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अर्थ और मानव

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अर्थ और मानव  वक्त ने खिलाफत की सारे जुल्मों का हिसाब ले लिया।
एक साख से निकलकर हर साख को निगल लिया।
ताकती रह गई दुनियां हर मंजर बदलता रहा।
इंसा थके पैरो से दिन रात चलता रहा।

नहीं छोड़ा किसी को मुकम्मल हर दर दरबदर हुआ।
क्या पैसा क्या हुनर क्या  ताकत सब लचर हुआ।
खौफ ऐसा मौत की चादर का न कफन नसीब हुआ।
महलों के मतवालों का अंत भी इस कदर हुआ।

भागती दुनियां ताकती राहें गुमनाम अंधेरा डुबता सूरज।
सब आँस की नाँव एक एक कर अंधकारमय हुआ।
घर विरान जंगल सुनसान न कोई मेहमान हर सख्स बना अंजान।
नम आँखों ने कहाँ नहीं देखा पहले कभी ऐसा तूफान।

गाँव अपना शहर अपना याद आया उन्हें जो चल दिए थे।
सब छोड़कर चमकीले विदेशों की चमचमाती दुनियां मैं।
ये वापसी मिलन भी क्या खुब याद आएगा उन्हें गर बच सके तो दास्ताने अपनी बयाँ कर थकेंगे नहीं वो सब।

कर सके तो फिर इतना सा खत याद रखना धरा की मार से।
अब भी नहीं समझ पाए तो बचना हैं मुश्किल मौत की ललकार से।
ये तूफ़ान वो संकट हैं जो कभी छंट नहीं सकता।
जब तक मानव अपनी गलतियों पर रूक नहीं सकता।
अर्थ और मानव  तुमने जल सुखाया जल बहाया मैं चुप रहा तुम्हारे लिए।
तुमनें ज…

कोरोना को हराना हैं poem 05/04/2020

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#कोरोना को हराना हैं poem 05/04/2020
खौफ मैं है जींदगी फिर भी साथ है मन  हर तरफ माहौल है गमगीन फिर भी एक हे जन जन।  इस तरह टुट कर ना बिखरे ये वतन  आओ मिलकर सब एक हो जाए।  चलो आज शाम एकता का दीपक जलाए
रोशनी एकता की दिखा दे सब मिलकर।  ये देश है स्वालम्बि ये बता दे साथ चलकर। कुछ सहम गए साथी उन्हें भी साथ ले आए।  चलो आज एक होकर एक साथ दीप जलाए।  जीतना है हम सबको देश को साथ लेकर ही हराना हैं महामारी को एक साथ होकर ही।  कोरोना से भी ज्यादा जडे़ मजबुत हैं हमारी।  भारत पड़ेगा इस महामारी पर भी भारी। 
जब भी वतन पर संकट आए जग जाना है।  डट कर सामना करना है औरो को भी जगाना है।  भुल मत जाना साथ रहकर ही हराना हैं।  आज शाम एकता का दिया जलाना हैं।  कोरोना को हराना हैं poem 05/04/2020
आज शाम एकता का दिया जलाना हैं।  Corona ko harana Hai. Poem ranjit choubey www.edmranjit.com 05 /04/2020

बंसत पंचमी कविता 👏30/01/2020

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बंसत पंचमी कविता👏30/01/2020
इस माँ के बीना तो संसार अधुरा लगता था।
नहीं आती तु तो सब सूना सूना लगता था।
विद्या की देवी माँ तुझ बीन ज्ञान सरोवर सूना था।
तु ज्योति बनकर आई तो बंसत भी पुरा लगता हैं।

 " मधुर स्वर वीणा ज्योति कुंज उज्ज्वल संसार किया।
माँ तुने तो धरा को विद्या कंठ कर दिया।
गुगे का भी स्वर बनी माँ हर मुख मैं तु समाई।
धरती से अंबर तले तु वेदो मैं हैं छाई।

"बीन तेऱे माता जीवन के हर मोड़ पर अंधेरा।
तू हैं तो प्राणी का भी जीवन लगे है पुरा।
माँ वंदना माँ सारदा माँ ज्योतिमय विद्यावाहिनी।
करो कृपा जगत ज्योति रुपा जीव सजल तारिणि।
 बंसत पंचमी कविता👏30/01/2020 "ब्रम्हा का सृजन हो माँ  कंमलडली कहलाई हो।
सरस्वती नदी का रुप माँ धरा पर तुम आई हो।
जगत के कण कण पर माँ तेरा उपकार हैं।

"तु बुद्धि हैं संगीत माँ तु वेद् हो विज्ञान भी।
जीवन की सुरुआत से मानव के उत्थान तक।
जीव जगत से देवो तक माँ तेरा ही तो ज्ञान है।
माँ हंसवाहिनी तुम से ही तीनों लोक प्रकाशमान हैं।

"माँ ऐसे ही जीवन में सभी के प्रकाश फैलाए रखना।
ज्ञान का दिपक जग में जलाए रखना।
हर जीवन की बुद्…

पिज्जा डिलीवरी साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love( part 12)18/12/2019

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पिज्जा डिलीवरी साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love( part 12)18/12/2019

साहिल तुम अब कैसे हो मै ठिक हु सुरभि अच्छा गुड सुरभि सुनों हम शाम को बात करते हैं। अभी थोड़ा काम कर रहा हु।
सुरभि ओके। बांय साहिल बाय यार ।आकाश भाई हमने कल वो बिल दे दिये थें जो अपनें मंथली कस्टमर थें।

उनके ओफिस और घर जाकर एक बात बोलें हम ने जब कुछ बिल दिये तो लोगों कि अजीब सी शकल सामनें आई। आकाश भाई लोगों ने पिज्जा लेतें टाइम कभी कोई शिकायत नहीं की अब बिल के टाइम कैसी शिकायत।

हमें तो लोगों की ये आदत बिलकुल भी अच्छी नहीं लगी हम तो धुप बारिस आंधी तुफान रात दिन मेहनत से उनके घर या औफिस में डिलीवरी पहुंचाते हैं ना हम तो कभी कोई शिकायत नहीं करते।फिर पैमेंट टाईम में कुछ लोग ऐसा क्यों करते हैं। आकाश साहिल मेरे भाई ये बिजनेस में ऐसा होता हैं।


कोई भी काम करो लोगों को पैसे देते टाइम अच्छा नहीं लगता।साहिल आकाश भाई मुझे तो आज बिल्कुल अच्छा नहीं लगा और आज नहीं तो कल में सैठ जी से इस बारे में बात करूँगा की जो लोग पैसे दैने में मुह बनाते हैं ऐसे लोगों की डिलीवरी हमे बंद कर दैनी चाहि…

शायरी दर्दे मोह्बत। 29/10/2019

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शायरी दर्दे मोह्बत। 29/10/2019
कोई सौगात नहीं जिंदगी जो  हार जाएं ।
बस दिल की बेबसी ने जलाया हैं। ।
प्यार भी तो वहीं किया करते हैं ज्यादा। 
जिन्हें वक्त ने हरपल रूलाया हैं ।।

मासुम सा दिल भी जल कर पत्थर। 
बन जाता है दुनियां में अक्सर ।
क्योंकि इस दुनियां में हर तरफ ।
बेवफ़ाई का साया छाया हैं । 

खता नहीं हो अश्क फिर भी  गिरते हैं ।।
सजा ना भी मिले लोग फिर भी डरते हैं ।
ऐसी बेईमान मोहब्त को भी कहते हैं ।
खुदा ने अपने ही हाथों से बनाया हैं। 

जमीं गवाह उनकी हो गई जो इश्क में। ।
ताबुत हो गए । 
कुछ तो समझे कुछ मिट गए फंसाने बने ।।
कुछ सब हारकर भी न पा सके मोहब्त  ।
सुना हैं वही मजनू वही रांझा दिवाने बने। 

कोई पढ़े दिवानगी पर किताबों में नहीं । 
नशा मोहब्त का तो मिट जानें पर होता हैं।। 
वक्त जब निकल जाता है परवाने का अक्शर। 
फिर प्यार में सिर्फ़ आँसुओं का समंदर रह जाता हैं।। 

What is Love ,only for sadness then sadness ,
दोस्तों जिंदगी में प्यार तभी करना जब आपमें गम सहने की ताकत हो। 
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Writing by ranjit choubeay .
29/10/2019शायरी दर्दे मोह्बत। 29/10/2019

अब मौसम बदल रहा है।26/10/2019

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#EDMranjit motivational thought.

अब मौसम बदल रहा है।26/10/2019
अब मौसम बदल रहा हैं।
अब.लोग संभल रहें हैं।
अब सच्चाई को समझकर।
अब लोग भक भक जल रहे है।
अब मौसम बदल रहा है।
**अब जागी है थोड़ी इनसानियत देखों।
अब लोग बात कर रहे है।
अब जब कंगाल हुआ हैं अपना कुछ।
अब पाँव फुक फुक लोग चल रहें हैं।
**अब समझ आएगा सबकों
अब आँखों मैं ज्वाला भड़कने लगी हैं।
अब पागल पब्लिक कुछ कुछ करने लगी हैं।
अब नहीं चलती भेड़चाल की मरजी।
अब मरजी से अपनी सब चलने लगें हैं।
**अब मौसम बदल रहा हैं।
अब लोग संभल रहे हैं*******
www.edmranjit.com
Writing ranjit choubeay.
26/10/2019
अब मौसम बदल रहा है।26/10/2019

👏💐शुभ दीपावली 🎆🎇27/10/2019

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👏💐शुभ दीपावली 🎆🎇27/10/2019
दीपों के जगमग उजालों का मौसम आया है।
सोनें चाँदी सा चमचम बजारों का रूतबा छाया हैं।
घरों मैं सबकी अपनी अपनी फरमाइशे हैं।
बाजारों मैं भी अतरंगी अतरंगी नुमाईशे हैं।
**नौकरी से छुट्टी लेनें का मौसम आया हैं।
सभी के साथ माहौल बनाने का मौसम आया है।
यारों से मिलने अपनी सुनाने उनकी सुनने का मौसम आया है।
मिठाइयों मैं डुबकी लगाने का मौसम आया है।

**सभी रूठें मित्र रिस्तेदारों को मनानें का मौसम आया हैं।
नई फसल का लुत्फ उठाने का मौसम आया है।
घरों को नया साफ सुथरा चमकदार बनाने का मौसम आया हैं।
खुशियों मैं झुमने नाचने गानें का मौसम आया है।
भग्वान श्री राम को यादकर खुशियाँ लुटाने का मौसम आया है।**जीवन के एक और साल को शुभ दिपावली मैं छाने का मौसम आया है।

सच और झुठ पर विजय अजय समझने का मौसम आया है।
वर्षों से चली आ रही शुभ परमपरा को निभाने का मौसम आया है।
नई पिढ़ी को रावन कौन था बताने का मौसम आया.हैं।
अपनी सभ्य संस्कृति को आत्मसात करने का मौसम आया है।
छोटे को आशीर्वाद देने बड़ों का आशीर्वाद लेने का मौसम आया है।**

अपनी भुलों को भुलाकर और सत्य को अपनाकर फिर से चलने …

पिज्जा डिलीवरी साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'part(11) 25/10/2019💐

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पिज्जा डिलीवरी साहिल विच सुरभि की प्रेम कहानी। Delivery Sahil Witch Surabhi's love story'part(11) 25/10/2019💐
आकाश हमनें कहा था ना साहिल तुमसे तबीयत अच्छी।
नहीं तो काम पर मत चलों पर तुम माने नहीं। अब देखों कैसे बुखार ज्यादा बढ़ गया। साहिल क्या आकाश भाई आप भी बिल्कुल उस सुरभि जैसे ही रिऐक्ट कर रहे हौ वौ हमें ले गई पकड़ कर डाक्टर के पास हमने दवा भी ली हैं।

 और डाक्टर ने कहा एक दो दिन मे फिट हो जाऔगे। आकाश सही है जो सुरभि हैं वरना तुम मेरी तो सुनते ही नहीं। वरना आज बीमार तो नहीं होते। साहिल आकाश भाई आप अब शान्त हो जाईयें कल सुबह देखिये हम कैसे ठिक होकर काम पर जाते हैं।
अच्छा क्या कहा तुमने कल काम पर जाओगे। हाहाहा साहिल हमने सैठ जी को फोन कर दिया साहिल बिमार हैं ।

और दो दिन वो काम पर नहीं आ पाऐगा।आकश भाई क्या किया आपने आखिर में अकेला यहाँ रूम पर करुगां क्या। और आप कै ऊपर ज्यादा लौड आ जाऐगा शौप पर फिर ये ठिक नहीं ईसलिए मुझे यहाँ बोर नहीं हौना। आकाश साहिल कोई बोरिंग नहीं होगी मस्त खा पिकर आराम करना और शाम को सुरभि ले जाऐगी गार्डन सब मुड अच्छा हो जाऐगा। हाहाहाहा क्या भाई आ…