छा बेटा था ।आति कै पास काम था वो घर मै सबका खयाल भी रखता था फिर चाहे आति की बहन हो या भाई आति ने सबकी जरूररते पुरी की। लेकिन आति को उसकी माँ की कमी हमेशा से खलती रही।

 जीसको देखो वो आति को हमेशा जरूरत भरी निगाहों से ही देखता था उसकी लाइफ मै कोई ऐसा नही था जो उसको समझ पाता एक इंसान केवल दुसरो की जरूरतों के लिये नही होता जब उसको ये
एहसास होता है। की फैमली और दुनीया सिर्फ
उसको अपनी जरूरतों के लिये ही पुछती है तो। वो टुट जाता है। आति भी इसी तरह बिलकुल अकेला हो गया था वो हमेशा अपनी सोच को गलत साबित करता रहा और अपने पापा भाई बहन का साथ देता रहा

लेकिन इंसान की शक्ति भी सीमित ही होती है। जब वो अपन…

इंटरनेट हमसे हैं या हम इंटरनेट से💐

Edmranjit.
इंटरनेट हमसे हैं या हम इंटरनेट से💐 भाई उमर मै काफी बड़े थे उनसे कुछ बात करने।
मे अक्सर डर लगता था लेकिन मुझे उनकी एक ऐसी बात।
पता थी जो सिर्फ मे जानता था। और वो बात ये थी जब भाई ।
खुश हो तो उनसे अपनी कोई भी बात शेयर करना आसान था।
या फिर उनसे मजाक मस्ती भी करो तो उन्हें उस टाईम सब अच्छा लगता था। भाई जीतना ही सीधा सरल इंसान है।
शायद उससे कही जयादा टेलेंट भी रखता था ।
भाई का सबसे बड़ा टेलेंट था उनका लिखना।
वो कभी भी कहानियाँ कविताएँ लिखते रहते थे।
और मुझे सुनाते और कहते बता छोटे कविता अच्छी है।
मुझे तो उनकी हर कविता अच्छी लगती थी इसलिए बोलता था।

एक दम सुपर है भाई।
पर भाई को लगता था मै झुठ बोलता हु।
वो सोचते थे उनका मन रखने कै लिये मे हमेशा उनकि।
कविता और कहानियों की तारीफ करता हु।
लेकिन  कहते है ना जब तक इंसान को सही इंसान।
नही मिलता तब तक तो वो खुद को पहचान ही नही पाता।
भाई को लेखन से इतना लगाव था। कितनी बार मेनें उन्हें।
पुरी पुरी रात लिखते देखा था।

एक दिन बातो बातो मै मेनें भाई से पुछा भाई आप इतना अच्छा लिखते हो आपको कया लेखक बनना है।
भाई का जवाब था छोटे बनना तो लेखक ही चाह…

एक सफर जो कभी रूक रूक सा जाता हैं। पौयम 💐

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Edmranjit.
एक सफर जो कभी रूक रूक सा जाता हैं। पौयम 💐 एक सफर जो कभी ।
रूक रूक सा जाता हैं।
अथाह चलता हैं।
कुछ अपनें ही अंदाज में।
।।
मुशकुराता हैं गुन गुनाता हैं।
राह चलतें ही।
कभी कभार शिटिया बजाता हैं।
फिर ना जानें क्यों।
वो थम सा जाता हैं।।
।।
उमंग में कभी कभी।
वो सब भुल जाता हैं।
लियें हुये तरंग में।
वो खुब डुब जाता हैं।।
।।
अहम का कोई रस नहीं।
वो दुर दुर खुशमिजाज हैं।
लहर हवा सा बन के वो।
खुद में लाजवाब हैं।
।।
धरा से ले गगन तलें।
सफर हरा भरा मीले।
ये सोच में जीता हैं वो।
अब सफर मुझें नया मीले।
।।
वो धुप में भी खुश रहा।
नशा सफर के रंग तलें।
हिली जमी हिला गगन।
सफर के अंतकाल में।
Www.edmranjit.com
Writing by ranjit choubeay.

दिंनाक20/06/2019
एक सफर जो कभी रूक रूक सा जाता हैं। पौयम 💐

एक सत्यवादी राजा💐

Edmranjit
एक सत्यवादी राजा💐 आज #एक #राजा #की #कहानी #सुनाता #हु।

एक राजा आपने कुशल राज्य को शकुशल चला रहा था।
उसके राज्य में सब जन सुखी थे। राजा स्वय भेष बदलकर आपने राज्य मे घूम घूमकर प्रजा का हाल चाल पुछा करता था। जब भी उसे कुछ गलत काम होता नजर आता तो वो तुरंत प्रभावी कदम उठाता और सब ठिक करवा देता था। गरीब असहाय की राजा खुब सेवा करता था।साधु संत भी राजा की बहुत प्रशंसा करते नहीं थकते थै।देखते ही देखते राजा की किर्ती दुर दुर तक फेलने लगी। राजा का नाम चारों तरफ फैलने लगा।समय बीतता गया सब कुछ ठिक से चल रहा था।
एक बार राजा के दरबार मैं एक फकीर आया।
राजा ने बडे़ ही मान सम्मान से फकीर की सेवा की। फकीर राजा से कुछ वार्तालाप करना चाहता था। परन्तु फकीर राजा से अपनी बात कह नहीं पाता था। वो स्वयं बोलता था।राजन मैं आपसे कुछ कहना चाहता हु। पंरन्त अभी कह नहीं पा रहा हूँ।
राजा भी फकीर की बात सुनकर बहुत उतशुकता पूर्वक बोलता  महात्मा आप जो भी कहना चाहतें हैं आप निंश्नकोच होकर कहिये हम भी सुनना चाहते हैं। आप की समस्या अगर हम आपके लिये कुछ भी कर पाये तो अवश्य ही हमारे भाग्य का उदय होगा। फकीर राजा की …

पेड़ लगायें जीवन और प्राकृतिक बचाये।पौयम💐

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Edmranjit.
पेड़ लगायें जीवन और प्राकृतिक बचाये।पौयम💐 आओं चलों एक पौधा लगातें हैं।
दोनों मीलकर एक गमला बनातें हैं ।
हम सुबह शाम उससें भी जुड़ते जाएंगे ।
सुबह हम पानी डाल देंगे।
शाम को दोनों उससें बतियाऐंगे।

पता हैं इनमें भी जीवन होता हैं।
पर कोई समझता नहीं बहुत दुख होता हैं।
हमारे जीवन की डोर हैं इनसे।
पतझड़ सावन वर्षा चारों और हैं इनसे।
इनकी कोमल ठंडी हवाओं का कितना स्वाद हैं।
इनके सामने तो ऐसी कुलर फेन सब बकवास हैं।

मुझे ही नहीं सभी को इन्हें बचाना चाहिए।
ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधा लगाना चाहिऐ।
अपने जीवन की बगियां की तरह इन्हें भी प्यार करो।
सुबह शाम सिंचो थोड़ा दुलार करो।
इनके साथ रहने से दुख भी कम हो जाता है।

प्राकृतिक संपदा है ये इन्हें बढा़ना चाहिए।
दोस्तों ज़्यादा से ज्याद पेड़ लगाना चाहिए।
अपनें आस पास इन्हें भी सजाना चाहिए ।
कितना अच्छा लगता है जब बाग जाते हो।
कितना मजा आता है जब आम चुरातें हो।
अपनें बचपन की यादों मैं जाना चाहिए।
दोस्तों चारो तरफ हरियाली फैलानी चाहिऐ ।

एक वृक्ष सिर्फ़ वृक्ष नहीं होता।
इससे तो कितनी जानें जुडी़ होती है।
पता हैं जैसे ही एक पेड़ आप काटतें हो।
ध…